Pachmarhi Travel: 2 दिन में घूमने की पूरी Budget Guide
अगर आपको लगता है कि खूबसूरत पहाड़, घने जंगल, झरने और ठंडी हवा का मजा लेने के लिए हमेशा हिमाचल या उत्तराखंड ही जाना पड़ेगा, तो एक बार मध्य प्रदेश की तरफ भी रुख कीजिए। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी ऐसी ही जगह है, जहां पहुंचते ही मैदानी इलाकों की गर्मी और शहरों की भागदौड़ काफी पीछे छूट जाती है। बारिश के बाद जब यहां के जंगल पूरी तरह हरे हो जाते हैं, पहाड़ों के बीच बादल उतर आते हैं और झरनों में पानी बढ़ जाता है, तब Pachmarhi का नजारा और भी खूबसूरत हो जाता है। यही वजह है कि मानसून के बाद का समय यहां घूमने के लिए खास माना जाता है। अगर आप Delhi, भोपाल, इंदौर, नागपुर या मध्य प्रदेश के किसी दूसरे शहर से एक शांत और बजट वाली पहाड़ी यात्रा की तलाश में हैं, तो Pachmarhi आपके लिए काफी अच्छा विकल्प हो सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां सिर्फ पहाड़ देखकर वापस नहीं आना पड़ता। झरने हैं, गुफाएं हैं, जंगल हैं, मंदिर हैं, पुराने चर्च हैं, व्यू-पॉइंट हैं और आसपास घूमने के लिए कई ऐसी जगहें भी हैं जहां आपको बड़े हिल स्टेशन जैसी लगातार भीड़ नहीं मिलेगी। तो अगर आप पहली बार Pachmarhi जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इस गाइड में आपको रास्ते, घूमने की जगहें, लोकल गाड़ी, खाने-पीने, रहने और बजट से लेकर जरूरी सावधानियों तक की जानकारी आसान भाषा में मिल जाएगी। सतपुड़ा की गोद में बसा Pachmarhi आखिर इतना खास क्यों है? पचमढ़ी को अक्सर मध्य प्रदेश का मिनी कश्मीर या सतपुड़ा की रानी कहा जाता है। समुद्र तल से करीब 1,067 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह इलाका मध्य प्रदेश के बाकी मैदानी हिस्सों से बिल्कुल अलग महसूस होता है। यहां पहुंचते ही आपको ऊंचे-नीचे पहाड़, घने जंगल, पुराने पेड़ और ठंडी हवा देखने को मिलती है। बारिश के बाद तो रास्तों के दोनों तरफ हरियाली इतनी बढ़ जाती है कि कई जगह सड़क के आगे सिर्फ जंगल और पहाड़ दिखाई देते हैं। Pachmarhi की एक खास बात यह भी है कि यह सिर्फ घूमने की जगह नहीं है। यहां प्रकृति के साथ इतिहास और धार्मिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। पांडव गुफाएं, जटाशंकर गुफा और चौरागढ़ जैसे स्थान इसे बाकी सामान्य हिल स्टेशनों से अलग बनाते हैं। अगर आप ऐसा ट्रिप चाहते हैं जिसमें एक ही जगह पर प्रकृति, इतिहास, धार्मिक स्थल और थोड़ा एडवेंचर सब मिल जाए, तो Pachmarhi काफी अच्छा विकल्प बन सकता है। पचमढ़ी का इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है आज जिस पचमढ़ी को हम एक खूबसूरत हिल स्टेशन के रूप में जानते हैं, उसका इतिहास काफी पुराना है। इस इलाके का संबंध स्थानीय गोंड समुदायों से रहा है और बाद में ब्रिटिश दौर में इसका विकास एक हिल स्टेशन और सैनिटोरियम के रूप में हुआ। ब्रिटिश अधिकारी जेम्स फोरसिथ का नाम पचमढ़ी के आधुनिक विकास के इतिहास में प्रमुखता से आता है। यहां का ठंडा मौसम अंग्रेजों को पसंद आया और धीरे-धीरे इलाके में छावनी, सड़कें और दूसरी इमारतें विकसित की गईं। आज भी Pachmarhi में घूमते हुए आपको ब्रिटिश