दुनिया के 7 Hidden Mountains, जिनकी पूजा होती है
दुनिया में ऐसे कई Mountains हैं जिन्हें लोग केवल ऊंची चोटियों या खूबसूरत प्राकृतिक जगहों के रूप में नहीं देखते। कुछ Mountains ऐसे भी हैं, जिनसे लोगों की धार्मिक आस्था, पुरानी कथाएं और सदियों पुरानी परंपराएं जुड़ी हुई हैं। इन जगहों पर जाने वाले लोग केवल घूमने नहीं जाते, बल्कि किसी खास धार्मिक विश्वास और आध्यात्मिक भावना के साथ वहां पहुंचते हैं। दुनिया के कुछ पवित्र Mountains ऐसे हैं जिन्हें एक से ज्यादा धर्मों में महत्वपूर्ण माना जाता है। कहीं भगवान शिव से जुड़ी मान्यता है, कहीं भगवान बुद्ध से, तो कहीं पैगंबर मूसा, हजरत आदम और पैगंबर नूह की धार्मिक कथाएं इन Mountains से जुड़ी हुई हैं। इन जगहों की यात्रा सामान्य पर्यटन यात्रा से थोड़ी अलग होती है। कई Mountains पर कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, कुछ जगहों पर मौसम तेजी से बदलता है और कई स्थानों पर स्थानीय धार्मिक नियमों का पालन करना जरूरी होता है। आज के इस लेख में हम दुनिया के ऐसे ही 7 पवित्र Mountains के बारे में जानेंगे, जिनकी पहचान केवल उनकी ऊंचाई से नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी आस्था और इतिहास से भी है। कैलाश Mountain: चार धर्मों के लिए पवित्र स्थान तिब्बत में स्थित कैलाश Mountain दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पवित्र Mountains में गिना जाता है। इसकी ऊंचाई करीब 6,638 मीटर है और यह हिमालय के तिब्बती क्षेत्र में स्थित है। हिंदू धर्म में कैलाश को भगवान शिव का निवास माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव माता पार्वती के साथ इसी Mountain पर निवास करते हैं। इसी वजह से भारत और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु कैलाश की यात्रा करना चाहते हैं। कैलाश का महत्व केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है। बौद्ध धर्म में भी इसे बहुत पवित्र माना जाता है। तिब्बती बौद्ध परंपरा में इसे कांग रिनपोछे यानी कीमती बर्फीला रत्न कहा जाता है। जैन धर्म की मान्यता के अनुसार पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने कैलाश क्षेत्र से जुड़े अष्टापद Mountain पर मोक्ष प्राप्त किया था। वहीं तिब्बत की प्राचीन बोन परंपरा में भी इस क्षेत्र को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कैलाश की सबसे अलग बात यह है कि श्रद्धालु इसकी चढ़ाई करने की बजाय इसके चारों ओर परिक्रमा करते हैं। इस परिक्रमा को कोरा कहा जाता है। लगभग 52 किलोमीटर की यह यात्रा पैदल पूरी की जाती है। ऊंचाई, ठंड और कठिन रास्तों की वजह से यह यात्रा आसान नहीं होती। कैलाश क्षेत्र के आसपास मानसरोवर झील भी स्थित है, जिसे हिंदू और बौद्ध परंपराओं में पवित्र माना जाता है। झील, बर्फ से ढकी चोटियां और खुला पहाड़ी इलाका इस पूरी यात्रा को बेहद खास बनाते हैं। कैलाश जाने वाले यात्रियों को परमिट, यात्रा की अनुमति और स्थानीय नियमों की जानकारी पहले से लेनी पड़ती है। यह क्षेत्र तिब्बत में आता है, इसलिए यहां की यात्रा सामान्य घरेलू टूर जैसी नहीं होती। एडम्स पीक: एक Mountain और चार धार्मिक मान्यताएं श्रीलंका में स्थित एडम्स पीक को स्थानीय भाषा में श्री पादा भी कहा जाता है। यह