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दिल्ली वालों को लुभाते हैं हरियाणा के ये पिकनिक स्पॉट, आप भी हो जाएंगे यहाँ के मुरीद

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हरियाणा अपने स्पिरिचुअल और हिस्टोरिकल वैल्यूज (Spiritual and Historical Values) के लिए फेमस है और यहां की खूबसूरती आसपास के शहरों से पर्यटकों को आकर्षित करती है। राजधानी दिल्ली से नजदीक होने के कारण अक्सर दिल्ली के लोग पिकनिक मनाने यहां आया करते हैं। यहां के फेमस टूरिस्ट प्लेसेस (Famous Tourist Places) की अगर बात की जाए तो उनमें यहाँ के दो नेशनल पार्क, मोरनी हिल्स और फरीदाबाद का नाम भी आता है जो पर्यटकों को आकर्षित करतें है। आज के फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताएँगे इन्ही जगहों के बारें में जहाँ आप नेचर को एक्सप्लोर कर सकते हैं। (Tourist places in Haryana) 1. सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान (Sultanpur National Park) सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान हरियाणा के सुल्तानपुर, फारुखनगर और गुरुग्राम जिले में स्थित भारत का एक प्रसिद्ध बर्ड अभयारण्य है। यह नेशनल पार्क सुल्तानपुर में स्थित है जिसके कारण इस उद्यान को सुल्तानपुर पक्षी विहार भी कहा जाता है। यह नेशनल पार्क लगभग 142 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस पक्षी विहार में हजारों की संख्या में लुप्तप्राय और दुर्लभ पक्षी पाए जाते है। यहाँ पाए जाने वाले पक्षियों में पेलिकन, साइबेरियाई सारस, काले पंखों वाला स्टिल्ट, जलकाग, पैडीफील्ड पिपिट, लिटिल कॉर्मोरेंट, इंडियन कॉर्मोरेंट, पर्पल सनबर्ड, ब्लैक फ्रैंकोलिन, कॉमन स्पूनबिल, कॉमन हूपो, ग्रे फ्रैंकोलिन, इंडियन रोलर, व्हाइट आइबिस, व्हाइट-थ्रोटेड किंगफिशर, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, इंडियन स्पॉट-बिल्ड डक, पेंटेड सारस, कॉमन ग्रीनशैंक्स, कुरजां आदि कुछ ऐसे प्रमुख प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां हैं जो इस नेशनल पार्क में आपको अवश्य मिल जायेंगे। कैसे पहुंचे सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Sultanpur National Park)? सुल्तानपुर नेशनल पार्क, गुड़गाँव-झज्जर हाईवे पर फर्रुखनगर के नजदीक स्थित है। दिल्ली एनसीआर में होने के कारण सुल्तानपुर नेशनल पार्क वीकेंड बिताने का एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। आप दिल्ली मेट्रो से यहाँ आना चाहें तो येलो लाइन से हुडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन पर पहुँच कर, वहां से कोई निजी कैब या ऑटो बुक करके आप इस खूबसूरत पक्षी विहार तक पहुँच सकते हैं। अगर आप गुड़गाँव से जाएँ तो यह लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर है और दिल्ली से लगभग 42 किलोमीटर की दूरी पर। 2. मोरनी हिल्स (Morni Hills)  मोरनी हिल्स (Morni Hills) को हरियाणा का एकमात्र हिल स्टेशन माना जाता है, जो कि अपने स्पिरिचुअल और हिस्टोरिकल वैल्यूज (Spiritual and Historical Values) के लिए फेमस है। यहां की खूबसूरती आसपास के शहरों से पर्यटकों को आकर्षित करती है। राजधानी दिल्ली से नजदीक होने के कारण अक्सर दिल्ली के लोग पिकनिक मनाने यहां आया करते हैं। यहां के फेमस टूरिस्ट अट्रैक्शन (Famous Tourist Attraction) की अगर बात की जाए तो उनमें मोरनी फोर्ट का नाम सबसे पहले आता है। इसके अलावा यहां एडवेंचर पार्क और टिक्कर ताल भी है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है। कैसे पहुंचे मोरनी हिल्स (How to reach Morni Hills)? मोरनी हिल्स पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले चंडीगढ़ पहुंचना होगा। चंडीगढ़ से मोरनी हिल्स की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है और यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट चंडीगढ़ एयरपोर्ट है। