Bazar Destination Travel

जानिए असम क्यों कहलाता है भारत का हैंडलूम कैपिटल?

भारत में हैंडलूम सिर्फ कपड़ा बनाने का तरीका नहीं है, बल्कि यह लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी और पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ काम है। गांवों में आज भी कई घरों में करघा चलता है, जहां लोग हाथ से कपड़ा बुनते हैं। यह काम पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आ रहा है, इसलिए इसमें एक अलग ही अनुभव और हुनर नजर आता है। मशीन से बने कपड़े जल्दी बन जाते हैं, लेकिन हाथ से बने कपड़ों की बात ही अलग होती है। उनकी फिनिश, डिजाइन और मेहनत साफ दिखाई देती है। यही वजह है कि भारतीय (Assam) हैंडलूम को देश ही नहीं, विदेशों में भी खास पहचान मिली हुई है।

असम को क्यों कहा जाता है हैंडलूम कैपिटल

अगर सीधे तौर पर जवाब दिया जाए तो असम को भारत का हैंडलूम कैपिटल माना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह वहां का सुवालकुची गांव है, जो इस काम के लिए पूरे देश में जाना जाता है। इस गांव को “सिल्क विलेज” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां बड़े स्तर पर रेशम के कपड़े तैयार किए जाते हैं। खास बात यह है कि यहां बुनाई कोई छोटा काम नहीं है, बल्कि यह पूरे इलाके की पहचान बन चुका है। लोग इसे सिर्फ रोजगार नहीं मानते, बल्कि अपने काम पर गर्व भी करते हैं।

सुवालकुची में हर घर जुड़ा है इस काम से

सुवालकुची की सबसे खास बात यह है कि यहां बुनाई हर घर का हिस्सा है। यहां के ज्यादातर घरों में करघा देखने को मिल जाता है और परिवार के लगभग सभी लोग इस काम से जुड़े होते हैं। सुबह से लेकर शाम तक लोग मिलकर धागा तैयार करते हैं, रंगाई करते हैं और फिर कपड़ा बुनते हैं। यहां मुगा, एरी और पट सिल्क की बुनाई होती है, जो अपनी क्वालिटी के लिए काफी मशहूर है। इन कपड़ों की डिमांड सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी रहती है। यही कारण है कि यह छोटा सा गांव देश के हैंडलूम सेक्टर में इतना बड़ा नाम बन चुका है।

इस काम में दूसरे राज्यों का भी बड़ा नाम है

हालांकि असम को हैंडलूम कैपिटल कहा जाता है, लेकिन भारत के कई और राज्य भी इस काम में पीछे नहीं हैं। उत्तर प्रदेश का वाराणसी बनारसी साड़ियों के लिए जाना जाता है, जिनकी बुनाई और डिजाइन दुनिया भर में पसंद की जाती है। तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ी अपनी मजबूत बनावट और पारंपरिक लुक के लिए जानी जाती है। आंध्र प्रदेश की पोचमपल्ली और पश्चिम बंगाल की तांत साड़ी भी अपनी अलग पहचान रखती हैं। हर राज्य की अपनी तकनीक, डिजाइन और स्टाइल है, जो उसे दूसरों से अलग बनाता है।

हैंडलूम से कितने लोगों का घर चलता है

हैंडलूम का काम सिर्फ एक कला नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों के लिए रोज़गार का बड़ा जरिया है। खासकर गांवों में यह काम लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा है। बहुत से परिवार पूरी तरह इसी पर निर्भर होते हैं। महिलाओं के लिए भी यह काम काफी फायदेमंद है, क्योंकि वे घर पर रहकर ही बुनाई कर सकती हैं और अपनी आमदनी बढ़ा सकती हैं। इससे गांवों की अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलता है और लोग अपने इलाके में रहकर ही काम कर पाते हैं।

आज के समय में क्या दिक्कतें आ रही हैं?

आज के दौर में हैंडलूम इंडस्ट्री को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी दिक्कत मशीन से बनने वाले सस्ते कपड़ों की है, जो बाजार में आसानी से मिल जाते हैं। लोग सस्ते होने की वजह से मशीन वाले कपड़े ज्यादा खरीद लेते हैं, जिससे कारीगरों को उतना फायदा नहीं मिल पाता। कई बार उन्हें अपने काम का सही दाम भी नहीं मिलता। इसके अलावा नई पीढ़ी के लोग भी इस काम से दूर होते जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें इसमें उतनी कमाई नजर नहीं आती। फिर भी जो लोग इस काम से जुड़े हैं, वे इसे छोड़ना नहीं चाहते

सरकार और फैशन इंडस्ट्री का रोल

हैंडलूम को बचाने और आगे बढ़ाने के लिए सरकार और फैशन इंडस्ट्री दोनों ही कोशिश कर रहे हैं। “वोकल फॉर लोकल” जैसे अभियान से लोगों को अपने देश के उत्पाद खरीदने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके अलावा फैशन डिजाइनर भी अब हैंडलूम कपड़ों को अपने डिजाइन में शामिल कर रहे हैं। बड़े फैशन शो और ब्रांड्स में जब हैंडलूम नजर आता है, तो इसकी वैल्यू और बढ़ जाती है। इससे कारीगरों को नया बाजार मिलता है और उनके काम को पहचान मिलती है।

युवाओं में बढ़ रही हैंडलूम की डिमांड

आज के समय में युवा भी धीरे-धीरे हैंडलूम की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। पहले जहां लोग इसे सिर्फ पारंपरिक कपड़ों तक सीमित मानते थे, अब इसे रोज़मर्रा के फैशन में भी शामिल किया जा रहा है। कॉलेज, ऑफिस और खास मौकों पर लोग हैंडलूम कपड़े पहनना पसंद कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी ऐसे कपड़ों को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, जिससे इसका ट्रेंड और बढ़ रहा है।

अगर साफ शब्दों में कहा जाए तो असम को भारत का हैंडलूम कैपिटल माना जाता है, और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह सुवालकुची जैसा गांव है। लेकिन यह भी सच है कि पूरे देश में हैंडलूम का काम फैला हुआ है और हर राज्य इसमें अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। यह सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि लोगों की मेहनत और सालों पुरानी कला का नतीजा है, जिसे आज भी जिंदा रखा गया है।

admin

About Author

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Culture Himachal Pradesh Travel

Chail- Amazing places to visit in Chail

चंडीगढ़ से महज 110 किमी की दूरी पर है खूबसूरत चैल हिल स्टेशन by Pardeep Kumar मैं प्रदीप कुमार फाइव
Culture Destination Lifestyle Uttar Pradesh

Garh Mukteshwar

Garh Mukteshwar – गढ़मुक्तेश्वर: जहाँ कौरवों और पांडवों का पिंडदान हुआ था By Pardeep Kumar नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल