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Pachmarhi Travel: 2 दिन में घूमने की पूरी Budget Guide

Pachmarhi

अगर आपको लगता है कि खूबसूरत पहाड़, घने जंगल, झरने और ठंडी हवा का मजा लेने के लिए हमेशा हिमाचल या उत्तराखंड ही जाना पड़ेगा, तो एक बार मध्य प्रदेश की तरफ भी रुख कीजिए। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी ऐसी ही जगह है, जहां पहुंचते ही मैदानी इलाकों की गर्मी और शहरों की भागदौड़ काफी पीछे छूट जाती है।

बारिश के बाद जब यहां के जंगल पूरी तरह हरे हो जाते हैं, पहाड़ों के बीच बादल उतर आते हैं और झरनों में पानी बढ़ जाता है, तब Pachmarhi का नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है। यही वजह है कि मानसून के बाद का समय यहां घूमने के लिए खास माना जाता है। अगर आप Delhi, भोपाल, इंदौर, नागपुर या मध्य प्रदेश के किसी दूसरे शहर से एक शांत और बजट वाली पहाड़ी यात्रा की तलाश में हैं, तो Pachmarhi आपके लिए काफी अच्छा विकल्प हो सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां सिर्फ पहाड़ देखकर वापस नहीं आना पड़ता।

झरने हैं, गुफाएं हैं, जंगल हैं, मंदिर हैं, पुराने चर्च हैं, व्यू-पॉइंट हैं और आसपास घूमने के लिए कई ऐसी जगहें भी हैं जहां आपको बड़े हिल स्टेशन जैसी लगातार भीड़ नहीं मिलेगी। तो अगर आप पहली बार Pachmarhi जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इस गाइड में आपको रास्ते, घूमने की जगहें, लोकल गाड़ी, खाने-पीने, रहने और बजट से लेकर जरूरी सावधानियों तक की जानकारी आसान भाषा में मिल जाएगी।

सतपुड़ा की गोद में बसा Pachmarhi आखिर इतना खास क्यों है?

पचमढ़ी को अक्सर मध्य प्रदेश का मिनी कश्मीर या सतपुड़ा की रानी कहा जाता है। समुद्र तल से करीब 1,067 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह इलाका मध्य प्रदेश के बाकी मैदानी हिस्सों से बिल्कुल अलग महसूस होता है। यहां पहुंचते ही आपको ऊंचे-नीचे पहाड़, घने जंगल, पुराने पेड़ और ठंडी हवा देखने को मिलती है।

बारिश के बाद तो रास्तों के दोनों तरफ हरियाली इतनी बढ़ जाती है कि कई जगह सड़क के आगे सिर्फ जंगल और पहाड़ दिखाई देते हैं। Pachmarhi की एक खास बात यह भी है कि यह सिर्फ घूमने की जगह नहीं है। यहां प्रकृति के साथ इतिहास और धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं।

Pachmarhi

पांडव गुफाएं, जटाशंकर गुफा और चौरागढ़ जैसे स्थान इसे बाकी सामान्य हिल स्टेशनों से अलग बनाते हैं। अगर आप ऐसा ट्रिप चाहते हैं जिसमें एक ही जगह पर प्रकृति, इतिहास, धार्मिक स्थल और थोड़ा एडवेंचर सब मिल जाए, तो Pachmarhi काफी अच्छा विकल्प बन सकता है।

पचमढ़ी का इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है

आज जिस पचमढ़ी को हम एक खूबसूरत हिल स्टेशन के रूप में जानते हैं, उसका इतिहास काफी पुराना है। इस इलाके का संबंध स्थानीय गोंड समुदायों से रहा है और बाद में ब्रिटिश दौर में इसका विकास एक हिल स्टेशन और सैनिटोरियम के रूप में हुआ। ब्रिटिश अधिकारी जेम्स फोरसिथ का नाम पचमढ़ी के आधुनिक विकास के इतिहास में प्रमुखता से आता है।

