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बाहु किला- जम्मू का ये ऐतिहासिक नगीना देख हो जाएंगे हैरान

जम्मू का सबसे पुराना और खूबसूरत किला, बाहु किला। यह किला जम्मू शहर से सिर्फ 5 किलोमीटर दूर तवी नदी के बाएं किनारे पर एक ऊंची पहाड़ी पर बसा है। अगर आप इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के शौकीन हैं, तो यह जगह आपके लिए किसी अवसर से कम नहीं। बाहु किला सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि जम्मू की शान और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है।

कहा जाता है कि इस किले को करीब 3000 साल पहले राजा बहुलोचन ने बनवाया था। हालांकि, बाद में डोगरा शासकों ने इसे और भव्य बनाया। यह किला न केवल अपने मजबूत ढांचे के लिए मशहूर है बल्कि इसके अंदर बने मां काली के मंदिर के कारण भी। इस मंदिर को लोग ‘बावे वाली माता’ के नाम से जानते हैं। हर साल लाखों लोग यहां दर्शन करने आते हैं।

खासकर मंगलवार और रविवार को भक्तों की भीड़ यहां उमड़ती है। किले की मोटी दीवारें, पुरानी वास्तुकला और तवी नदी का नजारा मन मोह लेता है। इसके आसपास बाग-ए-बाहु नाम का एक सुंदर बगीचा भी है, जो इसे और आकर्षक बनाता है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग भी यहां होती है। बाहु किला जम्मू की आत्मा है। यह न सिर्फ पर्यटकों को आकर्षित करता है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी आस्था का केंद्र है।

बाहु किले का इतिहास बड़ा रोचक है। कहा जाता है कि इसे राजा बहुलोचन ने 3000 साल पहले बनवाया था। वे राजा जम्बूलोचन के भाई थे, जिन्होंने जम्मू शहर की नींव रखी। एक किंवदंती के अनुसार, राजा जम्बूलोचन शिकार पर गए थे। वहां उन्होंने एक बाघ और बकरी को तवी नदी के किनारे साथ में पानी पीते देखा। यह देखकर उन्हें लगा कि यह जगह बहुत खास है। उन्होंने यहीं अपनी राजधानी बनाई और उनके भाई बहुलोचन ने बाहु किला बनवाया।

बाहू किला

समय के साथ किला कई बार बदला। 16वीं सदी में राजा कपूर देव के पोते औतर सिंह ने इसे फिर से बनवाया। बाद में, 19वीं सदी में डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह ने इसे और मजबूत किया। उनके बेटे महाराजा रणबीर सिंह ने भी इसमें कुछ बदलाव करवाए। किले की दीवारें बलुआ पत्थर से बनी हैं, जो इसे मजबूती और सुंदरता देती हैं। किले का नाम ‘बाहु’ इसलिए पड़ा क्योंकि इसे राजा बहुलोचन ने बनवाया था। यह किला जम्मू की रक्षा के लिए बनाया गया था।

इसकी मोटी दीवारें और आठ अष्टकोणीय मीनारें दुश्मनों से बचाव करती थीं। किले में एक गुप्त रास्ता भी है, जो आपातकाल में बाहर निकलने के लिए था। एक बार मैंने सुना कि स्थानीय लोग मानते हैं कि मां काली इस किले की रक्षा करती हैं, जिससे यह हमेशा सुरक्षित रहा। किले में एक तालाब भी है, जो 15 फीट गहरा है। पहले इसे हथियार और गोला-बारूद रखने के लिए इस्तेमाल करते थे। किले के नीचे एक जेल भी थी, जहां दुश्मनों को रखा जाता था। यह सब सुनकर लगता है कि बाहु किला सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि एक जीवंत इतिहास।

बाहु किला अपने आप में एक खजाना है। सबसे बड़ा आकर्षण है मां काली का मंदिर, जिसे बावे वाली माता मंदिर कहते हैं। यह मंदिर 8वीं सदी में बनाया गया था। मंदिर में मां काली की मूर्ति काले पत्थर से बनी है और 3.9 फीट ऊंचे चबूतरे पर है। मंदिर छोटा है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक शक्ति बहुत बड़ी है।

बाहु किला

लोग मानते हैं कि मां काली जम्मू को हर मुसीबत से बचाती हैं। हर साल मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर में नवरात्रि के दौरान यहां बाहु मेला लगता है। इस मेले में हजारों लोग आते हैं। रंग-बिरंगे स्टॉल, लोकगीत और भक्ति का माहौल इसे खास बनाता है। अगर आप मंगलवार या रविवार को जाएं, तो भक्तों की भीड़ देखने लायक होती है। किले के बाहर बाग-ए-बाहु बगीचा है। यह मुगल स्टाइल में बना है, जिसमें फव्वारे, रंग-बिरंगे फूल और बड़े-बड़े पेड़ हैं।

