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Bengaluru Road Trip: Gandhi Jayanti पर घूमने की 5 जगहें

Road Trip

Bengaluru की जिंदगी जितनी तेज है, उतना ही कभी-कभी उससे थोड़ा दूर जाने का मन भी करता है। सुबह ऑफिस के लिए निकलना, ट्रैफिक में घंटों फंसना, दिनभर काम और फिर वही रास्ता पकड़कर घर लौटना… कुछ समय बाद यह रोज का रूटीन काफी थका देता है। ऐसे में अगर कैलेंडर में लगातार छुट्टी मिल जाए तो मन करता है कि बस बैग उठाओ, गाड़ी निकालो और शहर से बाहर निकल जाओ। गांधी जयंती का लॉन्ग वीकेंड ऐसे ही ब्रेक का अच्छा मौका है।

अगर आप Bengaluru में रहते हैं और बहुत लंबी यात्रा नहीं करना चाहते, तो शहर के आसपास कई ऐसी जगहें हैं जहां कुछ घंटों की ड्राइव में पहुंचा जा सकता है। कहीं महलों और पुराने शहर की रौनक मिलेगी, कहीं कॉफी के बागान और पहाड़ियां, तो कहीं जंगल और वन्यजीव आपका इंतजार कर रहे होंगे।

इस तरह का Road Trip सिर्फ मंजिल तक पहुंचने का सफर नहीं होता। रास्ते में किसी छोटे ढाबे पर रुकना, हाईवे किनारे चाय पीना, किसी गांव के पास से गुजरना और अपनी पसंद का संगीत सुनते हुए खुली सड़क पर चलना भी इस सफर का हिस्सा होता है। तो अगर इस गांधी जयंती पर Bengaluru से बाहर निकलने का मन है, तो इन पांच जगहों को अपनी सूची में जरूर रख सकते हैं।

1. मैसूर — Bengaluru से छोटी ड्राइव और शाही शहर का अलग अंदाज

अगर आपके पास सिर्फ दो या तीन दिन हैं और आप ऐसी जगह जाना चाहते हैं जहां इतिहास, खाना, बाजार और घूमने के लिए कई जगहें एक साथ मिल जाएं, तो मैसूर एक अच्छा विकल्प है। Bengaluru से मैसूर की दूरी करीब 145 किलोमीटर है और कार से आमतौर पर लगभग 3 से साढ़े 3 घंटे का समय लग सकता है। इसलिए यह उन लोगों के लिए काफी सुविधाजनक Road Trip बन जाता है जो बहुत लंबी ड्राइव नहीं करना चाहते।

Bengaluru से निकलकर रामनगर, चन्नपटना, मद्दूर, मांड्या और श्रीरंगपटनम होते हुए मैसूर पहुंचा जा सकता है। रास्ते में भी कई छोटे ब्रेक लिए जा सकते हैं। सुबह जल्दी निकलने पर हाईवे का सफर ज्यादा आरामदायक रहता है और दोपहर तक मैसूर पहुंचकर शहर घूमना शुरू किया जा सकता है।

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रामनगर से शुरू करें रास्ते का मजा

Bengaluru से निकलने के बाद रामनगर आपकी पहली दिलचस्प जगहों में से एक हो सकती है। यहां आसपास की चट्टानी पहाड़ियां काफी अलग नजारा देती हैं। फिल्म प्रेमियों के लिए यह इलाका इसलिए भी खास है क्योंकि यहां लोकप्रिय फिल्म शोले की शूटिंग से जुड़ी यादें हैं।

इसके बाद चन्नपटना आता है, जिसे लकड़ी के खिलौनों के लिए जाना जाता है। अगर आप Road Trip में रास्ते से कुछ स्थानीय चीज खरीदना पसंद करते हैं, तो यहां के रंग-बिरंगे लकड़ी के खिलौने अच्छा विकल्प हो सकते हैं। हाईवे के आसपास कई दुकानों पर आपको ये खिलौने देखने को मिल जाएंगे।

