Destination Travel

मांगी तुंगी- जो दिखती है ‘द ग्रेट वॉल आफ चाइना’ की तरह

  • 0 Comments

क्या आपको पता है इंडिया में भी ‘द ग्रेट वॉल आफ चाइना’ के जैसी ही एक वॉल है? जी हां आपने कुछ भी गलत नहीं पढ़ा है! यह सच है कि भारत में भी द ग्रेट वॉल आफ चाइना के जैसी ही एक इमारत है। आज के इस ब्लॉग में हम इसी वॉल के बारे में आपको बताएंगे। इस वॉल का नाम है मांगी तुंगी पिनेकल्स। जैन धर्म के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक मांगी तुंगी पिनेकल्स महाराष्ट्र के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है। जिसे एक्सप्लोर करने दूर-दूर से पर्यटक यहां घूमने आते हैं।असल में मांगी और तुंगी सह्याद्री के पहाड़ियों की दो चोटियां है जिन्हें जोड़ने के लिए सीढ़ियां बनाई गई हैं। जो दूर से देखने पर बिल्कुल ‘द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना’ के जैसी दिखाई देती है। मांगी तुंगी पिनेकल्स तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का निर्माण करवाया गया है। अगर सीढ़ियों के संख्या की बात की जाए तो इन सीढ़ियों की संख्या लगभग 3500 से भी ज्यादा है। जिसे चढ़ने में आपको दो से तीन घंटे का समय लग सकता है। लेकिन इन सीढ़ियों को चढ़ते हुए आपको जरा भी थकान का एहसास नहीं होगा। क्योंकि इन सीढ़ियों के दोनों ओर दिखने वाले खूबसूरत नजारे किसी के भी थकान को पल भर में गायब करने के सक्षम हैं। इन खूबसूरत नजारों को देखने के बाद और ज्यादा उत्सुकता होती है कि अगर यह रास्ता इतना खूबसूरत है तो पीक पर पहुंचने के बाद का नजारा कितना खूबसूरत होगा? …और यही सवाल पर्यटकों को थकने नहीं देता है और आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट करता है। मांगी तुंगी ट्रेक पर जाने के लिए दो रास्ते जाते हैं। जिसमें एक रास्ता पैदल ट्रैकिंग करने वालों के लिए है। जिसमें आपको 3500 सीढ़ियां चढ़नी पड़ेंगी। वहीं दूसरा रास्ता उन लोगों के लिए है जो गाड़ी से जाना चाहते हैं। लेकिन इस रास्ते में आप पूरी दूरी गाड़ी से कवर नहीं कर सकते हैं। इस रास्ते के जरिए आपको लास्ट के 1000 सीढ़ियों की चढ़ाई करनी होगी। मांगी तुंगी पिनेकल्स घूमने जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Mangi Tungi pinnacles) खासकर के जब भारत में मानसून की एंट्री होती है और इसके बाद धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगती है तो मांगी तुंगी पिनेकल्स पर कोहरे का साया मंडराने लगता है। अक्टूबर से मार्च तक के समय में मांगी तुंगी पिनेकल्स का यह नजारा देखने लायक होता है। अगर आप मांगी तुंगी पिनेकल्स को विजिट करना चाहते हैं तो, हमारा यह सुझाव होगा कि आप मानसून के बाद ही यहां आए। क्योंकि इस समय चारों ओर ग्रीनरी ही ग्रीनरी देखने को मिलती है। जिसके कारण  मांगी तुंगी पीक्स की खूबसूरती और भी ज्यादा निखर का सामने आती है। मांगी तुंगी पीक्स से दिखने वाले नजारे इतने खूबसूरत होते हैं कि कुछ पल के लिए खुद को भूलकर उसे मूमेंट में ठहर जाने का दिल चाहता है। सनराइज और सनसेट के समय का लाल आकाश इस पिनेकल्स की खूबसूरती