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Nokrek National Park की पूरी जानकारी जानें

Nokrek National Park

कभी-कभी ऐसी जगह घूमने का मन करता है, जहां न शहरों का शोर हो, न गाड़ियों की भीड़ और न ही हर तरफ लोगों की आवाजाही। बस चारों तरफ हरियाली, पेड़ों से छनकर आती धूप, मिट्टी की खुशबू और दूर कहीं पक्षियों की आवाज सुनाई दे। अगर आप भी ऐसी किसी जगह की तलाश में हैं, तो मेघालय के गारो हिल्स में बसा Nokrek National Park आपकी अगली ट्रिप के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

मेघालय का नाम सुनते ही अक्सर शिलांग, चेरापूंजी और झरनों की तस्वीरें दिमाग में आती हैं। लेकिन राज्य के गारो हिल्स इलाके में एक ऐसी प्राकृतिक जगह भी है, जहां घने जंगल, दुर्लभ पेड़-पौधे और कई तरह के वन्यजीव देखने को मिलते हैं। यहां की खासियत सिर्फ इसकी हरियाली नहीं, बल्कि यहां मिलने वाला जंगली संतरा और गारो समुदाय की प्रकृति से जुड़ी परंपराएं भी हैं।

Nokrek National Park उन लोगों के लिए खास है जिन्हें भीड़भाड़ वाली जगहों के बजाय जंगलों में घूमना, पैदल रास्तों पर चलना, पक्षियों की आवाज सुनना और किसी इलाके को करीब से समझना पसंद है। यहां की यात्रा किसी आम हिल स्टेशन की तरह नहीं होगी। आपको थोड़ी तैयारी करनी होगी, स्थानीय गाइड की मदद लेनी होगी और मौसम के हिसाब से अपना प्लान बनाना होगा।

Nokrek National Park इतना खास क्यों है?

नोकरेक मेघालय के गारो हिल्स इलाके में स्थित है। यहां के जंगलों में सदाबहार और अर्ध-सदाबहार पेड़, बांस के झुरमुट, जंगली पौधे और कई तरह के जीव पाए जाते हैं। पहाड़ी रास्तों और घने जंगलों के कारण इस जगह का माहौल बाकी लोकप्रिय पर्यटन स्थलों से काफी अलग है।

Nokrek National Park का सबसे अहम हिस्सा इसका प्राकृतिक जंगल है, जिसे बचाकर रखना जरूरी है। यहां घूमने का मकसद सिर्फ अच्छी तस्वीरें लेना नहीं, बल्कि जंगल और उसके आसपास के प्राकृतिक जीवन को समझना भी है। इस इलाके में रहने वाले गारो समुदाय की जिंदगी और परंपराओं का रिश्ता भी जंगल से पुराना है।

Nokrek National Park

यह जगह उन यात्रियों के लिए ज्यादा अच्छी है जो प्रकृति के बीच समय बिताना चाहते हैं। यहां हर मोड़ पर किसी बड़े पर्यटन बाजार या होटल की उम्मीद करने के बजाय आपको शांत माहौल, स्थानीय गांव और जंगल के रास्तों का अनुभव मिलेगा।

नोकरेक नेशनल पार्क और बायोस्फीयर रिजर्व में क्या अंतर है?

कई लोग नोकरेक नेशनल पार्क और नोकरेक बायोस्फीयर रिजर्व को एक ही जगह समझ लेते हैं, जबकि दोनों का दायरा अलग है। नेशनल पार्क जंगल के उस खास हिस्से को बचाने के लिए है जहां वन्यजीवों और प्राकृतिक पर्यावरण की सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।

दूसरी तरफ, नोकरेक बायोस्फीयर रिजर्व का क्षेत्र इससे बड़ा है। इसमें जंगल के साथ आसपास के इलाके और स्थानीय समुदायों से जुड़े क्षेत्र भी शामिल हैं। यूनेस्को ने साल 2009 में नोकरेक बायोस्फीयर रिजर्व को अपने Man and the Biosphere कार्यक्रम के तहत मान्यता दी थी। इसका क्षेत्रफल लगभग 82,000 हेक्टेयर है।

