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भारत के फेमस टाइगर रिजर्वों की सूची में शामिल है छत्तीसगढ़ का इंद्रावती टाइगर रिजर्व

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इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान (Indravati National Park) छत्तीसगढ़ में एक नेशनल पार्क है जो, बीजापुर जिले में स्थित है। इंद्रावती नेशनल पार्क लगभग 1,258 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1975 में हुई थी। सर्वप्रथम, इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान को 1981 में नेशनल पार्क घोषित किया गया था। इसके पश्चात 1983 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व बना दिया गया। यह टाइगर रिजर्व भारत के प्रसिद्ध टाइगर रिजर्वों में आता है। इस नेशनल पार्क का नाम इंद्रावती नदी के नाम पर रखा गया था जो इस नेशनल पार्क के किनारे से बहती है। यह नेशनल पार्क वाइल्ड वाटर बफैलो (Wild Water Buffalo) का निवास स्थल है जो अब विलुप्त होने के कगार पर है। फॉउना (Fauna in Indravati National Park) इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे वाइल्ड वॉटर बफैलो (Wild Water Buffalo), टाइगर (Tiger), गौर (Gaur), तेंदुआ (Leopard), एशियाई हाथी (Asian Elephant), करैत (Krait), चौसिंगा (Chausingha), चीतल (Chital), फ्लाइंग गिलहरी (Flying Squirrel), भारतीय मंटजैक (Indian Muntjac), पैंगोलिन (Pangolin), सांभर (Sambar), जंगली सूअर (Wild Boar), काला हिरण (Black Deer), जंगली कुत्ते (Wild Dog), रीसस बंदर (Rhesus Monkey), साही (Porcupine), भारतीय गिरगिट (Indian Chameleon), भारतीय रॉक अजगर (Indian Rock Python), नीलगाय (Nilgai), कोबरा (Cobra), फ्रेशवॉटर क्रोकोडाइल (Freshwater Crocodile), भालू (Bear) और मॉनिटर छिपकली (Monitor Lizard) शामिल है। फ्लोरा (Flora in Indravati National Park) अगर बात की जाए इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के फ्लोरा की तो, यहाँ पेड़ों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- बेर (Ber), बांस (Bamboo), सागौन (Teak), लेगरस्ट्रोमिया (Lagerstroemia), पलाश (Palas), बेहरा (Behera), बेल (Bel), शीशम (Sheesham), कर्ता (Karta), कुल्लू (Kullu), बीजा (Bija), मुंडी (Mundi), धोबन (Dhoban), रोहन (Rohan), सिरस (Siras), अर्जुन (Arjun), सलाई (Salai), जामुन (Jamun), साल (Sal), तेंदू (Tendu), सेमल (Semal), हल्दू (Haldu) और महुआ (Mahua) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Indravati National Park) अगर आप इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में यहाँ बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है और टेम्प्रेचर (Temperature) 40 डिग्री से ऊपर पहुँच जाता है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (नवंबर से मार्च) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Indravati National Park)?

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कश्मीरी हंगुल का घर है दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान

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दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान (Dachigam National Park) जम्मू कश्मीर में एक नेशनल पार्क है जो, श्रीनगर जिले से 22 किमी दूर स्थित है। दाचीगाम नेशनल पार्क लगभग 141 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1981 में हुई थी। सर्वप्रथम, दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान को 1910 को जम्मू कश्मीर के महराजा ने इस क्षेत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया। इसके पश्चात, 1981 इसे नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। डल झील के निकट होने के कारण डल झील का जलक्षेत्र इस नेशनल पार्क के संरक्षण क्षेत्र में आता है और इसी कारण डल झील दाचीगाम नेशनल पार्क के जीवों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। दाचीगाम का कश्मीरी में अर्थ होता है ‘दस गांव’ और इन्ही दस गाँवों को जोड़कर इस नेशनल पार्क का निर्माण हुआ था। फॉउना (Fauna in Dachigam National Park) दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे कश्मीरी हंगुल (Kashmir Hangul), हिम तेन्दुआ (Snow Leopard), कस्तूरी मृग (Musk Deer), वल्चर (Vulture), गीदड़ (Jackal), मोनाल (Monal), हिमालयी काला भालू (Himalayan Black Bear), बुलबुल (Bulbul), लेपर्ड कैट (Leopard Cat), कश्मीर धूसर लंगूर (Kashmir Gray Langur), हिमालय भूरा भालू (Himalayan Brown Bear), हिमालय सराव (Himalayan Sarao), मिनिवेट (Minivet), पहाड़ी लोमड़ी (Mountain Fox), गोल्डन ईगल (Golden Eagle), हिमालय रासू (Himalayan Rasu) और जंगली बिल्ली (Jungle Cat) शामिल है। फ्लोरा (Flora in Dachigam National Park) अगर बात की जाए दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान के फ्लोरा की तो, यहाँ पेड़ों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- हिमालयी नम शीतोष्ण सदाबहार (Himalayan Moist Temperate Evergreen), नम पर्णपाती झाड़ियाँ (Moist Deciduous Shrubs), देवदार (Deodar), चीड़ (Pine) एवं ओक (Oak) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Dachigam National Park) अगर आप दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप विंटर (Winter) में आने से बचें क्योंकि विंटर में यहाँ बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है। आप यहाँ मार्च से जून के बीच में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Dachigam National Park)?