मद्दूर वड़ा और फिल्टर कॉफी के बिना मैसूर का सफर अधूरा

मद्दूर से गुजरते समय स्थानीय नाश्ते का स्वाद लेना इस Road Trip का मजेदार हिस्सा हो सकता है। मद्दूर वड़ा कर्नाटक की मशहूर चीजों में से एक है। गर्मागर्म वड़े के साथ फिल्टर कॉफी मिल जाए तो हाईवे की थकान भी कुछ कम लगती है।

अगर आपके पास थोड़ा ज्यादा समय है तो श्रीरंगपटनम में भी रुक सकते हैं। मैसूर पहुंचने से पहले यह ऐतिहासिक इलाका पड़ता है और यहां टीपू सुल्तान से जुड़े कई ऐतिहासिक स्थल देखने को मिलते हैं। इतिहास पसंद करने वालों के लिए यह सिर्फ रास्ते का पड़ाव नहीं बल्कि अपने आप में एक महत्वपूर्ण जगह है।

मैसूर पैलेस से लेकर देवराजा मार्केट तक क्या देखें?

मैसूर पहुंचने के बाद सबसे पहले मैसूर पैलेस देखा जा सकता है। इसकी भव्य इमारत, सजावट और वास्तुकला इसे शहर की पहचान बनाती है। अगर आपका Road Trip रविवार को पड़ रहा है तो शाम के समय महल की रोशनी देखने का मौका भी मिल सकता है। इसके बाद चामुंडी हिल्स का रुख किया जा सकता है। पहाड़ी से शहर का अच्छा नजारा दिखाई देता है। शाम के समय देवराजा मार्केट में घूमना भी अलग अनुभव देता है। यहां फूलों, मसालों और स्थानीय सामानों की दुकानों के बीच घूमते हुए आपको शहर की रोजमर्रा की जिंदगी करीब से देखने को मिलेगी।

मैसूर में क्या खाएं और क्या खरीदें?

मैसूर की यात्रा में स्थानीय खाना जरूर चखना चाहिए। केले के पत्ते पर परोसी जाने वाली कर्नाटक शैली की थाली, मैसूर डोसा और मैसूर पाक यहां के लोकप्रिय स्वादों में शामिल हैं। अगर मिठाई पसंद है तो मैसूर पाक जरूर आजमाएं।

खरीदारी के लिए मैसूर सिल्क और चंदन से जुड़े उत्पाद भी लोकप्रिय हैं। हालांकि खरीदारी करते समय दुकान और उत्पाद की प्रामाणिकता जरूर जांच लें। अगर आप सिर्फ घूमने के लिए जा रहे हैं तो बाजार में बिना जल्दबाजी घूमना भी Road Trip का अच्छा हिस्सा बन सकता है।

2. कुर्ग — कॉफी की खुशबू और धुंधली पहाड़ियों के बीच दो दिन

अगर आपका मन शहर से थोड़ा ज्यादा दूर जाने का है और आपको पहाड़, हरियाली और ठंडा मौसम पसंद है, तो कुर्ग यानी कोडागु आपकी छुट्टी को बिल्कुल अलग बना सकता है।

Bengaluru से कुर्ग की दूरी करीब 250 से 265 किलोमीटर के आसपास है और सड़क की स्थिति तथा ट्रैफिक के हिसाब से लगभग 5 से 6 घंटे लग सकते हैं। Bengaluru से मांड्या और मैसूर होते हुए कुशालनगर और फिर मडिकेरी की तरफ जाना एक आम रास्ता है। यह Road Trip मैसूर के बाद धीरे-धीरे बदलते हुए परिदृश्य की वजह से भी खास लगता है। शहर की इमारतों के बाद हरियाली बढ़ने लगती है और आगे पहाड़ी इलाका शुरू हो जाता है।

कुशालनगर में रुककर बढ़ा सकते हैं सफर का मजा

कुशालनगर कुर्ग की तरफ जाने वाले यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहां के आसपास नामद्रोलिंग मॉनेस्ट्री यानी गोल्डन टेंपल और कावेरी निसर्गधाम जैसे स्थान देखे जा सकते हैं।

अगर आपके पास पूरा दिन है तो इन जगहों को Road Trip के रास्ते में शामिल किया जा सकता है। कावेरी निसर्गधाम में हरियाली और नदी के आसपास का वातावरण कुछ समय आराम करने के लिए अच्छा लगता है। वहीं गोल्डन टेंपल की वास्तुकला और शांत वातावरण आपको शहर की भागदौड़ से काफी अलग महसूस कराएगा।

कॉफी एस्टेट में ठहरना क्यों खास रहेगा?