यहां का ठंडा मौसम अंग्रेजों को पसंद आया और धीरे-धीरे इलाके में छावनी, सड़कें और दूसरी इमारतें विकसित की गईं। आज भी Pachmarhi में घूमते हुए आपको ब्रिटिश दौर की पुरानी इमारतें और शांत कैंटोनमेंट क्षेत्र देखने को मिलते हैं।

यहां की वास्तुकला और आसपास की हरियाली मिलकर शहर को एक अलग पहचान देती है। इसके अलावा पचमढ़ी सतपुड़ा बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र का हिस्सा है। इसलिए यहां का जंगल और प्राकृतिक वातावरण भी इस जगह की सबसे बड़ी खासियतों में शामिल है।

Pachmarhi कैसे पहुंचें? ट्रेन से जाना सबसे आसान रहेगा

अगर आप ट्रेन से Pachmarhi जा रहे हैं तो सबसे नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन पिपरिया है। पिपरिया से पचमढ़ी करीब 50 किलोमीटर के आसपास है और स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको टैक्सी, साझा वाहन और बस जैसे विकल्प मिल जाते हैं। Delhi, मुंबई, भोपाल, जबलपुर, नागपुर और दूसरे बड़े शहरों से पिपरिया तक ट्रेन के विकल्प मिल सकते हैं।

अपनी यात्रा की तारीख के अनुसार ट्रेन की उपलब्धता पहले जांच लेना बेहतर रहेगा। पिपरिया से आगे का रास्ता ही असली पहाड़ी यात्रा जैसा महसूस होने लगता है। करीब एक से डेढ़ घंटे में आप जंगल और घुमावदार पहाड़ी रास्तों से होते हुए Pachmarhi पहुंच सकते हैं। अगर पिपरिया की सीधी ट्रेन न मिले तो इटारसी भी एक विकल्प हो सकता है। इटारसी बड़ा रेलवे जंक्शन है, जहां देश के कई हिस्सों से ट्रेनें आती-जाती हैं। वहां से सड़क मार्ग से पचमढ़ी पहुंचा जा सकता है।

सड़क से Pachmarhi जाना है तो रास्ता भी ट्रिप का हिस्सा है

अगर आपको रोड ट्रिप पसंद है तो Pachmarhi तक सड़क से जाना अपने आप में अच्छा अनुभव हो सकता है। खासकर पिपरिया से पचमढ़ी का अंतिम हिस्सा घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों के बीच से गुजरता है। भोपाल से पचमढ़ी की दूरी लगभग 210 से 230 किलोमीटर के आसपास पड़ती है। जबलपुर से यह दूरी करीब 240 से 260 किलोमीटर और नागपुर से लगभग 250 से 285 किलोमीटर के आसपास हो सकती है।

वास्तविक समय आपके रूट, ट्रैफिक और सड़क की स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर आप Delhi से आ रहे हैं तो ट्रेन या फ्लाइट से भोपाल या इटारसी तक पहुंचकर आगे सड़क का रास्ता लेना भी एक विकल्प हो सकता है। रोड ट्रिप करते समय खासकर बारिश के मौसम में थोड़ा अतिरिक्त समय रखें। पहाड़ी रास्तों पर मौसम अचानक बदल सकता है और बारिश के बाद सड़क की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।

Pachmarhi पहुंचकर सबसे पहले क्या समझना जरूरी है?

पचमढ़ी में घूमने का तरीका दूसरे शहरों से थोड़ा अलग है। यहां कई प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल जंगल और वन क्षेत्र के अंदर हैं, जहां निजी बाहरी वाहनों के जाने पर नियम लागू होते हैं। इसलिए यहां पहुंचकर सबसे पहले स्थानीय पर्यटन और वन विभाग के नियमों की जानकारी ले लेना बेहतर है। कई जगहों के लिए स्थानीय परमिट वाली जिप्सी और गाइड की जरूरत पड़ सकती है।

पर्यटन स्थलों की स्थिति, वाहन नियम और शुल्क समय के साथ बदल सकते हैं। इसलिए पुराने ब्लॉग या वीडियो में बताए गए रेट को अंतिम न मानें। बुकिंग या भुगतान से पहले स्थानीय आधिकारिक काउंटर से मौजूदा शुल्क की पुष्टि करें। यही छोटी-सी तैयारी आपकी Pachmarhi यात्रा को काफी आसान बना सकती है।

जंगल घूमने के लिए जिप्सी का इंतजाम कैसे करें?

