Agra Fort – Best Tourist Place in Agra

Agra Fort-मुगलों की शान का प्रतीक-आगरा का किला
by Pardeep Kumar
दिल्ली से लगभग 232 किलो मीटर दूर आगरा शहर अपनी ऐतिहासिकता के कारण आज भी बेहद प्रासंगिक है। गंगा-जमुनी तहजीब की विरासत का यह शहर अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए दुनिया भर में जाना पहचाना जाता है। मंदिर की लुभावनी घंटियों और मस्जिदों की अजान से जैसे आगरा शहर हर रोज नींद से जागता हो। न केवल होली दिवाली बल्कि ईद और रमजान में भी यह शहर जश्न में डूब जाता है।
आगरा में दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक ताजमहल के अलावा आगरा का किला भव्यता का एक दूसरा नमूना है। इस किले की अद्भुत बनावट को देखकर आप बड़े बड़े किलों को भूल जायेंगे। जब तक की मुगलों ने अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित नही कर दी थी तब तक यानि के 1638 तक मुगल शासकों का मुख्य निवास यही किला था। इसे आगरा का लाल किला भी कहा जाता है क्योंकि यह दिल्ली के लाल किले की तरह ही लाल पत्थरों से बना है।

आगरा का किला यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है। यह वर्ल्ड फेमस ताजमहल से लगभग 2.5 किमी दूर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। अपनी बड़ी-बड़ी शक्तिशाली दीवारों के कारण हमेशा सुरक्षित रहा यह किला अपने वैभव शाली इतिहास के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
जानिए आगरा के किले का इतिहास
अगर इतिहास की बात करें तो 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई के बाद, मुगल शासक बाबर इसी किले में, इब्राहिम लोदी के महल में रहा। उनके उत्तराधिकारी हुमायूँ को 1530 में इसी किले में ताज पहनाया गया था। लेकिन हुमायूं 1540 में बिलग्राम में शेर शाह सूरी से हार गया था। तब यह किला 1555 तक शेरशाह सूरी के पास उसके अधिकार में रहा, जब तक की हुमायूँ ने इस पर दोबारा अधिकार न कर लिया। बाद में इसकी केंद्रीय स्थिति के महत्व को समझते हुए, अकबर ने इसे अपनी राजधानी बनाया और 1558 में फतेहपुर सीकरी से आगरा पहुंचे। इतिहासकार अबुल फजल ने एक जगह दर्ज किया कि यह एक ईंट का किला था जिसे ‘बादलगढ़’ के नाम से जाना जाता था। तब यह बहुत ही खंडहर हालत में था।
अकबर ने राजस्थान के धौलपुर जिले के बरौली क्षेत्र से लाल बलुआ पत्थर मंगवा कर इसका दोबारा नए सिरे से निर्माण करवाया था। उस समय के बेहतरीन आर्किटेक्ट्स ने इस किले की नींव रखी और इसे बाहरी सतहों पर बलुआ पत्थर के साथ आंतरिक कोर में ईंटों के साथ बनाया गया था।

लगभग 4,000 कारीगरों ने आठ वर्षों तक प्रतिदिन इस पर काम किया, और इसे 1573 में पूरा किया।

शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में खूबसूरत ताजमहल बनवाया था। अपने दादा के विपरीत, शाहजहाँ का झुकाव सफेद संगमरमर से बनी इमारतों की तरफ अधिक था। इतिहास के अनुसार अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, शाहजहाँ को उसके बेटे औरंगजेब ने किले में कैद कर दिया था।
18 वीं शताब्दी की शुरुआत में किले पर मराठा साम्राज्य द्वारा आक्रमण किया गया और कब्जा कर लिया गया। 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई में अब्दाली के द्वारा अपनी विनाशकारी हार के बाद, मराठा अगले दशक तक इस क्षेत्र से बाहर रहे। अंत में महादजी शिंदे ने 1785 में इस किले पर कब्जा कर लिया। इस तरह इस ऐतिहासिक किले पर शासकों की अदला-बदली चलती रही। यह किला 1857 के पहले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लड़ाई का प्रमुख स्थल रहा , जिसने बाद में भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का अंत किया।

