Offbeat Hill Station: भारत की 6 शांत पहाड़ी जगहें
हर बार पहाड़ों पर घूमने का प्लान बनाते ही हमारे दिमाग में शिमला, मनाली या मसूरी जैसे नाम सबसे पहले आते हैं। लेकिन छुट्टियों के दिनों में यही जगहें कई बार इतनी भीड़ से भर जाती हैं कि पहाड़ों का सुकून पीछे छूट जाता है। लंबा ट्रैफिक, गाड़ियों के हॉर्न और हर तरफ सैलानियों की भीड़ के बीच छुट्टी मनाने का मजा थोड़ा कम हो जाता है। अगर आप इस बार कुछ अलग देखना चाहते हैं, तो भारत के कुछ ऐसे Hill Station भी हैं जो अपनी खूबसूरती के साथ-साथ शांति के लिए भी जाने जाते हैं।
इन जगहों की खास बात यह है कि यहां आपको सिर्फ पहाड़ देखने नहीं मिलते, बल्कि जंगल, झीलें, पुराने रास्ते, स्थानीय संस्कृति और प्रकृति के बीच समय बिताने का मौका भी मिलता है। कुछ जगहों पर बर्फबारी आपका इंतजार करती है, तो कहीं चाय और कॉफी के बागानों के बीच घूमने का मजा है। कुछ Offbeat Hill Station ऐसे हैं जहां गाड़ियों का शोर तक सुनाई नहीं देता, तो कुछ जगहें अपनी जनजातीय संस्कृति और पुराने इतिहास के लिए खास हैं। अगर आपकी अगली छुट्टी का प्लान भी किसी शांत Hill Station का है, तो चोपटा से लेकर लैंडौर तक ये 6 जगहें आपकी पसंद की लिस्ट में जरूर होनी चाहिए।
1. चोपटा – पहाड़ों के बीच मिनी स्विट्जरलैंड जैसा एहसास
उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में बसा चोपटा करीब 2,608 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक बेहद खूबसूरत और शांत Hill Station है। यहां की सबसे खास चीज हैं इसके मखमली घास के मैदान, जिन्हें स्थानीय भाषा में बुग्याल कहा जाता है। चारों तरफ ऊंचे पहाड़, हरे मैदान और बर्फ से ढकी चोटियां चोपटा को बाकी जगहों से अलग बनाती हैं।
इसी खूबसूरती की वजह से इसे उत्तराखंड का ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ भी कहा जाता है। चोपटा को Offbeat Hill Station पसंद करने वाले यात्रियों के लिए खास माना जा सकता है, क्योंकि यहां प्रकृति के बीच काफी शांत माहौल मिलता है। चोपटा पंच केदार क्षेत्र के बीच भी खास जगह रखता है। इसके बाईं ओर केदारनाथ और मदमहेश्वर मंदिर हैं, दाईं ओर रुद्रनाथ और कल्पेश्वर हैं और ठीक ऊपर तुंगनाथ मंदिर स्थित है।
चोपटा आने वाले यात्रियों के लिए तुंगनाथ मंदिर एक खास आकर्षण है। इसे दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। चोपटा से तुंगनाथ तक का रास्ता ट्रैकिंग पसंद करने वालों के बीच काफी लोकप्रिय है। अगर आपको पहाड़ों पर पैदल चलना और रास्ते में बदलते नजारे देखना पसंद है, तो यह अनुभव आपके लिए खास हो सकता है। तुंगनाथ से आगे चंद्रशिला पीक भी जा सकते हैं।
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करीब 4,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चंद्रशिला चंद्रनाथ पर्वत का शिखर है। तुंगनाथ मंदिर से करीब 1.5 किलोमीटर की चढ़ाई के बाद यहां पहुंचा जा सकता है। ऊपर पहुंचने के बाद नंदा देवी, चौखंबा, बांदरपूंछ और केदार पीक का 360 डिग्री नजारा दिखाई देता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार रावण पर विजय पाने के बाद भगवान राम ने यहां ध्यान लगाया था।
चोपटा सिर्फ ट्रैकिंग के लिए ही खास नहीं है। यह जगह पक्षी देखने वालों के लिए भी शानदार है। यहां 240 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं। हिमालयन मोनाल, स्कारलेट फिंच और हिल पार्ट्रिज जैसे पक्षी यहां देखे जा सकते हैं। दुगलबिट्टा, मक्कूमठ और मंडल गांव बर्ड वॉचिंग के प्रमुख स्थान हैं। चोपटा से करीब 7 किलोमीटर दूर कांचुला कोरक कस्तूरी मृग अभयारण्य भी है।