पचमढ़ी के कई लोकप्रिय प्राकृतिक स्थानों तक जाने के लिए स्थानीय जिप्सी का इस्तेमाल किया जाता है। आमतौर पर एक जिप्सी में कई यात्री साथ जा सकते हैं, इसलिए अगर आप परिवार या दोस्तों के साथ हैं तो खर्च बांटने से प्रति व्यक्ति बजट कम हो सकता है।

जंगल क्षेत्र में रजिस्टर्ड गाइड की जरूरत भी हो सकती है। परमिट और गाइड से जुड़े शुल्क भी समय के साथ बदल सकते हैं, इसलिए यात्रा के दिन आधिकारिक जानकारी लेना बेहतर रहेगा। अगर आप वीकेंड या छुट्टी के समय जा रहे हैं तो वाहन की उपलब्धता पहले से पूछ लें। खासकर मानसून के बाद जब झरनों और हरियाली को देखने के लिए लोग ज्यादा पहुंचते हैं, तब आखिरी समय पर गाड़ी मिलने में परेशानी हो सकती है।

धूपगढ़: जहां से सतपुड़ा का पूरा नजारा दिखता है

Pachmarhi में अगर एक जगह ऐसी है जिसे ज्यादातर लोग अपनी सूची में जरूर रखते हैं, तो वह धूपगढ़ है। करीब 1,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित धूपगढ़ मध्य प्रदेश का सबसे ऊंचा बिंदु है। यहां से आसपास की सतपुड़ा पहाड़ियों का शानदार दृश्य दिखाई देता है। खासकर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का माहौल काफी खूबसूरत हो जाता है।

अगर आप सूर्यास्त देखने जा रहे हैं तो बहुत आखिरी समय में पहुंचने के बजाय थोड़ा पहले पहुंचें। इससे आपको जगह देखने और सही स्थान चुनने का समय मिल जाएगा। बारिश के बाद बादलों और धुंध की वजह से दृश्य कभी साफ दिखाई दे सकता है और कभी बिल्कुल नहीं। इसलिए अगर मौसम खराब हो तो उम्मीद के मुताबिक दूर तक नजारा न मिले, इसके लिए तैयार रहें।

बी फॉल: पचमढ़ी का सबसे लोकप्रिय झरना

बारिश के मौसम के बाद Pachmarhi में झरनों का रूप पूरी तरह बदल जाता है और बी फॉल उनमें सबसे लोकप्रिय जगहों में से एक है। करीब 35 मीटर की ऊंचाई से नीचे गिरता पानी और आसपास की हरियाली इसे काफी खूबसूरत बनाती है। नीचे पानी के आसपास पर्यटकों को समय बिताते हुए देखा जा सकता है, हालांकि पानी में उतरने से पहले स्थानीय सुरक्षा निर्देश जरूर देखें।

बी फॉल तक पहुंचने में कुछ पैदल चलना और सीढ़ियां भी शामिल हो सकती हैं। इसलिए यहां जाते समय आरामदायक जूते पहनना काफी जरूरी है। अगर आप बारिश के बाद जा रहे हैं तो पत्थर फिसलन भरे हो सकते हैं। सिर्फ फोटो लेने के लिए किनारे तक जाने की कोशिश न करें।

रजत प्रपात: पहाड़ से गिरती चांदी जैसी धार

रजत प्रपात को अंग्रेजी में सिल्वर फॉल के नाम से भी जाना जाता है। यह बहुत ऊंचाई से गिरने वाली पतली जलधारा के रूप में दिखाई देता है। जब सूरज की रोशनी पानी पर पड़ती है तो दूर से यह चांदी की लकीर जैसी नजर आती है, इसी वजह से इसका नाम रजत प्रपात पड़ा। यह जगह बी फॉल से बिल्कुल अलग अनुभव देती है।

