Interchange: 15 अक्टूबर से EPE-Yamuna Expressway का सीधा रूट
अगर आप Delhi-NCR में रहते हैं और अक्सर गाज़ियाबाद, मेरठ, सोनीपत, पलवल या कुंडली की तरफ से यमुना एक्सप्रेसवे होते हुए आगरा या जेवर की तरफ जाते हैं, तो एक खबर आपके रोज़ के सफर को काफी आसान कर सकती है। खासकर अगर आपने कभी परी चौक के आसपास ट्रैफिक में फंसकर 20-30 मिनट सिर्फ इसी सोच में निकाल दिए हों कि आखिर यहां से निकलेंगे कब! अब इसी परेशानी को कम करने के लिए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे को सीधे जोड़ने वाला Interchange 15 अक्टूबर 2026 से खोलने की तैयारी है।
इसका मतलब यह है कि जो गाड़ियां अभी एक्सप्रेसवे से उतरकर कासना, ग्रेटर नोएडा और परी चौक की तरफ से घूमती हैं, उन्हें आगे चलकर सीधे एक एक्सप्रेसवे से दूसरे एक्सप्रेसवे पर जाने का रास्ता मिलेगा।
यह बदलाव सिर्फ रास्ता छोटा करने तक सीमित नहीं है। इससे समय, ईंधन और शहर की अंदरूनी सड़कों पर बढ़ने वाला ट्रैफिक भी कम हो सकता है। तो आखिर यह Interchange है क्या, कहां बना है और इससे जेवर एयरपोर्ट जाने वालों को कितना फायदा मिलने वाला है? चलिए आसान भाषा में पूरी बात समझते हैं।
अभी तक EPE और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच सीधा रास्ता क्यों नहीं था?
दिलचस्प बात यह है कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे एक-दूसरे को क्रॉस करते हैं, लेकिन लंबे समय तक दोनों के बीच सीधा कनेक्शन नहीं था। यानी दोनों एक्सप्रेसवे पास होने के बावजूद एक से दूसरे पर सीधे चढ़ने या उतरने की सुविधा मौजूद नहीं थी। यही वजह थी कि यात्रियों को बीच में एक्सप्रेसवे छोड़कर स्थानीय सड़कों का सहारा लेना पड़ता था।
मान लीजिए आप गाज़ियाबाद या मेरठ की तरफ से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर आ रहे हैं और आपको आगरा की तरफ जाना है। ऐसे में आपको पहले EPE से बाहर निकलना पड़ता था और फिर ग्रेटर नोएडा की तरफ की सड़कों से होते हुए यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंचना पड़ता था। इस रास्ते में कासना और परी चौक जैसे इलाके आते हैं, जहां ट्रैफिक बढ़ने पर कुछ किलोमीटर का रास्ता काफी लंबा लगने लगता है। नया Interchange इसी पुराने चक्कर को खत्म करने के लिए बनाया जा रहा है।
परी चौक और कासना के जाम से कैसे मिलेगी राहत?
परी चौक ग्रेटर नोएडा का एक महत्वपूर्ण ट्रैफिक पॉइंट है और यहां से रोज़ बड़ी संख्या में स्थानीय और बाहरी वाहन गुजरते हैं। समस्या तब ज्यादा बढ़ जाती है जब एक्सप्रेसवे का ट्रैफिक भी शहर की सड़कों पर आ जाता है। ट्रक, बस, कार और स्थानीय वाहन एक ही रास्ते पर आने लगते हैं और फिर जाम का असर आसपास के इलाकों तक दिखाई देता है।
नया Interchange इस ट्रैफिक को शहर की अंदरूनी सड़कों से दूर रखने में मदद करेगा। EPE से आने वाले वाहनों को यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए परी चौक की तरफ जाने की जरूरत कम होगी। इससे एक तरफ यात्रियों का चक्कर कम होगा और दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा की स्थानीय सड़कों पर भी बाहरी ट्रैफिक का दबाव घट सकता है।
कहां बनाया जा रहा है यह नया Interchange?
यह Interchange ग्रेटर नोएडा में गलगोटियास यूनिवर्सिटी और जगनपुर-अफजलपुर गांव के आसपास बनाया जा रहा है। इसकी लोकेशन ऐसी रखी गई है कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों को यमुना एक्सप्रेसवे तक सीधा कनेक्शन मिल सके। यह जगह यमुना एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट से लगभग 10 किलोमीटर आगे बताई जा रही है।

यानी परी चौक के आसपास से निकलने के बजाय एक्सप्रेसवे के रास्ते ही आगे बढ़कर दूसरे एक्सप्रेसवे पर पहुंचने का विकल्प मिलेगा। यही इस पूरे Interchange की सबसे बड़ी खासियत है।
क्लोवरलीफ डिजाइन वाला यह Interchange इतना खास क्यों है?