Nokrek National Park का मुख्य संरक्षित क्षेत्र करीब 47 से 48 वर्ग किलोमीटर का है। वहीं, पूरे बायोस्फीयर रिजर्व का क्षेत्र इससे काफी बड़ा है। इसलिए यात्रा की योजना बनाते समय यह समझना जरूरी है कि आप नेशनल पार्क के किस हिस्से, ट्रेकिंग रूट या आसपास के गांव में जाना चाहते हैं।

यहां आने वाले यात्रियों को स्थानीय नियमों का पालन करना चाहिए और जंगल के भीतर अपनी मर्जी से रास्ता चुनने के बजाय गाइड की सलाह लेनी चाहिए।

नोकरेक पीक: गारो हिल्स की सबसे ऊंची चोटी

नोकरेक की पहाड़ियां इस पूरे इलाके की पहचान हैं। यहां की सबसे ऊंची चोटी नोकरेक पीक है, जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से करीब 1,412 मीटर बताई जाती है। यहां से आसपास की पहाड़ियों और जंगलों का नजारा देखने को मिलता है।

Nokrek National Park घूमने आने वाले ट्रेकिंग पसंद करने वालों के लिए नोकरेक पीक तक जाने वाला रास्ता खास आकर्षण है। इस ट्रेक में गांव के आसपास के रास्तों से आगे बढ़ते हुए जंगल के भीतर जाना पड़ता है। रास्ते में घने पेड़, बांस, जंगली पौधे और मौसम के हिसाब से बदलते प्राकृतिक नजारे मिलते हैं।

दारीबोकग्रे गांव इस ट्रेक के लिए एक प्रमुख शुरुआती जगह है। मेघालय सरकार की जानकारी के मुताबिक, गांव से पीक तक करीब साढ़े तीन किलोमीटर का ट्रेक बताया गया है। हालांकि, अलग-अलग ट्रेल और आने-जाने के पूरे रास्ते की कुल दूरी इससे अलग हो सकती है।

यह ट्रेक शुरू करने से पहले अपनी फिटनेस, मौसम और रास्ते की स्थिति का ध्यान रखें। बारिश के बाद पगडंडियां फिसलन भरी हो सकती हैं। इसलिए अच्छे ग्रिप वाले जूते पहनना और स्थानीय गाइड के साथ चलना बेहतर रहेगा। Nokrek National Park

जंगली संतरे का खजाना: Citrus indica की कहानी

नोकरेक की सबसे खास बातों में से एक है यहां मिलने वाला जंगली संतरा। इसका वैज्ञानिक नाम Citrus indica है और स्थानीय गारो समुदाय इसे मेमांग नारंग के नाम से भी जानता है।

इस पौधे का महत्व सिर्फ इसके फल तक सीमित नहीं है। यह संतरे की दुर्लभ प्रजातियों में से एक है और वैज्ञानिकों के लिए भी खास है, क्योंकि इसके आनुवंशिक गुणों को बचाकर रखना जरूरी है। इसी वजह से नोकरेक के इलाके में जंगली संतरे को सुरक्षित रखने के लिए सिट्रस जीन सैंक्चुअरी बनाई गई है।

Nokrek National Park की यह खासियत इसे उन लोगों के लिए भी दिलचस्प बनाती है जिन्हें पेड़-पौधों और प्रकृति के बारे में जानना पसंद है। यहां आकर आप समझ सकते हैं कि किसी जंगल का महत्व सिर्फ वहां रहने वाले जानवरों से नहीं, बल्कि दुर्लभ पौधों और उनकी जैव विविधता से भी होता है।

कई बार जंगली संतरे को दुनिया के सभी आधुनिक संतरों का सीधा पूर्वज कह दिया जाता है, लेकिन इस तरह के वैज्ञानिक दावे को सावधानी से समझना चाहिए। इतना जरूर है कि Citrus indica एक महत्वपूर्ण जंगली सिट्रस प्रजाति है, जिसे बचाने के लिए यहां खास प्रयास किए गए हैं।

अगर आप इस जगह को देखने जाएं, तो पौधों या फलों को बिना अनुमति तोड़ने से बचें। इस तरह की दुर्लभ वनस्पतियों को सुरक्षित रखना ही इस प्राकृतिक जगह की असली अहमियत है।

नोकरेक के जंगलों में कौन-कौन से वन्यजीव मिलते हैं?