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Top 6 National Parks of Uttarakhand

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उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र में बसा हुआ एक राज्य है जहाँ धार्मिक संस्कृति के साथ-साथ नेचुरल ब्यूटी भी हैं। यहाँ गंगा और यमुना का उद्गम स्थल भी है और दुनिया का सबसे खूबसूरत नेशनल पार्क भी। यहाँ हिन्दुओं के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल चार धाम (बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) भी है। यहाँ नेचुरल ब्यूटी बहुत ज्यादा है इसलिए छोटा राज्य होने के बावजूद, यहाँ छह नेशनल पार्क्स है। आज के फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताएँगे इन सभी नेशनल पार्क्स (National Parks of Uttarakhand) के बारें में जहाँ आप नेचर को एक्सप्लोर कर सकते हैं। 1. जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbette National Park) जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क जिसे पहले हैली नेशनल पार्क भी कहा जाता था। यह हमारे देश का सबसे पुराना नेशनल पार्क भी है। यह उत्तराखंड के रामनगर में स्थित है। दिल्ली से जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की दूरी करीबन 250 किलोमीटर है। यहां पर आप किसी भी साधन से बड़ी ही आसानी से पहुंच सकते है। यहां पर आपको 2000 से भी ज्यादा रंग बिरंगी तितलियों की प्रजातियां मिल जाएगी। आप यहां किफायती दाम में होटल या रिसोर्ट में भी रुक सकते हैं। यह कॉर्बेट यकीनन प्रकृति के बहुत करीब और शांति प्रिय है। कैसे पहुंचे जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Jim Corbette National Park)? 2. फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Valley of Flowers National Park) वैली ऑफ़ फ्लावर उत्तराखंड में एक ऐसी जगह है जहां आपको चारों ओर हजारों प्रकार के फूलों, पौधों और छोटे-छोटे जीव जंतुओं को देखने का अवसर मिलेगा। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि इस शब्दों में बयां किया जा सकना नामुमकिन है। इस जगह की खूबसूरती को महसूस करने के लिए और यहां के फिजाओं में बसे सुकून के एहसास को समझने के लिए आपको खुद ही यहां तक आना पड़ेगा। नेचर्स लवर के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि आप इसे तस्वीरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इस जगह के बारे में आपको एक और खास बात यह है कि ये जगह वर्ल्ड हेरिटेज साइट के सूची में शामिल है। यहाँ लगभग 500 से भी ज्यादा प्रकार की पौधों और जड़ी बूटियों की प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- एनीमोन (Anemone), जर्मेनियम (Germanium), मार्श (Marsh), गेंदा (Marigold), प्रिभुला (Pribula), रानुनकुलस (Ranunculus), कोरिडालिस (Corydalis), इन्डुला (Indula), सौसुरिया (Saussurea) और कम्पानुला (Campanula)। कैसे पहुंचे फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Valley of Flowers National Park)? वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आपको ट्रैकिंग करनी पड़ेगी। इसके लिए आपको सबसे पहले उत्तराखंड के गोविंद घाट से पुलना गांव तक पहुंचना होगा। पुलना गांव से आपकी ट्रैकिंग की शुरुआत होगी। जब आप पुलना गांव से अपनी ट्रैकिंग की शुरुआत करेंगे तो रास्ते में आपको सबसे पहले जंगल चट्टी नाम के एक बाजार से गुजरना होगा। जंगल चट्टी से गुजरते हुए आप भ्युवदार गांव पहुंचेंगे। भ्युवदार गांव इस ट्रक का सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट होगा। जहां से आप घांगरिया के लिए निकलेंगे। पुलना से घांगरिया तक का ट्रैक लगभग 10 किलोमीटर का होता है। घांगरिया पहुंचकर आपको एक दिन रुकना पड़ेगा, क्योंकि दिन के 12:00 के बाद घांगरिया से आगे की ट्रैकिंग रोक दी जाती है। अगले दिन आप वैली ऑफ फ्लावर के लिए ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं। घांगरिया से वैली ऑफ फ्लावर का रास्ता लगभग 4 किलोमीटर का है और आप बहुत ही आसानी से इस ट्रैक को पूरा कर लेंगे। 3. गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान (Govind Pashu Vihar National Park) गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान सुपीन रेंज में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पास स्थित है। गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क लगभग 958 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1955 में हुई थी। इस नेशनल पार्क का नाम स्वतंत्रता सेनानी और राजनितज्ञ गोविन्द बल्लभ पंत के नाम पर रखा गया था जो उस समय होम मिनिस्टर (Home Minister) के पद पर आसीन थे। हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा घोषित करने में गोविन्द बल्लभ पंत का प्रमुख हाथ था। यह नेशनल पार्क गढ़वाल हिमालय (Garhwal Himalayas) क्षेत्र में स्थित हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान में भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे स्नो लेपर्ड प्रोजेक्ट (Snow Leopard Project) के तहत यहाँ स्नो लेपर्ड का संरक्षण किया जाता है। आप इस नेशनल पार्क में ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। कैसे पहुंचे गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Govind Pashu Vihar National Park)? 4. गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Gangotri National Park)  गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान गंगोत्री हिमानी के गोद में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है।यह नेशनल पार्क उत्तराखंड का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। गंगोत्री नेशनल पार्क लगभग 2390 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1989 में हुई थी। इस उद्यान के पूर्व में तिब्बत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा है। गंगा नदी का उद्गम स्थल गोमुख इसी उद्यान में स्थित है। इस उद्यान का नाम गंगोत्री ग्लेशियर के नाम पर रखा गया है जो हिन्दुओं के प्रमुख पूजनीय स्थलों में से एक है। आपको यहाँ की ऊंचाई में भारी विषमता देखने को मिलेंगी। यहाँ प्रमुख रूप से हिम तेंदुआ (Snow leopard), बाघ (Tiger), भरल (Bharal), हिमालयन तहर (Himalayan Tahr), भूरा भालू (Brown Bear), हिमालयन मोनाल (Himalayan Monal), हिमालयन स्नोकॉक (Himalayan Snowcock), काला भालू (Black Bear), कस्तूरी मृग (Musk Deer) पाए जाते है। कैसे पहुंचे गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Gangotri National Park)? 5. राजाजी नेशनल पार्क (Rajaji National Park) उत्तराखंड राज्य के देहरादून और हरिद्वार में स्थित राजाजी नेशनल पार्क का क्षेत्रफल 820.5 वर्ग किलोमीटर है। हाथियों, तेंदुओं, बाघों और हिरनों जैसे जानवरों को अपने में पनाह देने वाला यह पार्क पर्यटकों के मन को भी काफी लुभाता है। सुहाने मौसम, हरे भरे पेड़ और पहाड़ियों के बीच खुले में घूम रहे जानवर को देखना अपने आप में ही अविस्मरणीय दृश्य होता है। कैसे पहुंचे राजाजी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Rajaji National Park)? 6. नंदा देवी नेशनल पार्क (Nanda Devi National Park) उत्तराखंड के चमोली गढ़वाल में स्थित नंदा देवी नेशनल पार्क (Nanda Devi National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्कों की सूची में गिना जाता है।

