Latest Travel Travel News & Information

29 sept से खुलेगा Barapullah Phase 3, जानें Delhi का नया रूट

Barapullah

मयूर विहार से सराय काले खां तक नया एलिवेटेड कॉरिडोर, AIIMS और साउथ दिल्ली की तरफ करीब 15 मिनट में पहुंचने की उम्मीद; जानिए रूट, कनेक्टिविटी, लूप्स, लागत और सफर में क्या बदलेगा। अगर आप रोज सुबह घर से निकलते ही यह सोचते हैं कि आज किस रास्ते से ऑफिस पहुंचेंगे और किस रास्ते पर सबसे कम जाम मिलेगा, तो दिल्ली की एक नई सड़क आपके रोज के सफर को काफी हद तक बदल सकती है।

खासकर मयूर विहार, ईस्ट दिल्ली और नोएडा की तरफ से साउथ दिल्ली जाने वालों के लिए लंबे समय से इंतजार किया जा रहा Barapullah Phase 3 अब 29 सितंबर 2026 को जनता के लिए खुलने वाला है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मयूर विहार फेज-1 से सराय काले खां तक जाने के लिए एक नया सिग्नल-फ्री एलिवेटेड रास्ता मिलेगा।

इसके आगे पहले से मौजूद बारापुला नेटवर्क से जुड़कर यह रास्ता साउथ दिल्ली की तरफ जाने वाले यात्रियों को AIIMS और आसपास के इलाकों तक पहुंचने में मदद करेगा। रिपोर्टों के मुताबिक, अभी जिस सफर में ट्रैफिक के हिसाब से करीब 35 से 40 मिनट लग सकते हैं, वह करीब 15 मिनट तक सिमट सकता है

29 सितंबर से शुरू होगा नया सफर

कई साल से निर्माणाधीन Barapullah Phase 3 के खुलने की तारीख आखिरकार तय हो गई है। यह कॉरिडोर 29 सितंबर को जनता के लिए खोला जाना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इसके उद्घाटन की जानकारी सामने आई है और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश साहिब सिंह की मौजूदगी की भी रिपोर्ट है।

इस परियोजना का इंतजार इसलिए भी लंबा रहा क्योंकि इसे 2014 में मंजूरी मिली थी और 2015 में काम शुरू हुआ था। शुरुआत में इसे 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जमीन, पर्यावरणीय मंजूरियों, निर्माण से जुड़ी दिक्कतों और दूसरी वजहों के कारण काम लगातार आगे खिसकता गया। अब करीब एक दशक बाद यह हिस्सा ट्रैफिक के लिए खुलने जा रहा है।

मयूर विहार से सराय काले खां तक कहां जाएगा रास्ता?

Barapullah Phase 3 का मुख्य हिस्सा करीब 3.5 किलोमीटर लंबा और चार लेन वाला एलिवेटेड कॉरिडोर है। इसका सीधा कनेक्शन मयूर विहार फेज-1 और सराय काले खां के बीच होगा। सराय काले खां पहुंचने के बाद यह पहले से बने बारापुला नेटवर्क से जुड़ जाएगा। इसका मतलब यह नहीं है कि मयूर विहार से AIIMS तक पूरा रास्ता सिर्फ 3.5 किलोमीटर का है।

Barapullah

असल फायदा पूरे जुड़े हुए नेटवर्क का है। नया हिस्सा पुराने बारापुला कॉरिडोर से जुड़कर ईस्ट दिल्ली से साउथ दिल्ली की तरफ एक लंबा, ज्यादातर सिग्नल-फ्री रास्ता उपलब्ध कराएगा। रिपोर्टों में पूरे जुड़े हुए कॉरिडोर की लंबाई करीब 9 किलोमीटर बताई गई है। यही कनेक्शन इस परियोजना को सिर्फ एक नए फ्लाईओवर के बजाय दिल्ली के बड़े सड़क नेटवर्क का हिस्सा बनाता है।

AIIMS तक 15 मिनट का सफर कितना बदल देगा?