यहां मुख्य आकर्षण झरने को दूर से देखना है। सुरक्षा कारणों से हर जगह नीचे जाकर पानी तक पहुंचना संभव नहीं होता। अगर आप प्रकृति और फोटोग्राफी पसंद करते हैं तो रजत प्रपात को अपनी Pachmarhi यात्रा में जरूर शामिल कर सकते हैं।

पांडव गुफाएं: इतिहास, मान्यता और हरियाली एक साथ

पांडव गुफाएं पचमढ़ी की सबसे चर्चित ऐतिहासिक जगहों में से एक हैं। यहां चट्टानों को काटकर बनाई गई पांच गुफाएं हैं। स्थानीय मान्यता इन्हें पांडवों से जोड़ती है, लेकिन इनके ऐतिहासिक और स्थापत्य संबंधों को लेकर अलग-अलग मत मिलते हैं।

इसलिए इन्हें सिर्फ महाभारत की निश्चित ऐतिहासिक जगह मानने के बजाय स्थानीय परंपरा और पुरातात्विक इतिहास दोनों के संदर्भ में देखना बेहतर है। गुफाओं के आसपास बना हरा-भरा क्षेत्र और ऊपर से दिखाई देने वाला शहर का दृश्य भी इसे खास बनाता है। अगर आप Pachmarhi में पहली बार आए हैं तो यह जगह देखना आसान भी है और ज्यादा समय भी नहीं लेती।

जटाशंकर गुफा: पहाड़ के अंदर बना प्राकृतिक शिव मंदिर

जटाशंकर गुफा धार्मिक आस्था रखने वालों के लिए खास जगह है। यह प्राकृतिक चट्टानों के बीच बनी गहरी और संकरी गुफा है, जहां भगवान शिव से जुड़ी मान्यताएं प्रचलित हैं।

गुफा के अंदर प्राकृतिक चट्टानों की बनावट काफी अलग दिखाई देती है और यहां प्राकृतिक शिवलिंग भी मौजूद है। यहां पहुंचने के लिए नीचे की तरफ उतरना पड़ता है, इसलिए बुजुर्ग यात्रियों या चलने में परेशानी वाले लोगों को थोड़ा ध्यान रखना चाहिए। जटाशंकर की सबसे खास बात यही है कि यहां आपको किसी बड़े मंदिर परिसर की जगह प्रकृति के बीच एक प्राकृतिक गुफा में धार्मिक स्थल देखने को मिलता है।

हांडी खोह: गहरी घाटी और चारों तरफ जंगल

हांडी खोह Pachmarhi के उन स्थानों में से है जहां पहुंचकर आपको पहाड़ों की गहराई का अंदाजा होता है। यहां एक गहरी घाटी और उसके आसपास घने जंगल दिखाई देते हैं।

Pachmarhi

ऊपर से नीचे की तरफ देखने पर घाटी काफी गहरी नजर आती है और चारों तरफ सन्नाटा इस जगह को और खास बना देता है। यहां व्यू-पॉइंट पर खड़े होकर फोटो लेते समय सुरक्षा दूरी बनाए रखना जरूरी है। पहाड़ी किनारों पर सिर्फ अच्छी फोटो के लिए आगे बढ़ना बिल्कुल सही नहीं है। अगर आपको शांत जगहें पसंद हैं तो हांडी खोह आपको काफी अच्छा लग सकता है।

अप्सरा विहार में झरने के पानी के बीच समय बिताएं

अप्सरा विहार एक छोटा और खूबसूरत प्राकृतिक जल क्षेत्र है, जहां पानी के आसपास बैठने और मौसम सही होने पर नहाने का अनुभव लिया जा सकता है। यह जगह बी फॉल की तुलना में ज्यादा छोटी और शांत महसूस हो सकती है।

हालांकि बारिश के बाद पानी का बहाव बदल सकता है, इसलिए यहां उतरने से पहले स्थानीय सुरक्षा निर्देश जरूर देखें। परिवार के साथ जा रहे हैं तो बच्चों पर खास नजर रखें। पहाड़ी झरने देखने में शांत लग सकते हैं, लेकिन बारिश के बाद पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है।