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन मोरनी हिल्स का नजदीकतम रेलवे स्टेशन है। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद अगर आप वहां से बस लेकर मोरनी हिल जाना चाहेंगे तो आपको चंडीगढ़ से मोरनी हिल्स के लिए डायरेक्ट बसें भी मिल जाएंगी। इसके अलावा आप अपनी सुविधा अनुसार टैक्सी भी कर सकते हैं। 3. फरीदाबाद (Faridabad) फरीदाबाद हरियाणा का एक ऐसा शहर है जहाँ आपको एक हिल स्टेशन की वाइब आएगी। फरीदाबाद के बारे में अगर बात की जाए तो यह एक इंडस्ट्रियल एरिया (Industrial Area) है और बीते कुछ सालों में एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में भी उभर रहा है। अब तो इस शहर को मिनी हिल स्टेशन भी कहा जाने लगा है। फरीदाबाद आपके लिए सबसे बेस्ट विजिटिंग ऑप्शन हो सकता है। क्योंकि यह शहर दिल्ली एनसीआर (Delhi NCR) का हिस्सा है और एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। अगर आप भी फरीदाबाद जाना चाहते हैं तो फरीदाबाद में घूमने लायक जगह के बारे में जानना आपके लिए बहुत ही जरूरी है। फरीदाबाद में बहुत सी ऐसी जगहें हैं जहां आप अपने पिकनिक के लिए या फिर वीकेंड (weekend) के लिए जा सकते हैं।फरीदाबाद के मुख्य पर्यटन स्थल निम्नलिखित हैं : राजा नाहर सिंह पैलेस (Nahar Singh’s Palace), इस्कॉन टेंपल फरीदाबाद (Isckon Temple Faridabaad), सूरजकुंड (Surajkund), टाउन पार्क (Town Park) कैसे पहुंचे फरीदाबाद (How to reach Faridabad)? फरीदाबाद पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले दिल्ली पहुंचना होगा। दिल्ली से फरीदाबाद की दूरी लगभग 28 किलोमीटर है और यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। फरीदाबाद रेलवे स्टेशन फरीदाबाद का नजदीकतम रेलवे स्टेशन है। दिल्ली पहुंचने के बाद अगर आप वहां से बस लेकर फरीदाबाद जाना चाहेंगे तो आपको दिल्ली से फरीदाबाद के लिए डायरेक्ट बसें भी मिल जाएंगी। इसके अलावा आप अपनी सुविधा अनुसार टैक्सी भी कर सकते हैं। आप दिल्ली मेट्रो के कश्मीरी गेट स्टेशन से राजा नाहर सिंह पैलेस पहुंच सकते है। 4. कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (Kalesar National Park) चंडीगढ़ से 122 किलोमीटर दूर हरियाणा के यमुनानगर जिले में कालेसर राष्ट्रीय उद्यान और कालेसर वन्यजीव अभ्यारण्य (Kalesar Wildlife Sanctuary) है जो अपने नेचुरल डाइवर्सिटी (Natural Diversity) के लिए अपने आसपास के क्षेत्र में प्रसिद्ध है। कालेसर राष्ट्रीय उद्यान और कालेसर वन्यजीव अभ्यारण्य क्रमशः 53 वर्ग किमी और 53.45 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है और इन दोनों की स्थापना क्रमशः 8 दिसंबर 2003 और 13 दिसंबर 1996 को हुई थी। इस नेशनल पार्क का नाम कालेसर महादेव मंदिर के नाम पर रखा गया था जो इसी राष्ट्रीय उद्यान में है। यहाँ पाए जाने वाले जीवों में एशियाई हाथी (Asian Elephant), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), लेपर्ड कैट (Leopard Cat), वाइल्ड कैट (Wild Cat), चीतल (Chital), रस्टी-स्पॉटेड कैट (Rusty-spotted Cat), नीलगाय (Nilgai), सांभर (Sambar), आदि शामिल है। कैसे पहुंचे कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Kalesar National Park)? यमुनानगर पौंटा साहिब स्टेट हाईवे (NH 907) कालेसर नेशनल पार्क से होकर गुजरता है। कालेसर नेशनल पार्क सड़क मार्ग द्वारा प्रमुख शहरों (यमुनानगर, पोंटा और देहरादून) से जुड़ा हुआ है। इस नेशनल पार्क के पास में एक रेलवे स्टेशन है- ‘यमुनानगर रेलवे स्टेशन’ जहाँ से आप टैक्सी या बस लेकर कालेसर नेशनल पार्क पहुंच सकते है। हवाई मार्ग से आने

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Best National Parks of Haryana