दिल्ली में दूरी से ज्यादा परेशानी कई बार ट्रैफिक की होती है। दो जगहों के बीच सड़क पर दूरी कम हो सकती है, लेकिन अगर रास्ते में लगातार सिग्नल, जाम और चौराहे मिलते रहें तो वही सफर काफी लंबा हो जाता है। Barapullah के शुरू होने के बाद इसी समस्या को कम करने की कोशिश की जा रही है।

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ईस्ट दिल्ली और नोएडा की तरफ से AIIMS जाने वाले यात्रियों का सफर ट्रैफिक की स्थिति और शुरुआती जगह के आधार पर करीब 35–40 मिनट से घटकर लगभग 15 मिनट तक हो सकता है। इसे एक अनुमानित यात्रा समय समझना चाहिए, हर दिन हर वाहन के लिए तय 15 मिनट की गारंटी नहीं।

ऑफिस जाने वालों के लिए इसका मतलब रोज के सफर में काफी समय बचना हो सकता है। खासकर सुबह और शाम के व्यस्त समय में अगर यह रास्ता ट्रैफिक को बेहतर तरीके से बांट पाता है, तो ईस्ट दिल्ली से साउथ दिल्ली जाने वालों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।

Barapullah से जुड़कर बनेगा करीब 9 किलोमीटर का कॉरिडोर

इस परियोजना की असली खासियत इसे अकेले देखने में नहीं, बल्कि पूरे बारापुला नेटवर्क के साथ समझने में है। Barapullah Phase 3 मयूर विहार से सराय काले खां तक पहुंचेगा और वहां से मौजूदा बारापुला फ्लाईओवर के जरिए आगे साउथ दिल्ली की तरफ रास्ता मिलेगा।

इस कनेक्शन से मयूर विहार, सराय काले खां, लाजपत नगर की तरफ जाने वाले रास्तों और आगे AIIMS तथा साउथ दिल्ली के दूसरे हिस्सों के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। नोएडा से आने वालों के लिए भी यह कनेक्शन अहम है, क्योंकि नोएडा की तरफ से ईस्ट दिल्ली में प्रवेश करने के बाद आगे साउथ दिल्ली जाने के लिए कई जगहों पर ट्रैफिक का दबाव रहता है। नया कॉरिडोर ऐसे यात्रियों को एक वैकल्पिक और ज्यादा सीधा रास्ता देगा।

9 लूप क्यों बनाए गए हैं?

सिर्फ फ्लाईओवर बना देना काफी नहीं होता। अगर एंट्री और एग्जिट पर ही गाड़ियां एक-दूसरे के सामने आ जाएं तो ऊपर की सड़क खाली होने के बावजूद नीचे जाम लग सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए Barapullah Phase 3 में कई लूप और कनेक्टिंग रैंप बनाए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार कॉरिडोर में कुल 9 लूप दिए गए हैं, जिनका काम अलग-अलग दिशाओं से आने और जाने वाले ट्रैफिक को सही तरीके से बांटना है।

इससे गाड़ियों को एक ही जगह पर इकट्ठा होने से रोकने और चोक पॉइंट कम करने में मदद मिल सकती है। यानी अगर आप पहली बार इस रास्ते से जा रहे हैं तो सिर्फ ऊपर की सड़क देखकर आगे बढ़ने के बजाय एग्जिट और दिशा वाले बोर्ड पर ध्यान देना जरूरी होगा। गलत लूप लेने पर आपको वापस आने में अतिरिक्त समय लग सकता है।

यमुना पर बना नया पुल भी है खास

Barapullah परियोजना का एक बड़ा हिस्सा यमुना नदी को पार करता है। इसके साथ दिल्ली को यमुना पर एक और सड़क पुल मिलेगा, जिसे शहर का 10वां रोड ब्रिज बताया जा रहा है। इस पुल को एक्स्ट्राडोज्ड डिजाइन के साथ बनाया गया है। इसकी खास बात यह है कि इसके बड़े स्पैन के कारण नदी के सक्रिय हिस्से में पिलर की संख्या कम रखने की कोशिश की गई है।

उपलब्ध जानकारी में स्पैन करीब 125 मीटर तक बताए गए हैं। यमुना के ऊपर से गुजरते समय यह हिस्सा कॉरिडोर के सबसे अलग हिस्सों में से एक नजर आ सकता है। हालांकि ड्राइव करते समय पुल पर रुकना या फोटो लेने के लिए वाहन खड़ा करना बिल्कुल सही नहीं होगा।

सिर्फ कार वालों के लिए नहीं है यह कॉरिडोर

आमतौर पर जब किसी एलिवेटेड रोड की बात होती है तो सबसे पहले कार और बाइक वालों के फायदे की बात होती है। लेकिन Barapullah Phase 3 में पैदल चलने वालों और साइकिल से आने-जाने वालों के लिए भी अलग सुविधाएं शामिल की गई हैं। इस कॉरिडोर में समर्पित साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए रास्ते दिए गए हैं।