यहां से तवी नदी और जम्मू शहर का नजारा बहुत सुंदर दिखता है। यह बगीचा पिकनिक के लिए भी बेस्ट है। बच्चे यहां खेलते हैं, और बड़े फोटो खींचते हैं। बगीचे में एक कृत्रिम झरना भी है, जो पर्यटकों को खूब पसंद आता है। क्या आप जानते हैं कि बाग-ए-बाहु में भारत का सबसे बड़ा भूमिगत एक्वेरियम भी है? यहां रंग-बिरंगी मछलियां और जलीय जीव देखने को मिलते हैं। यह बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए मजेदार है। किले की वास्तुकला भी देखने लायक है। इसकी दीवारों पर जटिल नक्काशी और मेहराब हैं, जो मुगल और राजपूत शैली का मिश्रण दिखाते हैं। अगर आप फोटोग्राफी पसंद करते हैं, तो यह जगह आपके लिए खास अनुभव बन सकती है।

बाहु किला पहुंचना बहुत आसान है। यह जम्मू शहर के बीच से सिर्फ 5 किलोमीटर दूर है। आप चाहें तो बस, टैक्सी या ऑटो से जा सकते हैं। जम्मू शहर अच्छी तरह से सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जुड़ा है।

हवाई मार्ग जम्मू का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जम्मू एयरपोर्ट है, जो किले से 8-10 किलोमीटर दूर है। यहां से टैक्सी लेकर 15-20 मिनट में पहुंच सकते हैं। दिल्ली, मुंबई और श्रीनगर से नियमित उड़ानें हैं।

रेल मार्ग जम्मू तवी रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी है, जो किले से 6 किलोमीटर दूर है। यह स्टेशन देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा है। स्टेशन से ऑटो या टैक्सी ले सकते हैं।

सड़क मार्ग अगर आप सड़क से आ रहे हैं, तो जम्मू शहर से किला बहुत पास है। बसें और टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं। अगर आप श्रीनगर से आ रहे हैं, तो 270 किलोमीटर का सफर है, जो 6-7 घंटे लेता है। रास्ते में खूबसूरत पहाड़ियां और नजारे दिखेंगे।

बाहु किला घूमने के बाद भूख लगना तो बनता है। जम्मू में खाने के लिए ढेर सारे विकल्प हैं। किले के पास बाग-ए-बाहु में छोटे-छोटे स्टॉल हैं, जहां आप स्थानीय खाना जैसे कचौरी, समोसा और चाय ले सकते हैं। अगर आप जम्मू का मशहूर खाना ट्राई करना चाहते हैं, तो राजमा-चावल या कटरा की कढ़ी जरूर खाएं। यह स्वाद आपको हमेशा याद रहेगा। अगर आप रेस्टोरेंट में खाना चाहते हैं, तो जम्मू शहर में कई अच्छे होटल हैं। वहां आप मुगलई, पंजाबी या कश्मीरी खाना खा सकते हैं। रोगन जोश, दम आलू और गुस्सी मटन जम्मू में बहुत मशहूर हैं। अगर मीठा पसंद है, तो शाही टुकड़ा ट्राई करें। मैंने एक बार जम्मू में कश्मीरी चाय पी, जो गुलाबी और मीठी थी। मजा आ गया था।

रहने के लिए जम्मू में सस्ते से लेकर महंगे होटल तक हैं। किले के पास कुछ गेस्ट हाउस और बजट होटल हैं। अगर आप लग्जरी चाहते हैं, तो रघुनाथ बाजार या गांधी नगर में 4-5 सितारा होटल मिल जाएंगे। भी एक अच्छा विकल्प है। मेरी सलाह है कि होटल पहले बुक कर लें, खासकर नवरात्रि के समय। स्थानीय अनुभव में आप किले के आसपास टहल सकते हैं। बाग-ए-बाहु में बैठकर तवी नदी का नजारा लें। अगर आप मंदिर में दर्शन करने जा रहे हैं, तो सुबह जल्दी जाएं, क्योंकि भीड़ कम होती है। एक बात और किले के आसपास बंदर घूमते हैं। वे चंचल हैं, लेकिन आपका खाना या कैमरा छीन सकते हैं। इसलीए सावधान भी रहें।

बाहु किला जाना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह इतिहास, संस्कृति और प्रकृति का शानदार मिश्रण है। यह किला आपको जम्मू के गौरवशाली अतीत से जोड़ता है। मां काली का मंदिर आध्यात्मिक शांति देता है और बाग-ए-बाहु में आप प्रकृति का मजा ले सकते हैं। यह जगह बच्चों, बड़ों और बुजुर्गों, सभी के लिए है। इतना सब जानने के बाद फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल की तरफ से कुछ सुझाव भी लेते जाइए।जैसे हमेशा आरामदायक जूते पहनें, क्योंकि किले में थोड़ा चलना पड़ता है। गर्मियों में छाता या टोपी ले जाएं। मंदिर में फोटो खींचने से पहले पूछ लें। अगर मेला देखने जा रहे हैं, तो पहले से होटल बुक करें। स्थानीय खाना जरूर ट्राई करें, और एक्वेरियम देखना न भूलें आदि

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