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पंचकूला में स्थित है एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन

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जब भी कभी पार्क या फिर गार्डन का जिक्र होता है तो हमारे ध्यान में क्या आता है? खूबसूरत से फूल और रंग बिरंगी तितलियाँ,,, यहीं ना! लेकिन क्या कभी सोचा है कि कैक्टस का भी कोई गार्डन हो सकता है? जी हां यह वही कैक्टस है जो अक्सर घर के गमले में दिख जाता है लेकिन किसी को उसमें खास दिलचस्पी नहीं होती। फाइव कलर्स ऑफ ट्रेवल के आज के इस ब्लॉग में हम आपको आज जिस गार्डन के बारे में बताने जा रहे हैं वह रंग बिरंगे फूलों का बगीचा नहीं बल्कि कांटेदार कैक्टस वाला गार्डन है। जी हां हम आज बात करने जा रहे हैं एशिया के लार्जेस्ट कैक्टस गार्डन (Asia’s Largest Cactus Garden) के बारे में, जो कि हरियाणा में स्थित है। आईए जानते हैं इस गार्डन के बारे में और भी डिटेल में : कैक्टस गार्डन का इतिहास (History of Cactus Garden) : इस गार्डन को वर्ष 2004 में सिर्फ 500 पौधों के साथ कैक्टस गार्डन के तौर पर खोला गया था। हालांकि यह बोटैनिकल गार्डन 1987 में स्थापित हो गया था। आज के समय में यहां कैक्टस की 3500 से अधिक प्रजातियां हैं। उनमें कई एंडेंजर्ड स्पीशीज भी है। यह कैक्टस गार्डन पंचकूला के सेक्टर 5 में स्थित है और हरियाणा की शोभा में चार चांद लगता है। अगर बात करें इस कैक्टस गार्डन के क्षेत्रफल की तो यह 7 एकड़ भूमि पर फैला हुआ है। कैक्टस गार्डन की विशेषताएँ (Qualities of Cactus Garden) : यह कैक्टस गार्डन एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन है और यहां आपको हर तरह के कैक्टस के पौधे देखने को मिल जाएंगे। यहां कई सारे ऐसे कैक्टस के पौधे भी हैं जिनकी लंबाई इंसानों की लंबाई से भी ज्यादा है। वहीं कुछ पौधे ऐसे भी हैं जो जमीन तक हीं सिमट कर रह जाते हैं। यहां गोल और चपटे दोनों ही प्रकार के पत्तों वाले कैक्टस आपको देखने को मिलेंगे।खासकर इस गार्डन को जिस तरह से सजाया गया है वह अपने आप में हीं सराहनीय है। इस गार्डन के बीच में एक छोटा सा तालाब भी है, जो इस गार्डन की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करता है। साफ सुथरा सा यह गार्डन यहां आने वाले पर्यटकों को काफी अचंभित करता है। अगर आपका इंटरेस्ट वाइल्डलाइफ में है और आप फ्लोरा और फाउना को एक्सप्लोर करने में इंटरेस्ट रखते हैं तो आपको इस कैक्टस गार्डन में घूमने जरूर आना चाहिए। यहां आकर आपको बहुत सी ऐसी जानकारियां मिलेगी जो शायद आपके लिए नई हो। विज्ञान के क्षेत्र में इंटरेस्ट रखने वाले बच्चों के लिए यह कैक्ट्स गार्डन बहुत हीं बेस्ट पिकनिक ऑप्शन है। आप इस बोटैनिकल गार्डन में घूमने जा सकते हैं और इसे एक्सप्लोर कर सकते हैं। फ्लोरा की है अनेक प्रजातियाँ (Vast Diversity Of Flora in Cactus Garden): यह कैक्टस गार्डन और बोटैनिकल गार्डन पेड़ पौधों के जैव विविधता के मामले में काफी धनी है। यहां फ्लोरा की कई सारी ऐसी प्रजातियां पाई जाती हैं जो विलुप्त होने के कगार पर हैं। अगर यहाँ पाए जाने वाले कैक्टस के दुर्लभ प्रजातियों की बात की जाए तो यहाँ कैक्टस की लगभग 3500 दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियाँ पायी जाती हैं। जिनमे प्रमुख रूप से ओपंटियास (Opuntias), फेरोकैक्टस (Ferocactus), नोटोकैक्टि (Notocacti), स्तंभाकार कैक्टि (Columnar Cacti), एगेव्स (Agaves), एस्ट्रोफाइटम (Astrophytum), इचिनोसेरियस (Echinocereus), मम्मिलारियास (Mammillarias) शामिल हैं। एंट्री फीस और टाइमिंग (Entry Fees and Timings of Cactus Garden): अगर बात करें इस बोटैनिकल गार्डन में एंट्री की तो इस बोटैनिकल गार्डन के एंट्री टिकट की प्राइस ₹10 पर पर्सन है। इस कैक्ट्स गार्डन के एंट्री की टाइमिंग सुबह के 8 बजे से शाम के 6 बजे तक की है।

