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नॉर्वे का Longyearbyen, जानिए क्यों इस शहर में मरने की अनुमति नहीं है?

दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जो अपने अनोखे नियमों और अलग जीवनशैली के कारण लोगों का ध्यान खींचती हैं। इन्हीं में से एक है नॉर्वे के आर्कटिक इलाके में स्थित Longyearbyen छोटा-सा शहर। यह शहर Svalbard द्वीपसमूह में बसा हुआ है और इसे दुनिया के सबसे उत्तरी बसे हुए इलाकों में गिना जाता है। यह जगह जितनी खूबसूरत है, उतनी ही रहस्यमयी भी।

नॉर्वे का Longyearbyen, जानिए क्यों इस शहर में मरने की अनुमति नहीं है?

यहां एक ऐसा नियम लागू है जो दुनिया में कहीं और देखने को नहीं मिलता-इस शहर में मरने की अनुमति नहीं है। सुनने में यह अजीब लगता है, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण और कठिन प्राकृतिक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं।

क्यों लागू किया गया ‘मरने की मनाही’ का नियम

इस शहर में यह नियम अचानक नहीं बना, बल्कि इसके पीछे एक गंभीर वैज्ञानिक कारण है। दरअसल यहां की जमीन पूरे साल जमी रहती है। इस जमी हुई जमीन को वैज्ञानिक भाषा में Permafrost कहा जाता है। जब किसी व्यक्ति को ऐसी जमीन में दफनाया जाता है तो शव सामान्य तरीके से गल-सड़ नहीं पाता। कई दशक पहले यहां के पुराने कब्रिस्तानों की जांच के दौरान वैज्ञानिकों को पता चला कि करीब सौ साल पहले दफनाए गए शव लगभग सुरक्षित अवस्था में मौजूद हैं।

इतना ही नहीं, उन शवों में पुराने वायरस और बैक्टीरिया भी जमे हुए पाए गए। वैज्ञानिकों को डर था कि अगर ये वायरस फिर सक्रिय हो गए तो खतरनाक बीमारियां फैल सकती हैं। इसी खतरे को देखते हुए 1950 के दशक में स्थानीय प्रशासन ने यहां दफनाने पर रोक लगा दी। अब यदि यहां कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाता है या उसकी हालत अंतिम अवस्था में पहुंच जाती है, तो उसे मुख्य भूमि Norway भेज दिया जाता है।

यहां जन्म लेने पर भी हैं कई सीमाएं है

दिलचस्प बात यह है कि इस शहर में सिर्फ मरने को लेकर ही नियम नहीं हैं, बल्कि यहां जन्म लेने को लेकर भी कुछ खास व्यवस्थाएं लागू हैं। दरअसल यह इलाका बेहद ठंडा और दूरदराज़ होने के कारण यहां बड़े अस्पताल और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं। इसी वजह से गर्भवती महिलाओं के लिए यहां बच्चे को जन्म देना सुरक्षित नहीं माना जाता। आम तौर पर गर्भावस्था के अंतिम हफ्तों से पहले ही महिलाओं को नॉर्वे के दूसरे बड़े शहरों में भेज दिया जाता है, जहां बेहतर अस्पताल और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होते हैं।

वहीं सुरक्षित माहौल में बच्चे का जन्म कराया जाता है। बच्चे के जन्म और शुरुआती देखभाल के बाद परिवार चाहें तो वापस इस शहर में लौट सकता है। इस व्यवस्था का मकसद मां और नवजात दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, क्योंकि इतनी कठोर जलवायु और सीमित मेडिकल सुविधाओं वाले इलाके में आपातकालीन इलाज कर पाना हमेशा आसान नहीं होता।

यहा कई महीनों तक नहीं निकलता सूरज

यह शहर उत्तरी ध्रुव के बेहद करीब स्थित है। इसी वजह से यहां साल के कुछ महीनों तक सूरज दिखाई ही नहीं देता। इस प्राकृतिक घटना को Polar Night कहा जाता है। आमतौर पर नवंबर से जनवरी के बीच लगभग दो महीने तक यहां लगातार अंधेरा बना रहता है। इस दौरान सूरज क्षितिज के ऊपर नहीं आता और पूरा इलाका धुंधली रोशनी या अंधेरे में डूबा रहता है। हालांकि गर्मियों में इसका बिल्कुल उल्टा दृश्य देखने को मिलता है। उस समय कई हफ्तों तक सूरज डूबता ही नहीं और दिन-रात लगातार रोशनी बनी रहती है। इस घटना को Midnight Sun कहा जाता है।