क्या है इस किले में खास
जहांगीर महल: आगरा किले में जब आप अमर सिंह द्वार से प्रवेश करेंगे, तो जो भी आपको सबसे पहला महल नजर आएगा, वही जहांगीर महल है। यहीं से जहाँगीर का न्याय लोकप्रिय हुआ और उसने आम जन के लिए घण्टियों की श्रंखला बनाई, जिसे न्याय पाने वाला इसे बजा कर अपनी फरियाद कर सकता था।

जहांगीर महल के सामने ही आपको एक हौज़ दिखाई देगा। यह केवल एक ही पत्थर से बना टैंक है जो जहाँगीर ने बनवाया था और इसलिए इसे उन्हीं का नाम दिया गया है। यह टैंक मुख्य रूप से स्नान करने के लिए बनवाया गया था और यह लगभग 1.22 मीटर गहरा है।

दीवान ए आम और दीवान ए खास: दीवाने आम वह हॉल है जहाँ मुगल बादशाह आम जनता के साथ उनकी समस्याओं पर बात करते थे। और दीवाने खास वह हाल है जहां बादशाह अपने बेहद खास मंत्रियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर सलाह मशविरा और बातचीत किया करते थे।


आरामगाह : आगरा किले की सबसे महत्वपूर्ण संरचना आरामगाह है। यह खास महल का निर्माण मुगल वंश के सम्राट के विश्राम कक्ष के रूप में किया गया था। इस महल की सबसे अनोखी विशेषता इसमें संगमरमर के पत्थरों पर खूबसूरत पेंटिंग्स और नक्काशी की गई हैऔर इन्ही पेंटिंग के कारण ही इस महल को खास महल कहा जाता है।


थोड़ा आगे बढ़ने पर, आप नगीना मस्जिद और मीना मस्जिद, शाहजहानी महल और जनाना मीना बाजार, शीश महल जैसी बेहतरीन इमारत देखेंगे।
नगीना मस्जिद को शाहजहाँ ने एक ऐसे पवित्र स्थान के रूप में बनवाया था, जहाँ जाकर वह निजी रूप से पूजा-अर्चना कर सके।

आगरा के किले में आप जटिल नक्काशी और इसके निर्माण में उपयोग किए गए बेहद खास पत्थरों से अवश्य प्रभावित होंगे। इसके अलावा, मंडप की बालकनियों से यमुना नदी और ताजमहल के लुभावने दृश्य आपको बिल्कुल मंत्रमुग्ध कर देंगे।
कैसे पहुंचे आगरा
दिल्ली से आगरा की उड़ान एक घंटे से भी कम लंबी है। आगरा शहर से खेरिया हवाई अड्डा 13 किलो मीटर दूर है। यहां से आगरा सिटी जाने के लिए आप ऑटो या कैब बुक कर सकते हैं। आगरा दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-चेन्नई मार्ग पर स्थित है और पूरे भारत के अधिकांश शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। दिल्ली, जयपुर, ग्वालियर और झांसी जैसे शहरों से आगरा के लिए नियमित ट्रेनें हैं। आगरा देश के अन्य हिस्सों जैसे कोलकाता, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों से भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आगरा में पांच रेलवे स्टेशन हैं – आगरा कैंट स्टेशन (मुख्य स्टेशन), आगरा किला रेलवे स्टेशन, राजा की मंडी, आगरा शहर और ईदगाह रेलवे स्टेशन। ताजमहल और आगरा का किला आगरा कैंट रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूरी पर हैं और यहां तक जाने के लिए आप कोई टैक्सी, ऑटो रिक्शा भी किराए पर ले सकते हैं। सड़क मार्ग से आगरा NH2 और नए यमुना एक्सप्रेसवे द्वारा दिल्ली से सीधा जुड़ा हुआ है। इस एक्सप्रेस वे से आप आराम से लगभग तीन से चार घंटे में आगरा पहुंच सकते हैं। जयपुर NH11 भी आगरा से जुड़ा हुआ है और यह भी लगभग 4 घंटे की ड्राइव पर है।
आगरा का किला, जिसे “लाल-किला”, “फोर्ट रूज” या “किला-ए-अकबरी” के रूप में भी जाना जाता है, आगरा फोर्ट शहर के प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट्स में से मुख्य आकर्षण है। शक्ति और सौहार्द का प्रतीक, यह किला आज भी पूरी शान और गौरव के साथ सीना तान के खड़ा है।

