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Hawa Mahal: 2026 में टिकट, टाइमिंग और घूमने की पूरी जानकारी

Hawa Mahal

जयपुर घूमने की बात हो और Hawa Mahal का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। गुलाबी शहर की पहचान बन चुकी यह इमारत बाहर से जितनी खूबसूरत दिखती है, इसके पीछे की कहानी और बनावट उतनी ही दिलचस्प है।

सड़क के दूसरी तरफ खड़े होकर इसकी फोटो लेना तो लगभग हर जयपुर जाने वाले यात्री की लिस्ट में होता है, लेकिन अगर आप इसके अंदर जाकर देखें तो पता चलता है कि यह सिर्फ फोटो खिंचवाने वाली जगह नहीं है। इसके छोटे-छोटे झरोखे, पांच मंजिल की बनावट, संकरी ढलानें और पुराने जयपुर का ऊपर से दिखने वाला नजारा इसे खास बनाता है।

अगर आप 2026 में जयपुर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो Hawa Mahal की टिकट, टाइमिंग, अंदर जाने का रास्ता, फोटो लेने की सही जगह, आसपास घूमने वाली जगहें और खाने-पीने के विकल्प पहले से जान लेना आपके काम को काफी आसान कर सकता है।

खासकर अगर पहली बार जयपुर आ रहे हैं, तो Hawa Mahal को अकेले देखने के बजाय इसके आसपास के पुराने शहर को भी अपने प्लान में शामिल करें। इससे कुछ घंटों में जयपुर के इतिहास, बाजार, वास्तुकला और स्थानीय खाने का अच्छा अनुभव मिल सकता है

Hawa Mahal को जयपुर की पहचान क्यों कहा जाता है?

जयपुर की पुरानी गलियों में जैसे ही आप बड़ी चौपड़ की तरफ पहुंचते हैं, सामने गुलाबी और लाल रंग की एक अनोखी इमारत नजर आती है। यही Hawa Mahal है। इसकी सबसे खास बात इसका बाहरी हिस्सा है, जिसमें एक के ऊपर एक सैकड़ों छोटे झरोखे बने हुए हैं। दूर से देखने पर पूरी इमारत किसी बड़े मुकुट या मधुमक्खी के छत्ते जैसी दिखाई देती है।

यही अलग डिजाइन इसे बाकी ऐतिहासिक इमारतों से अलग बनाता है। आज Hawa Mahal जयपुर की सबसे ज्यादा फोटो खींची जाने वाली जगहों में से एक है। सोशल मीडिया पर जयपुर की फोटो की बात हो तो अक्सर सबसे पहले इसी इमारत की तस्वीर दिखाई देती है। लेकिन इसके पीछे सिर्फ खूबसूरत वास्तुकला नहीं, बल्कि उस समय की शाही जीवनशैली से जुड़ी एक खास वजह भी थी। यही वजह है कि यहां घूमते समय सिर्फ सामने से फोटो लेने के बजाय इसकी कहानी को समझना ज्यादा दिलचस्प हो जाता है।

Hawa Mahal

1799 में बना था Hawa Mahal

Hawa Mahal का निर्माण साल 1799 में जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था। इसके डिजाइन की जिम्मेदारी वास्तुकार लाल चंद उस्ताद को दी गई थी। कहा जाता है कि महाराजा सवाई प्रताप सिंह भगवान श्रीकृष्ण के भक्त थे और इसी वजह से इमारत के बाहरी हिस्से की बनावट में कृष्ण के मुकुट से प्रेरणा दिखाई देती है।

उस समय जयपुर एक महत्वपूर्ण राजघराना था और शाही परिवार की महिलाओं के लिए पर्दा प्रथा का पालन किया जाता था। राजपरिवार की महिलाएं आम लोगों के बीच जाकर बाजार या सड़कों पर होने वाले कार्यक्रम नहीं देख सकती थीं। ऐसे में Hawa Mahal की खिड़कियों और झरोखों को इस तरह बनाया गया कि वे बाहर की गतिविधियों को देख सकें, लेकिन बाहर से लोग उन्हें आसानी से न देख पाएं।