इसे दिल्ली के फ्लाईओवर प्रोजेक्ट्स में एक खास सुविधा के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर इतनी ऊंचाई वाले सड़क कॉरिडोर में गैर-मोटर वाहन यात्रियों के लिए ऐसी व्यवस्था कम देखने को मिलती है। इसका फायदा तभी मिलेगा जब वाहन चालक भी इन जगहों का इस्तेमाल पार्किंग, कट लेने या शॉर्टकट के लिए न करें। साइकिल और पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए रास्ते को अलग रखना सड़क सुरक्षा के लिए भी जरूरी है।

नोएडा और ईस्ट दिल्ली वालों को सबसे ज्यादा फायदा

Barapullah का सीधा फायदा मयूर विहार और ईस्ट दिल्ली के लोगों को मिलेगा, क्योंकि नया कॉरिडोर सीधे मयूर विहार फेज-1 से शुरू होता है। इसके अलावा नोएडा से आने वाले यात्रियों के लिए भी साउथ दिल्ली की तरफ जाने का रास्ता आसान हो सकता है।

खासकर वे लोग जिन्हें रोजाना AIIMS, लाजपत नगर, INA या साउथ दिल्ली के दूसरे हिस्सों की तरफ जाना पड़ता है, उनके लिए नया कनेक्शन उपयोगी साबित हो सकता है। त्रिलोकपुरी, पटपड़गंज और आसपास के इलाकों के लोगों को भी इस नए रास्ते का फायदा मिल सकता है। हालांकि किसी खास कॉलोनी से यात्रा का समय कितना घटेगा, यह उसके एंट्री पॉइंट और उस दिन के ट्रैफिक पर निर्भर करेगा।

सराय काले खां क्यों है इस पूरे नेटवर्क की अहम जगह?

सराय काले खां पहले से ही दिल्ली का एक बड़ा ट्रांसपोर्ट जंक्शन है। यहां रेलवे स्टेशन, बस सेवा और मेट्रो जैसी अलग-अलग परिवहन सुविधाएं मौजूद हैं। नए Barapullah कनेक्शन से इस इलाके का सड़क नेटवर्क और मजबूत होगा। मयूर विहार की तरफ से आने वाला ट्रैफिक सराय काले खां पहुंचकर मौजूदा बारापुला नेटवर्क से जुड़ सकेगा।

Barapullah

इससे आगे साउथ दिल्ली की दिशा में जाने वाले यात्रियों को एक लगातार जुड़ा हुआ रास्ता मिलेगा। इसका एक और फायदा यह है कि ईस्ट दिल्ली और साउथ दिल्ली के बीच यात्रा करने वालों को हर बार उन्हीं पुराने व्यस्त रास्तों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नया रास्ता ट्रैफिक को अलग-अलग दिशाओं में बांटने में मदद कर सकता है।

आखिर 10 साल क्यों लग गए?

Barapullah Phase 3 की कहानी सिर्फ एक नए फ्लाईओवर की कहानी नहीं है। इसका निर्माण करीब एक दशक तक अलग-अलग अड़चनों से गुजरता रहा। परियोजना को 2014 में मंजूरी मिली और 2015 में निर्माण शुरू हुआ था।

शुरुआत में इसे 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन जमीन अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरियों, निर्माण संबंधी चुनौतियों और दूसरी देरी के कारण इसकी समयसीमा बार-बार आगे बढ़ी। हाल के वर्षों में इस परियोजना की कई तय समयसीमाएं निकल गईं। जून 2026 की समयसीमा भी पूरी नहीं हो पाई थी। अब सितंबर के अंत में इसके खुलने की तैयारी की जा रही है।

बजट भी बढ़कर पहुंचा ₹1,635 करोड़

इतने लंबे समय तक चलने वाली किसी बड़ी सड़क परियोजना का खर्च भी बढ़ना तय माना जाता है। Barapullah Phase 3 के साथ भी यही हुआ। रिपोर्टों के अनुसार परियोजना की शुरुआती अनुमानित लागत करीब ₹1,260 करोड़ थी, जो बाद में बढ़कर लगभग ₹1,635 करोड़ हो गई। यानी शुरुआती अनुमान से करीब ₹375 करोड़ ज्यादा खर्च का अंतर सामने आया।

लागत बढ़ने के पीछे परियोजना में हुई देरी, काम के दौरान हुए बदलाव और निर्माण से जुड़ी दूसरी चुनौतियों को कारण बताया गया है। यह आंकड़ा पूरे प्रोजेक्ट की संशोधित लागत के रूप में रिपोर्ट किया गया है।

रोज सफर करने वालों के लिए क्या बदलेगा?

