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Top 7 National Parks in Assam

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बरसात का सीजन खत्म हो गया है और धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगा है, ऐसे में नेशनल पार्क्स भी जंगल सफारी और टूर के लिए खुल गए हैं। अगर आप अभी किसी अच्छे से वीकेंड टूर की प्लानिंग कर रहे हैं तो जंगल सफारी और टूर आपके लिए एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है। नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। यहां आप शहरों से दूर जंगलों के बीच प्रकृति को महसूस करते हुए अपना एक अच्छा सा वीकेंड ट्रिप प्लान कर सकते हैं। आज के फाइव कलर्स आफ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताने वाले हैं असम के सभी नेशनल पार्क्स (National Parks in Assam) के बारे में, जहां आप अच्छे से बायोडायवर्सिटी को एक्सप्लोर कर सकते हैं और अपना वीकेंड एंजॉय कर सकते हैं। 1. काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) असम के सोनितपुर जिले में स्थित काजीरंगा नेशनल पार्क एक सिंग वाले गैंडे के लिए पूरी दुनिया भर में जाना जाता है। असम का यह काजीरंगा नेशनल पार्क हमेशा से हीं पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। यह नेशनल पार्क 430 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और पूरे भारत में पाए जाने वाले 90% गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में ही पाए जाते हैं। लेकिन काजीरंगा नेशनल पार्क इन गैंडों के अतिरिक्त अन्य कई जानवरों का आशियाना है। जिनमें मुख्यतः बाघ, हाथी, पैंथर, जंगली भैंसे, भालू और अन्य कई प्रकार की पक्षियाँ शामिल हैं। कैसे पहुंचे काजीरंगा नेशनल पार्क (How to reach Kaziranga National Park)?  2. मानस नेशनल पार्क (Manas National Park) असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है। मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। कैसे पहुंचे मानस नेशनल पार्क (How to reach Manas National Park)?  3. नामेरी नेशनल पार्क (Nameri National Park) नामेरी राष्ट्रीय उद्यान हिमालय की तलहटी में बसा हुआ एक नेशनल पार्क है जो, असम के सोनितपुर जिले में स्थित है। यह नेशनल पार्क एक टाइगर रिजर्व भी है जो असम में मानस टाइगर रिजर्व के बाद दूसरा है। नामेरी नेशनल पार्क लगभग 210 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1998 में हुई थी। नामेरी राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), जंगली हाथी (Wild Elephant), क्लाउडेड लेपर्ड (Clouded Leopard), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), जंगली सुअर (Wild Pig) आदि शामिल है। कैसे पहुंचे नामेरी राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Nameri National Park)? 4. ओरांग राष्ट्रीय उद्यान (Orang National Park) ओरांग राष्ट्रीय उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित एक नेशनल पार्क है जो, असम के darang और सोनितपुर जिले में स्थित है। ओरांग नेशनल पार्क लगभग 300 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 1985 में हुई थी। सर्वप्रथम ओरांग राष्ट्रीय उद्यान को 1985 में वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया था। इसके पश्चात 13 अप्रैल 1999 को इसे नेशनल पार्क घोषित किया गया। ओरांग राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे बंगाल टाइगर (Bengal Tiger), एशियाई एलीफैंट (Asian Elephant), पिग्मी हॉग (Pygmy Hog), भारतीय गैंडा (Indian Rhinoceros), वाइल्ड वॉटर बफैलो (Wild Water Buffalo) आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ मछलियों की 50 से अधिक प्रजातियां पायी जाती है। कैसे पहुंचे ओरांग राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Orang National Park)? 5. रायमोना नेशनल पार्क (Raimona National Park) रायमोना राष्ट्रीय उद्यान असम का छठा नेशनल पार्क है जो, असम के कोकराझार जिले में स्थित है। इस राष्ट्रीय उद्यान की सीमा क्षेत्र इंडो-भूटान बॉर्डर और पश्चिम बंगाल की राज्य सीमा से लगती है। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे एशियाई हाथी (Asian Elephant), रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), क्लाउडेड तेंदुआ (Clouded Leopard), हॉर्नबिल (Hornbill), चित्तीदार हिरण (Spotted Deer), भारतीय गौर (Indian Gaur), वाइल्ड वॉटर बफैलो (Wild Water Buffalo), आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ पक्षियों की 170 से अधिक प्रजातियां तथा तितलियों की 150 से अधिक प्रजातियां निवास करती है। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान की प्रसिद्धि का कारण यह है कि, यहाँ गोल्डन लंगूर पाए जाते है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते है। वही अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ वनस्पतियों की लगभग 380 प्रजातियाँ पायी जाती हैं। कैसे पहुंचे रायमोना राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Raimona National Park)? 6. डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क (Dibru-Saikhowa National Park) यह राष्ट्रीय उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित एक नेशनल पार्क है जो, असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले में स्थित है। डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क लगभग 340 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। ब्रह्मपुत्र और लोहित नदी उत्तर में एवं डिब्रू नदी इस पार्क के दक्षिण में बहती है। डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना निवास करते है जिनमे स्तनधारियों की कुल 36 प्रजातियाँ पायी जाती है। इनमे रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), स्पॉटेड तेंदुआ (Spotted Leopard), तेंदुआ (Leopard), स्लॉथ बीयर (Sloth Bear), जंगली बिल्ली (Wild Cat), जंगली घोड़ा (Wild Horse), एशियाई हाथी (Asian Elephant) आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ पक्षियों की 350 से अधिक प्रजातियां रहती है। कैसे पहुंचे डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Dibru-Saikhowa National Park)? 7. देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान (Dehing Patkai National Park) देहिंग पटकाई राष्ट्रीय उद्यान असम में एक नेशनल पार्क है जो, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले में स्थित है। देहिंग पटकाई नेशनल पार्क लगभग 231 वर्ग किलोमीटर के