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हरियाणा अपने स्पिरिचुअल और हिस्टोरिकल वैल्यूज (Spiritual and Historical Values) के लिए फेमस है और यहां की खूबसूरती आसपास के शहरों से पर्यटकों को आकर्षित करती है। राजधानी दिल्ली से नजदीक होने के कारण अक्सर दिल्ली के लोग पिकनिक मनाने यहां आया करते हैं। यहां के फेमस टूरिस्ट प्लेसेस (Famous Tourist Places) की अगर बात की जाए तो उनमें यहाँ के दो नेशनल पार्क्स का नाम भी आता है। इसके अलावा यहां मोरनी हिल्स, मोरनी फोर्ट, एडवेंचर पार्क और टिक्कर ताल भी है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है। आज के फाइव कलर्स ऑफ़ ट्रैवल के इस ब्लॉग में हम आपको बताएँगे इन दो नेशनल पार्क्स (National Parks of Haryana) के बारें में जहाँ आप नेचर को एक्सप्लोर कर सकते हैं। 1. सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान (Sultanpur National Park) सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान हरियाणा के सुल्तानपुर, फारुखनगर और गुरुग्राम जिले में स्थित भारत का एक प्रसिद्ध बर्ड अभयारण्य है। यह नेशनल पार्क सुल्तानपुर में स्थित है जिसके कारण इस उद्यान को सुल्तानपुर पक्षी विहार भी कहा जाता है। यह नेशनल पार्क लगभग 142 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है। इस पक्षी विहार में हजारों की संख्या में लुप्तप्राय और दुर्लभ पक्षी पाए जाते है। यहाँ पाए जाने वाले पक्षियों में पेलिकन, साइबेरियाई सारस, काले पंखों वाला स्टिल्ट, जलकाग, पैडीफील्ड पिपिट, लिटिल कॉर्मोरेंट, इंडियन कॉर्मोरेंट, पर्पल सनबर्ड, ब्लैक फ्रैंकोलिन, कॉमन स्पूनबिल, कॉमन हूपो, ग्रे फ्रैंकोलिन, इंडियन रोलर, व्हाइट आइबिस, व्हाइट-थ्रोटेड किंगफिशर, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, इंडियन स्पॉट-बिल्ड डक, पेंटेड सारस, कॉमन ग्रीनशैंक्स, कुरजां आदि कुछ ऐसे प्रमुख प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां हैं जो इस नेशनल पार्क में आपको अवश्य मिल जायेंगे। कैसे पहुंचे सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Sultanpur National Park)? सुल्तानपुर नेशनल पार्क, गुड़गाँव-झज्जर हाईवे पर फर्रुखनगर के नजदीक स्थित है। दिल्ली एनसीआर में होने के कारण सुल्तानपुर नेशनल पार्क वीकेंड बिताने का एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। आप दिल्ली मेट्रो से यहाँ आना चाहें तो येलो लाइन से हुडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन पर पहुँच कर, वहां से कोई निजी कैब या ऑटो बुक करके आप इस खूबसूरत पक्षी विहार तक पहुँच सकते हैं। अगर आप गुड़गाँव से जाएँ तो यह लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर है और दिल्ली से लगभग 42 किलोमीटर की दूरी पर। 2. कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (Kalesar National Park) चंडीगढ़ से 122 किलोमीटर दूर हरियाणा के यमुनानगर जिले में कालेसर राष्ट्रीय उद्यान और कालेसर वन्यजीव अभ्यारण्य (Kalesar Wildlife Sanctuary) है जो अपने नेचुरल डाइवर्सिटी (Natural Diversity) के लिए अपने आसपास के क्षेत्र में प्रसिद्ध है। कालेसर राष्ट्रीय उद्यान और कालेसर वन्यजीव अभ्यारण्य क्रमशः 53 वर्ग किमी और 53.45 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है और इन दोनों की स्थापना क्रमशः 8 दिसंबर 2003 और 13 दिसंबर 1996 को हुई थी। इस नेशनल पार्क का नाम कालेसर महादेव मंदिर के नाम पर रखा गया था जो इसी राष्ट्रीय उद्यान में है। यहाँ पाए जाने वाले जीवों में एशियाई हाथी (Asian Elephant), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), लेपर्ड कैट (Leopard Cat), वाइल्ड कैट (Wild Cat), चीतल (Chital), रस्टी-स्पॉटेड कैट (Rusty-spotted Cat), नीलगाय (Nilgai), सांभर (Sambar), आदि