को और बढ़ा देता है। अगर आप नेचर लवर हो तो आपको इस ट्रेक के लिए जरूर जाना चाहिए। कैसे पहुंचे (How To Reach Mangi Tungi Pinnacles)? मांगी तुंगी नासिक शहर से लगभग 125 किलोमीटर, मुंबई से तकरीबन 280 किलोमीटर और पुणे शहर से लगभग 330 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से मांगी तुंगी पहुंचना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सबसे पहले ताराबाद टाउन पहुंचाना पड़ेगा। आप ताराबाद टाउन से नासिक टू नंदुरबार स्टेट बस के जरिए मांगी तुंगी के बेस विलेज यानी भीलवड़ विलेज तक पहुंच सकते हैं। यह बस आपको मांगी तुंगी ट्रैक के बिल्कुल गेट के पास उतारेगी। जहां से आप अपना ट्रेकिंग स्टार्ट कर सकते हैं। मांगी तुंगी पिनेकल्स पर बना मंदिर शाम के 3:00 बजे बंद हो जाता है। क्योंकि अंधेरा होने के कारण किसी भी दुर्घटना के होने के चांसेस बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं। इन्हीं दुर्घटनाओं को अवॉइड करने के लिए यहां पर 3:00 बजे शाम के बाद मंदिर बंद हो जाते हैं। जिसके बाद आपको वापस से लौटना होगा। आप मैक्सिमम तीन बजे तक यहां घूम सकते हैं। इस ट्रेक के लिए हमारी ओर से आपको एक सुझाव होगा कि आप जब भी मांगी तुंगी ट्रेक के लिए जाएं तो अपने साथ एक डंडा या फिर हाइकिंग पोल जरूर रखें। क्योंकि मांगी तुंगी ट्रेक के आसपास बंदरों की संख्या बहुत ज्यादा है। जो कि यहां आने वाले पर्यटकों के बैग पर झपट्टा मार देते हैं। उन बंदरों से बचने के लिए आप अपने पास एक छोटा सा लकड़ी का डंडा रख सकते हैं। आपके पास कुछ नहीं है तो घबराने वाली कोई बात नहीं है। इस ट्रेक के स्टार्टिंग पॉइंट पर हीं बहुत सारी कठिया मिलती हैं। जिन्हें आप ₹20 देकर खरीद सकते हैं। बेहतरीन है यहां की कलाकृति (The artwork here is excellent) मांगी तुंगी पिनेकल्स के पास आपको कई सारी गुफाएं देखने को मिलेंगी। जिनके अंदर जैन स्थापत्य कला के कई उदाहरण देखने को मिलते हैं। इनमें जैन धर्म से जुड़े लेख भी शामिल हैं। इसके अलावा वहां कई सारी मूर्तियां भी देखने को मिलती हैं जो जैन धर्म से ताल्लुकात रखती हैं। जब आप यह ट्रेक स्टार्ट करेंगे तो लगभग 250 सीढ़ियां चढ़ने के बाद आपको एक छोटा सा मंदिर देखने को मिलेगा जो बहुत हीं प्राचीन मंदिर है और जैन धर्म के भगवान मुनि शत नाथ से जुड़ा हुआ है। मांगी तुंगी की चोटियों पर पहाड़ियों को खोदकर तरह-तरह के मूर्तियों को उकेरा गया है। हजारों साल पुराने होने के बावजूद भी इन मूर्तियों की फिनिशिंग देखने लायक है। मांगी तुंगी के पिनेकल्स पर भगवान महावीर की गुफा, शांतिनाथ जैन दिगंबर और श्री मांगी गिरी के गुफा के साथ-साथ और कई सारी गुफाएं हैं। जिनके अंदर बहुत सी कलाकृतियों को उकेरा गया है। यहां स्थापित है भगवान ऋषभ गिरी देवता की सबसे ऊंची प्रतिमा (The tallest statue of Lord Rishabh Giri Devta is installed here) मांगी तुंगी ट्रैक पर हीं आपको भगवान ऋषभ गिरी देवता की प्रतिमा भी देखने को मिलती है। जो 108 फीट ऊंची है। इस प्रतिमा का इनॉग्रेशन 2016 में किया गया और इस प्रतिमा को बनाने में लगभग 22 साल लग गए। अगर आज के