घने जंगलों में घूमने का अपना अलग मजा है। यहां हर जानवर खुले में दिखाई दे, ऐसा जरूरी नहीं। कई जीव पेड़ों के बीच या जंगल के ऐसे हिस्सों में रहते हैं जहां इंसानों की आवाजाही कम होती है। इसलिए जंगल में वन्यजीव देखने के लिए धैर्य और सही जानकारी जरूरी है।

Nokrek National Park और इसके आसपास के जंगलों में एशियाई हाथी, हूलॉक गिब्बन, स्लो लोरिस, अलग-अलग तरह के बंदर और कई अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं। यहां क्लाउडेड लेपर्ड जैसे दुर्लभ और शर्मीले जीवों का भी प्राकृतिक आवास है। हालांकि, इन जानवरों को देख पाना पूरी तरह किस्मत, मौसम और जंगल की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

जंगल में घूमते समय जानवरों के पास जाने, उन्हें खाना खिलाने या उनकी आवाज निकालकर आकर्षित करने की कोशिश न करें। अगर कोई जानवर दिखाई भी दे, तो सुरक्षित दूरी बनाए रखें और गाइड की बात मानें। Nokrek National Park

यहां आने का मकसद किसी खास जानवर को देखने की गारंटी लेना नहीं होना चाहिए। जंगल में पैदल चलने, उसके माहौल को समझने और प्राकृतिक जीवन को बिना परेशान किए देखने का अनुभव भी अपने आप में खास है।

हूलॉक गिब्बन और पक्षियों को देखने का अनुभव

नोकरेक के जंगलों में हूलॉक गिब्बन खास आकर्षण है। यह भारत में पाया जाने वाला एकमात्र एप यानी कपि समूह का जीव है। गिब्बन आम बंदरों से अलग होते हैं और पेड़ों की ऊंची शाखाओं पर अपने लंबे हाथों की मदद से झूलते हुए चलते हैं।

सुबह के समय जंगल में पक्षियों और वन्यजीवों की आवाजें सुनाई दे सकती हैं। अगर आप किस्मत वाले हुए, तो पेड़ों की ऊंचाई पर हूलॉक गिब्बन की आवाज भी सुन सकते हैं। लेकिन इन्हें देखना तय नहीं है, क्योंकि ये घने जंगलों में रहते हैं और अक्सर इंसानों से दूर रहते हैं।

Nokrek National Park पक्षियों में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए भी अच्छा इलाका है। यहां हॉर्नबिल, तीतर और कई दूसरे वन-पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। सुबह के समय स्थानीय गाइड के साथ पक्षियों को देखने निकलना अच्छा अनुभव हो सकता है।

अगर आपके पास दूरबीन है, तो उसे साथ रख सकते हैं। कैमरा ले जाना भी अच्छा है, लेकिन फोटो लेने के चक्कर में पक्षियों के बहुत करीब जाने या उनके घोंसलों के आसपास पहुंचने से बचें।

एक बात और, इंटरनेट पर नोकरेक में रेड पांडा दिखाई देने के दावे मिल सकते हैं। लेकिन यात्रा का पूरा प्लान किसी दुर्लभ जानवर को देखने की उम्मीद पर न बनाएं। यहां का जंगल, वनस्पतियां और पक्षियों की विविधता ही अपने आप में यात्रा को खास बनाती है। Nokrek National Park

नोकरेक में कौन-कौन से ट्रेक और एडवेंचर कर सकते हैं?

अगर आपको पैदल घूमना और प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद है, तो नोकरेक की यात्रा में ट्रेकिंग जरूर शामिल करें। यहां के रास्ते जंगल, पहाड़ी ढलानों और गांवों के आसपास से गुजरते हैं। रास्ते की लंबाई और कठिनाई चुने गए ट्रेल के हिसाब से बदल सकती है।

नोकरेक पीक ट्रेक: दारीबोकग्रे गांव से नोकरेक पीक की ओर जाने वाला रास्ता यहां के प्रमुख ट्रेक में शामिल है। यात्रा से पहले गाइड से कुल दूरी, लौटने में लगने वाला समय और रास्ते की स्थिति जरूर पूछें।