शामिल है। कैसे पहुंचे कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Kalesar National Park)? यमुनानगर पौंटा साहिब स्टेट हाईवे (NH 907) कालेसर नेशनल पार्क से होकर गुजरता है। कालेसर नेशनल पार्क सड़क मार्ग द्वारा प्रमुख शहरों (यमुनानगर, पोंटा और देहरादून) से जुड़ा हुआ है। इस नेशनल पार्क के पास में एक रेलवे स्टेशन है- ‘यमुनानगर रेलवे स्टेशन’ जहाँ से आप टैक्सी या बस लेकर कालेसर नेशनल पार्क पहुंच सकते है। हवाई मार्ग से आने के लिए इस नेशनल पार्क का निकटम एयरपोर्ट चंडीगढ़ (शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट) में है।

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दिल्ली के नजदीक घूमने के लिए बेस्ट है कालेसर नेशनल पार्क

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चंडीगढ़ से 122 किलोमीटर दूर हरियाणा के यमुनानगर जिले में कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (Kalesar National Park) और कालेसर वन्यजीव अभ्यारण्य (Kalesar Wildlife Sanctuary) है जो अपने नेचुरल डाइवर्सिटी (Natural Diversity) के लिए अपने आसपास के क्षेत्र में प्रसिद्ध है। कालेसर राष्ट्रीय उद्यान और कालेसर वन्यजीव अभ्यारण्य क्रमशः 53 वर्ग किमी और 53.45 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है और इन दोनों की स्थापना क्रमशः 8 दिसंबर 2003 और 13 दिसंबर 1996 को हुई थी। यह नेशनल पार्क और वन्यजीव अभ्यारण्य, उत्तराखंड के राजाजी राष्ट्रीय उद्यान (Rajaji National Park) और हिमाचल प्रदेश के सिम्बलबाड़ा राष्ट्रीय उद्यान (Simbalbara National Park) राष्ट्रीय उद्यान से जुड़ा हुआ है। इस नेशनल पार्क का नाम कालेसर महादेव मंदिर के नाम पर रखा गया था जो इसी राष्ट्रीय उद्यान में है। कालेसर नेशनल पार्क में फॉउना (Fauna in Kalesar National Park) कालेसर राष्ट्रीय उद्यान में कई प्रकार के फॉउना (Fauna) निवास करते हैं। यहाँ पाए जाने वाले जीवों में एशियाई हाथी (Asian Elephant), भारतीय तेंदुआ (Indian Leopard), लेपर्ड कैट (Leopard Cat), वाइल्ड कैट (Wild Cat), चीतल (Chital), रस्टी-स्पॉटेड कैट (Rusty-spotted Cat), नीलगाय (Nilgai), सांभर (Sambar), भारतीय सियार (Indian Jackal), रीसस मकाक (Rhesus Macaque), छोटा भारतीय सिवेट (Small Indian Civet), सूअर (Boar), इंडियन क्रेस्टेड पौरक्यूपाइन (Indian Crested Porcupine), ग्रे लंगूर (Grey Langur), भारतीय ग्रे नेवला (Indian Grey Mongoose), बार्किंग डियर (Barking Deer), गोरल (Goral), कॉमन पाम सिवेट (Common Palm Civet), भारतीय खरगोश (Indian Hare) आदि शामिल है। कालेसर नेशनल पार्क में फ्लोरा (Flora in Kalesar National Park) अगर बात की जाए कालेसर नेशनल पार्क के फ्लोरा की तो, यहाँ के 53 प्रतिशत भागों पर घने जंगल 38 प्रतिशत भागों पर खुला जंगल और 9 प्रतिशत भागों पर झाड़ियां है। यहाँ पाए जाने वाले पेड़ों की कुछ प्रमुख प्रजातियाँ में साल (Sal), सेमुल (Semul), अमालतास (Amaltas), बहेरा (Bahera), खैर (Khair), शीशम (Shisham), सैन (Sain), झिंगन (Jhingan), छाल (Chhal), सिन्दूर (Sindoor), आदि है। इस राष्ट्रीय उद्यान में बहुत अधिक संख्या में औषधीय पौधे पाए जाते हैं। बेस्ट टाइम टू विजिट कालेसर नेशनल पार्क (Best time to visit Kalesar National Park) अगर आप कालेसर राष्ट्रीय उद्यान आने की चाह रख रहे है तो आप समर (Summer) में आने से बचें क्योंकि समर में इस राष्ट्रीय उद्यान में बहुत गर्मी पड़ती है। आप यहाँ ठण्ड के महीनों (अक्टूबर से मई) में आने की कोशिश करें क्योंकि इस समय यहाँ का मौसम सुहाना और परिस्थितियां सम रहती हैं और आपको यहाँ ज्यादा से ज्यादा जानवर देखने को मिलेंगे। कैसे पहुंचे कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (How to reach Kalesar National Park)?