अगर आप रोज मयूर विहार से साउथ दिल्ली जाते हैं, तो सबसे बड़ा बदलाव आपके सफर के तरीके में होगा। पहले आपको ट्रैफिक के हिसाब से रिंग रोड, डीएनडी या दूसरे व्यस्त रास्तों का चुनाव करना पड़ सकता था। अब Barapullah आपके पास एक नया विकल्प लेकर आएगा। लेकिन शुरुआत के दिनों में थोड़ा धैर्य रखना भी जरूरी होगा।

नया रास्ता खुलते ही बहुत से लोग इसे आजमाने पहुंच सकते हैं। इससे शुरुआती दिनों में लूप, रैंप और एग्जिट के आसपास अचानक ट्रैफिक बढ़ भी सकता है। इसलिए पहले कुछ दिनों में रास्ते को समझने के लिए गूगल मैप या दूसरे नेविगेशन साधन की मदद लेना बेहतर रहेगा और सिर्फ इसलिए तेज गाड़ी नहीं चलानी चाहिए कि सड़क नई और सिग्नल-फ्री है।

क्या सच में हर सफर 15 मिनट में पूरा होगा?

यह सवाल सबसे जरूरी है। Barapullah के बारे में 15 मिनट की बात कई रिपोर्टों में सामने आई है, लेकिन इसे हर यात्री के लिए तय समय समझना सही नहीं होगा। यह समय मुख्य रूप से मयूर विहार/ईस्ट दिल्ली और AIIMS के बीच अपेक्षित यात्रा समय के संदर्भ में बताया गया है। आपकी शुरुआत की जगह, गाड़ी का प्रकार, एंट्री और एग्जिट, लूप का चुनाव और उस समय का ट्रैफिक वास्तविक यात्रा समय को बदल सकते हैं।

इसलिए असली फायदा कुछ दिन इस्तेमाल के बाद ही ज्यादा साफ दिखाई देगा। अगर नया कॉरिडोर अपने उद्देश्य के अनुसार ट्रैफिक को बांट पाता है, तो नियमित यात्रियों के लिए समय की अच्छी बचत हो सकती है।

पहली बार Barapullah इस्तेमाल कर रहे हैं तो इन बातों का रखें ध्यान

नया रास्ता खुलने के बाद सबसे जरूरी चीज होगी सही एंट्री और एग्जिट चुनना। Barapullah पर बने लूप और रैंप इसी काम के लिए हैं, इसलिए साइन बोर्ड को नजरअंदाज करके आखिरी समय पर लेन बदलने से बचें। सिग्नल-फ्री सड़क का मतलब यह नहीं है कि यहां जितनी तेज चाहें गाड़ी चला सकते हैं। लागू गति सीमा और ट्रैफिक नियमों का पालन करना जरूरी होगा।

यमुना के ऊपर से गुजरते हुए पुल देखने में अच्छा लग सकता है, लेकिन सड़क के बीच वाहन रोककर फोटो या वीडियो बनाना सुरक्षा के लिहाज से गलत होगा। अगर इस कॉरिडोर पर साइकिल ट्रैक और फुटपाथ अलग दिए गए हैं तो उन्हें वाहन चलाने के लिए इस्तेमाल न करें।

दिल्ली-NCR की सड़क कनेक्टिविटी में कितना फर्क पड़ेगा?

Barapullah Phase 3 के खुलने के बाद ईस्ट दिल्ली और साउथ दिल्ली के बीच सड़क कनेक्टिविटी में एक नया विकल्प जुड़ जाएगा। इसका असर सिर्फ एक रास्ते तक सीमित नहीं रहेगा, क्योंकि ट्रैफिक का दबाव अलग-अलग मार्गों में बंट सकता है। मयूर विहार से सराय काले खां का नया लिंक, पुराने बारापुला कॉरिडोर से जुड़कर करीब 9 किलोमीटर का लगातार नेटवर्क बनाता है।

Barapullah

इसी वजह से इसे दिल्ली के बड़े शहरी सड़क प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। अभी यह देखना बाकी है कि आम दिनों, बारिश, ऑफिस टाइम और त्योहारों के दौरान यह रास्ता कितना ट्रैफिक संभाल पाता है। लेकिन इतना जरूर है कि मयूर विहार और आसपास के इलाकों से साउथ दिल्ली जाने वालों के पास अब एक नया रास्ता होगा।

29 सितंबर के बाद क्या आपको यह रास्ता इस्तेमाल करना चाहिए?