करीब दो हजार लोगों की छोटी-सी दुनिया

इस शहर की आबादी बहुत बड़ी नहीं है, बल्कि यहां करीब दो हजार के आसपास ही लोग रहते हैं। छोटी आबादी होने के बावजूद यहां का माहौल काफी अंतरराष्ट्रीय माना जाता है, क्योंकि अलग-अलग देशों से आए लोग यहां काम और रिसर्च के सिलसिले में रहते हैं। कोई यहां वैज्ञानिक परियोजनाओं पर काम कर रहा है, तो कोई खनन उद्योग से जुड़ा हुआ है, वहीं कुछ लोग पर्यटन से संबंधित गतिविधियों में लगे रहते हैं। दरअसल यह इलाका वैज्ञानिकों के लिए बेहद खास माना जाता है। दुनिया भर के शोधकर्ता यहां आकर आर्कटिक क्षेत्र के पर्यावरण, बर्फ की परतों, समुद्री जीवन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अहम अध्ययन करते हैं।

तेजी से बदलते मौसम और पिघलती बर्फ को समझने के लिए यह जगह एक तरह की प्राकृतिक प्रयोगशाला की तरह मानी जाती है। यही वजह है कि यहां समय-समय पर अलग-अलग देशों के वैज्ञानिक और शोध संस्थान अपने अध्ययन कार्यक्रम चलाते रहते हैं और इस छोटे से शहर को वैश्विक रिसर्च के नक्शे पर खास पहचान दिलाते हैं।

यहां बाहर निकलते समय साथ रखना पड़ता है हथियार

इस शहर की जिंदगी सुनने में जितनी रोमांचक और अनोखी लगती है, असल में उतनी आसान बिल्कुल भी नहीं है। यहां का मौसम बेहद कठोर है- साल के लंबे हिस्से में कड़ाके की ठंड पड़ती है, तेज़ बर्फीली हवाएं चलती हैं और तापमान कई बार शून्य से काफी नीचे चला जाता है। ऐसे हालात में रोज़मर्रा की ज़िंदगी जीना भी अपने आप में एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इसके अलावा यहां जंगली जानवरों का खतरा भी हमेशा बना रहता है। खास तौर पर Polar Bear इस इलाके के सबसे खतरनाक जानवरों में गिने जाते हैं।

आर्कटिक क्षेत्र होने की वजह से ये भालू कभी-कभी शहर के आसपास भी दिखाई दे जाते हैं। यही कारण है कि शहर की सीमा से बाहर जाते समय कई लोग अपनी सुरक्षा के लिए बंदूक या अन्य सुरक्षा उपकरण साथ रखते हैं। स्थानीय प्रशासन और गाइड भी लोगों को बार-बार सावधान करते हैं कि शहर से बाहर निकलते समय अकेले न जाएं और पूरी सुरक्षा के साथ ही यात्रा करें। इन सब चुनौतियों के बावजूद यहां रहने वाले लोग इस अनोखी जगह के प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण और अलग जीवनशैली के कारण इसे अपना घर मानते हैं।

पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र

अपने अनोखे नियमों और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण यह शहर दुनियाभर के पर्यटकों के लिए भी बेहद आकर्षक बन चुका है। हर साल हजारों लोग यहां आर्कटिक प्रकृति, बर्फीले पहाड़ों और अलग तरह की जीवनशैली को देखने के लिए आते हैं। यहां आने वाले पर्यटक ध्रुवीय रोशनी यानी Aurora Borealis का अद्भुत नजारा भी देख सकते हैं, जो रात के आकाश को हरे और बैंगनी रंगों से भर देता है।

प्रकृति के नियमों से चलने वाला शहर

इस तरह Longyearbyen दुनिया की उन दुर्लभ जगहों में से एक है जहां इंसानी जीवन पूरी तरह प्रकृति की परिस्थितियों के अनुसार ढल गया है। यहां मौत के लिए भी नियम हैं, जन्म के लिए भी व्यवस्था अलग है और दिन-रात का चक्र भी बाकी दुनिया से बिल्कुल अलग है। यही वजह है कि यह शहर दुनिया के सबसे अनोखे और रहस्यमयी स्थानों में गिना जाता है, जहां की हर बात लोगों को हैरान कर देती है

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