यानी उस समय यह इमारत सिर्फ सुंदरता के लिए नहीं बनाई गई थी। इसका डिजाइन शाही महिलाओं की जरूरतों और उस समय की सामाजिक व्यवस्था को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था।

953 झरोखे बनाते हैं इसे सबसे खास

Hawa Mahal की सबसे ज्यादा चर्चा इसके 953 झरोखों को लेकर होती है। इन छोटे-छोटे झरोखों पर बेहद बारीक जाली और सजावटी काम किया गया है। इतनी बड़ी संख्या में झरोखों को एक ही इमारत के बाहरी हिस्से पर देखना अपने आप में काफी अनोखा अनुभव है। इन झरोखों का काम सिर्फ बाहर देखने तक सीमित नहीं था।

इनके डिजाइन की वजह से हवा भी इमारत के अंदर आती थी। छोटे-छोटे रास्तों से हवा के आने-जाने की वजह से अंदर का वातावरण बाहर की गर्मी की तुलना में ज्यादा हवादार रहता था।

इसी कारण इसे Hawa Mahal नाम मिला और अंग्रेजी में इसे Palace of Winds भी कहा जाता है। आज जब आप इन झरोखों के पास खड़े होते हैं तो आसानी से समझ सकते हैं कि पुराने समय के वास्तुकार बिना आधुनिक एयर-कंडीशनर जैसी सुविधा के भी इमारत को मौसम के हिसाब से कैसे डिजाइन करते थे।

Hawa Mahal के अंदर जाने पर क्या देखने को मिलेगा?

बहुत से लोग सोचते हैं कि Hawa Mahal अंदर से भी किसी बड़े महल जैसा होगा, जिसमें विशाल कमरे और बड़े-बड़े दरबार होंगे। लेकिन यहां पहुंचने के बाद आपको कुछ अलग देखने को मिलता है। इसका मुख्य आकर्षण वास्तव में इसका सामने वाला सजावटी हिस्सा है और इमारत कई जगहों पर काफी संकरी है। अंदर पहुंचने के बाद आपको ऊपर की मंजिलों तक जाने के लिए पारंपरिक सीढ़ियों के बजाय ढलान जैसी संरचनाएं दिखाई देती हैं।

इन ढलानों को इस तरह बनाया गया था कि उस समय शाही महिलाएं पालकी के जरिए ऊपर तक आसानी से पहुंच सकें। आज इन्हीं ढलानों पर चलते हुए ऊपर जाना अपने आप में एक अलग अनुभव लगता है। ऊपर पहुंचने के बाद झरोखों से बाहर का नजारा भी काफी अच्छा दिखाई देता है। पुराने जयपुर की सड़कें, बाजार और आसपास की ऐतिहासिक इमारतें ऊपर से देखने पर शहर की पुरानी बनावट को समझने का मौका देती हैं।

पांच मंजिलों में छिपी है अलग-अलग पहचान

Hawa Mahal की पांच मंजिलों को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इनमें शरद मंदिर, रतन मंदिर, विचित्र मंदिर, प्रकाश मंदिर और हवा मंदिर प्रमुख हैं। हर मंजिल की अपनी बनावट और उपयोग से जुड़ी जानकारी मिलती है। रतन मंदिर में रंगीन कांच के काम की झलक देखने को मिलती है, जबकि विचित्र मंदिर को महाराजा के निजी पूजा स्थल से जोड़ा जाता है।

ऊपर की मंजिलों से हवा का बहाव और आसपास का दृश्य और ज्यादा महसूस होता है। अगर आप सिर्फ सामने से फोटो लेकर लौट जाएंगे तो इन चीजों को देखने का मौका छूट सकता है। इसीलिए जयपुर घूमते समय Hawa Mahal के लिए कम से कम 30 से 45 मिनट निकालना बेहतर रहेगा। इससे आप बाहर की फोटो के साथ अंदर की वास्तुकला को भी आराम से देख पाएंगे।

Hawa Mahal

2026 में Hawa Mahal की टिकट कितनी है?

