Unakoti: जहां जंगलों में छिपा है करोड़ों मूर्तियों का रहस्य
अगर आपको इतिहास, रहस्य और प्रकृति तीनों एक साथ देखना पसंद है, तो Tripura का Unakoti आपके लिए किसी खजाने से कम नहीं है। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच मौजूद यह जगह पहली नजर में ही लोगों को हैरान कर देती है। यहां विशाल चट्टानों पर बनी देवताओं की मूर्तियां सदियों से खड़ी हैं और आज भी उनके बनने का पूरा रहस्य कोई नहीं जानता।
इसी वजह से Unakoti को पूर्वोत्तर भारत के सबसे अनोखे पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। हर साल हजारों पर्यटक और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और इन विशाल पत्थर की मूर्तियों को देखकर हैरान रह जाते हैं।
Unakoti का मतलब क्या है?
उनाकोटी का अर्थ होता है “एक करोड़ में एक कम”। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां कुल 99,99,999 मूर्तियां मौजूद हैं। इसी वजह से इस जगह का नाम Unakoti पड़ा। स्थानीय कोकबोरोक भाषा में इसे “सुबराई खुंग” भी कहा जाता है।
हालांकि यहां मौजूद सभी मूर्तियों की गिनती कभी नहीं हो पाई, लेकिन पूरे परिसर में फैली विशाल पत्थर की कलाकृतियां इस कहानी को और भी दिलचस्प बना देती हैं। यही वजह है कि Unakoti आज इतिहास प्रेमियों और यात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है।
Unakoti कहां स्थित है?
Unakoti भारत के त्रिपुरा राज्य के उनाकोटी जिले में स्थित है। यह अगरतला से लगभग 175 किलोमीटर और धर्मनगर से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है।
चारों तरफ फैली हरियाली, छोटी पहाड़ियां और जंगल इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। जैसे-जैसे आप Unakoti के करीब पहुंचते हैं, वैसे-वैसे प्रकृति और इतिहास का अनोखा मेल देखने को मिलता है।
Unakoti की मूर्तियां किसने बनाईं?
उनाकोटी का सबसे बड़ा रहस्य यही है कि आखिर इतनी विशाल मूर्तियां किसने बनाईं। इतिहासकारों का मानना है कि इनका निर्माण 7वीं से 9वीं शताब्दी के बीच हुआ होगा।
कई विशेषज्ञ इसे तत्कालीन देव वंश के राजाओं की कला से जोड़ते हैं। इन मूर्तियों में हिंदू धार्मिक परंपरा और स्थानीय आदिवासी कला दोनों की झलक दिखाई देती है।
आज भी किसी के पास इस बात का पक्का जवाब नहीं है कि घने जंगलों के बीच इतनी बड़ी-बड़ी चट्टानों पर इतनी शानदार नक्काशी कैसे की गई होगी।
Unakoti से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध लोककथा
Unakoti की सबसे लोकप्रिय कहानी मूर्तिकार कल्लू कुमार से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि वह भगवान शिव के साथ कैलाश जाना चाहता था।
भगवान शिव ने उससे कहा कि अगर वह एक ही रात में एक करोड़ मूर्तियां बना देगा तो उसे अपने साथ ले जाएंगे। कल्लू कुमार पूरी रात मेहनत करता रहा, लेकिन सुबह होने तक वह एक मूर्ति कम बना पाया।
इसी वजह से भगवान शिव उसे वहीं छोड़कर चले गए और उस जगह का नाम उनाकोटी यानी “एक करोड़ में एक कम” पड़ गया।
भगवान शिव से जुड़ी दूसरी पौराणिक कथा
एक दूसरी मान्यता के अनुसार भगवान शिव एक करोड़ देवी-देवताओं के साथ काशी जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने इसी स्थान पर रात बिताई।
सुबह सिर्फ भगवान शिव समय पर जागे जबकि बाकी सभी देवी-देवता सोते रह गए। गुस्से में भगवान शिव ने उन्हें पत्थर बनने का श्राप दे दिया और अकेले काशी के लिए निकल गए। इसी कारण यहां मौजूद पत्थर की मूर्तियों को एक करोड़ देवी-देवताओं का रूप माना जाता है।
Unakoti में क्या-क्या देखा जा सकता है?