Destination Travel

कुम्भे वॉटरफॉल : सह्याद्री की पहाड़ियों में बहता हुआ खूबसूरत झरना

  • 0 Comments

सह्याद्री की पहाड़ियों की असीम खूबसूरती दुनिया भर से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। पहाड़ियों की श्रृंखला में खतरनाक ट्रैकिंग डेस्टिनेशंस के साथ-साथ कुछ ऐतिहासिक किले और कई सारे प्राकृतिक झरने भी हैं जो पर्यटकों के मनमोहन में सक्षम है। यहां एडवेंचर टूरिज्म से लेकर रिलिजियस टूरिज्म तक के लिए हर तरह के पर्यटन स्थल मौजूद हैं। आज के इस ब्लॉग में मैं सह्याद्री के इन्हीं पहाड़ियों को चीर कर बहने वाली एक खूबसूरत झरने के बारे में बताने वाली हूंँ जिसका नाम है कुम्भे वॉटरफॉल। कैसे पहुँचे (How to reach)? सह्याद्री की पहाड़ियों में बहता कुम्भे वॉटरफॉल महाराष्ट्र के मानगांव में स्थित है। जवाब मानगांव से छोटे पगडंडियों के जरिए इस झरने की ओर कदम बढ़ाएंगे तो दूर से ही आपके कानों में इस झरने की कौतुहलता घुलने लगेगी। मानगांव पहुंचने के लिए आप अगर बाय रोड जाना चाहते हैं तो मानगांव बस स्टॉप तक बस की सुविधा उपलब्ध हो जाती है। वहीं अगर वाया ट्रेन मानगांव पहुंचाना चाहते हैं तो मानगांव में एक रेलवे स्टेशन भी है। जिसका नाम मानगांव रेलवे स्टेशन है। हवाई हवाई रूट के जरिए ट्रेवल करने के शौकीन लोगों के लिए कुम्भे वॉटरफॉल से सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पुणे हवाई अड्डा है। जो कुम्भे वॉटरफॉल से लगभग 126 किलोमीटर दूर स्थित है और यह एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। कुम्भे वॉटरफॉल के इस असीम खूबसूरती को देखने के लिए दुनिया भर के अलग-अलग कोने से पर्यटक यहां घूमने आते हैं। यहां अक्सर लोग पिकनिक मनाने, ट्रैकिंग करने और कैंप लगाने के लिए आते हैं। अगर आप नेचर को पसंद करने वाले हैं तो आपको यह जगह बहुत ही पसंद आने वाला है। नेचर फोटोग्राफी करने वाले लोगों के लिए भी कुम्भे वॉटरफॉल एक बेहतरीन फोटोग्राफी डेस्टिनेशन है। जहां से वह प्रकृति की खूबसूरती को बहुत ही बेहतरीन तरीके से अपने कैमरे में कैद कर सकते हैं। कुम्भे वॉटरफॉल जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Kumbhe Waterfall)? वैसे तो कुम्भे वॉटरफॉल्स घूमने कभी भी जा सकते हैं, लेकिन यहां जाने का सबसे सही समय मानसून का होता है। क्योंकि इस समय वॉटरफॉल में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। साथ ही इस समय आसपास ग्रीनरी भी देखने को मिलता है। जिसके कारण वॉटरफॉल की खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं। मानसून में झरने में पानी की मात्रा बढ़ जाने के कारण झरना और भी तेज गति से आगे बढ़ता है। जब आप पहाड़ियों के बीच से झरने को बहता हुआ देखेंगे तो यकीन मानिए इसकी खूबसूरती देखकर कुछ पल के लिए आपको भी ऐसा ही लगेगा कि जैसे इससे खूबसूरत और क्या हीं हो सकता है? बड़े शहरों के शोर शराबे से दूर प्रकृति की गोद में बहते हुए इस झरने के बारे में आज भी बहुत कम लोग जानते हैं। इस वजह से  यहां ज्यादा लोगों की आवाजाही नहीं होती है। यही वजह है कि यहां आप बहुत ही शांत माहौल में पिकनिक मना सकते हैं। अगर आप कुछ समय के लिए अपने काम से ब्रेक लेकर किसी प्राकृतिक पर्यटन स्थल को घूमना चाहते हैं तो कुम्भे वॉटरफॉल इसके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन हो सकता है, क्योंकि यहां आपकी प्राइवेसी में दखल देने वाला कोई नहीं होता है। आप बहुत ही आराम से यहां अपनी छुट्टियां बिता सकते हैं। साथ ही ट्रैकिंग और कैंपिंग के जरिए आप अपनी छुट्टी को और भी ज्यादा रोमांचक बना सकते हैं।