जंगल में नेचर वॉक: अगर आप लंबा ट्रेक नहीं करना चाहते, तो स्थानीय गाइड से छोटी नेचर वॉक के बारे में पूछ सकते हैं। इस दौरान पेड़-पौधों, पक्षियों और स्थानीय जंगल के बारे में जानने का मौका मिलता है।

झरनों की सैर: गारो हिल्स के आसपास कई झरने हैं। रोंगबांग दारे जैसे झरनों को नोकरेक की यात्रा के साथ जोड़ा जा सकता है। कुछ जगहों तक पहुंचने के लिए अलग से सड़क यात्रा या पैदल चलना पड़ सकता है।

Nokrek National Park के जंगल में किसी भी ट्रेक पर जाने से पहले यह तय कर लें कि वह रास्ता पर्यटकों के लिए खुला है या नहीं। बारिश के मौसम में कुछ रास्ते खतरनाक हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय सलाह को नजरअंदाज न करें।

Nokrek National Park

नोकरेक घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

मेघालय में बारिश और नमी का असर काफी रहता है। इसलिए नोकरेक जाने से पहले मौसम देखना जरूरी है। यहां घूमने के लिए अक्टूबर से अप्रैल तक का समय आम तौर पर बेहतर माना जाता है। मेघालय पर्यटन भी अक्टूबर से अप्रैल के बीच यात्रा की सलाह देता है।

अक्टूबर से फरवरी: इस समय मौसम अपेक्षाकृत ठंडा और ट्रेकिंग के लिए आरामदायक हो सकता है। जंगल में घूमने और आसपास के गांव देखने के लिए यह अच्छा समय है। फिर भी, बारिश के बाद रास्ते गीले हो सकते हैं। Nokrek National Park

मार्च और अप्रैल: इस समय तापमान बढ़ने लगता है, लेकिन जंगल में हरियाली और प्राकृतिक नजारे बने रहते हैं। ट्रेकिंग की योजना बनाते समय दिन के तापमान और बारिश की संभावना देख लें।

मानसून: बारिश के दौरान जंगल बहुत हरा-भरा हो जाता है, लेकिन पगडंडियों पर कीचड़, फिसलन और जोंक की परेशानी बढ़ सकती है। तेज बारिश से रास्तों पर जाना मुश्किल भी हो सकता है। इसलिए मानसून में ट्रेकिंग करने से पहले स्थानीय गाइड और प्रशासन से स्थिति की जानकारी जरूर लें।

अगर आपकी पहली जंगल यात्रा है, तो ऐसा समय चुनें जब मौसम अपेक्षाकृत स्थिर हो और रास्तों की स्थिति ठीक हो। इससे यात्रा ज्यादा आरामदायक रहेगी।

नोकरेक कैसे पहुंचें?

नोकरेक जाने के लिए गुवाहाटी और तुरा प्रमुख पड़ाव हो सकते हैं। यहां तक पहुंचने के लिए आपको हवाई, रेल और सड़क यात्रा को मिलाकर प्लान बनाना होगा।

हवाई मार्ग: गुवाहाटी एयरपोर्ट नोकरेक जाने वालों के लिए एक उपयोगी विकल्प है। मेघालय पर्यटन के मुताबिक, गुवाहाटी एयरपोर्ट से नोकरेक की दूरी सड़क मार्ग से लगभग 262 किलोमीटर बताई गई है। दूरी इस बात के अनुसार बदल सकती है कि आप किस प्रवेश बिंदु या गांव तक जा रहे हैं।

रेल मार्ग: गुवाहाटी रेलवे स्टेशन तक ट्रेन से पहुंचा जा सकता है। वहां से तुरा या गारो हिल्स के दूसरे हिस्सों के लिए सड़क यात्रा करनी होगी। बस, टैक्सी या साझा गाड़ी की उपलब्धता यात्रा की तारीख के हिसाब से पहले जांच लें।

सड़क मार्ग: गुवाहाटी से तुरा तक सड़क के रास्ते पहुंचा जा सकता है। तुरा से आगे दारीबोकग्रे और नोकरेक की तरफ जाने के लिए स्थानीय वाहन की जरूरत पड़ सकती है। रास्ते और मौसम के अनुसार यात्रा में लगने वाला समय बदल सकता है। Nokrek National Park

Nokrek National Park के लिए निकलने से पहले अपने ड्राइवर या स्थानीय गाइड से यह साफ कर लें कि वाहन आपको किस जगह तक छोड़ सकता है और ट्रेक कहां से शुरू होगा। इससे आखिरी समय में वाहन या रास्ते की परेशानी नहीं होगी।

नोकरेक में कहां रुकें और कितना समय रखें?