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दिल्ली-NCR वालों के लिए परफेक्ट पिकनिक डेस्टिनेशन है मोरनी हिल्स

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मोरनी हिल्स (Morni Hills) को हरियाणा का एकमात्र हिल स्टेशन माना जाता है, जो कि अपने स्पिरिचुअल और हिस्टोरिकल वैल्यूज (Spiritual and Historical Values) के लिए फेमस है। यहां की खूबसूरती आसपास के शहरों से पर्यटकों को आकर्षित करती है। राजधानी दिल्ली से नजदीक होने के कारण अक्सर दिल्ली के लोग पिकनिक मनाने यहां आया करते हैं। यहां के फेमस टूरिस्ट अट्रैक्शन (Famous Tourist Attraction) की अगर बात की जाए तो उनमें मोरनी फोर्ट का नाम सबसे पहले आता है। इसके अलावा यहां एडवेंचर पार्क और टिक्कर ताल भी है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है। एडवेंचर पार्क (Adventure Park): इस पार्क का उद्घाटन हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने 2004 में किया था। तब से यह पार्क बच्चों के लिए पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट बन गया है। मोरनी हिल्स में यह जगह बच्चों के द्वारा सबसे ज्यादा पसंद की जाती है। यहां कई तरह के एडवेंचरस एक्टिविटीज की जा सकते हैं। इस पार्क में एक हॉन्टेड हाउस भी है जो बच्चों को काफी पसंद आता है। इस पार्क में ट्री हाउस भी है जहां से पूरे मोरनी हिल्स का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। इस पार्क में एक भूल भुलैया भी है जो बाहर से देखने पर तो आसान सी दिखती है लेकिन जब आप इसके अंदर जाएंगे तो इसी में खो कर रह जाएंगे। इस मंकी मेज में आपको रास्ता ढूंढने में लगभग 10 – 15 मिनट का टाइम लग जाएगा। इस पार्क में जगह-जगह रंग-बिरंगे छोटे-छोटे बर्ड हाउस भी बनाए गए हैं। जो देखने में बहुत हीं खूबसूरत और प्यारे लगते हैं। इसके अलावा पार्क में एक कैफेटेरिया भी है। पार्क के बाहर ही पार्किंग स्पेस भी है जहां आप अपनी गाड़ी को पार्क कर सकते हैं।बात करें इस पार्क के एंट्री टिकट की तो इस पार्क में वयस्कों के लिए एंट्री टिकट ₹50 की है जबकि, बच्चों के लिए यह टिकट ₹30 की है। टिक्कर ताल (Tikkar Tal): टिक्कर ताल को यहां के दो खूबसूरत जिलों की वजह से जाना जाता है। पहाड़ी से देखने पर यह दोनों झीलें बहुत हीं खूबसूरत दिखती हैं। इन दोनों झीलों को एक छोटी सी पहाड़ी अलग करती है। इस ताल के किनारे बैठकर आप पिकनिक मना सकते हैं और अपनों के साथ टाइम स्पेंड कर सकते हैं। यहां का माहौल बहुत ही पीसफुल है और लोगों को काफी पसंद आता है। यह आप कई तरह की वॉटर स्पोर्ट्स एक्टिविटीज भी कर सकते हैं। जिनमें बनाना राइड, जेट स्कूटर राइड और पैरा मोटर राइड आदि शामिल हैं।बनाना राइड के टिकट की प्राइस ₹500 प्रति व्यक्ति है। वहीं जेट स्कूटर रीड के टिकट की कीमत ₹1000 पर पर्सन है। अगर आप पैरा मोटर राइट का आनंद उठाना चाहते हैं तो आपको इसके लिए प्रति व्यक्ति के तौर पर ₹1500 का टिकट लेना पड़ेगा। यह यहां की सबसे बेस्ट राइड है और पर्यटकों को काफी पसंद आती है।इन एडवेंचरस राइड्स के अलावा आप यहां पारा सीलिंग और नॉर्मल बोटिंग भी कर सकते हैं मोरनी फोर्ट (Morni Fort): मोरनी फोर्ट एक ऐतिहासिक किला है, जिसे क्वीन मोरनी ने बनवाया था। उन्हीं के नाम पर इस हिल स्टेशन का नाम मोरनी हिल्स पड़ा है। इस फोर्ट को अब नेचर स्टडी सेंटर और म्यूजियम में तब्दील कर दिया गया है। यहां आपको इनडेंजर्ड स्पीशीज के नेचुरल हैबिटेट के बारे में जानने और समझने का मौका मिलेगा। इसके अलावा यहां विलुप्त हो चुकी प्रजातियों के बारे में भी जानकारी देखने को मिलती है। इस म्यूजियम का मोटो बायोडायवर्सिटी को कंजर्व करना है और वाइल्डलाइफ की सुरक्षा को प्रमोट करना है। यहां जाकर आप इस बात को बहुत ही अच्छे से समझ पाएंगे कि किस तरह से आप इन विलुप्त हो रही प्रजातियों के संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं। अगर आपका इंटरेस्ट वाइल्डलाइफ में है तो आपको यह जगह बहुत ही पसंद आएगी। साथ ही यहाँ बच्चों को भी बहुत कुछ जानने और सीखने का मौका मिलता है। इस फोर्ट के बाहर ही एक शिवजी का मंदिर है। जहां कई सौ साल पुराना एक बरगद का पेड़ भी है। अगर आप मोरनी हिल्स आ रहे हैं तो आप इस फोर्ट को घूमने के लिए जरूर आए। यकीनन यह आपको बहुत ही पसंद आएगा। मोरनी हिल्स जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Morni Hills): अगर बात करें मोरनी हिल्स जाने के सबसे सही समय की तो यहां जाने का सबसे सही समय होता है सितंबर से अप्रैल तक का। क्योंकि इस समय यहां पर गर्मी नहीं होती है और आप बहुत हीं आसानी से एडवेंचरस एक्टिविटीज का आनंद उठा पाते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि मोरनी हिल्स घूमने के लिए सिर्फ इसी समय जाया जा सकता है। आप चाहे तो साल के किसी भी समय यहां घूमने के लिए जा सकते हैं। यह जगह हर समय उतनी ही खूबसूरत दिखती है। कैसे पहुंचे मोरनी हिल्स (How to reach Morni Hills)? मोरनी हिल्स पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले चंडीगढ़ पहुंचना होगा। चंडीगढ़ से मोरनी हिल्स की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है और यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट चंडीगढ़ एयरपोर्ट है। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन मोरनी हिल्स का नजदीकतम रेलवे स्टेशन है। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद अगर आप वहां से बस लेकर मोरनी हिल जाना चाहेंगे तो आपको चंडीगढ़ से मोरनी हिल्स के लिए डायरेक्ट बसें भी मिल जाएंगी। इसके अलावा आप अपनी सुविधा अनुसार टैक्सी भी कर सकते हैं।