यह कोई साधारण कट या फ्लाईओवर नहीं है। इसे क्लोवरलीफ डिजाइन पर तैयार किया जा रहा है। इस डिजाइन में अलग-अलग दिशाओं से आने वाली गाड़ियों को सीधे दूसरी सड़क पर ले जाने के लिए घुमावदार लूप बनाए जाते हैं। इस Interchange में कुल चार एंट्री और चार एग्जिट लूप हैं। यानी अलग-अलग दिशाओं से आने वाली गाड़ियों के लिए अलग रास्ते तैयार किए गए हैं।
इन लूप्स की कुल लंबाई करीब 13 किलोमीटर बताई जा रही है और पूरा प्रोजेक्ट लगभग 83 हेक्टेयर जमीन में फैला हुआ है। इसका फायदा यह होगा कि वाहन चालकों को किसी सामान्य चौराहे की तरह रेड लाइट पर रुककर दूसरी दिशा का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एक्सप्रेसवे से आने वाली गाड़ियां निर्धारित लूप के जरिए दूसरी दिशा में जा सकेंगी। इससे हाईवे का ट्रैफिक ज्यादा व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ सकता है।
15 अक्टूबर से क्या बदलेगा यात्रियों के लिए?
अगर तय कार्यक्रम के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से यह Interchange आम यातायात के लिए खुलता है, तो EPE से यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ जाने वाले यात्रियों के लिए रास्ता काफी सीधा हो जाएगा। अभी जहां लोगों को एक्सप्रेसवे से उतरकर स्थानीय सड़कों और परी चौक की तरफ जाना पड़ता है, वहीं नया रास्ता उन्हें सीधे यमुना एक्सप्रेसवे से जोड़ देगा।
अलग-अलग रूट और ट्रैफिक की स्थिति के हिसाब से करीब 15 से 30 मिनट तक की बचत होने की उम्मीद बताई जा रही है। सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होगा जिन्हें रोज़ या अक्सर पश्चिमी उत्तर प्रदेश से यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ जाना पड़ता है। उनके लिए Interchange सिर्फ एक नया रास्ता नहीं, बल्कि रोज़ के सफर में समय बचाने वाला कनेक्शन बन सकता है।
जेवर एयरपोर्ट जाने वालों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कनेक्शन?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर के आसपास आने वाले समय में यातायात बढ़ने की उम्मीद है। एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़क कनेक्टिविटी का होना जरूरी है और इस मामले में यह Interchange एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है। पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और Delhi-NCR के कुछ हिस्सों से आने वाले यात्रियों के लिए EPE पहले से ही एक बड़ा एक्सप्रेसवे कनेक्शन है।
अब अगर उसी से यमुना एक्सप्रेसवे पर सीधे जाने का रास्ता मिल जाता है, तो उन्हें ग्रेटर नोएडा की अंदरूनी सड़कों से होकर जाने की जरूरत कम पड़ेगी। इससे एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों के साथ-साथ भारी वाहनों और दूसरे बाहरी ट्रैफिक को भी शहर के अंदर आने से रोका जा सकता है। इसलिए Interchange की अहमियत सिर्फ आज के ट्रैफिक तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले समय की बढ़ती आवाजाही से भी जुड़ी हुई है।
कितनी जमीन में बना है और कितने लूप हैं?
इस पूरे Interchange का निर्माण लगभग 83 हेक्टेयर क्षेत्र में किया जा रहा है। इसमें चार एंट्री और चार एग्जिट लूप यानी कुल आठ प्रमुख लूप तैयार किए गए हैं। इन लूप्स की कुल लंबाई लगभग 13 किलोमीटर बताई गई है।
डिजाइन का उद्देश्य यह है कि अलग-अलग दिशाओं से आने वाली गाड़ियों को बिना किसी बड़े चौराहे या रेड लाइट के दूसरी सड़क पर जाने का रास्ता मिले। हालांकि एक्सप्रेसवे पर वाहन चलाते समय तय गति सीमा और लेन नियमों का पालन करना जरूरी रहेगा। क्लोवरलीफ डिजाइन का मतलब यह नहीं है कि हर जगह तेज गति से चलना सुरक्षित होगा। लूप पर मुड़ते समय खास तौर पर अपनी गति नियंत्रित रखना जरूरी होगा।
2019 में शुरू हुई योजना इतनी देर से पूरी क्यों हुई?