दौर की पुरानी इमारतें और शांत कैंटोनमेंट क्षेत्र देखने को मिलते हैं। यहां की वास्तुकला और आसपास की हरियाली मिलकर शहर को एक अलग पहचान देती है। इसके अलावा पचमढ़ी सतपुड़ा बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र का हिस्सा है। इसलिए यहां का जंगल और प्राकृतिक वातावरण भी इस जगह की सबसे बड़ी खासियतों में शामिल है। Pachmarhi कैसे पहुंचें? ट्रेन से जाना सबसे आसान रहेगा अगर आप ट्रेन से Pachmarhi जा रहे हैं तो सबसे नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन पिपरिया है। पिपरिया से पचमढ़ी करीब 50 किलोमीटर के आसपास है और स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको टैक्सी, साझा वाहन और बस जैसे विकल्प मिल जाते हैं। Delhi, मुंबई, भोपाल, जबलपुर, नागपुर और दूसरे बड़े शहरों से पिपरिया तक ट्रेन के विकल्प मिल सकते हैं। अपनी यात्रा की तारीख के अनुसार ट्रेन की उपलब्धता पहले जांच लेना बेहतर रहेगा। पिपरिया से आगे का रास्ता ही असली पहाड़ी यात्रा जैसा महसूस होने लगता है। करीब एक से डेढ़ घंटे में आप जंगल और घुमावदार पहाड़ी रास्तों से होते हुए Pachmarhi पहुंच सकते हैं। अगर पिपरिया की सीधी ट्रेन न मिले तो इटारसी भी एक विकल्प हो सकता है। इटारसी बड़ा रेलवे जंक्शन है, जहां देश के कई हिस्सों से ट्रेनें आती-जाती हैं। वहां से सड़क मार्ग से पचमढ़ी पहुंचा जा सकता है। सड़क से Pachmarhi जाना है तो रास्ता भी ट्रिप का हिस्सा है अगर आपको रोड ट्रिप पसंद है तो Pachmarhi तक सड़क से जाना अपने आप में अच्छा अनुभव हो सकता है। खासकर पिपरिया से पचमढ़ी का अंतिम हिस्सा घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों के बीच से गुजरता है। भोपाल से पचमढ़ी की दूरी लगभग 210 से 230 किलोमीटर के आसपास पड़ती है। जबलपुर से यह दूरी करीब 240 से 260 किलोमीटर और नागपुर से लगभग 250 से 285 किलोमीटर के आसपास हो सकती है। वास्तविक समय आपके रूट, ट्रैफिक और सड़क की स्थिति पर निर्भर करेगा। अगर आप Delhi से आ रहे हैं तो ट्रेन या फ्लाइट से भोपाल या इटारसी तक पहुंचकर आगे सड़क का रास्ता लेना भी एक विकल्प हो सकता है। रोड ट्रिप करते समय खासकर बारिश के मौसम में थोड़ा अतिरिक्त समय रखें। पहाड़ी रास्तों पर मौसम अचानक बदल सकता है और बारिश के बाद सड़क की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। Pachmarhi पहुंचकर सबसे पहले क्या समझना जरूरी है? पचमढ़ी में घूमने का तरीका दूसरे शहरों से थोड़ा अलग है। यहां कई प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल जंगल और वन क्षेत्र के अंदर हैं, जहां निजी बाहरी वाहनों के जाने पर नियम लागू होते हैं। इसलिए यहां पहुंचकर सबसे पहले स्थानीय पर्यटन और वन विभाग के नियमों की जानकारी ले लेना बेहतर है। कई जगहों के लिए स्थानीय परमिट वाली जिप्सी और गाइड की जरूरत पड़ सकती है। पर्यटन स्थलों की स्थिति, वाहन नियम और शुल्क समय के साथ बदल सकते हैं। इसलिए पुराने ब्लॉग या वीडियो में बताए गए रेट को अंतिम न मानें। बुकिंग या भुगतान से पहले स्थानीय आधिकारिक काउंटर से मौजूदा शुल्क की पुष्टि करें। यही छोटी-सी तैयारी आपकी Pachmarhi यात्रा को काफी आसान बना सकती है।