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एक ऐसा राष्ट्रीय उद्यान जिसका नाम गोविंद बल्लभ पंत के नाम पर रखा गया है

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गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान (Govind Pashu Vihar National Park) सुपीन रेंज में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के पास स्थित है। गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क लगभग 958 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1955 में हुई थी। इस नेशनल पार्क का नाम स्वतंत्रता सेनानी और राजनितज्ञ गोविन्द बल्लभ पंत के नाम पर रखा गया था जो उस समय होम मिनिस्टर (Home Minister) के पद पर आसीन थे। हिंदी को भारत की राष्ट्रीय भाषा घोषित करने में गोविन्द बल्लभ पंत का प्रमुख हाथ था। यह नेशनल पार्क गढ़वाल हिमालय (Garhwal Himalayas) क्षेत्र में स्थित हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान में भारत सरकार द्वारा चलाये जा रहे स्नो लेपर्ड प्रोजेक्ट (Snow Leopard Project) के तहत यहाँ स्नो लेपर्ड का संरक्षण किया जाता है। आप इस नेशनल पार्क में ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। फॉउना (Fauna in Govind Pashu Vihar National Park) गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे पक्षियों की 150 प्रजातियां और मैमल्स की 15 प्रजातियां शामिल है। यहाँ प्रमुख रूप से हिम तेंदुआ (Snow Leopard), भूरा भालू (Brown Bear), एशियाई काला भालू (Asian Black Bear), तेंदुआ (Leopard), हिमालयन स्नोकॉक (Himalayan Snowcock), हिमालयी तहर (Himalayan Tahr), चील (Steppe Eagle), कस्तूरी मृग (Musk Deer), भरल (Bharal), ब्लैक ईगल (Black Eagle), हिमालयन चूहा (Himalayan Field Rat), बियर्डेड वल्चर (Bearded Vulture), गोरल (Goral), गोल्डन ईगल (Golden Eagle), सिवेट (Civet), जंगली सूअर (Wild Boar) और हिमालयन मोनाल तीतर (Himalayan Monal Pheasant) पाए जाते है। फ्लोरा (Flora in Govind Pashu Vihar National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ पेड़ों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे यहाँ निचले भागों में चिर पाइन (Chir Pine), देवदार (Deodar), ओक (Oak), आदि पाई जाती है। इसके अलावा हाई अल्टीट्यूड पर ब्लू पाइन (Blue Pine), सिल्वर फ़िर (Silver Fir), यु (Yew), स्प्रूस (Spruce), ओक (Oak), मैपल (Maple), हैज़ल (Hazel), वॉलनट (Walnut), हॉर्स चेस्टनट (Horse Chestnut) आदि पाई जाती है। बेस्ट टाइम टू विजिट गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क (Best time to visit Govind Pashu Vihar National Park) अगर आप गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप विंटर (Winter) में आने से बचें क्योंकि विंटर में यहाँ बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है। आप यहाँ अप्रैल से जून और सितम्बर से नवंबर के बीच में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे गोविन्द पशु विहार राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Govind Pashu Vihar National Park)? सड़क मार्ग- आप धारकाधी से गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क पहुंच सकते है जो देहरादून से जुड़ा हुआ हैं।रेल मार्ग- इस नेशनल पार्क का नजदीकी रेलवे स्टेशन है- देहरादून रेलवे स्टेशन जहाँ से आप टैक्सी बुक करके या बस लेकर गोविन्द पशु विहार नेशनल पार्क पहुंच सकते है।हवाई मार्ग- इस नेशनल पार्क का निकटम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट (देहरादून) में है जो 231 किलोमीटर दूर है।

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इस नेशनल पार्क में स्थित है माँ गंगा का उद्गम स्थल गंगोत्री ग्लेशियर

