Murthal: जहाँ पराठे के लिए लोग आधी रात को भी निकल पड़ते हैं
अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और अब तक Murthal के मशहूर पराठों का स्वाद नहीं चखा है, तो यकीन मानिए आपकी रोड ट्रिप वाली लिस्ट अभी अधूरी है। दिल्ली से कुछ ही दूरी पर एनएच-44 यानी पुराने ग्रैंड ट्रंक रोड पर बसा Murthal आज सिर्फ एक पड़ाव नहीं, बल्कि देश के सबसे लोकप्रिय फूड डेस्टिनेशन्स में से एक बन चुका है।
पहले जहाँ यह जगह मुख्य रूप से ट्रक ड्राइवरों के लिए जानी जाती थी, वहीं आज हर उम्र और हर वर्ग के लोग सिर्फ यहाँ के मक्खन से लदे पराठे और गाढ़ी लस्सी का स्वाद लेने के लिए आते हैं। दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और आसपास के शहरों से लोग देर रात या सुबह-सुबह लंबी ड्राइव का मज़ा लेते हुए Murthal पहुँचते हैं। यही वजह है कि आज Murthal सिर्फ खाने की जगह नहीं बल्कि एक पूरा वीकेंड एक्सपीरियंस बन चुका है।
Murthal का इतिहास: 20 चारपाइयों से ₹100 करोड़ तक का सफर

Murthal की सफलता की कहानी भी इसके पराठों जितनी ही दिलचस्प है। इसकी शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी जब सीताराम नाम के एक व्यक्ति ने यहाँ पहला ढाबा शुरू किया। उस समय यह इलाका सिर्फ हाईवे का एक साधारण पड़ाव था, जहाँ से ट्रक ड्राइवर और यात्री गुजरते थे। इसके कुछ साल बाद, 1956 में सरदार प्रकाश सिंह ने एक छोटा सा ढाबा शुरू किया। उस समय उनके ढाबे में सिर्फ 20 चारपाइयाँ थीं और खाना लकड़ी के चूल्हे पर बनाया जाता था। उनका मकसद यात्रियों और ट्रक ड्राइवरों को सस्ता, स्वादिष्ट और घर जैसा खाना उपलब्ध कराना था।
धीरे-धीरे यह ढाबा यात्रियों के बीच मशहूर होने लगा। बाद में उनके बेटों अमरीक सिंह और सुखदेव सिंह ने इस कारोबार को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। आज अमरीक सुखदेव ढाबा सिर्फ Murthal ही नहीं बल्कि पूरे भारत का एक प्रतिष्ठित नाम बन चुका है। इसका सालाना कारोबार करीब ₹100 करोड़ तक पहुँच चुका है और इसे दुनिया के प्रतिष्ठित रेस्टोरेंट्स में भी गिना जाता है। जिस जगह कभी सिर्फ कुछ चारपाइयाँ हुआ करती थीं, आज वहाँ हजारों लोग रोज खाना खाने आते हैं।
Murthal के प्रसिद्ध ढाबे: कहाँ क्या है खास?
Murthal में दर्जनों ढाबे मौजूद हैं, लेकिन कुछ ऐसे नाम हैं जो हर यात्री की पहली पसंद बने हुए हैं। सबसे पहले बात आती है अमरीक सुखदेव की। यह Murthal का सबसे लोकप्रिय ढाबा माना जाता है। यहाँ के आलू पराठे, पनीर पराठे, सफेद मक्खन और मीठी लस्सी की चर्चा पूरे देश में होती है। यह ढाबा 24 घंटे खुला रहता है और यहाँ हमेशा भीड़ देखने को मिलती है। फिर भी इसकी सर्विस इतनी तेज़ है कि लोगों को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता।