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पंचकूला में स्थित है एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन

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जब भी कभी पार्क या फिर गार्डन का जिक्र होता है तो हमारे ध्यान में क्या आता है? खूबसूरत से फूल और रंग बिरंगी तितलियाँ,,, यहीं ना! लेकिन क्या कभी सोचा है कि कैक्टस का भी कोई गार्डन हो सकता है? जी हां यह वही कैक्टस है जो अक्सर घर के गमले में दिख जाता है लेकिन किसी को उसमें खास दिलचस्पी नहीं होती। फाइव कलर्स ऑफ ट्रेवल के आज के इस ब्लॉग में हम आपको आज जिस गार्डन के बारे में बताने जा रहे हैं वह रंग बिरंगे फूलों का बगीचा नहीं बल्कि कांटेदार कैक्टस वाला गार्डन है। जी हां हम आज बात करने जा रहे हैं एशिया के लार्जेस्ट कैक्टस गार्डन (Asia’s Largest Cactus Garden) के बारे में, जो कि हरियाणा में स्थित है। आईए जानते हैं इस गार्डन के बारे में और भी डिटेल में : कैक्टस गार्डन का इतिहास (History of Cactus Garden) : इस गार्डन को वर्ष 2004 में सिर्फ 500 पौधों के साथ कैक्टस गार्डन के तौर पर खोला गया था। हालांकि यह बोटैनिकल गार्डन 1987 में स्थापित हो गया था। आज के समय में यहां कैक्टस की 3500 से अधिक प्रजातियां हैं। उनमें कई एंडेंजर्ड स्पीशीज भी है। यह कैक्टस गार्डन पंचकूला के सेक्टर 5 में स्थित है और हरियाणा की शोभा में चार चांद लगता है। अगर बात करें इस कैक्टस गार्डन के क्षेत्रफल की तो यह 7 एकड़ भूमि पर फैला हुआ है। कैक्टस गार्डन की विशेषताएँ (Qualities of Cactus Garden) : यह कैक्टस गार्डन एशिया का सबसे बड़ा कैक्टस गार्डन है और यहां आपको हर तरह के कैक्टस के पौधे देखने को मिल जाएंगे। यहां कई सारे ऐसे कैक्टस के पौधे भी हैं जिनकी लंबाई इंसानों की लंबाई से भी ज्यादा है। वहीं कुछ पौधे ऐसे भी हैं जो जमीन तक हीं सिमट कर रह जाते हैं। यहां गोल और चपटे दोनों ही प्रकार के पत्तों वाले कैक्टस आपको देखने को मिलेंगे।खासकर इस गार्डन को जिस तरह से सजाया गया है वह अपने आप में हीं सराहनीय है। इस गार्डन के बीच में एक छोटा सा तालाब भी है, जो इस गार्डन की खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करता है। साफ सुथरा सा यह गार्डन यहां आने वाले पर्यटकों को काफी अचंभित करता है। अगर आपका इंटरेस्ट वाइल्डलाइफ में है और आप फ्लोरा और फाउना को एक्सप्लोर करने में इंटरेस्ट रखते हैं तो आपको इस कैक्टस गार्डन में घूमने जरूर आना चाहिए। यहां आकर आपको बहुत सी ऐसी जानकारियां मिलेगी जो शायद आपके लिए नई हो। विज्ञान के क्षेत्र में इंटरेस्ट रखने वाले बच्चों के लिए यह कैक्ट्स गार्डन बहुत हीं बेस्ट पिकनिक ऑप्शन है। आप इस बोटैनिकल गार्डन में घूमने जा सकते हैं और इसे एक्सप्लोर कर सकते हैं। फ्लोरा की है अनेक प्रजातियाँ (Vast Diversity Of Flora in Cactus Garden): यह कैक्टस गार्डन और बोटैनिकल गार्डन पेड़ पौधों के जैव विविधता के मामले में काफी धनी है। यहां फ्लोरा की कई सारी ऐसी प्रजातियां पाई जाती हैं जो विलुप्त होने के कगार पर हैं। अगर यहाँ पाए जाने वाले कैक्टस के दुर्लभ प्रजातियों की बात की जाए तो यहाँ कैक्टस की लगभग 3500 दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियाँ पायी जाती हैं। जिनमे प्रमुख रूप से ओपंटियास (Opuntias), फेरोकैक्टस (Ferocactus), नोटोकैक्टि (Notocacti), स्तंभाकार कैक्टि (Columnar Cacti), एगेव्स (Agaves), एस्ट्रोफाइटम (Astrophytum), इचिनोसेरियस (Echinocereus), मम्मिलारियास (Mammillarias) शामिल हैं। एंट्री फीस और टाइमिंग (Entry Fees and Timings of Cactus Garden): अगर बात करें इस बोटैनिकल गार्डन में एंट्री की तो इस बोटैनिकल गार्डन के एंट्री टिकट की प्राइस ₹10 पर पर्सन है। इस कैक्ट्स गार्डन के एंट्री की टाइमिंग सुबह के 8 बजे से शाम के 6 बजे तक की है।