अगर आप 2026 में Hawa Mahal घूमने जा रहे हैं, तो टिकट की कीमत पहले से जान लेना जरूरी है। दिए गए अपडेट के अनुसार राजस्थान के स्मारकों की टिकट दरों में 1 जनवरी 2026 से बदलाव किया गया है। भारतीय वयस्क पर्यटकों के लिए टिकट लगभग ₹100 प्रति व्यक्ति और भारतीय छात्रों के लिए पहचान पत्र के साथ लगभग ₹50 रखा गया है।

विदेशी पर्यटकों के लिए टिकट लगभग ₹600 और विदेशी छात्रों के लिए करीब ₹300 है। सात साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रवेश निशुल्क बताया गया है। हालांकि यात्रा से पहले आधिकारिक स्रोत से टिकट दर और प्रवेश नियम की दोबारा पुष्टि करना बेहतर रहेगा, क्योंकि स्मारकों की फीस और नियमों में बदलाव हो सकता है।

अगर आप जयपुर में सिर्फ Hawa Mahal ही नहीं, बल्कि आमेर फोर्ट, जंतर-मंतर, नाहरगढ़ और अल्बर्ट हॉल जैसी जगहें भी देखने वाले हैं, तो कंपोजिट टिकट का विकल्प भी देख सकते हैं। कई जगहों को एक साथ देखने वालों के लिए यह अलग-अलग टिकट लेने की तुलना में ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है।

Hawa Mahal घूमने की टाइमिंग क्या है?

Hawa Mahal आमतौर पर सुबह से शाम तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। दिए गए विवरण के अनुसार सुबह करीब 9 बजे से शाम 4:30 या 5 बजे तक इसे देखने का समय रहता है। हालांकि किसी भी ऐतिहासिक स्मारक पर जाने से पहले उसी दिन की आधिकारिक टाइमिंग जरूर चेक कर लेना चाहिए।

अगर आप भीड़ से बचना चाहते हैं तो सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहेगा। सुबह 9 से 11 बजे के बीच मौसम भी अपेक्षाकृत आरामदायक रहता है और फोटो के लिए रोशनी भी अच्छी मिल सकती है। गर्मियों में दोपहर के समय जयपुर की गर्मी तेज हो सकती है, इसलिए सुबह का समय ज्यादा आरामदायक रहेगा।

Hawa Mahal की सबसे अच्छी फोटो कहां से लें?

अगर आपकी पहली प्राथमिकता Hawa Mahal की पूरी फोटो लेना है, तो इसके सामने सड़क के दूसरी तरफ से फोटो लेना सबसे अच्छा विकल्प है। यहां से पूरी इमारत एक फ्रेम में आसानी से आ जाती है। महल के अंदर से पूरी बाहरी इमारत को एक साथ कैप्चर करना मुश्किल हो सकता है, इसलिए ज्यादातर आइकोनिक फोटो बाहर से ही ली जाती हैं। सुबह का समय इसके लिए खास तौर पर अच्छा माना जाता है।

इमारत का मुख्य हिस्सा पूर्व दिशा की तरफ है, इसलिए सुबह की धूप गुलाबी पत्थरों पर पड़ती है और पूरी बिल्डिंग का रंग काफी सुंदर दिखाई देता है। अगर आप कैमरा या मोबाइल से फोटो लेने वाले हैं तो सुबह की रोशनी में सामने से कुछ फोटो और आसपास की सड़क के साथ कुछ वाइड शॉट जरूर लें।

सुबह या शाम, Hawa Mahal कब ज्यादा खूबसूरत दिखता है?

अगर आप प्राकृतिक रोशनी में फोटो चाहते हैं तो सुबह का समय सबसे बेहतर विकल्प रहेगा। करीब 7 से 9 बजे के आसपास आसपास की सड़कें भी दिन के मुकाबले अपेक्षाकृत कम व्यस्त मिल सकती हैं और इमारत पर पड़ती रोशनी फोटो को अच्छा लुक देती है। शाम के समय इसका अनुभव थोड़ा अलग होता है।

सूरज ढलने के बाद आसपास की लाइट्स जलने लगती हैं और Hawa Mahal का रात वाला रूप सामने आता है। उस समय सड़क पर भीड़ ज्यादा हो सकती है, लेकिन स्ट्रीट लाइट्स के साथ ली गई तस्वीरों का अपना अलग आकर्षण होता है। अगर आपके पास समय है तो सुबह फोटो और दिन में अंदर घूमना सबसे अच्छा प्लान रहेगा। शाम को चाहें तो आसपास के बाजार और रूफटॉप कैफे एक्सप्लोर कर सकते हैं।

