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Most Popular Winter Festivals in India

देश के ऐसे प्रसिद्ध मेले जहां आप सर्दियों में पारम्परिक कल्चर और एडवेंचर का भरपूर आनंद उठा सकते हैं

भारत रंग-बिरंगे त्योहारों का देश है और देश भर में चाहे कोई भी मौसम हो आपको त्यौहार के साथ मेले हर जगह देखने को मिल जायेंगे। बच्चों की बात करें या महिलाओं की या फिर बूढ़े-बुजुर्गों की मेले की बात होते ही सभी के चेहरों में उत्साह और खुशी की झलक देखने को मिलती है। इन मेलों में बच्चो को झूलों की खुशी , महिलाओ को शॉपिंग की खुशी , और बुजुर्गो को अनेको कार्यक्रम देखने का उत्साह खूब नज़र आता है। सच में ये मेले कुछ समय के लिए एक अलग ही माहौल बना देते है। मेले की रौनक कुछ इस तरह लोगो को आकर्षित करती है कि काम में उलझा हुआ व्यस्त आदमी भी समय निकाल कर अपने परिवार के साथ मेले में जाना पसंद करता है। आज इस ब्लॉग में हम देश भर के ऐसे ही कुछ जाने पहचाने मेलों की बात करेंगे।(Most Popular Winter Festivals in India)

प्रसिद्ध मेले :

1. सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय मेला फरीदाबाद – हरियाणा में आयोजित सूरजकुंड का मेला देश विदेश में काफी मशहूर है। इसकी भव्यता और चहल-पहल के देश विदेशो में काफी चर्चे  होते हैं । यह मेला बसंत ऋतु के दौरान फरवरी के महीने में 01 से 16 तक आयोजित किया जाता है।

इस मेले की खास बात यह है कि देश विदेश के कलाकारों के सुन्दर-सुन्दर हैंड-मेड सामान यहाँ देखने व खरीदने को मिलते हैं। चंद शब्दों में इस मेले की खासियत की बात करे तो भारतीय संस्कृति , कला और संगीत सभी कुछ आपको इस मेले में देखने को मिल जायेगा। इस मेले में अपनी विभिन्न  कलाओं का प्रदर्शन करने देश-विदेश से लोग इसमें हिस्सा लेते है।

कैसे पहुंचे – सूरज कुंड रोड, लेक वुड सिटी, सूरजकुंड, फरीदाबाद, हरियाणा।

 आप जब भी मेट्रो से यहाँ आये तो यहाँ का नजदीकी मेट्रो स्टेशन सूरजकुंड मेले से लगभग 4.3 किमी  की दूरी पर बदरपुर मेट्रो स्टेशन है। वहाँ से आप रिक्शा, ऑटो या कैब लेकर पहुँच सकते है।

2. पुष्कर मेला (राजस्थान) – पुष्कर मेला ,राजस्थान के ही नहीं बल्कि पूरे भारत के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में से एक है। जहां राजस्थान की बात हो रही हो वहाँ ऊंटों  का जिक्र न हो, यह हो ही नहीं सकता। पुष्कर राज्य का सबसे बड़ा मेला होता है ‘ऊंट मेला’, यहाँ पशुओ पर आधारित बहुत से कार्यक्रम होते है। न केवल राजस्थान बल्कि देश भर से सभी अपने ऊंटों  को सजा कर इस मेले में शिरकत करते हैं, जहा ऊंटों की दौड़ करायी जाती है और जीतने वाले को अच्छा खासा इनाम दिया जाता है। सही मायने में कहा जाये तो ऊंट ही पुष्कर मेले की शान है। माना जाता है कि सब तीर्थों की यात्रा का फल पुष्कर स्नान व दर्शन से मिलता  है।

इस बार यह मेला 31 अक्टूबर से 9 नवंबर तक आयोजित किया जायेगा। ये मेला दूर दूर तक फैले रेतीले स्थान पर लगाया जाता है और यहाँ खाने-पीने से लेकर पारम्परिक नृत्य और  सांस्कृतिक कार्यक्रम सब कुछ देखने को मिलता है।