चौरागढ़ मंदिर: 1,300 से ज्यादा सीढ़ियों वाली चढ़ाई

अगर आपको धार्मिक यात्रा के साथ थोड़ा शारीरिक रोमांच भी पसंद है तो चौरागढ़ आपके लिए खास हो सकता है। चौरागढ़ की पहाड़ी पर भगवान शिव का मंदिर है और वहां तक पहुंचने के लिए बड़ी संख्या में सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

रास्ता मेहनत वाला है, इसलिए इसे हल्के में न लें। ऊपर मंदिर के आसपास दिखाई देने वाले हजारों त्रिशूल इस जगह की अलग पहचान बनाते हैं। धार्मिक मान्यता रखने वाले लोग यहां त्रिशूल चढ़ाते हैं। अगर आप चौरागढ़ जाना चाहते हैं तो सुबह जल्दी निकलना बेहतर रहेगा। पानी साथ रखें और आराम से चढ़ें। पूरे रास्ते को जल्दी पूरा करने की कोशिश करने के बजाय अपनी क्षमता के हिसाब से चलना ज्यादा सही है।

रीछगढ़ और क्राइस्ट चर्च भी देखने लायक हैं

Pachmarhi सिर्फ झरनों और पहाड़ियों तक सीमित नहीं है। यहां रीछगढ़ जैसी प्राकृतिक गुफा और पुराने दौर का क्राइस्ट चर्च भी देखा जा सकता है। रीछगढ़ की चट्टानों की बनावट इसे प्राकृतिक एम्फीथिएटर जैसा रूप देती है। वहीं क्राइस्ट चर्च औपनिवेशिक दौर की वास्तुकला और पुराने रंगीन कांच की खिड़कियों के लिए जाना जाता है।

अगर आपके पास पर्याप्त समय है तो इन दोनों जगहों को अपने कार्यक्रम में शामिल कर सकते हैं। इससे आपका ट्रिप सिर्फ प्रकृति आधारित न रहकर इतिहास और वास्तुकला से भी जुड़ जाता है।

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व: अगर वन्यजीवन पसंद है तो समय अलग रखें

अगर आप सिर्फ Pachmarhi घूमने नहीं बल्कि जंगल और वन्यजीवन को करीब से देखने भी जाना चाहते हैं, तो सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के लिए अलग समय निकालना बेहतर रहेगा। मढ़ई क्षेत्र में जीप सफारी और देनवा नदी की बोट सफारी लोकप्रिय गतिविधियां हैं। यहां तेंदुआ, भालू, गौर और कई तरह के पक्षी जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं।

लेकिन जंगल सफारी में किसी जानवर को देखना तय नहीं होता। सफारी का असली अनुभव जंगल के वातावरण, ट्रैक और वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक माहौल में देखने की कोशिश में है। अगर आप इसे अपने मुख्य पचमढ़ी कार्यक्रम में जोड़ रहे हैं तो कम से कम एक अतिरिक्त दिन रखने की कोशिश करें।

पचमढ़ी में क्या खाएं? पोहा-जलेबी से दाल बाफला तक

मध्य प्रदेश की यात्रा खाने के बिना पूरी नहीं हो सकती। Pachmarhi में सुबह पोहा-जलेबी से शुरुआत करना आसान और बजट वाला विकल्प है। इसके अलावा दाल बाफला जरूर ट्राई करें।

घी में सेंके गए बाफले, दाल और चटनी के साथ यह खाना पेट भी भर देता है और मध्य प्रदेश के स्थानीय स्वाद का अच्छा अनुभव भी देता है। भुट्टे का कीस, साबुदाना खिचड़ी और मालपुआ-रबड़ी भी ट्राई किए जा सकते हैं। खाने के लिए मेन मार्केट के आसपास आपको कई स्थानीय रेस्तरां और छोटी दुकानें मिल जाएंगी। किसी एक रेस्टोरेंट के नाम पर निर्भर रहने के बजाय उस समय की स्थानीय समीक्षा और खुलने के समय को देखकर फैसला करना बेहतर रहेगा।

Pachmarhi में कहां रुकें?