इस Interchange की योजना आज की नहीं है। इसकी शुरुआत की योजना साल 2019 में बनाई गई थी। उस समय इसकी अनुमानित लागत करीब 75.5 करोड़ रुपये बताई गई थी। लेकिन जमीन, मुआवजे और निर्माण से जुड़ी कई परेशानियों के कारण काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका। स्थानीय किसानों की जमीन और मुआवजे से जुड़े मुद्दों ने भी इस परियोजना में देरी की भूमिका निभाई।
बाद में डिजाइन में बदलाव हुआ और लागत बढ़ती गई। साल 2023 में इसकी अनुमानित लागत करीब 123 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके बाद मिट्टी भराई के काम को लेकर ठेकेदार और प्राधिकरण के बीच विवाद हुआ, जिसमें अतिरिक्त भुगतान की मांग भी सामने आई। इस वजह से काम एक समय पर काफी प्रभावित हुआ।
75 करोड़ से 270 करोड़ तक कैसे पहुंची परियोजना की लागत?
इस परियोजना की लागत में हुई बढ़ोतरी भी काफी चर्चा में रही है। शुरुआती अनुमान करीब 75.5 करोड़ रुपये था, लेकिन बाद में डिजाइन और दूसरे निर्माण संबंधी बदलावों के चलते लागत बढ़ी। इसके बाद मिट्टी के काम से जुड़े अतिरिक्त भुगतान के मुद्दे ने भी प्रोजेक्ट को प्रभावित किया।
आखिरकार परियोजना की जिम्मेदारी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI को सौंपे जाने के बाद संशोधित बजट करीब 270 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यानी जिस Interchange की शुरुआत कुछ साल पहले अपेक्षाकृत कम बजट से हुई थी, उसे पूरा करने में अब काफी ज्यादा लागत लग रही है। हालांकि इसका अंतिम असर परियोजना के संचालन और रखरखाव पर किस तरह पड़ेगा, यह आगे की स्थिति पर निर्भर करेगा।
![]()
अब कितना काम पूरा हो चुका है?
मौजूदा जानकारी के मुताबिक इस Interchange का 75 प्रतिशत से ज्यादा निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब मुख्य रूप से फिनिशिंग से जुड़े काम पूरे किए जाने हैं। इनमें सड़क की मार्किंग, साइन बोर्ड, रोशनी, क्रैश बैरियर और दूसरे सुरक्षा संबंधी काम शामिल हैं। अधिकारियों की योजना के अनुसार 30 सितंबर तक ऐसे काम पूरे करने और 15 अक्टूबर से ट्रैफिक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
हालांकि किसी भी बड़े सड़क प्रोजेक्ट में अंतिम तारीख निर्माण की स्थिति, सुरक्षा जांच और दूसरे प्रशासनिक कामों पर निर्भर कर सकती है। इसलिए यात्रा से पहले नए रूट से जुड़ी ताजा जानकारी देखना समझदारी होगी।
प्रॉपर्टी मार्केट पर भी पड़ सकता है असर
किसी इलाके में सड़क और एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी बेहतर होने का असर सिर्फ ट्रैफिक पर नहीं पड़ता। आसपास के इलाकों में रहने और कारोबार की मांग पर भी इसका असर देखा जाता है। यमुना एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट के आसपास पहले से कई बड़े विकास कार्य चल रहे हैं। ऐसे में नया Interchange इन इलाकों की सड़क कनेक्टिविटी को और बेहतर कर सकता है।
इससे भविष्य में लोगों के लिए कुछ YEIDA सेक्टरों से आने-जाने का समय कम हो सकता है। सेक्टर 18, 20 और 22D जैसे इलाकों का जिक्र भी प्रॉपर्टी बाजार में लगातार होता रहा है। लेकिन किसी भी जमीन, प्लॉट या घर की कीमत सिर्फ एक सड़क परियोजना से तय नहीं होती। खरीदारी या निवेश से पहले जमीन के कागज, प्राधिकरण के नियम, आसपास की सुविधाएं और वास्तविक बाजार भाव की अलग से जांच करना जरूरी है।
यमुना एक्सप्रेसवे पर जाने से पहले FASTag जरूर जांच लें
अगर आप नए Interchange से यमुना एक्सप्रेसवे पर जाने वाले हैं, तो FASTag की स्थिति पहले से देख लेना अच्छा रहेगा। यमुना एक्सप्रेसवे पर FASTag व्यवस्था लागू है और टोल भुगतान के लिए इसका इस्तेमाल होता है।
सफर शुरू करने से पहले अपने FASTag में पर्याप्त बैलेंस रखें। टोल के नियम और दरें समय के साथ बदल सकती हैं, इसलिए लंबे सफर से पहले मौजूदा दर की जानकारी लेना बेहतर है। खासकर अगर आप आगरा तक जाने वाले हैं, तो पूरे रास्ते के टोल का हिसाब पहले से बना लें।
यमुना एक्सप्रेसवे का टोल कितना है?