कुर्ग की पहचान उसकी कॉफी से भी जुड़ी है। मडिकेरी के आसपास कई जगहों पर आपको कॉफी के बागान दिखाई देंगे। अगर आप इस Road Trip को सिर्फ घूमने तक सीमित नहीं रखना चाहते तो कॉफी एस्टेट वाले होमस्टे में रुकना अच्छा अनुभव हो सकता है।

सुबह बागान के बीच टहलना, ताजी कॉफी पीना और आसपास की हरियाली देखना छुट्टी को थोड़ा धीमा बना देता है। यही वजह है कि कुर्ग उन लोगों को खास पसंद आता है जो शहर के शोर से कुछ समय दूर रहना चाहते हैं।

राजा सीट और एब्बे फॉल्स जरूर देखें

मडिकेरी में राजा सीट लोकप्रिय जगहों में से एक है। शाम के समय यहां से आसपास की पहाड़ियों और घाटियों का दृश्य अच्छा लगता है। अगर मौसम साफ हो तो सूर्यास्त का समय यहां बिताया जा सकता है। एब्बे फॉल्स भी कुर्ग के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।

जंगल और हरियाली के बीच झरने तक पहुंचने का रास्ता खुद एक छोटा अनुभव बन जाता है। बारिश के मौसम के आसपास पानी का बहाव ज्यादा हो सकता है, इसलिए वहां स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का ध्यान रखना जरूरी है।

3. चिकमगलूर — कॉफी, पहाड़ और थोड़ा सा एडवेंचर

Bengaluru से लगभग 240 से 260 किलोमीटर दूर चिकमगलूर भी एक शानदार विकल्प है। सड़क से करीब साढ़े 4 से 5 घंटे का सफर लग सकता है, हालांकि ट्रैफिक और रास्ते की स्थिति के हिसाब से समय बदल सकता है।

Bengaluru से नेलमंगला, कुनिगल, चन्नरायापट्टना और हासन होते हुए चिकमगलूर पहुंचा जा सकता है। अगर आपको पहाड़ी सड़क पर गाड़ी चलाने का मजा आता है तो यह Road Trip आपको काफी पसंद आ सकता है।

मुल्लयानगिरि की ऊंचाई पर बदल जाता है पूरा नजारा

चिकमगलूर में मुल्लयानगिरि सबसे लोकप्रिय जगहों में से एक है। यह कर्नाटक की सबसे ऊंची चोटी है और इसकी ऊंचाई करीब 1,930 मीटर है। ऊपर जाते हुए सड़क और मौसम दोनों बदलते जाते हैं।

ऊंचाई पर पहुंचकर ठंडी हवा, बादल और आसपास की पहाड़ियों का दृश्य Road Trip को यादगार बना सकता है। लेकिन पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी चलाते समय तेज गति से बचना जरूरी है। मोड़ पर हॉर्न और सावधानी दोनों काम आते हैं।

बाबा बुडनगिरि और शांत झील का अनुभव

चिकमगलूर में बाबा बुडनगिरि की पहाड़ियां भी देखी जा सकती हैं। यह इलाका अपने प्राकृतिक नजारों और पहाड़ी वातावरण के लिए जाना जाता है। अगर आपको बहुत भीड़ वाली जगहों के बजाय शांत जगह पसंद है तो हीरेकोलाले झील के आसपास कुछ समय बिताया जा सकता है।

शाम के समय पहाड़ियों के बीच झील का शांत पानी काफी खूबसूरत लगता है। इस तरह चिकमगलूर का Road Trip सिर्फ पहाड़ देखने तक सीमित नहीं रहता बल्कि आराम और प्रकृति दोनों का अनुभव देता है।