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दिल्ली-NCR वालों के लिए परफेक्ट पिकनिक डेस्टिनेशन है मोरनी हिल्स

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मोरनी हिल्स (Morni Hills) को हरियाणा का एकमात्र हिल स्टेशन माना जाता है, जो कि अपने स्पिरिचुअल और हिस्टोरिकल वैल्यूज (Spiritual and Historical Values) के लिए फेमस है। यहां की खूबसूरती आसपास के शहरों से पर्यटकों को आकर्षित करती है। राजधानी दिल्ली से नजदीक होने के कारण अक्सर दिल्ली के लोग पिकनिक मनाने यहां आया करते हैं। यहां के फेमस टूरिस्ट अट्रैक्शन (Famous Tourist Attraction) की अगर बात की जाए तो उनमें मोरनी फोर्ट का नाम सबसे पहले आता है। इसके अलावा यहां एडवेंचर पार्क और टिक्कर ताल भी है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है। एडवेंचर पार्क (Adventure Park): इस पार्क का उद्घाटन हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने 2004 में किया था। तब से यह पार्क बच्चों के लिए पसंदीदा टूरिस्ट स्पॉट बन गया है। मोरनी हिल्स में यह जगह बच्चों के द्वारा सबसे ज्यादा पसंद की जाती है। यहां कई तरह के एडवेंचरस एक्टिविटीज की जा सकते हैं। इस पार्क में एक हॉन्टेड हाउस भी है जो बच्चों को काफी पसंद आता है। इस पार्क में ट्री हाउस भी है जहां से पूरे मोरनी हिल्स का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। इस पार्क में एक भूल भुलैया भी है जो बाहर से देखने पर तो आसान सी दिखती है लेकिन जब आप इसके अंदर जाएंगे तो इसी में खो कर रह जाएंगे। इस मंकी मेज में आपको रास्ता ढूंढने में लगभग 10 – 15 मिनट का टाइम लग जाएगा। इस पार्क में जगह-जगह रंग-बिरंगे छोटे-छोटे बर्ड हाउस भी बनाए गए हैं। जो देखने में बहुत हीं खूबसूरत और प्यारे लगते हैं। इसके अलावा पार्क में एक कैफेटेरिया भी है। पार्क के बाहर ही पार्किंग स्पेस भी है जहां आप अपनी गाड़ी को पार्क कर सकते हैं।बात करें इस पार्क के एंट्री टिकट की तो इस पार्क में वयस्कों के लिए एंट्री टिकट ₹50 की है जबकि, बच्चों के लिए यह टिकट ₹30 की है। टिक्कर ताल (Tikkar Tal): टिक्कर ताल को यहां के दो खूबसूरत जिलों की वजह से जाना जाता है। पहाड़ी से देखने पर यह दोनों झीलें बहुत हीं खूबसूरत दिखती हैं। इन दोनों झीलों को एक छोटी सी पहाड़ी अलग करती है। इस ताल के किनारे बैठकर आप पिकनिक मना सकते हैं और अपनों के साथ टाइम स्पेंड कर सकते हैं। यहां का माहौल बहुत ही पीसफुल है और लोगों को काफी पसंद आता है। यह आप कई तरह की वॉटर स्पोर्ट्स एक्टिविटीज भी कर सकते हैं। जिनमें बनाना राइड, जेट स्कूटर राइड और पैरा मोटर राइड आदि शामिल हैं।बनाना राइड के टिकट की प्राइस ₹500 प्रति व्यक्ति है। वहीं जेट स्कूटर रीड के टिकट की कीमत ₹1000 पर पर्सन है। अगर आप पैरा मोटर राइट का आनंद उठाना चाहते हैं तो आपको इसके लिए प्रति व्यक्ति के तौर पर ₹1500 का टिकट लेना पड़ेगा। यह यहां की सबसे बेस्ट राइड है और पर्यटकों को काफी पसंद आती है।इन एडवेंचरस राइड्स के अलावा आप यहां पारा सीलिंग और नॉर्मल बोटिंग भी कर सकते हैं मोरनी फोर्ट (Morni Fort): मोरनी फोर्ट एक ऐतिहासिक किला है, जिसे क्वीन मोरनी ने बनवाया था। उन्हीं के नाम पर इस हिल स्टेशन का नाम मोरनी हिल्स पड़ा है। इस फोर्ट को अब नेचर स्टडी सेंटर और म्यूजियम में तब्दील कर दिया गया है। यहां आपको इनडेंजर्ड स्पीशीज के नेचुरल हैबिटेट के बारे में जानने और समझने का मौका मिलेगा। इसके अलावा यहां विलुप्त हो चुकी प्रजातियों के बारे में भी जानकारी देखने को मिलती है। इस म्यूजियम का मोटो बायोडायवर्सिटी को कंजर्व करना है और वाइल्डलाइफ की सुरक्षा को प्रमोट करना है। यहां