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महाराष्ट्र का यह शहर क्यों कहलाता है Orange City? जानिए पूरी कहानी

भारत में जब “Orange City” का नाम लिया जाता है, तो सबसे पहले ज़िक्र होता है नागपुर का। महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित यह शहर अपने रसीले और उच्च गुणवत्ता वाले संतरों की वजह से देश-विदेश में खास पहचान रखता है, यही कारण है कि इसे भारत की “संतरा राजधानी” भी कहा जाता है। हालांकि नागपुर की पहचान केवल संतरे तक सीमित नहीं है। यह शहर ऐतिहासिक धरोहर, आध्यात्मिक महत्व, तेजी से बढ़ते उद्योग और विकसित होते पर्यटन के कारण भी सुर्खियों में रहता है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर क्यों नागपुर को ऑरेंज सिटी कहा जाता है और क्यों यह शहर हर यात्री की ट्रैवल लिस्ट में शामिल होना चाहिए।

क्यों कहा जाता है नागपुर को ऑरेंज सिटी?

यहां की जलवायु और यहां की काली उपजाऊ मिट्टी संतरे की खेती के लिए बहुत मुफीद मानी जाती है। विदर्भ इलाके में दूर-दूर तक फैले संतरे के बागान इस शहर की पहचान बन चुके हैं। यहां के किसान बरसों से संतरे की खेती करते आ रहे हैं, इसलिए उन्हें इसकी बारीकियों का अच्छा अनुभव है। हर साल यहां से बड़ी मात्रा में संतरे देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों तक भेजे जाते हैं, जिससे स्थानीय कारोबार और किसानों की आमदनी को मजबूती मिलती है।

महाराष्ट्र का यह शहर क्यों कहलाता है Orange City? जानिए पूरी कहानी

नागपुर ऑरेंज को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग भी मिल चुका है, जिसने इसकी अलग पहचान को आधिकारिक दर्जा दिया है। यहां के संतरे अपने मीठे स्वाद, पतले छिलके और भरपूर रस के लिए मशहूर हैं। सर्दियों में जब फसल पूरी तरह तैयार होती है, तो बाजारों और बागानों में हर तरफ नारंगी रंग की रौनक नजर आती है। यही खासियत नागपुर को “ऑरेंज सिटी” के नाम से मशहूर बनाती है।

नागपुर भारत का भौगोलिक केंद्र भी है

इसको देश का भौगोलिक केंद्र माना जाता है और यही वजह है कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी काफी खास है। शहर के बीच मौजूद Zero Mile Stone इस बात की निशानी है कि अंग्रेज़ों के दौर में पूरे हिंदुस्तान की दूरियां यहीं से नापी जाती थीं। उस समय यह जगह प्रशासनिक नजरिए से बेहद अहम मानी जाती थी, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों की दूरी तय करने का पैमाना यहीं से शुरू होता था।

आज भी यह ऐतिहासिक स्मारक नागपुर की पहचान का अहम हिस्सा है। यहां आने वाले सैलानी न सिर्फ इसकी बनावट और इतिहास के बारे में जानने के लिए रुकते हैं, बल्कि इसे देश के “मध्य बिंदु” के रूप में देखने का अलग ही अनुभव महसूस करते हैं। शहर की रफ्तार के बीच खड़ा यह पत्थर नागपुर की ऐतिहासिक विरासत की याद दिलाता है और बताता है कि यह शहर सिर्फ संतरे की वजह से ही नहीं, बल्कि अपने इतिहास के कारण भी खास मुकाम रखता है।

नागपुर के प्रमुख पर्यटन स्थल

दीक्षाभूमि

नागपुर में स्थित दीक्षाभूमि एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक बौद्ध स्मारक है, जहाँ 14 अक्टूबर 1956 को डॉ. बी.आर. आम्बेडकर ने अपने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी। इस महान घटना ने भारत में बौद्ध धर्म के पुनरुत्थान और “नवयान” आंदोलन की नींव रखी, जिससे यह स्थान सामाजिक समानता और मानवीय गरिमा का एक बड़ा केंद्र बन गया। यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा खोखला स्तूप बना हुआ है, जिसका निर्माण वास्तुकार शेओ दान मल ने करवाया था।

महाराष्ट्र का यह शहर क्यों कहलाता है Orange City? जानिए पूरी कहानी

हर साल ‘धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस’ पर यहाँ लाखों लोग श्रद्धा अर्पित करने आते हैं और यहाँ उस बोधि वृक्ष को भी देखा जा सकता है जिसे श्रीलंका से लाई गई शाखाओं से रोपा गया था। महाराष्ट्र सरकार द्वारा ‘ए-ग्रेड’ पर्यटन स्थल घोषित यह स्थान न केवल धार्मिक आस्था बल्कि इतिहास और वास्तुकला की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है।

