Chhath Art Exhibition में देखें मिथिला की खास कलाकृतियां
छठ सिर्फ एक त्योहार नहीं है। इसके साथ जुड़ी पूजा, लोक परंपराएं, सूर्य उपासना, गीत, रंग और सदियों पुरानी सांस्कृतिक यादें इसे बाकी त्योहारों से अलग बनाती हैं। अब इसी छठ को कला के जरिए समझने और देखने का मौका Delhi में मिल रहा है। Delhi के INTACH, 71 Lodhi Estate में Chhath Art Exhibition का आयोजन किया गया है, जिसमें मूल मिथिला कलाकृतियों और छठ से जुड़ी पारंपरिक शिल्पकला के जरिए इस पर्व की सांस्कृतिक अहमियत को सामने रखा गया है।
पोस्टर में दी गई जानकारी के मुताबिक Chhath Art Exhibition का उद्घाटन 28 सितंबर 2026 को किया गया था और यह प्रदर्शनी 1 अक्टूबर 2026 तक देखने के लिए उपलब्ध है। यानी अगर आप Delhi में हैं और छठ, मिथिला कला या भारतीय लोक परंपराओं को करीब से समझना चाहते हैं, तो आपके पास इसे देखने के लिए अभी मौका है।
इस प्रदर्शनी की खास बात यह है कि यहां छठ को सिर्फ पूजा या धार्मिक पर्व के रूप में नहीं दिखाया गया है, बल्कि कला और संस्कृति के नजरिए से भी समझने की कोशिश की गई है। मिथिला की पारंपरिक कला के रंगों और आकृतियों के माध्यम से छठ से जुड़े भाव, सूर्य उपासना और लोक जीवन की झलक देखने को मिलती है।
Chhath Art Exhibition कहां और कब तक देख सकते हैं?
Chhath Art Exhibition का आयोजन INTACH, 71 Lodhi Estate, K.K. Birla Lane, New Delhi – 110003 में किया गया है। पोस्टर के अनुसार प्रदर्शनी 1 अक्टूबर 2026 तक देखने के लिए उपलब्ध है। प्रदर्शनी का उद्घाटन 28 सितंबर 2026, सोमवार को सुबह 11 बजे हुआ था।
उद्घाटन समारोह में INTACH के चेयरमैन Ashok Singh Thakur की ओर से आमंत्रण दिया गया था और श्री हरिवंश जी, उपसभापति, राज्यसभा, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
अगर आप Chhath Art Exhibition देखने की योजना बना रहे हैं तो एक बात ध्यान में रखें कि पोस्टर में प्रदर्शनी की अंतिम तारीख तो दी गई है, लेकिन रोजाना खुलने और बंद होने का समय स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया है। इसलिए जाने से पहले INTACH या आयोजन से जुड़ी ताजा जानकारी देख लेना बेहतर रहेगा।
Chhath Art Exhibition में आखिर क्या देखने को मिलेगा?
Chhath Art Exhibition का मुख्य उद्देश्य छठ पर्व की कलात्मक और सांस्कृतिक अहमियत को सामने लाना है। पोस्टर के अनुसार यहां मूल मिथिला कलाकृतियों और छठ से जुड़े शिल्प के जरिए इस पर्व को दिखाया गया है। मिथिला कला अपने खास रंगों, रेखाओं और लोक जीवन से जुड़े चित्रों के लिए जानी जाती है।
इस कला में सिर्फ सजावट नहीं होती, बल्कि रोजमर्रा के जीवन, धार्मिक विश्वासों, प्रकृति और सामाजिक परंपराओं की झलक भी मिलती है। इसी वजह से Chhath Art Exhibition को देखते समय अगर आप सिर्फ चित्रों के रंग और डिजाइन पर ध्यान देंगे तो शायद इसका पूरा अर्थ समझ नहीं पाएंगे।
इन कलाकृतियों के पीछे छठ से जुड़ी लोक स्मृतियां और परंपराएं भी दिखाई दे सकती हैं। यानी यहां कला को देखकर आप यह समझने की कोशिश कर सकते हैं कि किसी त्योहार को लोग अपनी चित्रकला और शिल्प में किस तरह दर्ज करते हैं।
मिथिला कला के जरिए छठ को समझने की कोशिश
छठ की पहचान सूर्य उपासना से जुड़ी है। इस पर्व में सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है और प्रकृति के साथ जुड़ाव इसकी एक महत्वपूर्ण विशेषता है। Chhath Art Exhibition इसी परंपरा को मिथिला की कला के जरिए सामने लाती है।