दिए गए 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार कार, जीप और वैन के लिए यमुना एक्सप्रेसवे पर करीब 2.65 रुपये प्रति किलोमीटर की दर बताई गई है। ग्रेटर नोएडा से आगरा तक पूरे रास्ते के लिए कार का टोल करीब 438 रुपये के आसपास बताया गया है। अगर 24 घंटे के भीतर वापसी होती है, तो राउंड ट्रिप के लिए अलग व्यवस्था के तहत टोल राशि सामान्य दो तरफ के टोल से कम हो सकती है।
हालांकि टोल दरें समय के साथ बदल सकती हैं, इसलिए यात्रा की तारीख पर लागू दर जरूर जांचें। नए Interchange से रास्ता आसान होने का मतलब यह नहीं है कि टोल खत्म हो जाएगा। एक्सप्रेसवे के इस्तेमाल के लिए संबंधित टोल नियम पहले की तरह लागू रहेंगे।
एक्सप्रेसवे पर स्पीड लिमिट को हल्के में न लें
नया Interchange खुलने के बाद लोगों में उत्साह होना स्वाभाविक है, लेकिन पहली गलती यही हो सकती है कि लोग नए रास्ते पर जरूरत से ज्यादा तेज गाड़ी चलाने लगें। यमुना एक्सप्रेसवे पर वाहनों की श्रेणी के हिसाब से गति सीमा तय रहती है। कारों के लिए निर्धारित अधिकतम गति सीमा और भारी वाहनों के लिए अलग सीमा का पालन करना जरूरी है।
रास्ते में कैमरों और स्पीड निगरानी की व्यवस्था भी रहती है। खासकर Interchange के घुमावदार लूप पर प्रवेश करते समय गति कम रखना जरूरी है। यहां सड़क का डिजाइन सीधा हाईवे जैसा नहीं होगा, इसलिए अचानक लेन बदलने या तेज गति से मुड़ने से बचना चाहिए।
नए रास्ते पर पहली बार जा रहे हैं तो इन बातों का ध्यान रखें
जब कोई नया Interchange खुलता है तो शुरुआत में बहुत से लोगों को इसकी लेन और लूप समझने में थोड़ा समय लग सकता है। इसलिए पहली बार जाते समय जल्दबाजी करने के बजाय सड़क पर लगे साइन बोर्ड ध्यान से पढ़ें। मोबाइल में रास्ता पहले से देख लें और जरूरत हो तो नेविगेशन चालू रखें।
लेकिन ड्राइव करते समय मोबाइल हाथ में लेकर रास्ता देखने की गलती न करें। अगर आपको लेन बदलनी है तो काफी पहले से इंडिकेटर दें और सुरक्षित तरीके से लेन बदलें।
इस Interchange से किन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है?