करीब 6 वर्ग किलोमीटर में फैला यह घना जंगल दुर्लभ कस्तूरी मृग के लिए जाना जाता है। इसके अलावा चोपटा से करीब 50 किलोमीटर दूर देवरियाताल भी है। करीब 2,438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह झील पहाड़ियों और जंगलों के बीच ट्रैकिंग के लिए प्रसिद्ध है। चोपटा पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जौली ग्रांट, देहरादून है, जो करीब 221 किलोमीटर दूर है।
नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जो करीब 202 किलोमीटर दूर है। ऋषिकेश, रुद्रप्रयाग और ऊखीमठ से चोपटा के लिए टैक्सी और बसें मिलती हैं। नवंबर से मई तक का समय यहां घूमने के लिए अच्छा माना जाता है। दिसंबर और जनवरी में बर्फबारी के बीच ट्रैकिंग का अनुभव और भी खास हो जाता है।
2. माथेरान – जहां गाड़ियों का शोर नहीं
महाराष्ट्र में मुंबई से 80 किलोमीटर से ज्यादा दूर स्थित माथेरान एक ऐसा Hill Station है जो बाकी पहाड़ी जगहों से बिल्कुल अलग है। इसे एशिया का इकलौता ऑटोमोबाइल-फ्री Hill Station बताया जाता है। यानी यहां गाड़ियों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक है। माथेरान जाने वाले यात्रियों को यहां सबसे पहले जो चीज महसूस होती है, वह है शांति। आम पहाड़ी शहरों में जहां गाड़ियों और हॉर्न का शोर सुनाई देता है, वहीं माथेरान में ऐसा माहौल नहीं है।
यहां आप पैदल, घोड़े की सवारी या तांगे से आसपास की जगहें देख सकते हैं। माथेरान का नाम भी अपने आप में खास है। इसका शाब्दिक अर्थ ‘पहाड़ के माथे पर जंगल’ बताया जाता है। यहां पक्की सड़कों की जगह लाल मिट्टी से बने रास्ते और पगडंडियां हैं। इसी वजह से यह जगह एक अलग तरह का Offbeat Hill Station अनुभव देती है।
माथेरान में कोरोनेशन पॉइंट से चंदेरी गुफाओं, म्हैसमाल, गादेश्वर झील, प्रबलगढ़ और कलावंती दुर्ग के दृश्य दिखाई देते हैं। वहीं लुईसा पॉइंट से मोरबे बांध, इरशालगढ़ किला, इको पॉइंट और किंग जॉर्ज पॉइंट जैसे नजारे देखने को मिलते हैं। शार्लोट लेक माथेरान की एक और खास जगह है। लंबे पैदल रास्तों से घूमने के बाद इस ठंडी झील के पास बैठना काफी सुकून देता है। पहाड़ियों के पीछे ढलते सूरज का नजारा यहां का अनुभव और खूबसूरत बना देता है।
इको पॉइंट भी यहां घूमने वालों के बीच खास है। पहाड़ों से घिरी इस जगह पर अपनी आवाज की गूंज सुनना बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए मजेदार अनुभव है। माथेरान घूमने जा रहे हैं तो आरामदायक वॉकिंग शूज जरूर पहनें। यहां के रास्ते कच्चे हैं और काफी जगह पैदल चलना पड़ता है। टॉर्च, पानी की बोतल और एनर्जी बार भी साथ रखना अच्छा रहेगा, क्योंकि जंगल के रास्तों पर दुकानें हर जगह आसानी से नहीं मिलतीं।
3. जीरो वैली – पहाड़ों के साथ अलग संस्कृति का अनुभव
अरुणाचल प्रदेश के निचले सुबनसिरी जिले में स्थित जीरो वैली एक शांत और हरी-भरी जगह है। समुद्र तल से करीब 1,688 मीटर से 2,438 मीटर की ऊंचाई पर फैली यह घाटी अपने चावल के खेतों, नीले चीड़ के जंगलों और अपतानी जनजाति की संस्कृति के लिए जानी जाती है। अगर आप ऐसा Hill Station ढूंढ रहे हैं जहां पहाड़ों के साथ स्थानीय जीवन और संस्कृति को भी करीब से देखने का मौका मिले, तो जीरो वैली आपके लिए खास हो सकती है।