कैसे पहुंचे पुष्कर मेले तक –  पुष्कर से सबसे नियरेस्ट रेलवे स्टेशन है अजमेर। अजमेर से पुष्कर की दूरी सिर्फ 11 किलोमीटर है। वहां से आप कैब या ऑटो से पुष्कर आराम से पहुंच सकते है। इसके अलावा पुष्कर दिल्ली-जयपुर हाईवे सड़क मार्ग से भी जुड़ा हुआ है।  आप यहाँ बस के अलावा अपनी पर्सनल गाड़ी से भी आसानी से पहुँच सकते हैं।

3.रण उत्सव (गुजरात) – वैसे तो गुजरात एक ऐसा राज्य है जहाँ देखने के लिए बहुत कुछ मौजूद है , पर यूँ कहा जाता है की गुजरात जाकर कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा। रण उत्सव हर साल अक्टूबर से फरवरी/मार्च के बीच धोरडो में आयोजित  होता है। इस उत्सव में टूरिस्ट यहाँ बने खूबसूरत टेंटों में रह सकते हैं,  जिसमें तमाम सुविधाएँ होती हैं। यहां गुजराती संस्‍कृति से जुड़ें फॉक डांस और म्‍यूजिक, कच्‍छ के कारीगरों का काम और उनके बनाए सामानों की खरीदारी करने व देखने का मौका मिलता है।

कैसे पहुंचे रण उत्सव

अगर आप कच्छ सड़क मार्ग से आना चाहते हैं तो कच्छ पहुंचने के लिए आप भुज शहर से आ सकते हैं। इसके अलावा अहमदाबाद से राजकोट से कैब बुक करके रोड ट्रिप ले सकते हैं। यदि आप ट्रेन से आना चाहते हैं तो आपको भुज रेलवे स्टेशन आना होगा।  जहाँ से आप कैब बुक कर सकते हैं। कच्छ से निकटतम रेलवे स्टेशन भुज रेलवे स्टेशन है।

4. जौलजीबी मेला –  दिल्ली से लगभग 565  किलोमीटर और पिथौरागढ़ शहर से 68 किलोमीटर दूर जौलजीबी में यह मेला आयोजित किया जाता है। जौलजीबी गोरी और काली नामक दो नदियों का संगम स्थल होने के कारण प्रसिद्ध है। हर साल ये महीना 14 नवंबर बाल दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाता है, जो पूरे भारत और नेपाल के लोगो को अपनी तरफ आकर्षित करता है

इस मेले में दूर-दूर से बड़े-बड़े कलाकार अपनी कलाओ का प्रदर्शन करने आते हैं  और भारी मात्रा में यहां पर्यटक देखने को मिलते हैं । जौलजीबी के मेले में कुमाऊं  और नेपाल का कल्चर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है। अगर आप दो देशों नेपाल और भारत खासकर उत्तराखंड का पारम्परिक कल्चर देखना चाहते हैं तो आपको इस मेले में एक बार जरूर आना चाहिए।

कैसे पहुंचे इस प्रसिद्ध मेले में – आप यहाँ अपनी पर्सनल गाड़ी से भी आ सकते हैं, नहीं तो पिथौरागढ़ से टैक्सी में आप यहाँ आसानी से पहुंच सकते है

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2 Comments

  1. Almora – Five Colors of Travel

    October 20, 2022

    […] कल्चर ऑफ़ अल्मोड़ा : क्योकि अल्मोड़ा कुमाऊँ रीजन में पड़ता है इसलिए अल्मोड़ा में पूरा कुमाऊनी कल्चर है। जैसे हिलजात्रा, छलिया डांस आदि। इसके अलावा यहाँ की भाषा भी कुमाऊनी है, और त्यौहार भी कुमाऊनी कल्चर में मनाये जाते है। […]

  2. New Delhi has always been the favourite city of most us

    October 20, 2022

    […] टिहरी उत्तराखंड की पहाड़ियों की गर्भ में बसा एक बहुत ही सुंदर शहर है जो प्रकृति को अपने अंदर समेटे हुए है। यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यह एक डूबा हुआ शहर है परन्तु यह करीब दो सौ सालों तक आबाद था। यहां पानी भरने की वजह से इसे टूरिस्ट्स प्लेस घोषित कर दिया। यहां अप्रैल से जून और अक्टूबर से दिसंबर तक पर्यटकों का बोलबाला रहता है। यह टिहरी शहर दिल्ली से लगभग 335 किलोमीटर है। यह आकर आप सच में प्रकृति का भरपूर आनंद ले सकते हैं। […]

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