इस Interchange का फायदा खास तौर पर उन यात्रियों को मिल सकता है जो EPE से यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ जाते हैं। गाज़ियाबाद, मेरठ, सोनीपत, कुंडली, पलवल और आसपास के इलाकों से आने वाले यात्रियों के लिए यह नया कनेक्शन उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा जेवर एयरपोर्ट की तरफ जाने वाले यात्रियों को भी सीधा एक्सप्रेसवे कनेक्शन मिलने का फायदा मिल सकता है।
![]()
दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा की स्थानीय सड़कों पर बाहरी ट्रैफिक कम होने से वहां रहने वाले लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। यानी इस Interchange का असर सिर्फ एक्सप्रेसवे पर चलने वाले वाहन तक सीमित नहीं रहेगा। अगर ट्रैफिक सही तरीके से डायवर्ट होता है तो आसपास की स्थानीय सड़कों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
20 किलोमीटर का चक्कर और 20-30 मिनट का समय बचाने की उम्मीद
इस परियोजना को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा अतिरिक्त दूरी और समय की बचत को लेकर है। अभी कई यात्रियों को एक्सप्रेसवे से उतरकर स्थानीय रास्तों से होकर वापस यमुना एक्सप्रेसवे तक जाना पड़ता है। इस वजह से करीब 15 से 20 किलोमीटर तक की अतिरिक्त दूरी हो सकती है। नया Interchange शुरू होने के बाद यह चक्कर काफी हद तक कम हो सकता है।
रूट और ट्रैफिक के हिसाब से 20 से 30 मिनट तक का समय बचने की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन वास्तविक बचत हर व्यक्ति के लिए एक जैसी नहीं होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगी कि आप कहां से आ रहे हैं, किस समय सफर कर रहे हैं और उस समय एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक की स्थिति कैसी है।
क्या अब परी चौक पर ट्रैफिक बिल्कुल खत्म हो जाएगा?
यह समझना भी जरूरी है कि नया Interchange खुलने का मतलब यह नहीं है कि परी चौक पर हमेशा के लिए जाम खत्म हो जाएगा। परी चौक खुद एक बड़ा स्थानीय ट्रैफिक पॉइंट है, जहां आसपास के बाजार, आवासीय इलाकों और स्थानीय आवाजाही का अपना ट्रैफिक रहता है।
हां, अगर EPE से आने-जाने वाला बाहरी ट्रैफिक सीधे यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ चला जाता है तो इससे परी चौक और आसपास की सड़कों पर अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है। कितना असर पड़ेगा, यह Interchange शुरू होने के बाद वास्तविक ट्रैफिक पैटर्न से ही साफ होगा।
Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव
- लंबे सफर पर निकलने से पहले FASTag का बैलेंस और उसकी स्थिति जरूर देख लें। इससे टोल पर रुकने या भुगतान से जुड़ी परेशानी से बचने में मदद मिलेगी।
- पहली बार इस Interchange से गुजर रहे हैं तो सड़क के साइन बोर्ड और लेन को ध्यान से देखें। आखिरी समय पर कट लेने या अचानक लेन बदलने के बजाय पहले से अपनी सही लेन पकड़ें।
- एक्सप्रेसवे खुला और खाली दिखे तो भी तय गति सीमा का पालन करें। खासकर क्लोवरलीफ के घुमावदार हिस्सों में गति नियंत्रित रखना बहुत जरूरी है।
- अगर आप आगरा, मथुरा या किसी दूसरे लंबे रूट पर जा रहे हैं तो लगातार कई घंटे ड्राइव करने से बचें। बीच में गाड़ी रोककर थोड़ा आराम करने से थकान कम होगी और ड्राइविंग पर ध्यान बना रहेगा।
- नया Interchange शुरू होने के शुरुआती दिनों में रास्ते के साइन और ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव हो सकते हैं। इसलिए निकलने से पहले ताजा रूट जानकारी देख लें और जरूरत हो तो नेविगेशन की मदद लें।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला यह Interchange Delhi-NCR और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सड़क नेटवर्क के लिए एक महत्वपूर्ण कनेक्शन बन सकता है। सबसे बड़ा बदलाव यही होगा कि यात्रियों को एक एक्सप्रेसवे से दूसरे एक्सप्रेसवे पर जाने के लिए बार-बार स्थानीय सड़कों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा।
परी चौक और कासना के आसपास अतिरिक्त ट्रैफिक कम होने की उम्मीद है, वहीं गाज़ियाबाद, मेरठ, सोनीपत और दूसरे इलाकों से आने वाले यात्रियों को यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ जाने में ज्यादा सीधा रास्ता मिल सकता है। जेवर एयरपोर्ट के बढ़ते महत्व को देखते हुए भी इस Interchange की भूमिका आने वाले समय में और बढ़ सकती है। फिलहाल सबकी नजर 15 अक्टूबर 2026 पर है।
अगर तय समय के अनुसार यह Interchange यातायात के लिए खुल जाता है, तो आने वाले दिनों में इसका असली फायदा सड़क पर दिखाई देगा। और शायद तब परी चौक से गुजरते हुए कई ड्राइवरों के मन में यही आएगा कि आखिर यह सीधा रास्ता पहले क्यों नहीं बनाया गया!