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यहां छठ को केवल पूजा की एक प्रक्रिया की तरह देखने की बजाय उसके पीछे मौजूद लोक जीवन और सांस्कृतिक भाव को समझने का मौका मिलता है। मिथिला की कला में अक्सर प्रकृति, पेड़-पौधे, पक्षी, मछली, सूर्य, धार्मिक प्रतीक और रोजमर्रा के जीवन से जुड़े दृश्य दिखाई देते हैं।
छठ जैसे पर्व के साथ जब इन चित्रों को जोड़ा जाता है, तो कला और त्योहार के बीच का संबंध और साफ नजर आने लगता है। Chhath Art Exhibition की यही बात इसे देखने लायक बनाती है। यह सिर्फ चित्र देखने की जगह नहीं, बल्कि एक त्योहार को अलग नजरिए से समझने का मौका भी है।
Chhath Art Exhibition में सूर्य उपासना पर भी है जोर
छठ पर्व में सूर्य की उपासना सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है। इसी वजह से Chhath Art Exhibition में सूर्य से जुड़े सांस्कृतिक और कलात्मक पक्ष को भी विशेष महत्व दिया गया है।
पोस्टर के अनुसार प्रदर्शनी के साथ आयोजित संगोष्ठी का विषय “History and Significance of Chhath Festival / Sun Worship” रखा गया था। इसमें विद्वानों और विशेषज्ञों ने छठ और सूर्य उपासना से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की।
सूर्य को भारतीय परंपरा में सिर्फ प्रकाश देने वाले प्राकृतिक तत्व के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि उसके साथ धार्मिक, सांस्कृतिक और लोक मान्यताएं भी जुड़ी रही हैं। Chhath Art Exhibition में कला के माध्यम से इसी लंबे सांस्कृतिक संबंध को देखने की कोशिश की गई है।
Chhath Art Exhibition सिर्फ चित्रों की प्रदर्शनी नहीं
किसी त्योहार से जुड़ी कला को समझने के लिए सिर्फ उसके चित्रों को देखना काफी नहीं होता। यह समझना भी जरूरी है कि वह कला किस समाज से आती है और उसके पीछे कौन-सी परंपराएं हैं। Chhath Art Exhibition में यही बात इसे सामान्य कला प्रदर्शनी से थोड़ा अलग बनाती है। यहां छठ पर्व और मिथिला की कला को एक साथ रखा गया है।
मिथिला क्षेत्र में लोक कला का संबंध घर, आंगन, त्योहार और धार्मिक अवसरों से रहा है। इसलिए जब छठ से जुड़े चित्र और शिल्प सामने आते हैं, तो वे केवल किसी कलाकार की कल्पना नहीं रह जाते। वे एक लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक परंपरा की झलक भी देते हैं।
अगर आप प्रदर्शनी देखने जाएं तो कोशिश करें कि हर चित्र को कुछ सेकंड ज्यादा देकर देखें। उसके रंग, आकृतियां और उसमें दिखाई गई चीजों को ध्यान से देखने पर शायद आपको उसमें छठ से जुड़ी कई बातें नजर आएं।
30 सितंबर को हुई खास संगोष्ठी
Chhath Art Exhibition के साथ एक विशेष संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया था। पोस्टर के अनुसार यह संगोष्ठी 30 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे आयोजित हुई। इसका विषय छठ पर्व का इतिहास और महत्व तथा सूर्य उपासना रखा गया था। संगोष्ठी में विद्वानों और विशेषज्ञों को एक साथ लाकर छठ के कई पहलुओं पर चर्चा की गई।
पोस्टर में बताया गया है कि चर्चा में छठ की बहुआयामी परंपरा के साथ सूर्य के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, स्थापत्य और प्रतिमात्मक रूपों पर भी ध्यान दिया गया। इसके साथ सूर्य उपासना की जीवित परंपरा और कला, अनुष्ठान तथा सांस्कृतिक स्मृति के बीच संबंध को समझने की कोशिश की गई।