किले में एंट्री
अमर सिंह गेट से ही आगरा किले में प्रवेश की अनुमति है। इस किले के कुछ हिस्से का इस्तेमाल भारतीय सेना करती है। उस हिस्से में सार्वजनिक पहुंच प्रतिबंधित कर दी गई है। तो आप उस क्षेत्र को नहीं देख सकते हैं। हालाँकि, यह किला बहुत विस्तृत है और इसमें कई इमारतें हैं जो देखने लायक हैं इसलिए आप उन्हें बहुत अच्छी तरह से देख सकते हैं। आगरा का किला देखने पर आपको दीवान-ए-आम या हॉल ऑफ पब्लिक ऑडियंस मिल जाएगी। कई खंभों वाला यह हॉल 1628 में शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया था।

थोड़ा आगे बढ़ने पर, आप नगीना मस्जिद और मीना मस्जिद, खास महल, शीश महल जैसे महलों सहित भव्य मस्जिदों में शाही मंडप देखेंगे। आगरा के किले में आप जटिल नक्काशी और इसके निर्माण में उपयोग किए गए बेहद खास पत्थरों से अवश्य प्रभावित होंगे। इसके अलावा, मंडप की बालकनियों से यमुना नदी और ताजमहल के लुभावने दृश्य आपको बिल्कुल मंत्रमुग्ध कर देंगे।
प्रवेश टिकट
आगरा के किले में प्रवेश के लिए सप्ताह के छह दिन विदेशी पर्यटकों से टिकट के 650/- लिए जाते हैं। वहीं भारतीय पर्यटक मात्र 50/- की राशि का टिकट लेकर किले में प्रवेश पा सकते हैं ।
आगरा जाने के लिए बेस्ट मौसम
वैसे तो यहां साल भर टूरिस्ट आते रहते हैं लेकिन फिर भी अक्टूबर से मार्च का महीना यहां आने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। सर्दियों के मौसम में खिली धूप में यहां घूमने का आनंद ही अलग होता है।
GLIMPSE OF AGRA FORT





by Pardeep Kumar
दिल्ली से लगभग 232 किलो मीटर दूर आगरा शहर अपनी ऐतिहासिकता के कारण आज भी बेहद प्रासंगिक है। गंगा-जमुनी तहजीब की विरासत का यह शहर अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए दुनिया भर में जाना पहचाना जाता है। मंदिर की लुभावनी घंटियों और मस्जिदों की अजान से जैसे आगरा शहर हर रोज नींद से जागता हो। न केवल होली दिवाली बल्कि ईद और रमजान में भी यह शहर जश्न में डूब जाता है। Agra fort
आगरा में दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक ताजमहल के अलावा आगरा का किला भव्यता का एक दूसरा नमूना है। इस किले की अद्भुत बनावट को देखकर आप बड़े बड़े किलों को भूल जायेंगे। जब तक की मुगलों ने अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित नही कर दी थी तब तक यानि के 1638 तक मुगल शासकों का मुख्य निवास यही किला था। इसे आगरा का लाल किला भी कहा जाता है क्योंकि यह दिल्ली के लाल किले की तरह ही लाल पत्थरों से बना है।

आगरा का किला यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है। यह वर्ल्ड फेमस ताजमहल से लगभग 2.5 किमी दूर उत्तर-पश्चिम में स्थित है। अपनी बड़ी-बड़ी शक्तिशाली दीवारों के कारण हमेशा सुरक्षित रहा यह किला अपने वैभव शाली इतिहास के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
जानिए आगरा के किले का इतिहास
अगर इतिहास की बात करें तो 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई के बाद, मुगल शासक बाबर इसी किले में, इब्राहिम लोदी के महल में रहा। उनके उत्तराधिकारी हुमायूँ को 1530 में इसी किले में ताज पहनाया गया था। लेकिन हुमायूं 1540 में बिलग्राम में शेर शाह सूरी से हार गया था। तब यह किला 1555 तक शेरशाह सूरी के पास उसके अधिकार में रहा, जब तक की हुमायूँ ने इस पर दोबारा अधिकार न कर लिया। बाद में इसकी केंद्रीय स्थिति के महत्व को समझते हुए, अकबर ने इसे अपनी राजधानी बनाया और 1558 में फतेहपुर सीकरी से आगरा पहुंचे। इतिहासकार अबुल फजल ने एक जगह दर्ज किया कि यह एक ईंट का किला था जिसे ‘बादलगढ़’ के नाम से जाना जाता था। तब यह बहुत ही खंडहर हालत में था।
अकबर ने राजस्थान के धौलपुर जिले के बरौली क्षेत्र से लाल बलुआ पत्थर मंगवा कर इसका दोबारा नए सिरे से निर्माण करवाया था। उस समय के बेहतरीन आर्किटेक्ट्स ने इस किले की नींव रखी और इसे बाहरी सतहों पर बलुआ पत्थर के साथ आंतरिक कोर में ईंटों के साथ बनाया गया था।