रूफटॉप कैफे से मिलेगा Hawa Mahal का शानदार व्यू

Hawa Mahal के सामने और आसपास कई रूफटॉप कैफे हैं, जहां बैठकर आप इस ऐतिहासिक इमारत को ऊपर से देख सकते हैं। सामने स्थित Wind View Cafe से महल का सीधा फ्रंट व्यू काफी अच्छा मिलता है। यहां चाय या स्नैक्स लेते हुए कुछ देर बैठकर बाहर का नजारा देखा जा सकता है। The Tattoo Cafe & Lounge भी आसपास का जाना-पहचाना विकल्प है। इसकी छत से Hawa Mahal का फ्रंट व्यू दिखाई देता है और शाम के समय यहां बैठने का अनुभव अलग हो सकता है।

अगर आप फोटो और वीडियो बनाने वाले हैं तो यहां से अलग एंगल मिल सकते हैं। JaiKutir Rooftop भी उन लोगों के लिए विकल्प हो सकता है जो थोड़ा आराम से बैठकर सामने का नजारा देखना चाहते हैं। हालांकि किसी भी कैफे में जाने से पहले वहां की मौजूदा कीमतें, खुलने का समय और बैठने की उपलब्धता चेक कर लेना अच्छा रहेगा।

Hawa Mahal तक कैसे पहुंचें?

Hawa Mahal जयपुर के पुराने शहर में बड़ी चौपड़ के पास स्थित है, इसलिए यहां पहुंचना काफी आसान है। जयपुर मेट्रो का इस्तेमाल करने वाले यात्री बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशन पर उतर सकते हैं। स्टेशन से Hawa Mahal बहुत ज्यादा दूर नहीं है और पैदल भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। अगर आप जयपुर के किसी दूसरे हिस्से से आ रहे हैं तो ऑटो, ई-रिक्शा या कैब का इस्तेमाल कर सकते हैं।

पुराने शहर में ट्रैफिक कई बार काफी ज्यादा हो जाता है, इसलिए बहुत पास की दूरी के लिए ई-रिक्शा या पैदल चलना ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है। जयपुर जंक्शन से Hawa Mahal की दूरी करीब 4 से 5 किलोमीटर के आसपास है, जबकि एयरपोर्ट से यह लगभग 13 किलोमीटर दूर है। ट्रैफिक के हिसाब से समय बदल सकता है, इसलिए अपनी यात्रा की योजना बनाते समय थोड़ा अतिरिक्त समय रखना बेहतर है।

Hawa Mahal के आसपास कौन-कौन सी जगहें देखें?

Hawa Mahal को देखने के बाद आपको तुरंत वापस होटल जाने की जरूरत नहीं है। इसके आसपास जयपुर की कई प्रमुख जगहें काफी पास हैं। सिटी पैलेस यहां से कुछ ही मिनट की दूरी पर है और इसे अपने प्लान में शामिल किया जा सकता है। जंतर-मंतर भी सिटी पैलेस के पास है।

यह यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और यहां मौजूद विशाल खगोलीय यंत्र पुराने समय की वैज्ञानिक समझ को दिखाते हैं। अगर आप इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखते हैं तो Hawa Mahal, सिटी पैलेस और जंतर-मंतर को एक ही रूट में देखना काफी अच्छा रहेगा। इसके बाद आप जोहरी बाजार और बापू बाजार की तरफ जा सकते हैं। यहां लाख की चूड़ियां, कुंदन ज्वेलरी, बंधेज कपड़े, हस्तशिल्प और जयपुर की दूसरी स्थानीय चीजें मिलती हैं।

जयपुर घूमना हो तो यहां का खाना जरूर चखें

Hawa Mahal और पुराने जयपुर की यात्रा खाने के बिना अधूरी लग सकती है। आसपास आपको कई स्थानीय दुकानों और खाने की जगहों पर राजस्थानी स्वाद चखने का मौका मिलेगा। प्याज की कचौरी जयपुर के लोकप्रिय नाश्तों में शामिल है और इसे गर्म चाय के साथ खाना काफी पसंद किया जाता है। अगर आपको लस्सी पसंद है तो एमआई रोड की प्रसिद्ध लस्सी भी ट्राई कर सकते हैं।