वापसी में बेलूर और हालेबीडु का इतिहास जोड़ें

अगर आपके पास समय है तो हासन के आसपास बेलूर और हालेबीडु को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं। यहां के मंदिरों की पत्थर पर की गई बारीक नक्काशी और होयसला वास्तुकला देखने लायक है।

इससे आपका Road Trip सिर्फ पहाड़ों और कॉफी तक सीमित नहीं रहेगा। एक ही यात्रा में आपको प्रकृति के साथ दक्षिण भारत के पुराने इतिहास और स्थापत्य कला को करीब से देखने का मौका भी मिल जाएगा।

4. कबिनी — जब मंजिल हो जंगल और सफर में हो वन्यजीवों का रोमांच

अगर पहाड़ों की जगह आपको जंगल ज्यादा पसंद है तो कबिनी का रुख किया जा सकता है। Bengaluru से कबिनी की दूरी लगभग 220 किलोमीटर के आसपास है और कार से करीब साढ़े 4 से 5 घंटे लग सकते हैं।

मैसूर एक्सप्रेसवे से मैसूर की तरफ जाकर वहां से एचडी कोटे रोड होते हुए कबिनी पहुंचा जा सकता है। यह Road Trip उन लोगों के लिए खास हो सकता है जो प्रकृति और वन्यजीवों के बीच कुछ समय बिताना चाहते हैं।

रास्ते में रंगनथिट्टू को जोड़ सकते हैं

अगर आपका समय और कार्यक्रम अनुमति देता है तो मैसूर के आसपास रंगनथिट्टू बर्ड सेंचुरी को भी यात्रा में शामिल किया जा सकता है। पक्षियों को देखने में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह छोटा पड़ाव काफी अच्छा हो सकता है।

Road Trip

हालांकि अगर आपका मुख्य उद्देश्य कबिनी सफारी है तो बहुत ज्यादा जगहें एक साथ जोड़ने के बजाय समय बचाकर जंगल क्षेत्र में पहुंचना बेहतर रहेगा। खासकर सफारी के तय समय को ध्यान में रखकर Road Trip की पूरी योजना बनानी चाहिए।

कबिनी में जंगल सफारी सबसे बड़ा आकर्षण

कबिनी की सबसे बड़ी पहचान यहां के जंगल और वन्यजीव हैं। नागरहोले टाइगर रिजर्व के आसपास सफारी के दौरान अलग-अलग तरह के वन्यजीव देखने का मौका मिल सकता है। हाथी, गौर, हिरण और कई तरह के पक्षी यहां पाए जाते हैं।

बाघ या तेंदुआ दिखना पूरी तरह संयोग और जंगल की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसीलिए सफारी को सिर्फ किसी एक जानवर को देखने की उम्मीद से नहीं जोड़ना चाहिए। जंगल का माहौल, पेड़-पौधे, पक्षियों की आवाज और जानवरों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देखना अपने आप में अनुभव है।

कबिनी में बोट सफारी भी है खास

कबिनी नदी के आसपास का क्षेत्र बोट सफारी के लिए भी जाना जाता है। पानी के किनारे आने वाले हाथियों और दूसरे वन्यजीवों को दूर से देखना काफी रोमांचक हो सकता है। अगर आप इस Road Trip को कबिनी तक ले जा रहे हैं तो सफारी की उपलब्धता और समय पहले से जांच लें।

स्लॉट सीमित हो सकते हैं और छुट्टियों के दौरान मांग बढ़ सकती है। इसलिए सिर्फ होटल बुक करके निकलने के बजाय जंगल सफारी की योजना भी पहले बना लेना बेहतर रहेगा।