पचमढ़ी में बजट से लेकर अच्छे रिसॉर्ट तक कई तरह के ठहरने के विकल्प मिलते हैं। अगर आपका बजट सीमित है तो शहर के आसपास छोटे होटल और होमस्टे देख सकते हैं। दो लोगों के शेयरिंग में कमरा लेने पर प्रति व्यक्ति खर्च काफी कम हो सकता है। वहीं परिवार के साथ हैं तो होटल की लोकेशन और पार्किंग को प्राथमिकता देना ज्यादा जरूरी होगा।

अगर आप मध्य प्रदेश पर्यटन की संपत्तियों में रुकना चाहते हैं तो उनकी आधिकारिक बुकिंग और उस तारीख की कीमत पहले जांच लें। होटल बुक करते समय सिर्फ कमरे की फोटो न देखें। यह भी देखें कि वहां से बाजार, टैक्सी स्टैंड और घूमने वाली जगहों तक पहुंचना कितना आसान है।

Pachmarhi घूमने का कितना बजट रखें?

बजट आपकी यात्रा के तरीके पर निर्भर करेगा। अगर आप ट्रेन से पिपरिया तक जाते हैं, वहां से साझा वाहन लेते हैं, बजट होटल में रुकते हैं और खाना सामान्य स्थानीय जगहों पर खाते हैं तो खर्च काफी नियंत्रित रखा जा सकता है।

बजट होटल के लिए करीब ₹1,500 से ₹2,500 प्रति रात का अनुमान रखा जा सकता है, लेकिन मौसम और वीकेंड में दरें बदल सकती हैं। लोकल साइटसीइंग के लिए जिप्सी, परमिट और गाइड का खर्च अलग से जोड़ना होगा।

अगर जिप्सी में चार से छह लोग मिलकर जाते हैं तो प्रति व्यक्ति खर्च कम हो सकता है। इसलिए अगर आप दो लोगों के साथ यात्रा कर रहे हैं तो पहले से जिप्सी की साझा व्यवस्था और होटल की कीमत पूछ लेना आपके बजट को काफी बेहतर तरीके से संभाल सकता है।

पचमढ़ी घूमने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

अगर आपको ठंडा मौसम और आराम से घूमना पसंद है तो अक्टूबर से मार्च का समय अच्छा हो सकता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और ट्रैकिंग या साइटसीइंग करना आसान रहता है। जुलाई से सितंबर तक मानसून के दौरान Pachmarhi की हरियाली सबसे ज्यादा खूबसूरत दिखाई देती है। झरनों में पानी बढ़ जाता है और पहाड़ों पर बादल और धुंध का अलग ही माहौल बन जाता है।

लेकिन बारिश के मौसम में फिसलन और सड़क की स्थिति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ रास्तों या प्राकृतिक स्थानों पर सुरक्षा कारणों से पहुंच सीमित भी हो सकती है। अप्रैल से जून के बीच जब मध्य भारत के मैदानी हिस्सों में काफी गर्मी होती है, तब पचमढ़ी का मौसम तुलनात्मक रूप से राहत देने वाला हो सकता है।

पचमढ़ी जाते समय इन छोटी बातों का ध्यान रखें

जंगल और पहाड़ी इलाकों में हमेशा थोड़ा कैश साथ रखें। शहर के मुख्य हिस्सों में डिजिटल भुगतान की सुविधा मिल सकती है, लेकिन हर प्राकृतिक पर्यटन स्थल पर यह सुविधा मिले, जरूरी नहीं।

मोबाइल नेटवर्क भी जगह के हिसाब से बदल सकता है। इसलिए होटल का पता, बुकिंग की जानकारी और जरूरी फोन नंबर पहले से फोन में सेव रखें। अच्छे ग्रिप वाले जूते पहनें, क्योंकि कई जगहों पर सीढ़ियां, पत्थर और फिसलन वाले रास्ते मिल सकते हैं।