उनाकोटी का सबसे बड़ा आकर्षण यहां की विशाल पत्थर की मूर्तियां हैं। इनमें सबसे प्रसिद्ध Unakotishwar Kal Bhairav की लगभग 30 फीट ऊंची चट्टानी आकृति है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है।
इसके अलावा यहां भगवान गणेश की कई दुर्लभ मूर्तियां मौजूद हैं। कुछ मूर्तियां बैठी हुई मुद्रा में हैं तो कुछ खड़ी हुई दिखाई देती हैं।
परिसर में माता दुर्गा, भगवान विष्णु, नंदी, हनुमान और कई अन्य देवी-देवताओं की आकृतियां भी देखने को मिलती हैं। इन मूर्तियों की बारीक नक्काशी आज भी लोगों को आकर्षित करती है।
Unakoti घूमने का सबसे अच्छा समय
अगर आप Unakoti घूमने की योजना बना रहे हैं तो अक्टूबर से अप्रैल का समय सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और पूरा परिसर आराम से देखा जा सकता है।
अप्रैल में यहां अशोक अष्टमी मेला भी लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु और पर्यटक शामिल होते हैं। इस समय Unakoti का धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल देखने लायक होता है।
Unakoti तक कैसे पहुंचें?
उनाकोटी पहुंचने के लिए सबसे पहले त्रिपुरा की राजधानी अगरतला या धर्मनगर पहुंचा जा सकता है। अगरतला से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से यहां पहुंचा जा सकता है। वहीं धर्मनगर रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी स्टेशन माना जाता है, जो Unakoti से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित है।
रेलवे स्टेशन से टैक्सी, ऑटो और स्थानीय वाहनों के जरिए आसानी से इस ऐतिहासिक स्थल तक पहुंचा जा सकता है।
UNESCO की सूची में क्यों शामिल हुआ Unakoti?
अपनी अनोखी शिल्पकला और ऐतिहासिक महत्व की वजह से Unakoti को 2022 में UNESCO की Tentative World Heritage List में शामिल किया गया।
इसके बाद इस स्थल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) भी यहां संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है।
अगर भविष्य में इसे World Heritage Site का दर्जा मिलता है, तो उनाकोटी दुनिया के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।
क्या Unakoti सच में देखने लायक जगह है?
अगर आपको इतिहास, प्राचीन कला, रहस्य और प्रकृति पसंद है तो Unakoti जरूर आपकी यात्रा सूची में होना चाहिए।
घने जंगलों के बीच मौजूद विशाल पत्थर की मूर्तियां, उनसे जुड़ी रोचक कहानियां और शांत वातावरण इस जगह को बाकी पर्यटन स्थलों से बिल्कुल अलग बनाते हैं। यही वजह है कि एक बार यहां आने वाले लोग इस अनुभव को लंबे समय तक याद रखते हैं।
Five Colors of Travel की ओर से 5 खास सुझाव
- अप्रैल में लगने वाले अशोक अष्टमी मेले के दौरान जाएं तो धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल का अलग अनुभव मिलेगा।
- धर्मनगर रेलवे स्टेशन से स्थानीय टैक्सी लेकर आसानी से उनाकोटी पहुंचा जा सकता है।
- पूरे परिसर में काफी पैदल चलना पड़ता है, इसलिए आरामदायक जूते जरूर पहनें।
- कैमरा या मोबाइल पूरी तरह चार्ज करके जाएं क्योंकि यहां की विशाल मूर्तियां हर एंगल से शानदार दिखाई देती हैं।
- यह एक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है, इसलिए साफ-सफाई बनाए रखें और मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने से बचें।
Unakoti घूमने जाते समय अपने साथ पानी की बोतल, हल्का नाश्ता और मौसम के अनुसार कपड़े जरूर रखें। बारिश के मौसम में सीढ़ियां और रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं, इसलिए सावधानी से चलें। सुबह के समय यहां कम भीड़ रहती है और मूर्तियों को आराम से देखा जा सकता है। अगर आप इतिहास में रुचि रखते हैं, तो स्थानीय गाइड की मदद लें ताकि इस जगह से जुड़ी रोचक कहानियों और ऐतिहासिक जानकारी को और बेहतर तरीके से समझ सकें।