5. लेपाक्षी — एक दिन की Road Trip में इतिहास का शानदार अनुभव

अगर आपके पास सिर्फ एक दिन है और फिर भी Bengaluru से बाहर निकलना चाहते हैं तो लेपाक्षी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह Bengaluru से करीब 125 किलोमीटर की दूरी पर है और कार से लगभग ढाई से तीन घंटे में पहुंचा जा सकता है। Bengaluru से येलाहांका, चिक्काबल्लापुर, बागेपल्ली और कोडीकोंडा क्रॉस होते हुए लेपाक्षी पहुंचा जा सकता है। हाईवे का बड़ा हिस्सा आसान ड्राइव देता है, इसलिए यह Road Trip उन लोगों के लिए भी ठीक है जो लंबी दूरी की ड्राइव के बजाय छोटा सफर करना चाहते हैं।

वीरभद्र मंदिर में दिखती है विजयनगर काल की कला

लेपाक्षी का मुख्य आकर्षण वीरभद्र स्वामी मंदिर है। यह मंदिर विजयनगर काल की वास्तुकला और पत्थर की बारीक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर में बने स्तंभ, मूर्तियां और छत पर दिखाई देने वाली पुरानी चित्रकारी इतिहास और कला में रुचि रखने वालों को काफी आकर्षित करती है। यहां घूमते समय सिर्फ तस्वीरें लेने के बजाय मंदिर की वास्तुकला को ध्यान से देखना भी इस Road Trip को खास बना सकता है।

लटकता हुआ खंभा बना देता है लेपाक्षी को खास

लेपाक्षी मंदिर का Hanging Pillar यहां आने वाले लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली चीजों में से एक है। यह खंभा फर्श को पूरी तरह नहीं छूता और उसके नीचे से कपड़ा निकालने की कोशिश पर्यटकों के बीच लोकप्रिय रही है।

हालांकि ऐसी जगहों पर किसी भी संरचना को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधि से बचना चाहिए और स्थानीय नियमों का पालन करना चाहिए। मंदिर परिसर की पुरानी वास्तुकला को सुरक्षित रखना हर यात्री की जिम्मेदारी है।

विशाल नंदी और नागलिंग देखना न भूलें

मंदिर से कुछ दूरी पर विशाल नंदी की प्रतिमा है, जिसे एक ही पत्थर से तराशी गई बड़ी नंदी प्रतिमाओं में गिना जाता है। इसके अलावा मंदिर परिसर में विशाल नागलिंग भी देखने को मिलता है।

लेपाक्षी की खासियत यही है कि यहां बहुत कम समय में इतिहास, धर्म और वास्तुकला तीनों का अनुभव मिल जाता है। इसलिए अगर आपके पास गांधी जयंती की सिर्फ एक दिन की छुट्टी है तो यह Road Trip काफी व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।

पांचों जगहों में से किस तरह चुनें अपनी मंजिल?

अगर आप पहली बार Bengaluru से बाहर जा रहे हैं और कम ड्राइव चाहते हैं, तो मैसूर या लेपाक्षी आसान विकल्प हो सकते हैं। मैसूर में इतिहास, खाना और बाजार है, जबकि लेपाक्षी एक दिन में घूमने के लिए ज्यादा सुविधाजनक है।

अगर आपका मन पहाड़ों और हरियाली का है तो कुर्ग या चिकमगलूर चुना जा सकता है। वहीं अगर जंगल और वन्यजीव देखने का मन है तो कबिनी को यात्रा में शामिल किया जा सकता है। इसलिए Road Trip की मंजिल सिर्फ दूरी देखकर तय न करें। यह देखें कि आपके पास कितने दिन हैं, गाड़ी कौन चला रहा है, साथ कौन जा रहा है और आप छुट्टी में आराम करना चाहते हैं या ज्यादा जगहें घूमना।

गांधी जयंती पर सुबह जल्दी निकलना क्यों बेहतर रहेगा?