अंबाझरी तालाब

अंबाझरी तालाब नागपुर का सबसे बड़ा जलाशय है, जिसे भोंसले राजाओं ने शहर में पानी की आपूर्ति के लिए विकसित किया था। वर्तमान में यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल है जहाँ लोग नौका विहार (boating) और स्वामी विवेकानंद के जीवन पर आधारित एक भव्य मल्टीमीडिया शो का आनंद लेते हैं। पारिस्थितिक रूप से, यहाँ 45 प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं, लेकिन यह तालाब प्रदूषण और जलकुंभी (water hyacinth) के तेजी से फैलने जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। हाल ही में, यहाँ स्थापित स्वामी विवेकानंद की मूर्ति विवाद का विषय बन गई है क्योंकि सिंचाई विभाग के अनुसार इसका निर्माण ‘बांध सुरक्षा अधिनियम’ (Dam Safety Act) का उल्लंघन करता है और इसे सितंबर 2023 में आई नागपुर की विनाशकारी बाढ़ का एक मुख्य कारण माना गया है। वर्तमान में, नागपुर नगर निगम (NMC) इस ऐतिहासिक तालाब के संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण के लिए कई सुधार कार्य और सफाई अभियान चला रहा है।

ताडोबा-अंधारी

ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व (TATR) महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थित है और यह राज्य का सबसे पुराना और सबसे बड़ा नेशनल पार्क है, जिसकी स्थापना 1955 में हुई थी। इस जंगल का नाम गोंड मुखिया ‘तारू’ और यहाँ बहने वाली ‘अंधारी’ नदी के नाम पर पड़ा है।

महाराष्ट्र का यह शहर क्यों कहलाता है Orange City? जानिए पूरी कहानी

लगभग 1727.59 वर्ग किलोमीटर में फैले इस रिजर्व में 90 से अधिक बाघ, तेंदुए, भालू और जंगली कुत्तों के साथ-साथ पक्षियों की 255 प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं। यहाँ बाघों को देखने के लिए मार्च से मई (गर्मी) का समय सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि गर्मी की वजह से जानवर पानी के स्रोतों के पास आते हैं, जबकि अक्टूबर से फरवरी तक का मौसम सैर-सपाटे के लिए बहुत आरामदायक होता है।

कैसे पहुंचे नागपुर?

नागपुर सड़क, रेल और हवाई तीनों रास्तों से देश के बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, इसलिए यहां पहुंचना काफी आसान माना जाता है। शहर से राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं, जिससे मुंबई, हैदराबाद, भोपाल और रायपुर जैसे शहरों तक सड़क मार्ग से आराम से सफर किया जा सकता है।

महाराष्ट्र का यह शहर क्यों कहलाता है Orange City? जानिए पूरी कहानी

हवाई यात्रा के लिए Dr. Babasaheb Ambedkar International Airport से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु सहित कई प्रमुख शहरों के लिए नियमित उड़ानें मिलती हैं। वहीं रेलवे नेटवर्क भी काफी मजबूत है, जिससे नागपुर मध्य भारत का एक अहम जंक्शन बन चुका है। देश के उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम को जोड़ने वाली कई प्रमुख ट्रेनें यहां से होकर गुजरती हैं, जो इसे यात्रियों के लिए सुविधाजनक और महत्वपूर्ण ट्रांजिट प्वाइंट बनाती हैं।

पर्यटन और व्यापार में बढ़ता महत्व

पिछले कुछ बरसों में नागपुर ने तेज़ी से औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। “मल्टी-मॉडल इंटरनेशनल कार्गो हब एंड एयरपोर्ट” यानी MIHAN परियोजना ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है। इस प्रोजेक्ट के तहत एयर कार्गो, वेयरहाउसिंग, आईटी पार्क और औद्योगिक इकाइयों के विकास ने व्यापारिक गतिविधियों को नई रफ्तार दी है। देश के बीचों-बीच होने की वजह से भी नागपुर माल ढुलाई और सप्लाई चेन के लिहाज़ से रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।

दूसरी ओर संतरे की खेती ने यहां के किसानों को मजबूत आर्थिक सहारा दिया है। नागपुर ऑरेंज की देश-विदेश में मांग होने से स्थानीय कृषि कारोबार को स्थिरता मिली है। साथ ही बढ़ते पर्यटन ने होटल, ट्रैवल, गाइड और छोटे व्यवसायों में रोज़गार के नए मौके पैदा किए हैं। इस तरह कृषि, उद्योग और पर्यटन — तीनों क्षेत्रों की तरक्की ने नागपुर को विकास की नई राह पर आगे बढ़ा दिया है।

नागपुर को “ऑरेंज सिटी” कहना महज़ एक नाम नहीं, बल्कि उसकी पूरी पहचान का इज़हार है। यहां संतरे की खुशबू से लेकर ऐतिहासिक विरासत, आध्यात्मिक अहमियत और तेज़ी से हो रहा आधुनिक विकास- सब कुछ एक साथ देखने को मिलता है। यही वजह है कि यह शहर सिर्फ खेती या कारोबार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अपने अलग रंग और रौनक से हर आने वाले का दिल जीत लेता है। अगर आप महाराष्ट्र घूमने की योजना बना रहे हैं, तो नागपुर को अपनी ट्रैवल लिस्ट में ज़रूर शामिल करें, क्योंकि यहां का स्वाद, तहज़ीब और घूमने-फिरने का अनुभव इसे देश के खास शहरों में शामिल करता है

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