गुलशन ढाबा भी Murthal के पुराने और भरोसेमंद नामों में गिना जाता है। 1950 के दशक से चल रहा यह ढाबा अपने गोभी और पनीर पराठों के लिए काफी मशहूर है। यहाँ आपको पारंपरिक ढाबे का माहौल भी मिलता है और आधुनिक सुविधाएँ भी। अगर आप परिवार के साथ आराम से बैठकर खाना चाहते हैं, तो गरम धरम एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसका माहौल अपेक्षाकृत शांत रहता है और यहाँ परिवारों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है। जन्मदिन, सालगिरह या छोटे-मोटे फैमिली फंक्शन के लिए भी लोग इस जगह को पसंद करते हैं।
वहीं नंबर 1 आहूजा ढाबा अपनी सादगी और पुराने ढाबा कल्चर के लिए जाना जाता है। यहाँ आपको एक ही टेबल पर ट्रक ड्राइवर, बिजनेस मैन और पर्यटक साथ बैठकर खाना खाते दिखाई दे सकते हैं। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
पराठों का स्वाद: सफेद मक्खन और तंदूर का जादू
Murthal के पराठे आखिर इतने खास क्यों होते हैं? इसका जवाब उनके बनाने के तरीके में छुपा है। यहाँ पराठों को सामान्य तवे की बजाय अक्सर तंदूर में धीमी आँच पर पकाया जाता है। इससे पराठों में एक अलग तरह का स्मोकी फ्लेवर आ जाता है जो स्वाद को और बढ़ा देता है। जब पराठा तैयार हो जाता है तो उसके ऊपर घर का बना सफेद मक्खन भरपूर मात्रा में रखा जाता है।

यही मक्खन Murthal के पराठों की असली पहचान माना जाता है। आलू, पनीर, प्याज और मिक्स वेज पराठे यहाँ सबसे ज्यादा ऑर्डर किए जाते हैं। इनके साथ मिलने वाली दही, अचार और मक्खन का कॉम्बिनेशन स्वाद को और भी शानदार बना देता है।
घर पर बनाएं Murthal जैसे तंदूरी पराठे
अगर आप Murthal नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर भी वैसा स्वाद लाने की कोशिश कर सकते हैं। इसके लिए गेहूँ का आटा, उबले आलू, बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, अदरक, हरा धनिया और अपने पसंदीदा मसाले लें। आटे को थोड़ा तेल और नमक मिलाकर नरम गूंध लें। इसके बाद आलू की स्टफिंग तैयार करें और लोई में भरकर पराठा बेल लें। यदि आपके पास गैस तंदूर है तो उसमें सेकें, नहीं तो मोटे तवे पर धीमी आँच पर अच्छी तरह पकाएँ। आखिर में ऊपर से सफेद मक्खन डालकर गर्मागर्म परोसें। स्वाद काफी हद तक Murthal जैसा महसूस होगा।
पर्यावरण और सरकारी नियम
Murthal की बढ़ती लोकप्रियता के साथ यहाँ पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। हाल के वर्षों में हरियाणा सरकार ने ढाबा मालिकों को साफ-सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार ने कई ढाबों के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाना अनिवार्य किया है ताकि आसपास के इलाकों में प्रदूषण न फैले।
जो ढाबे पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन नहीं करते, उनके खिलाफ कार्रवाई और भारी जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है। इसका उद्देश्य Murthal की लोकप्रियता के साथ-साथ यहाँ के प्राकृतिक वातावरण को भी सुरक्षित रखना है।
ट्रैवल टिप्स और जरूरी जानकारी
अगर आप Murthal घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ छोटी-छोटी बातें आपकी यात्रा को और बेहतर बना सकती हैं। सुबह 8 बजे से पहले या देर रात यहाँ पहुँचना सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि उस समय भीड़ अपेक्षाकृत कम होती है। वीकेंड पर खासकर शनिवार और रविवार को यहाँ काफी भीड़ रहती है।

दो लोगों के लिए खाने का औसत खर्च लगभग ₹500 से ₹1000 तक आ सकता है, जो आपके ऑर्डर पर निर्भर करता है। बड़े ढाबों में पार्किंग की सुविधा उपलब्ध रहती है, लेकिन भीड़ के समय टेबल मिलने में 15 से 20 मिनट तक का इंतजार करना पड़ सकता है।
Murthal सिर्फ पराठों की वजह से मशहूर नहीं है, बल्कि यह भारतीय हाईवे संस्कृति का एक अहम हिस्सा बन चुका है। यहाँ का खाना, यहाँ का माहौल और देर रात की रोड ट्रिप का अनुभव लोगों को बार-बार यहाँ आने के लिए मजबूर कर देता है।
चाहे आप खाने के शौकीन हों, परिवार के साथ घूमने निकले हों या दोस्तों के साथ लॉन्ग ड्राइव का प्लान बना रहे हों, Murthal हर किसी को एक यादगार अनुभव देता है। अगली बार जब आप दिल्ली से पंजाब या हरियाणा की तरफ सफर करें, तो इन मशहूर पराठों का स्वाद लेना बिल्कुल न भूलें। शायद यही वह स्वाद हो जिसे आप लंबे समय तक याद रखें।