लॉन्ग वीकेंड में Bengaluru से बाहर जाने वाली सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा ट्रैफिक हो सकता है। इसलिए अगर आप Road Trip पर जा रहे हैं तो सुबह जल्दी निकलना समझदारी होगी। करीब 5 से 6 बजे के बीच निकलने से शहर का शुरुआती ट्रैफिक पार करने में मदद मिल सकती है।

Road Trip

इसके अलावा सुबह की ड्राइव में मौसम भी अपेक्षाकृत आरामदायक रहता है। हालांकि ड्राइव करते समय सिर्फ जल्दी पहुंचने के लिए तेज गाड़ी चलाना सही नहीं है। छुट्टी का असली मजा सुरक्षित पहुंचने और रास्ते का आनंद लेने में है।

पहाड़ी इलाकों में ड्राइव करते समय रखें खास ध्यान

कुर्ग और चिकमगलूर जैसी जगहों पर पहुंचने के बाद सड़क का स्वरूप बदल जाता है। घुमावदार रास्ते, चढ़ाई और कई जगहों पर कम नेटवर्क ड्राइविंग को थोड़ा चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं। इसलिए Road Trip से पहले ऑफलाइन मैप डाउनलोड कर लेना अच्छा रहेगा।

गाड़ी की ब्रेक, टायर, इंजन ऑयल और कूलेंट की जांच भी कर लें। पहाड़ी रास्तों पर ओवरटेकिंग और तेज गति से बचें। अगर सामने से वाहन आ रहा है तो मोड़ पर खास सावधानी रखें। रास्ते में सुंदर जगह देखकर अचानक सड़क किनारे गाड़ी रोकने के बजाय सुरक्षित पार्किंग वाली जगह चुनें।

Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव

  • गाड़ी की पूरी जांच कराकर निकलें। Road Trip शुरू करने से पहले टायर, ब्रेक, इंजन ऑयल, कूलेंट और जरूरी कागजात जरूर चेक कर लें। छोटी खराबी भी पहाड़ी या लंबे हाईवे सफर में परेशानी बढ़ा सकती है।
  • सुबह जल्दी सफर शुरू करें। गांधी जयंती के लंबे वीकेंड पर Bengaluru से निकलने वाली सड़कों पर भीड़ बढ़ सकती है। इसलिए सुबह 5 से 6 बजे के बीच निकलना समय बचाने में मदद कर सकता है।
  • ऑफलाइन मैप जरूर रखें। कुर्ग, चिकमगलूर और कबिनी के कुछ हिस्सों में नेटवर्क कमजोर हो सकता है। इसलिए जाने से पहले रास्ते का ऑफलाइन मैप डाउनलोड कर लें।
  • छोटे स्टॉप के लिए थोड़ा कैश रखें। बड़े शहरों में डिजिटल पेमेंट आसानी से मिल जाता है, लेकिन छोटे दुकानदार, हाईवे स्टॉल या स्थानीय बाजार में नकद पैसे काम आ सकते हैं।
  • जगह की प्रकृति और नियमों का सम्मान करें। जंगल में तेज आवाज या हॉर्न से बचें, कचरा न फैलाएं और ऐतिहासिक स्मारकों को नुकसान न पहुंचाएं। अच्छा Road Trip वही है जिसमें रास्ता और मंजिल दोनों सुरक्षित रहें।

गांधी जयंती का लॉन्ग वीकेंड रोज के रूटीन से थोड़ा बाहर निकलने का अच्छा मौका हो सकता है। Bengaluru से कुछ घंटों की ड्राइव में ही आपको शाही मैसूर, कॉफी से भरा कुर्ग, पहाड़ियों वाला चिकमगलूर, जंगलों वाला कबिनी और इतिहास से जुड़ा लेपाक्षी जैसे अलग-अलग अनुभव मिल सकते हैं। किसी को महल और बाजार पसंद आएंगे, किसी को पहाड़ों में कॉफी की खुशबू, किसी को जंगल में सफारी और किसी को पुराने मंदिरों की नक्काशी। यही इस तरह के Road Trip की खूबसूरती है कि एक ही शहर से निकलकर कुछ घंटों में आपका पूरा माहौल बदल जाता है। बस गाड़ी की जांच करिए, जरूरी सामान रखिए, रास्ता पहले देख लीजिए और ड्राइव के दौरान जल्दबाजी मत कीजिए। आखिर छुट्टी का मतलब सिर्फ किसी जगह पहुंचना नहीं, बल्कि उस रास्ते को भी जीना है जो आपको वहां तक लेकर जाता है।

Shivani Pal

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