यह एक ऐसा Offbeat Hill Station है जहां घूमना सिर्फ प्राकृतिक नजारों तक सीमित नहीं रहता। जीरो वैली अपतानी जनजाति का मूल निवास स्थान है। यह जनजाति अपनी स्थायी गीली धान की खेती और चेहरे पर बनाए जाने वाले पारंपरिक टैटू के लिए प्रसिद्ध है। अपतानी सांस्कृतिक परिदृश्य को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की संभावित सूची में भी शामिल किया गया है। जीरो म्यूजिक फेस्टिवल भी इस जगह की खास पहचान है। हर साल होने वाला यह आउटडोर म्यूजिक फेस्टिवल देशभर से संगीत पसंद करने वाले लोगों को आकर्षित करता है।
मिडे के नीले चीड़ के जंगलों में पैदल घूमना भी यहां का अच्छा अनुभव है। जंगलों के बीच चलते हुए आसपास के अपतानी गांवों और वहां की जीवनशैली को देखने का मौका मिलता है। गर्मियों में भी जीरो वैली का मौसम काफी सुहावना और ठंडा रहता है। यही वजह है कि गर्मी से राहत पाने के लिए भी यह Offbeat Hill Station एक अच्छा विकल्प बन सकता है। जीरो वैली अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर से करीब 115 किलोमीटर दूर है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन नाहरलगुन करीब 100 किलोमीटर दूर है। जीरो एयरपोर्ट के अलावा लीलाबारी और ईटानगर एयरपोर्ट से भी यहां पहुंचा जा सकता है।
4. हाफलोंग – असम का शांत पहाड़ी शहर
असम के डिमा हसाओ जिले में स्थित हाफलोंग असम का एकमात्र Hill Station है। नीली पहाड़ियों, नदियों और झरनों से घिरा यह छोटा शहर प्रकृति पसंद करने वाले और फोटोग्राफी का शौक रखने वाले यात्रियों के लिए खास है। हाफलोंग की सबसे खास जगहों में हाफलोंग झील शामिल है। शहर के बीच स्थित इस झील के किनारे घूमना काफी अच्छा लगता है।
यहां का माहौल इतना शांत है कि झील के आसपास चलते हुए आपको इंग्लैंड के प्रसिद्ध लेक डिस्ट्रिक्ट जैसा एहसास हो सकता है। हाफलोंग से करीब 10 किलोमीटर दूर जतिंगा गांव है। यह गांव पक्षियों के रहस्यमय व्यवहार के लिए दुनियाभर में चर्चित है। पक्षियों में रुचि रखने वाले लोगों और वैज्ञानिकों के लिए यह जगह खास आकर्षण रखती है।
पानीमूर झरने भी हाफलोंग की खूबसूरती बढ़ाते हैं। कोपिली नदी से बने इन झरनों का पानी मौसम के हिसाब से फिरोजी से लेकर गहरे पन्ना-नीले रंग तक दिखाई दे सकता है। इस तरह का बदलता नजारा हाफलोंग को एक खास Offbeat Hill Station बनाता है। हाफलोंग से करीब 38 किलोमीटर दूर थुरुक गांव है। असम की चुनिंदा जगहों में शामिल इस गांव में सर्दियों के दौरान बर्फबारी भी देखने को मिलती है।
इसके अलावा हाफलोंग अपने हरे-भरे चाय के बागानों और समृद्ध वनस्पतियों व जीव-जंतुओं के लिए भी जाना जाता है। अगर आप भीड़ से दूर किसी शांत Hill Station में कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो हाफलोंग को अपनी लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।
5. यरकौड – कॉफी की खुशबू और पहाड़ों की ठंडी हवा
तमिलनाडु की शेवरॉय पहाड़ियों के बीच बसा यरकौड दक्षिण भारत का एक ऐसा Hill Station है जो मुख्य पर्यटन वाली जगहों की तुलना में काफी शांत है। ठंडा मौसम, हरियाली और कॉफी के बागान इस जगह की खास पहचान हैं। यरकौड में करडियूर व्यूपॉइंट मुख्य पर्यटक स्थलों से थोड़ा दूर है और पहाड़ियों व घाटियों के सूर्यास्त के लिए शानदार जगह है। अगर आपको शांत जगह पर बैठकर पहाड़ों के बदलते रंग देखना पसंद है, तो यह जगह अच्छी लगेगी।
कोट्टाचेडू टीक फॉरेस्ट भी यहां का खास आकर्षण है। सागौन के घने पेड़ों के बीच वन्यजीव और पक्षी दिखाई देते हैं। यहां प्रकृति के बीच पैदल चलना और ट्रैकिंग करना काफी अच्छा अनुभव हो सकता है। यरकौड के कॉफी बागान भी देखने लायक हैं। यहां घूमते समय हवा में ताजी कॉफी की खुशबू महसूस होती है। पहाड़ी की चोटी पर स्थित शेवरॉय मंदिर भी यहां का प्रमुख आकर्षण है।
