Natni ka bara: अलवर में 2 पहाड़ों के बीच पतली रस्सी बांधकर चलती थी नटनी, अब हर साल लाखों पर्यटक देखने आते हैं इसका खौफनाक इतिहास
Natni ka bara/Natni ka bara Alwar Thrilling Story History अलवर । राजस्थान के अलवर जिले में अरावली की दुर्गम और ऊंची पहाड़ियों के बीच एक ऐसा स्थान है, जिसका नाम सुनते ही आज भी लोगों के जेहन में रोमांच और खौफ एक साथ तैर जाता है। हम बात कर रहे हैं ‘नटनी का बारा’ की। अलवर से सरिस्का के रास्ते में स्थित यह जगह आज भले ही एक खूबसूरत टूरिस्ट स्पॉट और पिकनिक डेस्टिनेशन बन चुकी हो, लेकिन इसका कोना-कोना एक ऐसी जांबाज महिला की कहानी चीख-चीखकर बताता है, जिसने आसमान को चुनौती दी थी। Alwar Tourism
यह जगह किसी राजा-महाराजा के महल के लिए नहीं, बल्कि अरावली की दो गगनचुंबी चोटियों के बीच हवा में मौत से खेलने वाली एक नटनी के खौफनाक और हैरतअंगेज करतब के लिए अमर है। आइए जानते हैं, इस जगह का वो रोमांचक इतिहास, जो आज भी ट्रैवलर्स को यहां खींच लाता है। Horrifying History Rajasthan
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सैकड़ों फीट ऊपर, बादलों के बीच पतली रस्सी और नीचे पत्थरों की अथाह गहराई!
स्थानीय इतिहास और बुजुर्गों की मानें तो यह कहानी सदियों पुरानी है, लेकिन आज भी यहां की हवाओं में उस नटनी का खौफनाक सस्पेंस महसूस होता है। अरावली की दो ऐसी ऊंची पहाड़ी चोटियां, जिनकी खाई की तरफ देखने भर से अच्छे-अच्छों का सिर चकरा जाए, उनके बीच एक बेहद पतली और लंबी रस्सी बांधी गई थी। अलवर नटनी का बारा
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हवा में मौत का खेल: वह नटनी (रस्सी पर चलने वाली कलाकार) कोई आम इंसान नहीं थी, बल्कि संतुलन की साक्षात देवी थी। जब नीचे रूपारेल नदी पत्थरों को चीरती हुई बहती थी, तब वह नटनी जमीन से सैकड़ों फीट की ऊंचाई पर बिना किसी सेफ्टी नेट या बेल्ट के, सिर्फ एक बांस की लाठी के सहारे उस पतली सी रस्सी पर कदम बढ़ाती थी।
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सांसें थाम देने वाला करतब: जब वो पहाड़ों के बीच हवा के तेज थपेड़ों को चीरते हुए रस्सी पर चलती थी, तो नीचे खड़े दर्शकों की सांसें अटक जाती थीं। हवा में इतनी ऊंचाई पर जरा सी चूक का मतलब था, सीधे नीचे पत्थरों के गहरे कुंडों में मौत। वह रोजाना इस खतरनाक नदी और खाई को सिर्फ एक रस्सी के सहारे पार करके लोगों को हैरत में डाल देती थी।

ममता की वो एक चूक… और थम गई एक जांबाज की सांसें
कहते हैं कि, कला और हौसले में उस नटनी को हरा पाना नामुमकिन था, लेकिन वो एक मां की ममता से हार गई। एक दिन जब वह हमेशा की तरह दोनों पहाड़ियों के बीच बंधी रस्सी पर अपना सबसे खतरनाक करतब दिखा रही थी और बिल्कुल बीचों-बीच पहुंच चुकी थी, तभी नीचे जमीन पर खेल रहे उसके नन्हे बेटे की रोने की आवाज आई।
हवा में सैकड़ों फीट ऊपर, जहां पूरा ध्यान सिर्फ रस्सी पर होना चाहिए था, वहां एक मां का दिल अपने बच्चे के लिए तड़प उठा। नीचे अपने कलेजे के टुकड़े को देखने के चक्कर में, मात्र एक सेकंड के लिए उस नटनी की नजरें भटकीं और उसका संतुलन बिगड़ गया। पलक झपकते ही वह आसमान से सीधे नीचे नदी की पथरीली और अथाह गहरी चट्टानों पर आ गिरी। उस भयानक ऊंचाई से गिरने के कारण मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई।
प्रकृति के बीच कला के इस खौफनाक अंत ने स्थानीय लोगों के दिलों को झकझोर कर रख दिया और तब से अरावली की इन दो पहाड़ियों के बीच के इस पूरे इलाके को नाम मिला—‘नटनी का बारा’।
ट्रेवलर गाइड: रोमांच को करीब से महसूस करने कहां पहुंचें?
आज भी जब पर्यटक इस जगह पर बने पुल पर खड़े होते हैं और ऊपर उन दो ऊंची अरावली की चोटियों को देखते हैं, तो उनके रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि, कोई इतनी ऊंचाई पर रस्सी पर कैसे चल सकता है!
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आसपास का नजारा: इस पुल के दूसरी तरफ उस नटनी की याद और सुरक्षा के लिए एक प्राचीन माता का मंदिर भी बना हुआ है, जहां पर्यटक दर्शन करते हैं। मानसून के दिनों में यह जगह अरावली की हरियाली और पहाड़ों से बहकर आते पानी के कारण बेहद खूबसूरत और रहस्यमयी नजर आती है।
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कैसे पहुंचें (How to Reach): यह जगह अलवर शहर के बिल्कुल नजदीक है। यदि आप दिल्ली या जयपुर से आ रहे हैं, तो अलवर-सरिस्का हाईवे के जरिए सीधे अपनी कार या बाइक से यहां पहुंच सकते हैं। अलवर जंक्शन यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जहां से लोकल ऑटो या कैब आपको सीधे ‘नटनी का बारा’ के इस ऐतिहासिक पुल तक छोड़ देंगी।
ट्रेवलर टिप: यहां खड़े होकर जब आप ऊपर पहाड़ों की ऊंचाई को नापेंगे, तो आपको उस नटनी के अद्भुत साहस का अहसास होगा। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए पहाड़ों का यह एंगल और नटनी की कहानी का सस्पेंस एक बेहतरीन फ्रेम देता है।