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जंगली बिल्लियों की सात अलग-अलग प्रजातियों का घर है दिहिंग पाटकाई नेशनल पार्क

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दिहिंग पाटकाई राष्ट्रीय उद्यान (Dehing Patkai National Park) असम में एक नेशनल पार्क है जो, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले में स्थित है। दिहिंग पाटकाई नेशनल पार्क लगभग 231 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी स्थापना 2004 में हुई थी। सर्वप्रथम, दिहिंग पाटकाई राष्ट्रीय उद्यान को 13 जून 2004 को वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया था। इसके पश्चात 13 दिसंबर 2020 को इसे नेशनल पार्क घोषित किया गया। इस नेशनल पार्क को एलीफैंट प्रोजेक्ट के तहत एक एलीफैंट रिजर्व घोषित कर दिया गया था। देहिंग पटकाई नेशनल पार्क भारत में तराई वाले भागों में वर्षावनों का सबसे बड़ा क्षेत्र है। यह भारत का एकमात्र नेशनल पार्क है जहाँ वाइल्ड कैट्स की सात अलग-अलग प्रजातियां रहती है, जिसमें टाइगर, लेपर्ड, क्लाउडेड तेंदुआ, लेपर्ड कैट, गोल्डन कैट, जंगली बिल्ली और मार्बल कैट शामिल हैं। फॉउना (Fauna in Dehing Patkai National Park) दिहिंग पाटकाई राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे पक्षियों की 293 प्रजातियां, मछलियों की 50 प्रजातियां, रेप्टाइल्स की 47 प्रजातियां, मैमल्स की 50 प्रजातियां और तितलियों की 310 प्रजातियां शामिल है। यहाँ प्रमुख रूप से स्टंप-टेल्ड मकाक (Stump-tailed macaque), पिग-टेल्ड मकाक (pig-tailed macaque), मलायन सन भालू (Malayan sun bear), एशियाई जंगली कुत्ता (Asian wild dog), छोटे दांतों वाला पाम सिवेट (small-toothed palm civet), चाईनीज पैंगोलिन (Chinese pangolin), क्रैब ईटिंग मोंगूज़ (crab-eating mongoose), हिमालयी काला भालू (Himalayan black bear), बिंटूरोंग (Binturong), एशियाई सुनहरी बिल्ली (Asian golden cat), तेंदुआ बिल्ली (leopard cat), जंगल बिल्ली (Jungle cat), स्लो लोरिस (slow loris), असमिया मकाक (Assamese macaque), हूलॉक गिब्बन (hoolock gibbon), कैप्ड लंगूर (capped langur) और रीसस बंदर (rhesus monkey) पाए जाते है। फ्लोरा (Flora in Dehing Patkai National Park) वही अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ पेड़ों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- ओउ-टेंगा (Ou–tenga), मेकाई (Mekai), होलोंग (Hollong), उरीयम (Uriyam), नाहोर (Nahor), धूना (Dhuna), भर (Bhar), होलॉक (Hollock) और चामकोटखाल (Chamkotkhal)। यहाँ लकड़ियों की कुछ महत्वपूर्ण किस्में भी पायी जाती है जिनमे मेसुआ फेरिया (Mesua ferrea), शोरिया असामिका (Shorea assamica), डिप्टरोकार्पस मैक्रोकार्पस (Dipterocarpus macrocarpus), अमोरा वालिची (Amoora wallichii), कास्टानोप्सिस इंडिका (Castanopsis indica), डायसॉक्सिलम बिनेक्टीफ़ेरम (Dysoxylum binectiferum) और वेटिका लांसएफ़ोलिया (Vatica lanceaefolia) शामिल है। बेस्ट टाइम टू विजिट दिहिंग पाटकाई राष्ट्रीय उद्यान (Best time to visit Dehing Patkai National Park) यह राष्ट्रीय उद्यान साल के बारहों महीने खुला रहता है। आप यहाँ किसी भी महीने में आ सकते है। लेकिन अगर आप यहाँ माइग्रेटरी बर्ड्स (Migratory Birds) की ज्यादा प्रजातियाँ देखना चाहते है तो आप विंटर और स्प्रिंग (नवंबर से मार्च) में आने का कोशिश करें। क्योंकि इस समय ही माइग्रेटरी बर्ड्स यहाँ आते हैं। कैसे पहुंचे दिहिंग पाटकाई राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Dehing Patkai National Park)?

