Garjiya Devi Temple – Jim Corbett, Ramnagar
Garjiya Devi Temple: राम नगर का गर्जिया मंदिर- यहाँ रूह का सुकून ही नहीं आँखों में ठहर जाने वाले ख़्वाब से नज़ारे भी हैं
by Pardeep Kumar
ज़र्रे-ज़र्रे में उसी का नूर है
झांक खुद में वो न तुझसे दूर है
इश्क़ है उससे तो सबसे इश्क़ कर
इस इबादत का यही दस्तूर है …..
यहाँ सिर्फ रूह का सुकून ही नहीं आँखों में ठहर जाने वाले ख़्वाब से नज़ारे भी हैं। हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के रामनगर में स्थित ऐसे ही एक खूबसूरत ‘गिरिजा देवी मंदिर’ की जो कोसी नदी के बीचो-बीच एक टापू पर बना है। इस मंदिर को स्थानीय भाषा में यहाँ के लोग गर्जिया मंदिर कहते हैं।

अगर ये कहा जाये हमारा देश मंदिरों का देश है तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। हर जगह के मंदिर अपने आप में एक अलग ही इतिहास और चमत्कार समेटे हुए हैं। पर देश में ऐसे बहुत ही कम मंदिर देखने को मिलेंगे जहाँ जाकर आप अपनी आस्था के साथ प्रकृति का खूब आनंद ले सकते हैं, यहाँ नदी है, सामने पहाड़ हैं और देश के पहले नेशनल पार्क की गोद में आप अपना बेहतरीन क्वालिटी टाइम भी बिता सकते हैं।


कैसे पहुंचे गर्जिया मंदिर
आपको बता दूँ रामनगर ट्रेन और बस सेवाओं के माध्यम से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। दिल्ली से मुरादाबाद तक तो हाईवे ही है। बाकी रास्ता भी ठीक ही है। यहां तक पहुंचने के लिए रामनगर से आप टैक्सी ले सकते हैं और अगर आपके पास अपना वाहन है तो आपको और भी सुविधा हो जाएगी, क्योंकि फिर आप अपनी मर्जी से रुकते-रूकाते खाते-पीते यात्रा का लुत्फ़ उठा सकते हैं। क्योंकि पहाड़ों की तलहटी में बसे ऐसे डेस्टिनेशन फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन विकल्प होते हैं।
हम दिल्ली से रामनगर एक काव्य विमोचन समारोह में आये थे। मेरे साथ मेरे दो प्रिय विद्यार्थी थे या यूँ कह लीजिए शानदार युवा कवि थे तो ज्यादा सही रहेगा। हम दिल्ली से तकरीबन सुबह नौ बजे निकले और रामनगर लगभग 3-4 बजे के करीब पहुँच गए थे। शायरी कविताओं और गीत-ग़ज़लों में 260 किलोमीटर कब निकल गए पता ही नहीं चला। और ऐसे साहित्यिक लोगों के साथ रास्ते में रूककर कड़क चाय पीने का जो मजा है मुझे लगता है वो अन्यत्र दुर्लभ है। Garjiya Devi Temple Ramnagar

गर्जिया मंदिर
कार्यक्रम अगले दिन था वो भी रात को, इसलिए शेड्यूल के हिसाब से हमनें उस दिन आराम किया और अगले दिन सुबह-सुबह निकल गए जिम कॉर्बेट एरिया में स्थित गर्जिया मंदिर की और। आप इस जगह को सिर्फ एक धार्मिक नजरिये से न देखकर एक पिकनिक स्पॉट भी कह सकते हैं, क्योंकि वहां जाने का हमारा उदेश्य भी प्राकृतिक नज़ारों का रसपान करना ही था। वैसे देखा जाये तो प्राकृतिक तौर पर यह जगह जैव विविधता लिए हुए नदियों और पहाड़ों के बीच कुदरत के नैसर्गिक सौंदर्य का एक बेहतरीन उदाहरण है। गर्जिया मंदिर तक पहुँचने के लिए आपको पहले पार्किंग में अपनी गाड़ी पार्क करनी पड़ेगी, फिर एक छोटे -से बाजार होते हुए एक ब्रिज क्रॉस करना पड़ता है। ब्रिज पार करने के बाद आप पहुँचते है बिलकुल मंदिर के करीब। मंदिर एक छोटे से पहाड़ की चोटी पर बना हुआ है जो दूर से देखने पर ही श्रद्धालुओं को इसके चमत्कारिक होने का अहसास कराता है।