लगभग 4,000 कारीगरों ने आठ वर्षों तक प्रतिदिन इस पर काम किया, और इसे 1573 में पूरा किया।

शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में खूबसूरत ताजमहल बनवाया था। अपने दादा के विपरीत, शाहजहाँ का झुकाव सफेद संगमरमर से बनी इमारतों की तरफ अधिक था। इतिहास के अनुसार अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, शाहजहाँ को उसके बेटे औरंगजेब ने किले में कैद कर दिया था।
18 वीं शताब्दी की शुरुआत में किले पर मराठा साम्राज्य द्वारा आक्रमण किया गया और कब्जा कर लिया गया। 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई में अब्दाली के द्वारा अपनी विनाशकारी हार के बाद, मराठा अगले दशक तक इस क्षेत्र से बाहर रहे। अंत में महादजी शिंदे ने 1785 में इस किले पर कब्जा कर लिया। इस तरह इस ऐतिहासिक किले पर शासकों की अदला-बदली चलती रही। यह किला 1857 के पहले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लड़ाई का प्रमुख स्थल रहा , जिसने बाद में भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का अंत किया।

क्या है इस किले में खास
जहांगीर महल: आगरा किले में जब आप अमर सिंह द्वार से प्रवेश करेंगे, तो जो भी आपको सबसे पहला महल नजर आएगा, वही जहांगीर महल है। यहीं से जहाँगीर का न्याय लोकप्रिय हुआ और उसने आम जन के लिए घण्टियों की श्रंखला बनाई, जिसे न्याय पाने वाला इसे बजा कर अपनी फरियाद कर सकता था।

जहांगीर महल के सामने ही आपको एक हौज़ दिखाई देगा। यह केवल एक ही पत्थर से बना टैंक है जो जहाँगीर ने बनवाया था और इसलिए इसे उन्हीं का नाम दिया गया है। यह टैंक मुख्य रूप से स्नान करने के लिए बनवाया गया था और यह लगभग 1.22 मीटर गहरा है।

दीवान ए आम और दीवान ए खास: दीवाने आम वह हॉल है जहाँ मुगल बादशाह आम जनता के साथ उनकी समस्याओं पर बात करते थे। और दीवाने खास वह हाल है जहां बादशाह अपने बेहद खास मंत्रियों के साथ विभिन्न मुद्दों पर सलाह मशविरा और बातचीत किया करते थे।


आरामगाह : आगरा किले की सबसे महत्वपूर्ण संरचना आरामगाह है। यह खास महल का निर्माण मुगल वंश के सम्राट के विश्राम कक्ष के रूप में किया गया था। इस महल की सबसे अनोखी विशेषता इसमें संगमरमर के पत्थरों पर खूबसूरत पेंटिंग्स और नक्काशी की गई हैऔर इन्ही पेंटिंग के कारण ही इस महल को खास महल कहा जाता है।


थोड़ा आगे बढ़ने पर, आप नगीना मस्जिद और मीना मस्जिद, शाहजहानी महल और जनाना मीना बाजार, शीश महल जैसी बेहतरीन इमारत देखेंगे।
नगीना मस्जिद को शाहजहाँ ने एक ऐसे पवित्र स्थान के रूप में बनवाया था, जहाँ जाकर वह निजी रूप से पूजा-अर्चना कर सके।