नोकरेक की यात्रा के लिए तुरा, दारीबोकग्रे और चांदीग्रे जैसे इलाके उपयोगी ठहराव हो सकते हैं। मेघालय पर्यटन के अनुसार, दारीबोकग्रे और चांदीग्रे कई दिन की यात्रा के लिए अच्छे बेस बन सकते हैं। यहां स्थानीय होमस्टे और पारंपरिक माहौल का अनुभव लेने के विकल्प मिल सकते हैं।

अगर आप ज्यादा सुविधाओं के साथ रहना चाहते हैं, तो तुरा में ठहरकर दिन में नोकरेक की ओर जा सकते हैं। वहीं, जंगल के करीब रहकर स्थानीय जीवन को समझना चाहते हैं, तो दारीबोकग्रे या चांदीग्रे में उपलब्ध होमस्टे के बारे में पता कर सकते हैं। Nokrek National Park

कमरे की सुविधा, खाना, वाहन और गाइड की उपलब्धता पहले से पूछ लें। छोटे गांवों में हर समय होटल जैसी सुविधाएं मिलें, यह जरूरी नहीं है। इसलिए अपनी जरूरतों के हिसाब से रहने की जगह चुनें।

यात्रा के लिए दो से तीन दिन रखना उपयोगी हो सकता है, खासकर अगर आप ट्रेकिंग के साथ आसपास के झरने या गांव भी देखना चाहते हैं। Nokrek National Park की यात्रा को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय रास्ते, मौसम और अपनी शारीरिक क्षमता के हिसाब से प्लान करें।

नोकरेक जाने से पहले परमिट, गाइड और जरूरी नियम जान लें

नोकरेक एक संरक्षित प्राकृतिक इलाका है, इसलिए जंगल में जाने से पहले स्थानीय नियमों की जानकारी लेना जरूरी है। कुछ रास्तों पर गाइड की जरूरत हो सकती है और कुछ हिस्सों में प्रवेश या गतिविधियों पर पाबंदी हो सकती है। Nokrek National Park

जाने से पहले मेघालय पर्यटन विभाग या स्थानीय वन विभाग से प्रवेश शुल्क, समय, गाइड की फीस और अनुमति से जुड़ी ताजा जानकारी ले लें। ऑनलाइन अलग-अलग जगहों पर दी गई फीस और समय की जानकारी पुरानी भी हो सकती है, इसलिए बिना पुष्टि किए किसी तय रकम पर भरोसा न करें।

स्थानीय गाइड के साथ चलने से आपको रास्ता समझने में मदद मिलेगी। वह आपको आसपास के पौधों, पक्षियों और गारो समुदाय की परंपराओं के बारे में भी बता सकता है।

गांवों में स्थानीय लोगों की निजी जगहों और परंपराओं का सम्मान करें। अगर कहीं फोटो लेने, कैंप लगाने या जंगल में जाने से पहले अनुमति की जरूरत हो, तो उसका पालन करें। Nokrek National Park जैसे संवेदनशील इलाके में नियमों का ध्यान रखना आपकी सुरक्षा के साथ जंगल की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।

नोकरेक के आसपास कौन-सी जगहें देख सकते हैं?