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सुनहरे लंगूरों का घर है रायमोना नेशनल पार्क

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नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। असम का यह रायमोना नेशनल पार्क (Raimona National Park) पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन आप यहां शहरों से दूर जंगलों के बीच प्रकृति को महसूस करते हुए अपना एक अच्छा सा वीकेंड ट्रिप प्लान कर सकते हैं। रायमोना नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान असम का छठा नेशनल पार्क है जो, असम के कोकराझार जिले में स्थित है। इस राष्ट्रीय उद्यान की सीमा क्षेत्र इंडो-भूटान बॉर्डर और पश्चिम बंगाल की राज्य सीमा से लगती है। 5 जून 2021 को पर्यावरण दिवस के अवसर पर असम के मुख्यमंत्री श्री हिमन्त बिश्व शर्मा के द्वारा घोषणा की गई जिसके तहत इस उद्यान को नेशनल पार्क घोषित कर दिया गया था। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान में फॉउना और फ्लोरा (Fauna and Flora in Raimona National Park) रायमोना राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते है जिनमे एशियाई हाथी (Asian Elephant), रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), क्लाउडेड तेंदुआ (Clouded Leopard), हॉर्नबिल (Hornbill), चित्तीदार हिरण (Spotted Deer), भारतीय गौर (Indian Gaur), वाइल्ड वॉटर बफैलो (Wild Water Buffalo), आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ पक्षियों की 170 से अधिक प्रजातियां तथा तितलियों की 150 से अधिक प्रजातियां निवास करती है। रायमोना राष्ट्रीय उद्यान की प्रसिद्धि का कारण यह है कि, यहाँ गोल्डन लंगूर पाए जाते है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते है। वही अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ वनस्पतियों की लगभग 380 प्रजातियाँ पायी जाती हैं। कैसे पहुंचे रायमोना राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Raimona National Park)?

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पक्षियों की 350 से अधिक प्रजातियां का निवास स्थल है असम का डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क