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गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Gangotri National Park) गंगोत्री हिमानी के गोद में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित है।यह नेशनल पार्क उत्तराखंड का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। गंगोत्री नेशनल पार्क लगभग 2390 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1989 में हुई थी। इस उद्यान के पूर्व में तिब्बत की अंतर्राष्ट्रीय सीमा है। गंगा नदी का उद्गम स्थल गोमुख इसी उद्यान में स्थित है। इस उद्यान का नाम गंगोत्री ग्लेशियर के नाम पर रखा गया है जो हिन्दुओं के प्रमुख पूजनीय स्थलों में से एक है। आपको यहाँ की ऊंचाई में भारी विषमता देखने को मिलेंगी। फॉउना (Fauna in Gangotri National Park) गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे स्तनधारियों की 15 प्रजातियां और पक्षियों की लगभग 150 प्रजातियां शामिल है। यहाँ प्रमुख रूप से हिम तेंदुआ (Snow leopard), बाघ (Tiger), भरल (Bharal), हिमालयन तहर (Himalayan Tahr), भूरा भालू (Brown Bear), हिमालयन मोनाल (Himalayan Monal), हिमालयन स्नोकॉक (Himalayan Snowcock), काला भालू (Black Bear), कस्तूरी मृग (Musk Deer) पाए जाते है। यहाँ आपको हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षी भी दिख जाएंगे। फ्लोरा (Flora in Gangotri National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, इस उद्यान में शंकुधारी वन और हाई अल्टीट्यूड पर पाई जाने वाली पश्चिमी हिमालयी अल्पाइन झाड़ियाँ और घास के मैदान हैं। इस उद्यान में पाई जाने वाली वनस्पतियों में चिरपाइन देवदार, देवदार, स्प्रूस, ओक और रोडोडेंड्रोन शामिल हैं। बेस्ट टाइम टू विजिट गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Gangotri National Park) अगर आप गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप विंटर (Winter) और मानसून (Monsoon) में आने से बचें क्योंकि विंटर में यहाँ बहुत ज्यादा ठंड पड़ती है तथा मानसून में यहाँ बहुत लैंडस्लाइड (Landslide) होता है। आप यहाँ समर (Summer) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यह की परिस्थितियां सम रहती हैं। कैसे पहुंचे गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Gangotri National Park)?

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देव भूमि उत्तराखंड में है दुनिया का सबसे खूबसूरत नेशनल पार्क जानिए इसके बारे में

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Valley of Flowers “क्या आपने कभी किसी ऐसे जगह घूमने जाने का सपना सजाया है जहां दूर-दूर तक पहाड़ियां हो, चारों ओर फूल के बगीचे हो और जहां खूबसूरत रंग-बिरंगे फूल खिले हुए हो? अपनी आंखों को बंद करके सोचिए कि कितना खूबसूरत होगा वह जगह, जहां यह सब सच होगा? अपने ख्यालों से पूछिए कि उस जगह की फिजाओं में घुली हुई फूलों की खुशबू कितनी खूबसूरत होगी? ….और फिर अपने दिल से पूछिए कि क्या आप उस जगह से वापस लौट कर आना चाहेंगे या वहीं का हो कर रह जाना चाहेंगे?” क्या है वैली ऑफ़ फ्लावर?( what is valley of flower)? वैली ऑफ़ फ्लावर उत्तराखंड में एक ऐसी जगह है जहां आपको चारों ओर हजारों प्रकार के फूलों, पौधों और छोटे-छोटे जीव जंतुओं को देखने का अवसर मिलेगा। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि इस शब्दों में बयां किया जा सकना नामुमकिन है। इस जगह की खूबसूरती को महसूस करने के लिए और यहां के फिजाओं में बसे सुकून के एहसास को समझने के लिए आपको खुद ही यहां तक आना पड़ेगा। नेचर्स लवर के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। यह जगह इतनी खूबसूरत है कि आप इसे तस्वीरों में कैद करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे। इस जगह के बारे में आपको एक और खास बात यह है कि ये जगह वर्ल्ड हेरिटेज साइट के सूची में शामिल है। वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क पहले नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान का भाग था लेकिन बाद में इन दोनों नेशनल पार्कों को अलग कर दिया गया। इस फ्लॉवर वैली में खास क्या है? (What’s special in this valley of flower?) फ्लोरा (Floras in Valley of Flowers National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ लगभग 500 से भी ज्यादा प्रकार की पौधों और जड़ी बूटियों की प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- एनीमोन (Anemone), जर्मेनियम (Germanium), मार्श (Marsh), गेंदा (Marigold), प्रिभुला (Pribula), पोटेन्टिला (Potentilla), जिउम (Geum), तारक (Aster), लिलियम (Lilium), हिमालयी नीला पोस्त (Himalayan Blue Poppy), बछनाग (Bacchanal), डेलफिनियम (Delphinium), रानुनकुलस (Ranunculus), कोरिडालिस (Corydalis), इन्डुला (Indula), सौसुरिया (Saussurea) और कम्पानुला (Campanula)। बेस्ट टाइम टू विजिट वैली ऑफ़ फ्लावर नेशनल पार्क (Best time to visit Valley of Flowers National Park) वैसे तो यहां बहुत सारे विजिटर्स घूमने आते रहते हैं। लेकिन अगर आप शांति से यहां घूमना चाहते हैं तो आप ऐसे समय का चयन करें जब बद्रीनाथ के लिए ट्रैकिंग बंद रहती है। क्योंकि यहां आने वाले अधिकतर विजिटर्स बद्रीनाथ के पर्यटक हीं होते हैं। ऐसे में जब बद्रीनाथ की ट्रैकिंग बंद हो जाती है तो यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या भी कम जाती है। कैसे पहुंचे फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Valley of Flowers National Park)? वैली ऑफ फ्लावर नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आपको ट्रैकिंग करनी पड़ेगी। इसके लिए आपको सबसे पहले उत्तराखंड के गोविंद घाट से पुलना गांव तक पहुंचना होगा। पुलना गांव से आपकी ट्रैकिंग की शुरुआत होगी। जब आप पुलना गांव से अपनी ट्रैकिंग की शुरुआत करेंगे तो रास्ते में आपको सबसे पहले जंगल चट्टी नाम के एक बाजार से गुजरना होगा। जंगल चट्टी से गुजरते हुए आप भ्युवदार गांव पहुंचेंगे। भ्युवदार गांव इस ट्रक का सबसे इंपॉर्टेंट पॉइंट होगा। जहां से आप घांगरिया के लिए निकलेंगे। पुलना से घांगरिया तक का ट्रैक लगभग 10 किलोमीटर का होता है। घांगरिया पहुंचकर आपको एक दिन रुकना पड़ेगा, क्योंकि दिन के 12:00 के बाद घांगरिया से आगे की ट्रैकिंग रोक दी जाती है। अगले दिन आप वैली ऑफ फ्लावर के लिए ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं। घांगरिया से वैली ऑफ फ्लावर का रास्ता लगभग 4 किलोमीटर का है और आप बहुत ही आसानी से इस ट्रैक को पूरा कर लेंगे।