किलीयूर झरना पहाड़ियों से नीचे गिरता हुआ बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। यह स्थानीय लोककथाओं से भी जुड़ा हुआ है और फोटोग्राफी के लिए अच्छा स्थान है। पैगोडा पॉइंट भी यरकौड के खास स्थानों में शामिल है। यहां स्थानीय जनजातियों द्वारा बनाए गए पत्थर के पिरामिड जैसे ढांचे देखने को मिलते हैं और यहां से घाटी के सुंदर नजारे दिखाई देते हैं।
यरकौड में घूमने के साथ स्थानीय स्वाद लेना भी जरूरी है। यहां गर्म-गर्म मुरुगन इडली शॉप की इडली, सांबर और साउथ इंडियन फिल्टर कॉफी का स्वाद लिया जा सकता है। यहां के मीठे यरकौड आम भी काफी मशहूर हैं। यरकौड का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा सेलम में है, जो करीब 35 किलोमीटर दूर है। चेन्नई और बेंगलुरु से सड़क मार्ग द्वारा भी यहां पहुंचा जा सकता है। अक्टूबर से जून तक का समय घूमने के लिए सुखद माना जाता है। इस तरह यरकौड उन लोगों के लिए अच्छा Offbeat Hill Station है जो पहाड़ों के साथ कॉफी बागान, जंगल और शांत माहौल चाहते हैं।
6. लैंडौर – मसूरी के पास, लेकिन माहौल बिल्कुल अलग
मसूरी से सिर्फ 6 किलोमीटर ऊपर स्थित लैंडौर उन लोगों के लिए खास Hill Station है जो पहाड़ों में शांति चाहते हैं। करीब 2,250 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह एक शांत सैन्य छावनी क्षेत्र है। यहां सख्त निर्माण नियमों की वजह से 19वीं सदी की ब्रिटिश-कालीन वास्तुकला और पुराना शांत माहौल आज भी बना हुआ है। अगर मसूरी की भीड़ और मॉल रोड का शोर आपको पसंद नहीं है, तो लैंडौर एक अच्छा Offbeat Hill Station विकल्प हो सकता है।
यहां देवदार और ओक के पेड़ों के बीच पैदल चलने का अपना अलग मजा है। गोल चक्कर यानी Upper Circle Loop करीब 3.5 किलोमीटर लंबा पैदल रास्ता है। यह रास्ता देवदार और ओक के जंगलों के बीच से गुजरता है और माउंट परी टिब्बा तथा लैंडौर रिज के आसपास ले जाता है।
चार दुकान भी लैंडौर की पहचान बन चुकी है। सेंट पॉल्स चर्च के पास लकड़ी की पुरानी छोटी दुकानों के इस समूह में शहद-अदरक-नींबू वाली चाय, वैफल्स और पराठे काफी लोकप्रिय हैं। सिस्टर्स बाजार में स्थित लैंडौर बेकहाउस भी यात्रियों के बीच खास है। यहां 19वीं सदी की पुरानी रेसिपी किताबों के अनुसार बने सिनेमन रोल्स, लेमन टार्ट और स्टिक जॉ कैंडी मिलती हैं।
सिस्टर्स बाजार में ही 1928 से चल रही प्रकाश स्टोर्स है, जो हाथ से बने पीनट बटर, ब्लैक करंट जैम और चेडर पनीर के लिए मशहूर है। लैंडौर का सबसे ऊंचा स्थान लाल टिब्बा है।
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यहां लगी दूरबीन से बांदरपूंछ और केदारनाथ की बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों का नजारा देखा जा सकता है। डोमाज़ इन भी यहां की खास जगहों में शामिल है। तिब्बती चित्रकारी से सजा यह गेस्ट हाउस प्रसिद्ध भारतीय लेखक रस्किन बॉन्ड के घर के ठीक बगल में स्थित है। लैंडौर में रात 8:30 बजे के बाद शांति का कड़ा नियम लागू होता है। इसलिए यहां देर रात पार्टी या शोर-शराबे वाली नाइटलाइफ की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
यहां की संकरी और ढलान वाली सड़कों को देखते हुए बड़ी कार ले जाने के बजाय पैदल घूमना या लोकल टैक्सी लेना ज्यादा बेहतर रहता है। यही शांति लैंडौर को एक खास Hill Station बनाती है और उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प देती है जो पहाड़ों में भीड़ से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं।
कौन सा Hill Station आपके लिए सही है?