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नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी (Rich Biodiversity) देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। असम का यह डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क (Dibru-Saikhowa National Park) पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन आप यहां शहरों से दूर जंगलों के बीच प्रकृति को महसूस करते हुए अपना एक अच्छा सा वीकेंड ट्रिप (Weekend Trip) प्लान कर सकते हैं। डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ (Wildlife) की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। यह राष्ट्रीय उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित एक नेशनल पार्क है जो, असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिले में स्थित है। डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क लगभग 340 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। ब्रह्मपुत्र और लोहित नदी उत्तर में एवं डिब्रू नदी इस पार्क के दक्षिण में बहती है। इतिहास (History of Dibru-Saikhowa National Park) डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान को 1995 में वन्य जीव अभयारण्य घोषित किया गया। इसके पश्चात 1997 में इसे बायोस्फियर रिजर्व बनाने की घोषणा की गयी जिसमे इस 765 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाले उद्यान को दो भागों में बाँट दिया गया। कोर जोन क्षेत्र (340 वर्ग किमी) और बफर जोन क्षेत्र (425 वर्ग किमी)। इसके बाद में कोर जोन क्षेत्र को 1999 में नेशनल पार्क का दर्जा दे दिया गया। फॉउना (Faunas in Dibru-Saikhowa National Park) डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना निवास करते है जिनमे स्तनधारियों की कुल 36 प्रजातियाँ पायी जाती है। इनमे रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger), स्पॉटेड तेंदुआ (Spotted Leopard), तेंदुआ (Leopard), स्लॉथ बीयर (Sloth Bear), जंगली बिल्ली (Wild Cat), जंगली घोड़ा (Wild Horse), एशियाई हाथी (Asian Elephant) आदि शामिल है। इसके अलावा यहाँ पक्षियों की 350 से अधिक प्रजातियां रहती है। फ्लोरा (Floras in Dibru-Saikhowa National Park) अगर बात की जाए फ्लोरा की तो, यहाँ आर्किड वनस्पतियों की अनेक प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमे से कुछ प्रमुख निम्नलिखित है- सैलिक्स टेट्रास्पर्मा (Salix tetrasperma), बिशोफिया जावानिका (Bischofia javanica), डिलेनिया इंडिका (Dillenia indica), बॉम्बेक्स सीइबा (Bombax ceiba), टर्मिनलिया मायरियोकार्पा (Terminalia myriocarpa) और लेगरस्ट्रोमिया परविफ्लोरा (Lagerstroemia parviflora)। बेस्ट टाइम टू विजिट डिब्रू-सैखोवा नेशनल पार्क (Best time to visit Dibru-Saikhowa National Park) अगर आप यहाँ घूमने जाना चाहते है तो मानसून के समय यहाँ जाना के प्लानिंग से बचे क्योंकि मानसून में विज़िटर्स के लिए ये पार्क खुला नहीं होता है। इसका कारन यह है कि इस अवधि में यहाँ गर्मी और भारी बारिश होती है। आप यहाँ ठंड के महीनों (नवंबर से अप्रैल) में आ सकते है। कैसे पहुंचे डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Dibru-Saikhowa National Park)?

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एक ऐसा राष्ट्रीय उद्यान जो भारत और भूटान दोनों देशों में फैला हुआ है