गाढ़ी लस्सी और ऊपर की मलाई वाला स्वाद जयपुर के खाने का एक अलग अनुभव देता है। वहीं जोहरी बाजार की तरफ लक्ष्मी मिष्ठान भंडार यानी LMB जैसे पुराने नाम राजस्थानी खाना और मिठाइयों के लिए जाने जाते हैं। अगर आप बजट में घूम रहे हैं तो आसपास की छोटी स्थानीय दुकानों में भी खाना खा सकते हैं। बस साफ-सफाई और भीड़ देखकर जगह चुनना बेहतर रहेगा।

अकेले घूमने वाले यात्रियों के लिए क्या ध्यान रखें?

जयपुर सामान्य तौर पर एक लोकप्रिय पर्यटन शहर है, लेकिन किसी भी बड़े शहर की तरह यहां घूमते समय सामान्य सावधानी रखना जरूरी है। अगर आप अकेले या सोलो ट्रैवल कर रहे हैं तो रात में अनजान और सुनसान गलियों में जाने से बचें। खासकर पुराने शहर के बाजारों से निकलने के बाद मुख्य सड़क और व्यस्त इलाकों में रहना बेहतर है।

कैब या ऑटो लेते समय किराया पहले तय कर लें और ऑनलाइन कैब का इस्तेमाल करते हैं तो यात्रा की जानकारी किसी भरोसेमंद व्यक्ति के साथ साझा कर सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति आपको मुफ्त गाइड, बहुत सस्ता सामान या किसी खास दुकान पर ले जाने के नाम पर रोकता है तो पहले पूरी जानकारी लें। Hawa Mahal के आसपास दिन के समय काफी पर्यटक रहते हैं, लेकिन शाम को भीड़ और ट्रैफिक दोनों बढ़ सकते हैं। इसलिए अपने पूरे दिन का प्लान पहले से बनाकर चलना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा।

Hawa Mahal घूमने में कितना समय लगेगा?

सिर्फ बाहर से Hawa Mahal देखना और फोटो लेना हो तो 15 से 20 मिनट भी काफी हो सकते हैं। लेकिन अगर आप टिकट लेकर अंदर जाना चाहते हैं, झरोखों को देखना चाहते हैं, ऊपर की मंजिलों तक जाना चाहते हैं और आराम से फोटो लेना चाहते हैं तो करीब 30 से 45 मिनट निकालना बेहतर रहेगा।

अगर आप इसके साथ सिटी पैलेस, जंतर-मंतर और बाजार भी देखना चाहते हैं तो कम से कम आधा दिन इस पूरे इलाके के लिए रखना अच्छा रहेगा। सुबह Hawa Mahal से शुरुआत करके फिर जंतर-मंतर और सिटी पैलेस देखा जा सकता है। इसके बाद दोपहर में खाना और शाम को बाजार घूमना एक आरामदायक प्लान हो सकता है।

Hawa Mahal

जयपुर के लिए एक आसान Hawa Mahal डे प्लान

अगर आपके पास जयपुर में सिर्फ एक दिन है तो सुबह जल्दी Hawa Mahal पहुंचना सबसे सही रहेगा। पहले बाहर से फोटो लें और फिर टिकट लेकर अंदर घूम लें। इसके बाद पैदल या छोटी सवारी से जंतर-मंतर और सिटी पैलेस की तरफ जा सकते हैं। दोपहर में पुराने शहर में राजस्थानी खाना खाएं और थोड़ी देर आराम करें।

शाम को जोहरी बाजार या बापू बाजार में खरीदारी कर सकते हैं। अगर आप रूफटॉप से Hawa Mahal देखना चाहते हैं तो शाम के समय किसी अच्छे कैफे में बैठकर चाय या स्नैक्स के साथ इसका नजारा ले सकते हैं। इस तरह बिना बहुत भागदौड़ के एक ही दिन में जयपुर के पुराने शहर का काफी अच्छा हिस्सा देखा जा सकता है।