गर्जिया मंदिर का चमत्कारिक इतिहास
मंदिर के साथ जो नदी बह रही है उसके किनारे लगभग एक-आध किलोमीटर तक छोटी-छोटी छप्परनुमा दुकानें बनी हुई हैं जहाँ आपको मंदिर के लिए प्रसाद-फूल वगैरह बेचते दुकानदार दिख जायेंगे। वहीं हमने देखा एक चाय वाला गर्मागर्म चाय बना रहा था और समोसे भी। बस खाने के शौक़ीन लोगों के लिए इतना दृश्य काफी है। चाय पीते हुए उत्सुकतावश हमने उस चायवाले से मंदिर के चमत्कारिक इतिहास के बारे में पूछा तो जैसे वह बस इसी मौके की तलाश में था बड़े गर्व से उसने मंदिर के बारे में कई बातें बताई। उसी से हमें पता चला कि आज गर्जिया मंदिर जिस टीले पर है, वह कोसी नदी की बाढ़ में कहीं ऊपरी क्षेत्र से बहकर आया था। भैरव देवता ने टीले को बहते हुए आता देखा | मंदिर को टीले के साथ बहते हुये आता देखकर भैरव देव ने कहा –
“थि रौ, बैणा थि रौ’’ मतलब कि ‘ठहरो, बहन ठहरो, मेरे साथ यही पर रहो, यहीं निवास करो। बस तभी से गर्जिया में गिरिजा देवी निवास कर रही हैं। उसी ने बताया कि गिरिजा देवी पार्वती का ही दूसरा नाम है।
दरअसल ये कहानियां सिर्फ कहानी नहीं है बल्कि लोगों की आस्था का विषय भी है।
क्योंकि ये कहानी सुनाते हुए चाय वाले के भक्ति भाव आसानी से पढ़े जा सकते थे। खैर समोसे और चाय निपटाने के बाद हम थोड़ा पैदल चलकर आगे निकले और एक सुन्दर-सी जगह देखकर नदी में नहाने उत्तर गए। नदी में पानी का स्तर कोई ज्यादा नहीं था। हाँ, पानी ठंडा जरूर था। लेकिन था बिल्कुल साफ़। बरसात के समय लगातार पानी बरसने से पत्थरों पर थोड़ी काई नज़र आ रही थी। नेचर लवर्स के लिए यह सच में यह एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। Garjiya Devi Temple Ramnagar



वैसे पूरा कार्बेट पार्क क्षेत्र विशाल घास के मैदानों में फैला हुआ है, जो कि पहाडियों से घिरा हुआ है। इन पहाड़ों से छोटी-छोटी नदियां निकल कर मैदानों की ओर बहती हैं। और यही नदिया बनाती हैं इस क्षेत्र को बेहद खूबसूरत और दर्शनीय भी। यहाँ सर्दियों में रातें ठंडी होती हैं लेकिन दिन धूपदार और गरम होते हैं। अन्य मैदानी इलाकों की तरह यहाँ जुलाई से सितंबर तक बारिश होती है।
हमनें दिनभर पूरे गिर्जिया क्षेत्र में प्रकृति के नज़ारों का खूब आनंद लिया और शाम को वापिस निकल गए रामनगर। इस तरह इस छोटी-सी यात्रा का यही समापन हुआ। लेकिन यहाँ से जाने के बाद भी ज़ेहन में चमत्कारिक कहानियां और उनके पात्र चलते रहे।