जाकर आप इस बात को बहुत ही अच्छे से समझ पाएंगे कि किस तरह से आप इन विलुप्त हो रही प्रजातियों के संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं। अगर आपका इंटरेस्ट वाइल्डलाइफ में है तो आपको यह जगह बहुत ही पसंद आएगी। साथ ही यहाँ बच्चों को भी बहुत कुछ जानने और सीखने का मौका मिलता है। इस फोर्ट के बाहर ही एक शिवजी का मंदिर है। जहां कई सौ साल पुराना एक बरगद का पेड़ भी है। अगर आप मोरनी हिल्स आ रहे हैं तो आप इस फोर्ट को घूमने के लिए जरूर आए। यकीनन यह आपको बहुत ही पसंद आएगा। मोरनी हिल्स जाने का सबसे सही समय (Best time to visit Morni Hills): अगर बात करें मोरनी हिल्स जाने के सबसे सही समय की तो यहां जाने का सबसे सही समय होता है सितंबर से अप्रैल तक का। क्योंकि इस समय यहां पर गर्मी नहीं होती है और आप बहुत हीं आसानी से एडवेंचरस एक्टिविटीज का आनंद उठा पाते हैं। हालांकि ऐसा नहीं है कि मोरनी हिल्स घूमने के लिए सिर्फ इसी समय जाया जा सकता है। आप चाहे तो साल के किसी भी समय यहां घूमने के लिए जा सकते हैं। यह जगह हर समय उतनी ही खूबसूरत दिखती है। कैसे पहुंचे मोरनी हिल्स (How to reach Morni Hills)? मोरनी हिल्स पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले चंडीगढ़ पहुंचना होगा। चंडीगढ़ से मोरनी हिल्स की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है और यहां का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट चंडीगढ़ एयरपोर्ट है। चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन मोरनी हिल्स का नजदीकतम रेलवे स्टेशन है। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद अगर आप वहां से बस लेकर मोरनी हिल जाना चाहेंगे तो आपको चंडीगढ़ से मोरनी हिल्स के लिए डायरेक्ट बसें भी मिल जाएंगी। इसके अलावा आप अपनी सुविधा अनुसार टैक्सी भी कर सकते हैं।

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Surajkund International Crafts Mela (Faridabad)

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Surajkund International Crafts Mela (Faridabad): खानपान, संस्कृति और हस्तशिल्प का अनूठा संगम: सूरजकुंडअंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला फरीदाबाद by Pardeep Kumar सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला आज विश्व में अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। फरीदाबाद में  खूबसूरत अरावली पहाड़ियों में लगने वाला यह 35वां अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला है। (Surajkund International Crafts Mela) 19 मार्च से 4 अप्रैल तक होगा आयोजित आपको बता दें कि कोरोना के चलते वर्ष 2021 में इसका आयोजन नहीं हो पाया था आमतौर पर यह मेला फरवरी के महीने में 1 से 14 फरवरी के बीच लगता है लेकिन इस बार इसका आयोजन 19 मार्च से 4 अप्रैल तक किया गया है। खानपान, संस्कृति और हस्तशिल्प का अनूठा संगम सूरजकुंड मेले का प्रथम बार आयोजन सन् 1987 में हुआ था। वर्ष 2009 में पहली बार भारतीय राज्यों के अलावा दूसरे देशों को आमंत्रित करने का प्रचलन शुरू हुआ।  इस कड़ी में सूरजकुंड में शामिल होने वाला पहला देश मिस्र बना था।  तभी से दुनिया भर के हस्तशिल्पकार और अन्य कलाकार इस मेले में आते हैं। जिस कारण मेले में भारत के अलग-अलग राज्यों की संस्कृति तो देखने को मिलती ही है साथ में विदेशी संस्कृति और हस्तशिल्प कला का यहां पर खूब दीदार होता है। विदेशों के मंझे हुए शिल्पकार अपने हाथों से तैयार किए गए सामान का इस मेले में प्रदर्शन करते हैं। (Surajkund International Crafts Mela) कोरोना के कारण  पिछले साल आयोजित न कर पाने के कारण इस बार हरियाणा सरकार ने इस मेले को भव्य बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। टिकट मूल्य और कैसे करें ऑनलाइन टिकटों की बुकिंग इस बार के मेले में लोगों को बेहतरीन सुविधा देने की व्यवस्था की गई है।  