बेंगलुरु-मंगलुरु Vande Bharat का ट्रायल शुरू, पूरी जानकारी
कर्नाटक के यात्रियों के लिए बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच Vande Bharat शुरू होने की खबर काफी खास है। खासकर इसलिए, क्योंकि इस ट्रेन को जिस रास्ते से गुजरना है, वह कोई सामान्य रेलवे रूट नहीं है। रास्ते में पश्चिमी घाट की पहाड़ियां, घने जंगल, कई सुरंगें और ऐसे हिस्से हैं, जहां ट्रेन की रफ्तार को काफी संभालकर चलाना पड़ता है। इसी मुश्किल रास्ते पर अब Vande Bharat का ट्रायल शुरू हो चुका है। सकलेशपुर से सुब्रमण्य रोड के बीच होने वाला यह ट्रायल इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यही हिस्सा इस पूरे रूट की सबसे बड़ी चुनौती है। रेलवे इस दौरान यह देख रहा है कि Vande Bharat घाट सेक्शन में किस तरह काम करती है और ढलान, मोड़, सुरंगों तथा पुलों वाले रास्ते पर ट्रेन की सुरक्षा कैसी रहती है। अगर सभी सुरक्षा जांच और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी हो जाती हैं, तो आने वाले समय में बेंगलुरु से मंगलुरु के बीच यात्रा करने वाले लोगों को एक तेज और आधुनिक रेल विकल्प मिल सकता है। अभी इस दूरी को तय करने में कई घंटे लग जाते हैं। प्रस्तावित Vande Bharat से सफर का समय काफी कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। शिराडी घाट में शुरू हुआ Vande Bharat का ट्रायल 12 अगस्त 2026 को सुबह करीब 6:42 बजे ट्रेन सकलेशपुर स्टेशन से रवाना हुई और करीब 10:55 बजे सुब्रमण्य रोड स्टेशन पहुंची। यह ट्रायल दक्षिण पश्चिम रेलवे के मैसूर डिवीजन की निगरानी में किया जा रहा है। रेलवे की तकनीकी टीम और RDSO के अधिकारी भी ट्रेन के प्रदर्शन पर नजर रख रहे हैं। यह केवल सामान्य ट्रायल नहीं है। रेलवे के लिए यह समझना जरूरी है कि Vande Bharat इस कठिन घाट सेक्शन में किस तरह व्यवहार करती है। मैदानी इलाकों में तेज गति से चलने वाली ट्रेन के लिए पहाड़ी रास्ता बिल्कुल अलग तरह की चुनौती लेकर आता है। सकलेशपुर से सुब्रमण्य रोड के बीच करीब 55 किलोमीटर का हिस्सा पश्चिमी घाट से होकर गुजरता है। इस पूरे हिस्से को रेलवे के सबसे कठिन सेक्शनों में गिना जाता है। यहां ट्रैक पर कई तीखे मोड़ हैं और जगह-जगह सुरंगें तथा पुल आते हैं। इसी वजह से Vande Bharat को इस सेक्शन में अपनी सामान्य रफ्तार से काफी कम गति पर चलना पड़ता है। अभी ट्रायल के दौरान करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी यात्रा इसी गति से होगी। धीमी गति मुख्य रूप से इस मुश्किल घाट सेक्शन के लिए रखी गई है। आखिर शिराडी घाट इतना मुश्किल क्यों है? बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच रेल लाइन का यह हिस्सा देखने में जितना खूबसूरत है, रेलवे के लिए उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। पश्चिमी घाट का इलाका ऊंचा-नीचा है और यहां ट्रैक को कई जगह पहाड़ों के बीच से निकालना पड़ा है। सकलेशपुर और सुब्रमण्य रोड के बीच लगभग 55 किलोमीटर के रास्ते में 57 सुरंगें और 226 पुल बताए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर पुलों की संख्या इससे ज्यादा भी बताई जाती है। इसके अलावा रास्ते