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Top 5 National Parks in Madhya Pradesh

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मध्य प्रदेश भारत के सबसे बड़े राज्यों में से एक है और वन क्षेत्र के आधार पर यह भारत का सबसे अधिक वन विस्तार वाला राज्य है। ऐसे में यहां नेशनल पार्क और वन्य जीव अभ्यरण्यों की संख्या भी बहुत अधिक है। वैसे तो मध्य प्रदेश में 11 नेशनल पार्क हैं, लेकिन कुछ नेशनल पार्क्स ऐसे हैं जो बहुत हीं खास और खूबसूरत हैं। फाइव कलर्स का ट्रेवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं मध्य प्रदेश के पांच प्रमुख नेशनल पार्क (5 National Parks of Madhya Pradesh) के बारे में जहां एक बार जाना तो बनता है। 1. कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) देश के सबसे प्रसिद्ध नेशनल पार्क में से एक कूनो नेशनल पार्क हाल में ही काफी चर्चा का विषय रहा था। यहां कुछ दिनों पहले नामीबिया से 8 चीतों को ला कर रखा गया था। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित इस नेशनल पार्क में आकर आपको एक अलग ही अनुभूति होगी। चारों ओर घने जंगल और बेफिक्र घूम रहे जंगली जानवर किसी अलग ही दुनिया का आभास करा देते हैं। यह नेशनल पार्क कूनो नदी के तट पर स्थित है। यह कह सकते हैं कि कूनो नदी यहां की जीवन रेखा है। यहां के जंगली जानवरों को गर्मी के समय सिर्फ इसी नदी का सहारा होता है। बात करें अगर इस पार्क के फैलाव की तो यह नेशनल पार्क 415 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और हजारों जानवरों का आसरा है। कैसे पहुंचे कूनो राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Kuno National Park)? 2. सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान (Satpura National Park) सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान सतपुड़ा की पहाड़ियों में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में स्थित है। सतपुड़ा नेशनल पार्क लगभग 524 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1981 में हुई थी। यह नेशनल पार्क एक टाइगर रिजर्व भी है तथा बोरी और पंचमढ़ी अभ्यारण्य के साथ अपनी सीमा साझा करता हैं। इसी नेशनल पार्क में धूपगढ़ चोटी (1350 मीटर) अवस्थित हैं। सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे बाघ, तेंदुआ, सांभर, चौसिंगा, भेडकी, नीलगाय, चीतल, चिंकारा, लोमड़ी, जंगली सुअर, साही, भालू, काला हिरण, गौर, जंगली कुत्ता, उड़न गिलहरी, मूषक मृग और भारतीय विशाल गिलहरी शामिल हैं। कैसे पहुंचे सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Satpura National Park)? 3. बांधवगढ़ नेशनल पार्क (Bandhavgarh National Park) मध्य प्रदेश के विंध्याचल पर्वत में स्थित बांधवगढ़ नेशनल पार्क अपने बाघों के लिए प्रसिद्ध है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में इन बाघों को देखने के लिए दुनिया के अलग-अलग कोने से साल भर में लगभग 50,000 से भी ज्यादा पर्यटक आते हैं और जंगल सफारी के जरिए बाघों की खोज में निकल जाते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क लगभग 105 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस नेशनल पार्क में बाघ के अलावा कई अन्य प्रकार के स्तनधारी जीव भी पाए जाते हैं। जिनमें तेंदुआ, भेड़िया, सियार, हिरण, भालू, लंगूर, बंदर, जंगली सूअर, जंगली कुत्ते, लोथल बीयर और चीतल जैसे जीव प्रमुख है। वर्तमान समय में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में 165 बाघ अपना जीवन यापन कर रहे हैं। कैसे पहुंचे बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Bandhavgarh National Park)? 4. पेंच नेशनल पार्क (Pench National Park) पेंच नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का एक प्रमुख नेशनल पार्क है। यह राष्ट्रीय उद्यान 758 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस उद्यान की स्थापना 1975 में हुई थी। यहां पर पीफोल, कोपीजेन्ट, रेड जंगल फोल, रेड वेन्टेड बुलबुल, बेस्ट डबारबेट, क्रीमसन, मेंगपाई राबिन, रॉकेट टेल डोगों, व्हिस्टल टील, लेसर आदि पक्षियों की प्रजातियों के साथ, एक वन्यजीव हॉटस्पॉट है। पेंच नदी इस उद्यान को दो भागों में बाँटती है। पेंच टाइगर रिज़र्व को भारत का सर्वश्रेष्ठ टाइगर रिज़र्व होने का गौरव प्राप्त है। रुडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध कहानियों में से एक ‘द जंगल बुक’ इसी पार्क पर आधारित है। कैसे पहुंचे पेंच राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Pench National Park)? 5. कान्हा-किसली राष्ट्रीय उद्यान (Kanha–Kisli National Park) कान्हा नेशनल पार्क मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा नेशनल पार्क है। यह नेशनल पार्क अपने बारहसिंगा (Reindeer) के लिए प्रसिद्ध है। यह नेशनल पार्क लगभग 940 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। सर्वप्रथम कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को 1 जून 1955 को नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। इसके पश्चात 1973 में इसे टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया। कान्हा नेशनल पार्क में बारहसिंगा के अलावा भी कई प्रकार के वन्य जीव निवास करते है जिनमे बाघ, सारस, भेड़िया, छोटी बत्तख, चिन्कारा, भारतीय पेंगोलिन शामिल है। कैसे पहुंचे कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Kanha National Park)?