इससे साफ है कि Chhath Art Exhibition का उद्देश्य केवल कलाकृतियां दिखाना नहीं था। इसके साथ छठ की पृष्ठभूमि और उससे जुड़े सांस्कृतिक पक्षों पर बातचीत को भी जगह दी गई।
Chhath Art Exhibition में दिखती है कला और परंपरा की कड़ी
हम अक्सर त्योहारों को पूजा, व्रत, प्रसाद और पारिवारिक परंपराओं के रूप में देखते हैं। लेकिन किसी भी त्योहार के साथ गीत, चित्र, शिल्प, वेशभूषा और लोक स्मृतियां भी जुड़ी होती हैं। Chhath Art Exhibition इसी पूरी तस्वीर को देखने का अवसर देती है।
मिथिला की कला में त्योहारों और धार्मिक अवसरों से जुड़े दृश्य लंबे समय से दिखाई देते रहे हैं। ऐसे चित्रों में लोक जीवन और धार्मिक विश्वास एक-दूसरे से अलग नहीं होते। छठ के संदर्भ में यह बात और भी दिलचस्प हो जाती है क्योंकि इस पर्व में प्रकृति, सूर्य और जल तीनों का अपना महत्व है।
घाट, नदी या तालाब, सूर्य को अर्घ्य और पूजा की सामग्री—इन सबके बीच एक सांस्कृतिक संबंध दिखाई देता है। जब इन्हीं भावों को कला में उतारा जाता है तो एक त्योहार की कहानी रंगों और रेखाओं के जरिए भी सामने आती है।
Delhi में मिथिला कला देखने का मौका
Delhi देश के अलग-अलग हिस्सों की कला और संस्कृति को एक जगह देखने का बड़ा केंद्र है। यहां देश के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कलाकार और सांस्कृतिक संगठन समय-समय पर कार्यक्रम करते हैं। Chhath Art Exhibition भी Delhi में मिथिला की कला और छठ की परंपरा को देखने का ऐसा ही मौका है।
खासकर उन लोगों के लिए यह प्रदर्शनी दिलचस्प हो सकती है जो Bihar, Jharkhand, पूर्वी Uttar Pradesh या मिथिला क्षेत्र की संस्कृति से जुड़े हैं। लेकिन इसे देखने के लिए उस क्षेत्र से होना जरूरी नहीं है।
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अगर आपको भारत की लोक कलाओं और अलग-अलग त्योहारों की परंपराओं को समझने में रुचि है, तो Chhath Art Exhibition आपके लिए उपयोगी अनुभव हो सकती है। किसी दूसरे क्षेत्र की संस्कृति को समझने का सबसे अच्छा तरीका सिर्फ उसके बारे में पढ़ना नहीं, बल्कि उसकी कला और परंपराओं को सामने से देखना भी है।
Chhath Art Exhibition युवाओं के लिए क्यों खास है?
आज के समय में बहुत से युवा अपने त्योहारों और परंपराओं को सोशल मीडिया के जरिए देखते हैं। त्योहार की तस्वीरें और वीडियो कुछ ही सेकंड में लोगों तक पहुंच जाते हैं। लेकिन Chhath Art Exhibition जैसी प्रदर्शनी हमें थोड़ी देर रुककर किसी परंपरा को समझने का मौका देती है।
युवा यहां जाकर यह देख सकते हैं कि लोक कला किस तरह किसी समुदाय के जीवन और त्योहार को अपने अंदर समेटती है। इससे उन्हें कला और संस्कृति को केवल किताबों के विषय की तरह नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन से जुड़े अनुभव के रूप में समझने में मदद मिल सकती है। अगर आप कला, इतिहास, संस्कृति, समाज या डिजाइन से जुड़े विषयों में पढ़ाई कर रहे हैं तो Chhath Art Exhibition आपके लिए और भी दिलचस्प हो सकती है।
Chhath Art Exhibition में बच्चों को भी ले जा सकते हैं
अगर आप परिवार के साथ Delhi में घूमने की योजना बना रहे हैं तो Chhath Art Exhibition को भी उसमें शामिल किया जा सकता है। बच्चों को लोक कला से परिचित कराने के लिए संग्रहालय और कला प्रदर्शनियां अच्छी जगह होती हैं।
यहां वे रंगों, आकृतियों और अलग-अलग तरह की कलाकृतियों को देखकर अपनी समझ विकसित कर सकते हैं। छठ के बारे में उन्हें सिर्फ इतना बताने की बजाय कि यह सूर्य पूजा का पर्व है, आप प्रदर्शनी में दिख रही कला के माध्यम से यह भी समझा सकते हैं कि त्योहार हमारे लोक जीवन और कला में किस तरह दिखाई देते हैं।