में करीब 108 तीखे मोड़ आते हैं। सबसे बड़ी चुनौती यहां का gradient यानी ढलान है। इस सेक्शन में लगभग 1-in-50 का gradient बताया गया है। आसान भाषा में समझें, तो ट्रैक की ऊंचाई कम दूरी में तेजी से बदलती है। ऐसे रास्ते पर ट्रेन चलाते समय केवल इंजन की ताकत काफी नहीं होती। ट्रेन को चढ़ाई पर नियंत्रित करना, ढलान पर गति बनाए रखना और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित तरीके से रोकना भी उतना ही जरूरी होता है। यही कारण है कि इस रूट पर चलने वाली ट्रेनों के लिए रेलवे को अलग तरह की तैयारी करनी पड़ती है। 57 सुरंगों से होकर गुजरेगी ट्रेन इस रूट की सबसे खास चीजों में इसकी सुरंगें शामिल हैं। केवल 55 किलोमीटर के हिस्से में इतनी ज्यादा सुरंगें होना बताता है कि पश्चिमी घाट में रेलवे लाइन बनाना कितना मुश्किल रहा होगा। जब Vande Bharat इन सुरंगों से होकर गुजरेगी, तो यात्रियों के लिए यह सफर अपने आप में अलग अनुभव होगा। कुछ जगह ट्रेन घने जंगलों के बीच से गुजरेगी, तो कुछ हिस्सों में लगातार सुरंगें आती रहेंगी। मानसून के दौरान यह पूरा इलाका और भी खूबसूरत हो जाता है। पहाड़ों पर हरियाली बढ़ जाती है, छोटे-बड़े झरने दिखाई देने लगते हैं और कई जगह बादल पहाड़ियों के आसपास ही नजर आते हैं। हालांकि यात्रियों के लिए यह नजारा जितना अच्छा होगा, रेलवे के लिए मौसम उतना ही महत्वपूर्ण होगा। भारी बारिश के दौरान ट्रैक, पहाड़ी ढलानों और पुलों की निगरानी ज्यादा जरूरी हो जाती है। इसीलिए Vande Bharat को इस रूट पर शुरू करने से पहले रेलवे सुरक्षा से जुड़ी हर चीज को ध्यान से देख रहा है। Vande Bharat में क्यों जरूरी है Automatic Emergency Braking? इस ट्रायल की खास बात ट्रेन का Automatic Emergency Braking यानी AEB सिस्टम है। यह सिस्टम ट्रेन की सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद करता है। घाट सेक्शन में ट्रेन की गति पर लगातार नजर रखना जरूरी होता है। अगर किसी स्थिति में ट्रेन निर्धारित गति से ज्यादा तेज होने लगे, तो Automatic Emergency Braking सिस्टम जरूरत पड़ने पर ब्रेक लगाने में मदद कर सकता है। इस तरह की तकनीक खास तौर पर ऐसे रूट पर महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां चढ़ाई और ढलान लगातार बदलते रहते हैं। सामान्य ट्रेनों को ऐसे कठिन घाट सेक्शन में अतिरिक्त मदद की जरूरत पड़ सकती है। कई बार ट्रेन को खींचने या नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त इंजन यानी banker locomotive का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन Vande Bharat का डिजाइन दूसरी तरह का है। इसमें अलग से banker locomotive जोड़ने की प्रक्रिया आसान नहीं होती, क्योंकि ट्रेन के आगे और पीछे का aerodynamic हिस्सा इसके डिजाइन का महत्वपूर्ण भाग है। इसी वजह से इस ट्रेन को बिना बाहरी banker इंजन की मदद के घाट सेक्शन में चलाने की क्षमता को लेकर खास परीक्षण किया जा रहा है। बेंगलुरु से मंगलुरु का सफर कितना कम हो सकता है? अभी बेंगलुरु से मंगलुरु जाने वाले यात्रियों के पास बस, कार और सामान्य ट्रेन जैसे कई विकल्प हैं। सड़क से लंबी दूरी और पहाड़ी रास्ते की वजह से