अगर आपकी यात्रा का रास्ता मयूर विहार, सराय काले खां और आगे साउथ दिल्ली की तरफ पड़ता है, तो Barapullah को अपने रोज के रास्ते में शामिल करने से पहले एक-दो बार इसका रूट समझ लेना उपयोगी रहेगा।

शुरुआत में रास्ते के साइन बोर्ड, लूप और एग्जिट को ध्यान से देखें। कुछ दिनों में जब आपको सही एंट्री और एग्जिट समझ आ जाएगा, तब रोज के सफर में इसका इस्तेमाल काफी आसान हो सकता है। और सबसे जरूरी बात—15 मिनट का दावा सुनकर अपनी पूरी यात्रा का समय तय न करें। नया कॉरिडोर यात्रा को तेज बनाने के लिए बनाया गया है, लेकिन घर से ऑफिस तक का पूरा समय आपके शुरुआती और अंतिम रास्ते पर भी निर्भर करेगा।

दिल्ली वालों के लिए क्यों खास है Barapullah Phase 3?

दिल्ली में हर दिन लाखों लोग एक इलाके से दूसरे इलाके तक सिर्फ काम, पढ़ाई या जरूरी काम के लिए सफर करते हैं। ऐसे में सड़क पर बचाया गया 15–20 मिनट भी महीने भर में काफी बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।

Barapullah Phase 3 इसी रोजमर्रा की परेशानी को कम करने की कोशिश है। मयूर विहार से सराय काले खां का नया कनेक्शन, यमुना पर नया पुल, 9 लूप, साइकिल ट्रैक और पैदल रास्ते इसे सिर्फ एक सामान्य फ्लाईओवर से थोड़ा अलग बनाते हैं।

अब असली परीक्षा इसके जनता के लिए खुलने के बाद होगी। अगर ट्रैफिक सही तरीके से बंटता है और लोगों को सिग्नल और जाम से वास्तविक राहत मिलती है, तो ईस्ट दिल्ली से साउथ दिल्ली के रोजाना सफर का तरीका काफी बदल सकता है।

Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव

  • नए कॉरिडोर पर पहली बार जाते समय एंट्री, लूप और एग्जिट पहले से देख लें। खासकर सराय काले खां और मयूर विहार की तरफ सही दिशा वाले बोर्ड पर ध्यान दें।
  •  15 मिनट का समय अनुमानित है और आपकी शुरुआत की जगह व उस समय के ट्रैफिक पर निर्भर करेगा। ऑफिस के लिए निकलते समय थोड़ा अतिरिक्त समय रखना बेहतर रहेगा।
  • सिग्नल कम होने का मतलब यह नहीं कि सड़क रेसिंग के लिए है। तय गति सीमा, लेन और दूसरे ट्रैफिक नियमों का पालन जरूर करें।
  • यमुना के ऊपर से गुजरते समय नया पुल और आसपास का नजारा आकर्षक लग सकता है, लेकिन फोटो या वीडियो बनाने के लिए वाहन रोकना खुद के साथ दूसरे यात्रियों के लिए भी खतरा बन सकता है।
  • कॉरिडोर खुलने के बाद बहुत से लोग इसे पहली बार इस्तेमाल करेंगे। कुछ दिनों तक लूप और एग्जिट पर भीड़ हो सकती है, इसलिए जल्दबाजी के बजाय सही लेन में रहकर आराम से सफर करें।
Shivani Pal

Shivani Pal

About Author

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Culture Himachal Pradesh Travel

Chail- Amazing places to visit in Chail

चंडीगढ़ से महज 110 किमी की दूरी पर है खूबसूरत चैल हिल स्टेशन by Pardeep Kumar मैं प्रदीप कुमार फाइव
Destination Haryana Lifestyle Punjab Travel

Sukhna Lake-चंडीगढ़

Sukhna Lake-चंडीगढ़ की मशहूर झील by Pardeep Kumar दोस्तों, आज इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं चंडीगढ़ की