बच्चों से पूछ सकते हैं कि उन्हें कौन-सा चित्र पसंद आया और उसमें उन्हें क्या दिखाई दे रहा है। इस तरह Chhath Art Exhibition उनके लिए पढ़ाई जैसी नहीं, बल्कि देखने और समझने वाली गतिविधि बन सकती है।
Chhath Art Exhibition और सांस्कृतिक स्मृति
हर समाज की कुछ ऐसी परंपराएं होती हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रहती हैं। त्योहार भी इसी सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा होते हैं। छठ की परंपरा को जब लोक कला में उतारा जाता है तो वह सिर्फ उस समय की तस्वीर नहीं रहती। वह यह भी बताती है कि लोग अपने त्योहार को किस तरह देखते और महसूस करते रहे हैं।
Chhath Art Exhibition इसी सांस्कृतिक स्मृति को कला के जरिए सामने लाने का प्रयास करती है। पोस्टर में आयोजित संगोष्ठी के विषय में भी कला, अनुष्ठान और सांस्कृतिक स्मृति के बीच संबंध का उल्लेख किया गया है।
यह बात प्रदर्शनी के पूरे उद्देश्य को समझने में मदद करती है। यानी यहां रखी कलाकृतियों को देखकर आप सिर्फ यह नहीं पूछ सकते कि “यह चित्र सुंदर है या नहीं?” बल्कि यह भी पूछ सकते हैं कि “यह चित्र हमें छठ और उससे जुड़े समाज के बारे में क्या बताता है?”
Chhath Art Exhibition में जाने से पहले क्या ध्यान रखें?
अगर आप Chhath Art Exhibition देखने जाने वाले हैं तो सबसे पहले इसकी अंतिम तारीख ध्यान में रखें। पोस्टर के अनुसार प्रदर्शनी 1 अक्टूबर 2026 तक ही देखने के लिए उपलब्ध है। इसका स्थान INTACH, 71 Lodhi Estate, K.K. Birla Lane, New Delhi है।
जाने से पहले प्रदर्शनी के खुलने के समय की पुष्टि कर लें, क्योंकि पोस्टर में उद्घाटन का समय सुबह 11 बजे दिया गया है, लेकिन रोजाना प्रदर्शनी देखने का समय अलग से नहीं बताया गया है। प्रदर्शनी में रखी कलाकृतियों को छूने से बचें और वहां दिए गए निर्देशों का पालन करें।
अगर तस्वीर लेने की अनुमति हो तभी फोटो लें। और सबसे जरूरी बात, इसे सिर्फ जल्दी से घूमकर निकलने वाली जगह न समझें। Chhath Art Exhibition का असली अनुभव तभी मिलेगा जब आप कलाकृतियों और उनके पीछे के सांस्कृतिक संदर्भ को समझने की कोशिश करेंगे।
1 अक्टूबर तक है आपके पास मौका
अगर आपने अभी तक Chhath Art Exhibition नहीं देखी है, तो अब देर करने की जरूरत नहीं है। पोस्टर के अनुसार प्रदर्शनी 1 अक्टूबर 2026 तक चल रही है। यानी Delhi में रहने वाले लोगों के पास इसे देखने का बहुत सीमित समय बचा है।
आप इसे अपने दिन के किसी दूसरे काम के साथ भी जोड़ सकते हैं। Lodhi Estate की तरफ आने पर आसपास के क्षेत्र में समय बिताने के बाद प्रदर्शनी देखने जा सकते हैं। अगर आपको मिथिला कला में रुचि है या आप छठ पर्व को एक अलग नजरिए से समझना चाहते हैं, तो Chhath Art Exhibition आपके लिए देखने लायक कार्यक्रम हो सकता है।
Chhath Art Exhibition में सिर्फ कला नहीं, छठ की एक अलग कहानी
त्योहारों की खूबसूरती यही है कि हर पीढ़ी उन्हें अपने तरीके से आगे बढ़ाती है। कोई उन्हें गीतों में याद रखता है, कोई पूजा की परंपराओं में और कोई कला के जरिए। Chhath Art Exhibition में छठ की यही कलात्मक कहानी सामने आती है।