अगर आप नोकरेक तक जा रहे हैं, तो गारो हिल्स की कुछ दूसरी जगहों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं। इससे आपको इस इलाके की प्राकृतिक खूबसूरती और स्थानीय जीवन को थोड़ा और करीब से देखने का मौका मिलेगा।

Nokrek National Park

रोंगबांग दारे झरना: यह गारो हिल्स का एक खूबसूरत झरना है। आसपास का हरा-भरा माहौल और पानी का बहाव इसे प्रकृति पसंद करने वालों के लिए अच्छा पड़ाव बनाते हैं। जाने से पहले रास्ते की स्थिति जरूर पूछें।

सीजू गुफाएं: गारो हिल्स में स्थित सीजू गुफाएं अपनी प्राकृतिक बनावट और चूना पत्थर की संरचनाओं के लिए जानी जाती हैं। गुफाओं के अंदर जाने के लिए स्थानीय नियम और सुरक्षा संबंधी सलाह मानना जरूरी है। Nokrek National Park

बालपक्रम नेशनल पार्क: यह मेघालय का एक और प्रसिद्ध प्राकृतिक इलाका है। गारो समुदाय की मान्यताओं और यहां के अनोखे भू-दृश्यों के कारण यह जगह खास मानी जाती है। इसे नोकरेक के साथ जोड़ने से पहले दोनों जगहों के बीच यात्रा का समय और सड़क की स्थिति देख लें।

चांदीग्रे गांव: यहां पारंपरिक गारो जीवन और स्थानीय माहौल को समझने का मौका मिल सकता है। आसपास के प्राकृतिक नजारों के साथ गांव में ठहरना आपकी यात्रा को एक अलग अनुभव दे सकता है।

Nokrek National Park के साथ इन जगहों को देखने की योजना बनाते समय हर दिन बहुत सारे पड़ाव रखने से बचें। गारो हिल्स में सड़क यात्रा में उम्मीद से ज्यादा समय लग सकता है, इसलिए आराम से घूमने के लिए पर्याप्त समय रखें।

Five Colors of Travel की ओर से खास ट्रैवल सुझाव

  • लोकल गाइड जरूर साथ रखें। जंगल के रास्ते हर जगह साफ नहीं होते। स्थानीय गाइड से रास्ते, मौसम और वन्यजीवों से जुड़े नियमों की जानकारी लें।
  • अच्छे ग्रिप वाले जूते पहनें। ट्रेकिंग के दौरान कीचड़ और फिसलन मिल सकती है। आरामदायक ट्रेकिंग शूज, हल्का रेनकोट और जरूरत के हिसाब से कपड़े साथ रखें।
  • ऑफलाइन मैप डाउनलोड करें। जंगल और गांवों के आसपास मोबाइल नेटवर्क कमजोर हो सकता है। निकलने से पहले मैप डाउनलोड करें और अपने ठहरने की जगह व वापसी के रास्ते की जानकारी किसी के साथ साझा करें।
  • स्थानीय नियम और संस्कृति का सम्मान करें। जंगल में कचरा न छोड़ें, पौधे न तोड़ें और जानवरों को खाना न खिलाएं। गांव में फोटो लेने या किसी निजी जगह पर जाने से पहले अनुमति जरूर लें।
  • मौसम देखकर ट्रिप प्लान करें। ट्रेकिंग से पहले बारिश और रास्तों की स्थिति की जानकारी लें। अगर मौसम खराब हो, तो ट्रेक टाल देना बेहतर है। यात्रा का मजा तभी है जब आप सुरक्षित भी रहें।

अगर आप मेघालय में ऐसी जगह घूमना चाहते हैं जहां जंगल, दुर्लभ पौधे, पक्षियों की आवाजें और स्थानीय संस्कृति एक साथ देखने को मिले, तो नोकरेक आपकी ट्रैवल लिस्ट में जगह बना सकता है। यहां की यात्रा सिर्फ किसी व्यू पॉइंट पर पहुंचकर फोटो लेने के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति के बीच समय बिताने और एक नए इलाके को समझने के लिए है।

Nokrek National Park की सबसे बड़ी खासियत इसका प्राकृतिक जंगल, नोकरेक पीक, हूलॉक गिब्बन और जंगली संतरे की दुर्लभ प्रजाति है। यहां आने से पहले सही मौसम चुनें, स्थानीय गाइड की मदद लें और अपनी यात्रा को आराम से प्लान करें।

मेघालय की यह यात्रा आपको शहर की रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर कुछ शांत पल दे सकती है। और अगर आप जंगल को सिर्फ देखने के बजाय उसे समझने की कोशिश करेंगे, तो नोकरेक का अनुभव और भी यादगार बन सकता है। Nokrek National Park

Shivani Pal

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