Border Tourism: भारत-चीन सीमा के 13 गाँवों में अब घूम सकेंगे पर्यटक
क्या आपने कभी सोचा है कि जिन सीमावर्ती गाँवों तक कभी सिर्फ सेना और स्थानीय लोगों की ही पहुँच थी, वहाँ अब आम पर्यटक भी घूम सकेंगे? बर्फीले पहाड़, शांत घाटियाँ, अनोखी संस्कृति और देश की सरहद के बेहद करीब स्थित ये गाँव अब भारत के नए पर्यटन आकर्षण बनकर उभर रहे हैं। (Border Tourism)
साल 2026 में यह सपना सच हो गया है। भारत-चीन सीमा के 13 गाँव अब पर्यटकों के लिए खुल चुके हैं।
यह सब केंद्र सरकार के ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ (VVP) की बदौलत संभव हुआ है, जिसे 2023 में सीमावर्ती इलाकों के विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। यदि आप इस वर्ष किसी अलग और यादगार यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो ये Border Villages आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकते हैं।
कहाँ-कहाँ घूम सकते हैं आप?
इन 13 गाँवों को तीन राज्यों में शामिल किया गया है। हिमाचल प्रदेश में चितकुल, शिपकी ला पास, लेप्चा-ला, ग्यू, खाना, दुमटी और सांगला जैसे 7 गाँव शामिल हैं। उत्तराखंड में माणा, नीति, गुंजी और मलारी को इस योजना के तहत जोड़ा गया है। वहीं सिक्किम के लाचेन और लाचुंग भी उन सीमावर्ती गाँवों में शामिल हैं, जिन्हें अब पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है।
परमिट की व्यवस्था: कहाँ क्या जरूरी है?
इन गाँवों की यात्रा के लिए अलग-अलग राज्यों में अलग नियम लागू हैं।
हिमाचल प्रदेश
यहाँ के सातों गाँवों में जाने के लिए किसी जटिल परमिट प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं है। जून 2025 से लागू व्यवस्था के अनुसार पर्यटक पहचान पत्र, जैसे आधार कार्ड, के साथ यात्रा कर सकते हैं।
उत्तराखंड
माणा, नीति, गुंजी और मलारी जैसे गाँवों में जाने के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) आवश्यक है। यह परमिट जोशीमठ या धारचूला के एसडीएम कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है।
सिक्किम
लाचेन और लाचुंग की यात्रा के लिए पर्यटकों को गंगटोक के अधिकृत टूर ऑपरेटरों के माध्यम से परमिट बनवाना होता है।
इन गाँवों की खास बातें जो इन्हें बनाती हैं बेहद खास
शिपकी ला पास (हिमाचल प्रदेश)
1962 के बाद पहली बार आम पर्यटकों के लिए खोला गया यह इलाका आज Border Tourism का प्रमुख आकर्षण बन चुका है। यहाँ से सतलुज नदी को भारत में प्रवेश करते हुए देखा जा सकता है।
ग्यू गाँव (हिमाचल प्रदेश)
यह गाँव अपनी लगभग 500 वर्ष पुरानी प्राकृतिक रूप से संरक्षित ममी के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान इतिहास और रहस्य में रुचि रखने वाले यात्रियों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।
माणा गाँव (उत्तराखंड)
पहले इसे “भारत का आखिरी गाँव” कहा जाता था, लेकिन अब इसे “भारत का पहला गाँव” कहा जाता है। यहाँ स्थित प्रसिद्ध चाय की दुकान पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।
गुंजी (उत्तराखंड)
आदि कैलाश यात्रा का प्रमुख पड़ाव माना जाने वाला यह गाँव अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। इसे वर्ष 2024 में “बेस्ट टूरिज्म विलेज” का सम्मान भी मिल चुका है।
नीति वैली (उत्तराखंड)
यदि आप भीड़भाड़ से दूर शांत वातावरण की तलाश में हैं, तो नीति घाटी एक बेहतरीन विकल्प है। यहाँ के पारंपरिक पत्थर और लकड़ी से बने घर स्थानीय संस्कृति की झलक दिखाते हैं।
लाचेन और लाचुंग (सिक्किम)
सिक्किम के ये दोनों गाँव बर्फ से ढकी चोटियों, झरनों और खूबसूरत घाटियों के लिए प्रसिद्ध हैं। यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय संस्कृति यात्रियों को एक अलग अनुभव प्रदान करती है।
यात्रा की योजना बनाने से पहले जान लें ये महत्वपूर्ण बातें
इन सीमावर्ती गाँवों की यात्रा के लिए जून का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस समय अधिकांश क्षेत्रों में बर्फ पिघल चुकी होती है और रास्ते सामान्य रूप से खुले रहते हैं। मानसून शुरू होने से पहले का मौसम यात्रा के लिए अधिक अनुकूल रहता है।
हालाँकि, इन इलाकों में मोबाइल नेटवर्क कई स्थानों पर कमजोर मिल सकता है और एटीएम सुविधाएँ भी सीमित हो सकती हैं। इसलिए आवश्यक नकद राशि अपने साथ रखना बेहतर रहता है। इसके अलावा, जून के महीने में भी शाम और रात के समय तापमान 7 से 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है, इसलिए गर्म कपड़े साथ रखना जरूरी है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मिलेगा नया बढ़ावा
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का उद्देश्य केवल पर्यटन बढ़ाना नहीं है, बल्कि सीमावर्ती गाँवों में रहने वाले लोगों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा करना भी है। इसी दिशा में सरकार ने लगभग ₹4,800 करोड़ के निवेश की योजना बनाई है।
इस पहल के तहत सड़कों, इंटरनेट, बिजली, होमस्टे और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके और स्थानीय लोगों की आय में भी वृद्धि हो।
Five Colors of Travel की ओर से 5 खास सुझाव
- सीमावर्ती क्षेत्रों की यात्रा से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
- आवश्यक पहचान पत्र और परमिट दस्तावेजों की डिजिटल तथा प्रिंट कॉपी साथ रखें।
- ऊँचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा के दौरान पर्याप्त पानी पिएँ और शरीर को मौसम के अनुसार ढालने के लिए समय दें।
- स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक स्थलों का सम्मान करें तथा ग्रामीण जीवनशैली को समझने का प्रयास करें।
- प्लास्टिक कचरा न फैलाएँ और प्राकृतिक वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने में सहयोग करें।