मिथिला की मूल कलाकृतियों और छठ से जुड़े शिल्प के जरिए इस पर्व की सांस्कृतिक अहमियत को देखने का मौका मिलता है। सूर्य उपासना, प्रकृति, लोक जीवन और सांस्कृतिक स्मृति जैसे विषय यहां एक-दूसरे से जुड़े हुए नजर आते हैं। यही वजह है कि Chhath Art Exhibition को सिर्फ एक सामान्य प्रदर्शनी की तरह देखना शायद इसके उद्देश्य को छोटा कर देना होगा। यह एक ऐसी कोशिश है जिसमें एक जीवित लोक परंपरा को कला के माध्यम से Delhi के दर्शकों तक पहुंचाया गया है।
Chhath Art Exhibition 2026 की पूरी जानकारी एक नजर में
Chhath Art Exhibition का आयोजन INTACH की ओर से 71 Lodhi Estate, K.K. Birla Lane, New Delhi – 110003 में किया गया है। प्रदर्शनी का उद्घाटन 28 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे हुआ। पोस्टर के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 तक प्रदर्शनी देखने के लिए उपलब्ध है।
इसमें छठ पर्व की कलात्मक और सांस्कृतिक अहमियत को मूल मिथिला कलाकृतियों और छठ से जुड़े शिल्प के जरिए दिखाया गया है। प्रदर्शनी के साथ 30 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे छठ पर्व के इतिहास और सूर्य उपासना पर एक विशेष संगोष्ठी भी आयोजित की गई थी।
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संगोष्ठी में छठ की परंपरा, सूर्य के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूपों तथा कला, अनुष्ठान और सांस्कृतिक स्मृति के बीच संबंध पर चर्चा की गई। अगर आप Chhath Art Exhibition देखने जा रहे हैं तो रोजाना के समय और प्रवेश से जुड़ी ताजा जानकारी पहले जरूर जांच लें।
Chhath Art Exhibition क्यों बन सकती है आपकी Delhi घूमने की सूची का हिस्सा?
Delhi में घूमने के लिए हमारे पास हमेशा कई विकल्प होते हैं। लेकिन कभी-कभी किसी ऐसे कार्यक्रम में जाना अच्छा लगता है जो हमें किसी दूसरे क्षेत्र की संस्कृति के करीब ले जाए। Chhath Art Exhibition ऐसा ही एक अवसर है।
यहां मिथिला की कला के जरिए छठ पर्व को देखने का मौका मिलता है। यानी आप एक ही जगह पर लोक कला, सूर्य उपासना, त्योहार और सांस्कृतिक स्मृति से जुड़े कई पहलुओं को समझ सकते हैं।
अगर आपको लगता है कि त्योहारों को सिर्फ उनके दिन मनाने के बजाय उनके पीछे की कहानी भी समझनी चाहिए, तो Chhath Art Exhibition आपको जरूर पसंद आ सकती है। और क्योंकि प्रदर्शनी 1 अक्टूबर 2026 तक ही है, इसलिए अगर आप इसे देखना चाहते हैं तो समय रहते योजना बनाना बेहतर होगा।
Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव
- 1 अक्टूबर से पहले जरूर जाएं। पोस्टर के अनुसार Chhath Art Exhibition 1 अक्टूबर 2026 तक ही देखने के लिए उपलब्ध है। इसलिए अंतिम दिन का इंतजार न करें।
- जाने से पहले समय की पुष्टि करें। पोस्टर में उद्घाटन का समय सुबह 11 बजे दिया गया है, लेकिन रोजाना प्रदर्शनी देखने का समय स्पष्ट नहीं है। निकलने से पहले INTACH से ताजा जानकारी जरूर जांचें।
- कलाकृतियों को ध्यान से देखें। मिथिला कला में रंग, रेखाएं और प्रतीक बहुत कुछ कहते हैं। सिर्फ तस्वीर लेकर आगे न बढ़ें, बल्कि चित्र में दिखाई गई चीजों को समझने की कोशिश करें।
- छठ को सिर्फ त्योहार की तरह नहीं, परंपरा की तरह समझें। प्रदर्शनी में सूर्य उपासना, कला, अनुष्ठान और सांस्कृतिक स्मृति के बीच संबंध को देखने की कोशिश करें। इससे आपका अनुभव और गहरा होगा।
- मोबाइल से ज्यादा कला पर ध्यान दें। अगर तस्वीर लेने की अनुमति हो तो कुछ तस्वीरें याद के लिए जरूर लें, लेकिन ज्यादा समय कलाकृतियों और उनके पीछे की कहानी को समझने में लगाएं। यही इस प्रदर्शनी को देखने का असली मजा है।