आगरा के किले में आप जटिल नक्काशी और इसके निर्माण में उपयोग किए गए बेहद खास पत्थरों से अवश्य प्रभावित होंगे। इसके अलावा, मंडप की बालकनियों से यमुना नदी और ताजमहल के लुभावने दृश्य आपको बिल्कुल मंत्रमुग्ध कर देंगे।
कैसे पहुंचे आगरा
दिल्ली से आगरा की उड़ान एक घंटे से भी कम लंबी है। आगरा शहर से खेरिया हवाई अड्डा 13 किलो मीटर दूर है। यहां से आगरा सिटी जाने के लिए आप ऑटो या कैब बुक कर सकते हैं। आगरा दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-चेन्नई मार्ग पर स्थित है और पूरे भारत के अधिकांश शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। दिल्ली, जयपुर, ग्वालियर और झांसी जैसे शहरों से आगरा के लिए नियमित ट्रेनें हैं। आगरा देश के अन्य हिस्सों जैसे कोलकाता, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों से भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आगरा में पांच रेलवे स्टेशन हैं – आगरा कैंट स्टेशन (मुख्य स्टेशन), आगरा किला रेलवे स्टेशन, राजा की मंडी, आगरा शहर और ईदगाह रेलवे स्टेशन। ताजमहल और आगरा का किला आगरा कैंट रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूरी पर हैं और यहां तक जाने के लिए आप कोई टैक्सी, ऑटो रिक्शा भी किराए पर ले सकते हैं। सड़क मार्ग से आगरा NH2 और नए यमुना एक्सप्रेसवे द्वारा दिल्ली से सीधा जुड़ा हुआ है। इस एक्सप्रेस वे से आप आराम से लगभग तीन से चार घंटे में आगरा पहुंच सकते हैं। जयपुर NH11 भी आगरा से जुड़ा हुआ है और यह भी लगभग 4 घंटे की ड्राइव पर है।
आगरा का किला, जिसे “लाल-किला”, “फोर्ट रूज” या “किला-ए-अकबरी” के रूप में भी जाना जाता है, आगरा फोर्ट शहर के प्रमुख टूरिस्ट स्पॉट्स में से मुख्य आकर्षण है। शक्ति और सौहार्द का प्रतीक, यह किला आज भी पूरी शान और गौरव के साथ सीना तान के खड़ा है।

किले में एंट्री
अमर सिंह गेट से ही आगरा किले में प्रवेश की अनुमति है। इस किले के कुछ हिस्से का इस्तेमाल भारतीय सेना करती है। उस हिस्से में सार्वजनिक पहुंच प्रतिबंधित कर दी गई है। तो आप उस क्षेत्र को नहीं देख सकते हैं। हालाँकि, यह किला बहुत विस्तृत है और इसमें कई इमारतें हैं जो देखने लायक हैं इसलिए आप उन्हें बहुत अच्छी तरह से देख सकते हैं। आगरा का किला देखने पर आपको दीवान-ए-आम या हॉल ऑफ पब्लिक ऑडियंस मिल जाएगी। कई खंभों वाला यह हॉल 1628 में शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया था।

थोड़ा आगे बढ़ने पर, आप नगीना मस्जिद और मीना मस्जिद, खास महल, शीश महल जैसे महलों सहित भव्य मस्जिदों में शाही मंडप देखेंगे। आगरा के किले में आप जटिल नक्काशी और इसके निर्माण में उपयोग किए गए बेहद खास पत्थरों से अवश्य प्रभावित होंगे। इसके अलावा, मंडप की बालकनियों से यमुना नदी और ताजमहल के लुभावने दृश्य आपको बिल्कुल मंत्रमुग्ध कर देंगे।
प्रवेश टिकट
आगरा के किले में प्रवेश के लिए सप्ताह के छह दिन विदेशी पर्यटकों से टिकट के 650/- लिए जाते हैं। वहीं भारतीय पर्यटक मात्र 50/- की राशि का टिकट लेकर किले में प्रवेश पा सकते हैं ।
आगरा जाने के लिए बेस्ट मौसम
वैसे तो यहां साल भर टूरिस्ट आते रहते हैं लेकिन फिर भी अक्टूबर से मार्च का महीना यहां आने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। सर्दियों के मौसम में खिली धूप में यहां घूमने का आनंद ही अलग होता है।
GLIMPSE OF AGRA FORT