जगह अपने धार्मिक महत्व और Mountain की चोटी पर बने एक खास पदचिह्न के कारण दुनिया भर में जानी जाती है। इस पदचिह्न को लेकर अलग-अलग धर्मों की अलग मान्यताएं हैं। बौद्ध धर्म में इसे भगवान बुद्ध के पदचिह्न से जोड़ा जाता है। हिंदू परंपरा में इसे भगवान शिव के पदचिह्न के रूप में देखा जाता है। इस्लामी मान्यता में कुछ लोग इसे हजरत आदम से जोड़ते हैं। मान्यता है कि धरती पर आने के बाद आदम ने यहां अपना पहला कदम रखा था। कुछ ईसाई परंपराओं में भी इस Mountain को धार्मिक महत्व दिया जाता है। यही वजह है कि एडम्स पीक अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए खास बन गया है। एडम्स पीक की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसकी चढ़ाई है। यहां तक पहुंचने के लिए हजारों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ज्यादातर श्रद्धालु रात में चढ़ाई शुरू करते हैं, ताकि सुबह सूर्योदय के समय Mountain की चोटी तक पहुंच सकें। सुबह की पहली रोशनी में आसपास के Mountains और घाटियों का नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। धार्मिक यात्रा के साथ-साथ यह अनुभव प्रकृति को करीब से देखने का मौका भी देता है। यहां की यात्रा के लिए दिसंबर से मई के बीच का समय आमतौर पर बेहतर माना जाता है। अगर आप एडम्स पीक जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आरामदायक जूते, हल्का सामान और पानी जरूर साथ रखें। माउंट सिनाई: मूसा से जुड़ी धार्मिक कहानी मिस्र के सिनाई प्रायद्वीप में स्थित माउंट सिनाई दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक Mountains में से एक है। इसे अरबी में जबल मूसा भी कहा जाता है। यह Mountain यहूदी, ईसाई और इस्लामी परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पैगंबर मूसा ने इसी क्षेत्र में ईश्वर से संवाद किया था और उन्हें दस आज्ञाएं प्राप्त हुई थीं। इसी धार्मिक इतिहास की वजह से हजारों वर्षों से यह इलाका श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। माउंट सिनाई की यात्रा करने वाले कई लोग रात में चढ़ाई शुरू करते हैं, ताकि सुबह सूर्योदय के समय Mountain की चोटी पर पहुंच सकें। इस Mountain की ऊंचाई करीब 2,285 मीटर है। रास्ते में पत्थरों वाली चढ़ाई और सीढ़ियां मिलती हैं। इस क्षेत्र में सेंट कैथरीन मठ भी स्थित है। यह ईसाई धर्म के पुराने और महत्वपूर्ण मठों में से एक माना जाता है। माउंट सिनाई जाने वालों को ध्यान रखना चाहिए कि यहां दिन और रात के मौसम में काफी अंतर हो सकता है। रात की चढ़ाई के लिए गर्म कपड़े और अच्छी ग्रिप वाले जूते रखना जरूरी है। माउंट सिनाई की खासियत यही है कि यहां यात्रा केवल Mountain के रास्ते पर चलने तक सीमित नहीं रहती। रास्ते में धार्मिक इतिहास, पुराना मठ और आसपास का रेगिस्तानी इलाका इस यात्रा को अलग अनुभव बनाते हैं। ओम Mountain: बर्फ में दिखाई देता है ॐ का आकार भारत-नेपाल सीमा के पास उत्तराखंड के पिथौरागढ़ क्षेत्र में स्थित ओम Mountain अपनी अनोखी प्राकृतिक आकृति के लिए जाना जाता है। इस Mountain की चट्टानी सतह पर बर्फ इस तरह जमती है कि वहां ॐ जैसा आकार दिखाई देता है। हिंदू धर्म में ॐ को बेहद पवित्र माना जाता है। इसे प्रार्थना, ध्यान और आध्यात्मिक साधना से जोड़ा जाता है।