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Top 7 National Parks in Assam

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बरसात का सीजन खत्म हो गया है और धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगा है, ऐसे में नेशनल पार्क्स भी जंगल सफारी और टूर के लिए खुल गए हैं। अगर आप अभी किसी अच्छे से वीकेंड टूर की प्लानिंग कर रहे हैं तो जंगल सफारी और टूर आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। यहां आप शहरों से दूर जंगलों के बीच प्रकृति को महसूस करते हुए अपना एक अच्छा सा वीकेंड ट्रिप प्लान कर सकते हैं। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं असम के सभी नेशनल पार्क्स (National Parks in Assam) के बारे में, जहां आप अच्छे से बायोडायवर्सिटी को एक्सप्लोर कर सकते हैं और अपना वीकेंड एंजॉय कर सकते हैं। 1. काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। कैसे पहुंचे काजीरंगा नेशनल पार्क (How to reach Kaziranga National Park)?  2. मानस नेशनल पार्क (Manas National Park) असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है। मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। कैसे पहुंचे मानस नेशनल पार्क (How to reach Manas National Park)?  3. नामेरी नेशनल पार्क (Nameri National Park) नामेरी राष्ट्रीय उद्यान हिमालय की तलहटी में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, असम के सोनितपुर जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क एक टाइगर रिजर्व भी है जो असम में मानस टाइगर रिजर्व के बाद दूसरा है। नामेरी नेशनल पार्क लगभग 210 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1998 में हुई थी। नामेरी राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), जंगली हाथी (Wild Elephant), क्लाउडेड लेपर्ड (Clouded Leopard), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), जंगली सुअर (Wild Pig) आदि शामिल है। कैसे पहुंचे नामेरी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Nameri National Park)? 4. ओरांग राष्ट्रीय उद्यान (Orang National Park) ओरांग राष्ट्रीय उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित एक नेशनल पार्क है जो, असम के darang और सोनितपुर जिले में स्थित है। ओरांग नेशनल पार्क लगभग 300 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1985 में हुई थी। सर्वप्रथम ओरांग राष्ट्रीय उद्यान को 1985 में वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया था। इसके पश्चात 13 अप्रैल 1999 को इसे नेशनल पार्क घोषित किया गया। ओरांग राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे बंगाल टाइगर (Bengal Tiger), एशियाई एलीफैंट (Asian Elephant), पिग्मी हॉग (Pygmy Hog), भारतीय गैंडा (Indian Rhinoceros), वाइल्ड वॉटर बफैलो (Wild Water Buffalo) आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ मछलियों की 50 से अधिक प्रजातियां पायी जाती है। कैसे पहुंचे ओरांग राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Orang National Park)? 5. रायमोना नेशनल पार्क (Raimona National Park) रायमोना राष्ट्रीय उद्यान असम का छठा नेशनल पार्क है जो, असम के कोकराझार जिले में स्थित है। इस राष्ट्रीय उद्यान की सीमा क्षेत्र इंडो-भूटान बॉर्डर और पश्चिम बंगाल की राज्य सीमा से लगती है। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे एशियाई हाथी (Asian Elephant), रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), क्लाउडेड तेंदुआ (Clouded Leopard), हॉर्नबिल (Hornbill), चित्तीदार हिरण (Spotted Deer), भारतीय गौर (Indian Gaur), वाइल्ड वॉटर बफैलो (Wild Water Buffalo), आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ पक्षियों की 170 से अधिक प्रजातियां तथा तितलियों की 150 से अधिक प्रजातियां निवास करती है। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान की प्रसिद्धि का कारण यह है कि, यहाँ गोल्डन लंगूर पाए जाते है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते है। वही अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ वनस्पतियों की लगभग 380 प्रजातियाँ पायी जाती हैं। कैसे पहुंचे रायमोना राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Raimona National Park)? 6. डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क (Dibru-Saikhowa National Park) यह राष्ट्रीय उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित एक नेशनल पार्क है जो, असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले में स्थित है। डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क लगभग 340 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। ब्रह्मपुत्र और लोहित नदी उत्तर में एवं डिब्रू नदी इस पार्क के दक्षिण में बहती है। डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना निवास करते है जिनमे स्तनधारियों की कुल 36 प्रजातियाँ पायी जाती है। इनमे रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), स्पॉटेड तेंदुआ (Spotted Leopard), तेंदुआ (Leopard), स्लॉथ बीयर (Sloth Bear), जंगली बिल्ली (Wild Cat), जंगली घोड़ा (Wild Horse), एशियाई हाथी (Asian Elephant) आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ पक्षियों की 350 से अधिक प्रजातियां रहती है। कैसे पहुंचे डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Dibru-Saikhowa National Park)? 7. देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान (Dehing Patkai National Park) देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान असम में एक नेशनल पार्क है जो, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले में स्थित है। देहिंग पटकाई नेशनल पार्क लगभग 231 वर्ग किलोमीटर के