सबसे जरूरी बात—जंगल में प्लास्टिक, बोतल या खाने का कचरा बिल्कुल न छोड़ें। जिस प्रकृति को देखने के लिए आप इतनी दूर आए हैं, उसकी सफाई की जिम्मेदारी भी आपकी ही है।

Pachmarhi के लिए एक आसान दो दिन का प्लान

अगर आपके पास सिर्फ दो दिन हैं तो पहले दिन पांडव गुफा, जटाशंकर, बी फॉल, अप्सरा विहार और हांडी खोह जैसे आसपास के स्थानों को रखा जा सकता है। शाम को धूपगढ़ में सूर्यास्त के लिए समय बचाकर रखें। दूसरे दिन चौरागढ़ या रीछगढ़ जैसी जगहों में से अपनी रुचि के हिसाब से कोई एक-दो स्थान चुनें।

Pachmarhi

इसके बाद बाजार में स्थानीय खाना खाएं और समय मिले तो आसपास की दूसरी छोटी जगहें देखें। अगर आप सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की सफारी भी करना चाहते हैं तो दो दिन काफी कम पड़ सकते हैं।

उसके लिए कम से कम एक अतिरिक्त दिन जोड़ना ज्यादा आरामदायक रहेगा। Pachmarhi में कम जगहें देखकर आराम से घूमना, बहुत सारी जगहों को एक साथ ठूंसकर दिनभर भागते रहने से ज्यादा अच्छा अनुभव देगा।

Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव

  • अगर आपका लक्ष्य सूर्यास्त देखना है तो समय से पहले पहुंचें। मौसम साफ न हो तो दृश्य बदल सकता है, इसलिए सिर्फ सूर्यास्त के भरोसे पूरा कार्यक्रम न बनाएं।
  • बारिश के बाद बी फॉल और दूसरे झरनों में पानी का बहाव तेज हो सकता है। पानी में उतरने से पहले वहां मौजूद सुरक्षा निर्देश और स्थानीय लोगों की सलाह जरूर मानें।
  • लोकल साइटसीइंग पर जाने से पहले वाहन, परमिट और गाइड की कुल कीमत साफ-साफ पूछ लें। अगर आप दोस्तों के साथ हैं तो एक गाड़ी शेयर करके प्रति व्यक्ति खर्च कम किया जा सकता है।
  • पोहा-जलेबी से लेकर दाल बाफला और भुट्टे का कीस तक, पचमढ़ी में सिर्फ सामान्य फास्ट फूड पर निर्भर न रहें। स्थानीय खाने का स्वाद आपकी यात्रा को और खास बना सकता है।
  • जंगल, झरने और पहाड़ इस जगह की असली पहचान हैं। प्लास्टिक या कचरा वहीं छोड़कर न आएं और प्राकृतिक जगहों पर तेज संगीत बजाने से भी बचें।

Pachmarhi की खासियत यही है कि यहां पहुंचने के बाद आपको किसी बड़े पर्यटन शहर जैसी भागदौड़ महसूस नहीं होती। कहीं झरने की आवाज है, कहीं जंगल के बीच से गुजरती सड़क, कहीं पहाड़ी पर बना पुराना मंदिर और कहीं दूर तक फैली सतपुड़ा की घाटियां। अगर आप इस बार किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं जहां बजट भी ज्यादा न बिगड़े और दो-तीन दिन में प्रकृति के करीब समय बिताने का मौका भी मिल जाए, तो Pachmarhi को अपनी सूची में जरूर रखें।

खासकर बारिश के बाद की हरियाली में यहां का अनुभव बिल्कुल अलग हो जाता है। बस मौसम की जानकारी पहले लें, स्थानीय नियमों का ध्यान रखें, आरामदायक जूते पहनें और ट्रिप में थोड़ा खाली समय जरूर रखें। क्योंकि Pachmarhi जैसी जगहों को सिर्फ घूमना नहीं होता, थोड़ा रुककर महसूस भी करना होता है।

Shivani Pal

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