अगर आपको बर्फ, ट्रैकिंग और ऊंचे पहाड़ पसंद हैं तो चोपटा आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। अगर आप ऐसा Hill Station चाहते हैं जहां गाड़ियों का शोर बिल्कुल न हो, तो माथेरान को चुन सकते हैं। अगर पहाड़ों के साथ जनजातीय संस्कृति और हरे-भरे खेत देखना चाहते हैं, तो जीरो वैली एक अलग अनुभव देगी।
वहीं झील, झरने और चाय के बागान पसंद हैं तो हाफलोंग अच्छा विकल्प हो सकता है। कॉफी के बागान, जंगल और शांत मौसम के लिए यरकौड चुना जा सकता है। वहीं पुराने ब्रिटिश दौर की वास्तुकला, देवदार के जंगल और शांत पैदल रास्तों का अनुभव लेना है तो लैंडौर आपकी पसंद बन सकता है। इन सभी जगहों की अपनी अलग पहचान है और यही वजह है कि हर Offbeat Hill Station एक-दूसरे से अलग अनुभव देता है। यहां आपको सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि थोड़ा रुकने, प्रकृति को देखने और शहर की भागदौड़ से दूर समय बिताने का मौका मिलता है।
Five Colors of Travel की ओर से 5 खास सुझाव
- पहले बुकिंग कर लें: रहने की जगह पहले से तय रखें।
- आरामदायक जूते पहनें: ट्रैकिंग और पैदल रास्तों के लिए जरूरी हैं।
- मौसम देखकर सामान रखें: जैकेट और जरूरी कपड़े साथ रखें।
- पानी और टॉर्च रखें: जंगल वाले रास्तों पर काम आएंगे।
- पहाड़ साफ रखें: कचरा इधर-उधर न फेंकें।
भारत में घूमने के लिए मशहूर पहाड़ी जगहों की कोई कमी नहीं है, लेकिन अगर आप इस बार कुछ अलग चाहते हैं तो इन 6 Hill Station को जरूर देख सकते हैं। चोपटा के बुग्याल और बर्फीली चोटियों से लेकर माथेरान के बिना गाड़ियों वाले रास्तों तक, जीरो वैली की संस्कृति से लेकर हाफलोंग की झीलों तक, हर जगह अपने तरीके से खास है। यरकौड में कॉफी बागान और जंगल आपका इंतजार करते हैं, तो लैंडौर में देवदार के बीच पुरानी वास्तुकला और शांति मिलती है। इन जगहों की खासियत यही है कि ये आपको भीड़-भाड़ से थोड़ा दूर ले जाकर पहाड़ों को आराम से महसूस करने का मौका देती हैं। अगर आपकी अगली छुट्टी में मकसद सिर्फ घूमना नहीं बल्कि सुकून पाना भी है, तो किसी Offbeat Hill Station का प्लान जरूर बनाइए। हो सकता है अगली बार शिमला या मनाली की जगह आपको इन्हीं शांत पहाड़ी रास्तों में अपना पसंदीदा ठिकाना मिल जाए।