काउंटर के अलावा पेटीएम के सहयोग से मेले की टिकटों की बुकिंग की शानदार व्यवस्था की  गई है। आप आसानी से पेटीएम से टिकट्स बुक कर सकते हो। पर्यटकों को  असुविधा न हो इसके लिए प्रत्येक पार्किंग के पास टिकट काउंटर बनाया गया।  मेले की टिकट आम दिनों में ₹120, वहीं शनिवार और रविवार को टिकट की कीमत ₹180 रखी गई है। मेले की टाइमिंग सुबह 10 बजे से लेकर देर शाम तक है।(Surajkund International Crafts Mela) करीब 47 एकड़ में लगने वाले इस मेले में एंट्री करने के लिए पांच गेट बनाए गए हैं जिसमें लोकल सिटीजंस के लिए दो गेट, एक गेट वीआईपी एंट्री के लिए, एक गेट मीडियाकर्मियों की एंट्री के लिए और एक गेट स्टाफ वर्कर्स की एंट्री के लिए बनाया गया है। पूरे मेला स्थल को 18 सेक्टरों में बांटा गया है। फूड कोर्ट मेले के अंदर खाने पीने के लिए अलग फूड कोर्ट की व्यवस्था की गई है जहां आपको अलग-अलग राज्यों के लज़ीज और स्वादिष्ट पकवान खाने को मिलेंगे। जिसमें दिल्ली की मशहूर चाट, गोहाना की मशहूर जलेबी ,राजस्थान की कचोरी, जम्मू कश्मीर का फेमस चिकन और मटन, साउथ के उत्तपम डोसा, छोले भटूरे ,मटर कुल्चा आदि सारी चीजें मिल जायेंगी। युवाओं और बच्चों के लिए यहां पर एडवेंचर जोन की व्यवस्था भी की गई है। जिसमें तरह-तरह के झूले, निशानेबाजी, गुलेल बाजी और भी कई तरह के गेम्स की व्यवस्था की गई है।अगर आप सूरजकुंड मेले में जाए तो एडवेंचर जोन में जाना बिल्कुल भी ना भूले। सेल्फी प्वाइंट     मेले के अंदर कई जगह पर सेल्फी प्वाइंट भी बनाए गए हैं, जहां पर आप पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहरों के साथ अपनी पिक्चर क्लिक करवा सकते हैं। पूरे मेले को अलग-अलग राज्यों की पौराणिक धरोहरों के साथ संजोया गया है। मेले के अंदर एक जगह हरियाणा की प्रसिद्ध चौपाल का इंतजाम भी है। जिसमें अलग-अलग राज्यों और बाहरी देशों के कलाकार अपने क्षेत्र के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए मेले में पहुंचने वाले लोगों का मनोरंजन करते है और उन्हें अपनी सभ्यता और अपनी संस्कृति से रूबरू करवाते हैं। इसके अलावा आपको हर 10 कदम के बाद अलग-अलग राज्यों की झांकियां देखने को मिलेंगी, जिसमें कलाकार अपने लोकगीतों और लोकनृत्य को प्रस्तुत करते हैं और मेले में आने वाले लोगों को मस्ती में झूमने पर मजबूर कर देते हैं। मेले में अनेकों प्रकार के स्टॉल लगाए गए हैं जिसमें अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग क्षेत्रों के हस्तशिल्पकारों द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट्स जैसे कढ़ाई किए गए दुपट्टे, शॉल, सूट, अलग-अलग प्रकार के कपड़े, हिमाचली टोपी, कश्मीरी कालीन, राजस्थानी मोजड़ी, जूते और भी कई प्रकार की हैंड मेड चीजें आपको मिल जायेंगी। मेले के अंदर कश्मीरी थीम को ध्यान में रखते हुए वहां की परंपरा, वहां की संस्कृति को दर्शाया गया है। मेले में घूमने आए लोग यहां पर खूब फोटोग्राफी करते हैं।  मेले प्रशासन द्वारा जगह-जगह पर साफ पीने योग्य पानी की व्यवस्था भी की गई है जिससे कि मेले में आने वाले यात्रियों को गर्मी में राहत प्रदान हो। छाता या हैट साथ ले जाना बिल्कुल भी ना भूले आपको बता दें कि आजकल चिलचिलाती गर्मी से बचने के लिए आप अपना छाता या हैट अपने साथ अवश्य रखें और पानी की बोतल ले जाना बिल्कुल भी ना भूले। इससे आपको गर्मी से अवश्य राहत मिलेगी। क्योंकि यह मेला देर शाम तक चलता है इसलिए आप अपनी सुविधा और दिन में पड़ने वाली गर्मी से बचने के लिए शाम के समय भी यहाँ आ सकते हैं। (Surajkund International Crafts Mela) Photo Gallery – Surajkund Crafts Fair