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असम के मानस नदी के तट पर स्थित मानस नेशनल पार्क भारत और भूटान दोनों हीं देश में फैला हुआ है। मानस नदी भारत और भूटान के बॉर्डर पर बहती है, जिसके दोनों ओर घने जंगल बसे हैं। भारत में इस जंगल के भूभाग को मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता हैं। वहीं भूटान में फैले जंगल के क्षेत्र को रॉयल मानस नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता है।मानस नेशनल पार्क में वाइल्डलाइफ की बहुत सारी प्रजातियां आपको देखने को मिलेंगी। नॉर्थ ईस्ट में फेवरेबल कंडीशन होने के कारण यहां रिच बायोडायवर्सिटी देखने को मिलती है और यहीं वजह है कि यहां कई सारे नेशनल पार्क्स हैं। असम का यह मानस नेशनल पार्क पर्यटकों के बीच बहुत ज्यादा पॉपुलर नहीं है लेकिन इसे भी यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में स्थान दिया गया है। यहां आप शहरों से दूर जंगलों के बीच प्रकृति को महसूस करते हुए अपना एक अच्छा सा वीकेंड ट्रिप प्लान कर सकते हैं। लगभग 500 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ यह नेशनल पार्क भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित असम का प्रमुख नेशनल पार्क है। ब्रह्मपुत्र नदी इस नेशनल पार्क की जीवन दायिनी नदी है। मानस नेशनल पार्क का इतिहास (History of Manas National Park) सबसे पहले मानस नेशनल पार्क को वर्ष 1928 में एक सेंचुरी डिक्लेयर किया गया था। 1973 ई. में इसे बायो रिजर्व क्षेत्र घोषित कर दिया गया। 1990 में इस क्षेत्र को नेशनल पार्क की उपाधि दी गई और इस वन क्षेत्र का नाम मानस नेशनल पार्क पड़ गया। मानस नेशनल पार्क में जंगल सफारी (Jungle safari in manas national park)मानस नेशनल पार्क में अगर आप जंगल सफारी करना चाहते हैं तो यहां जंगल सफारी के दो ऑप्शन उपलब्ध हैं। पहला जीप सफारी और दूसरा एलिफेंट सफारी। जीप सफारी (Jeep Safari)अगर आप भारतीय हैं और बाँसबाड़ी जोन में जंगल सफारी करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको 4500 रुपए पर जीप खर्च करना होगा। वहीं भुईयांपाड़ा जॉन के लिए आपको ₹5500 पर जीप पे करना होगा। अगर बात किया जाए विदेशी पर्यटकों की तो विदेशी पर्यटकों को बाँसबाड़ी जोन में जंगल सफारी करने के लिए ₹8000 पर जीप पे करना होता है। वहीं भुईयांपाड़ा जोन में उनकाे ₹9000 पर जीप पे करना होता है। एक जीप को एक बार में पांच आदमी के लिए बुक किया जा सकता है।अगर बात करें जीप सफारी की टाइमिंग की तो यहां हर दिन तीन टाइम जीप सफारी करवाई जाती है। पहला सुबह के 6:30 से 9:30 तक, दूसरा सुबह के 10:00 से दोपहर के 1:00 तक और तीसरा दोपहर के 2:00 से शाम के 5:00 बजे तक। अगर आप यहां जंगल सफारी करने आ रहे हैं तो आप अपने हिसाब से जंगल सफारी की टाइमिंग सेट कर सकते हैं। एलिफेंट सफारी (Elephant Safari) मानस नेशनल पार्क में एलिफेंट सफारी सिर्फ बाँसबाड़ी जोन में करवाई जाती है अगर आप एलिफेंट सफारी करना चाह रहे हैं तो इसके लिए टिकट की प्राइस भारतीय पर्यटकों के लिए 1450 रुपए प्रति व्यक्ति और विदेशियों के लिए ₹3200 प्रति व्यक्ति होता है। एलिफेंट सफारी का यह टिकट 1 घंटे के लिए मान्य होता है। मानस नेशनल पार्क में एलिफेंट सफारी की टाइमिंग सुबह के समय ही होती है। आप यहां सुबह के 6:00 बजे से 7:00 बजे तक और 7:00 बजे से 8:00 बजे तक इस एलिफेंट सफारी का लुफ्त उठा सकते हैं।मानस नेशनल पार्क में चार तरह के टूर पैकेज उपलब्ध करवाए जाते हैं। अगर आप मानस नेशनल पार्क घूमना चाहते हैं तो आप अपनी सुविधा अनुसार इन टूर पैकेज में से किसी एक टूर पैकेज का चयन कर सकते हैं। मानस नेशनल पार्क के टूर पैकेजों के बारे में जानकारी निम्नांकित है : मानस नेशनल पार्क जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Manas National Park) अगर आप वाइल्डलाइफ को पसंद करते हैं और वाइल्डलाइफ को एक्सप्लोर करने के लिए अगर आप मानस नेशनल पार्क जा रहे हैं तो मानसून के समय जाने से बचें। क्योंकि मानसून के समय पूर्वोत्तर भारत में बहुत अधिक बारिश होने के कारण बाढ़ की समस्या उत्पन्न हो जाती है। जिसके कारण आपका पूरा का पूरा टूर प्लान खराब हो सकता है। इससे बचने के लिए आप अक्टूबर से मार्च तक के समय का चयन कर सकते हैं। क्योंकि इस समय बारिश की संभावना कम होती है और मौसम भी ठंडा होता है। कैसे पहुंचे मानस नेशनल पार्क (How to reach Manas National Park) मानस नेशनल पार्क पहुंचने के लिए आप सड़क रेल और हवाई तीनों ही मार्गों का उपयोग कर सकते हैं। अगर आप हवाई मार्ग से मानस नेशनल पार्क पहुंचना चाह रहे हैं तो आपको सबसे पहले गुवाहाटी एयरपोर्ट पहुंचना होगा। जो कि असम की राजधानी गुवाहाटी में स्थित है और देश के प्रमुख शहरों से बहुत ही अच्छे तरीके से फ्लाइट से कनेक्टेड है। अगर आपके शहर से यहां की डायरेक्ट फ्लाइट नहीं मिल रही है तो आप कनेक्टिंग फ्लाइट के जरिए अभी यहां पहुंच सकते हैं।रेल मार्ग से यहां पहुंचने के लिए सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन बरपेटा रेलवे स्टेशन है जो मानस नेशनल पार्क से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां से आप बहुत ही आसानी से मानस नेशनल पार्क पहुँच सकते हैं। बरपेटा रेलवे स्टेशन देश के अन्य राज्यों के रेलवे स्टेशनों से बहुत ही अच्छे तरीके से जुड़ा है।अगर आप मानस नेशनल पार्क जाने के लिए सड़क मार्ग का उपयोग करना चाहते हैं तो आसपास के शहरों से यहां आप आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके अलावा दूर के शहरों से भी आप यहां अपनी पर्सनल गाड़ी या कैब का उपयोग करके आ सकते हैं। सिलीगुड़ी गलियारा के द्वारा बड़े ही आसानी से मानस नेशनल पार्क तक पहुंचा जा सकता है।