Hawa Mahal सिर्फ फोटो स्पॉट नहीं है

आज के समय में Hawa Mahal को सोशल मीडिया की वजह से लोग अक्सर एक फोटो स्पॉट के रूप में देखते हैं। लेकिन असल में इसकी अहमियत इससे कहीं ज्यादा है। इसकी डिजाइन उस समय की वास्तुकला, मौसम की समझ और शाही महिलाओं की जीवनशैली से जुड़ी हुई है। 953 झरोखों वाली यह इमारत यह भी दिखाती है कि सैकड़ों साल पहले वास्तुकारों ने हवा और रोशनी जैसी प्राकृतिक चीजों को ध्यान में रखकर इमारतें बनाई थीं।

अंदर की ढलानें, पांच मंजिलों की बनावट और ऊपर से दिखने वाला पुराना जयपुर इसे सिर्फ एक सुंदर इमारत नहीं रहने देते। इसलिए अगली बार जब आप जयपुर जाएं और Hawa Mahal के सामने खड़े होकर फोटो लें, तो कुछ मिनट इसकी बनावट को ध्यान से देखने के लिए भी निकालें। तब शायद आपको यह जगह सिर्फ एक खूबसूरत गुलाबी इमारत नहीं, बल्कि जयपुर के इतिहास का एक अहम हिस्सा लगेगी।

Five Colors of Travel की ओर से 5 खास सुझाव

  • अगर आपको साफ और खूबसूरत फोटो चाहिए तो सुबह का समय चुनें। इस समय इमारत पर पड़ने वाली प्राकृतिक रोशनी इसके गुलाबी रंग और झरोखों को काफी अच्छी तरह दिखाती है और भीड़ भी दिन के मुकाबले कम मिल सकती है।
  • Hawa Mahal का असली अनुभव अंदर जाने के बाद मिलता है। थोड़ा समय निकालकर इसकी ढलानों, झरोखों और ऊपर की मंजिलों को देखें, क्योंकि इन्हीं चीजों से इसकी वास्तुकला और पुराने समय की सोच को समझने का मौका मिलता है।
  • Hawa Mahal के साथ सिटी पैलेस, जंतर-मंतर और पुराने जयपुर के बाजार आसानी से जोड़े जा सकते हैं। इससे बार-बार ट्रैफिक में समय खराब नहीं होगा और एक ही दिन में कई प्रमुख जगहें आराम से देख पाएंगे।
  • सामने से Hawa Mahal का व्यू लेने के लिए कई कैफे मिल जाएंगे, लेकिन सिर्फ फोटो के लिए बहुत महंगी जगह चुनने की जरूरत नहीं है। बैठने से पहले मेन्यू और कीमत देख लें और फिर अपनी सुविधा के हिसाब से जगह चुनें।
  • दिन में तापमान ज्यादा होने पर पैदल घूमना थका सकता है, इसलिए पानी की बोतल, आरामदायक जूते और हल्के कपड़े साथ रखें। अगर संभव हो तो Hawa Mahal और पुराने शहर की वॉक सुबह के समय रखें और दोपहर में थोड़ा आराम करें।

जयपुर घूमने की शुरुआत अगर किसी एक जगह से करनी हो तो Hawa Mahal एक शानदार विकल्प है। यहां आपको एक ही जगह पर इतिहास, वास्तुकला, पुराना जयपुर, बाजार और शानदार फोटो—सब कुछ मिल जाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे देखने के लिए पूरा दिन भी नहीं चाहिए। अगर आप सही समय पर पहुंचें और आसपास की जगहों को साथ में जोड़ लें तो कुछ घंटों में जयपुर का काफी खूबसूरत हिस्सा एक्सप्लोर किया जा सकता है।

तो अगली बार जब गुलाबी नगरी की यात्रा का प्लान बने, Hawa Mahal को सिर्फ फोटो के लिए नहीं, बल्कि उसकी पूरी कहानी और वास्तुकला को समझने के लिए जरूर देखें। यही छोटा-सा बदलाव आपकी जयपुर यात्रा को एक आम पर्यटन यात्रा से कहीं ज्यादा यादगार बना सकता है।

Shivani Pal

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