कर्नाटक में Railway Stations का नया रूप
भारत में ट्रेन से सफर करने वालों के लिए Railway Station किसी भी यात्रा का पहला और सबसे जरूरी हिस्सा होता है। कोई नौकरी के लिए रोज ट्रेन पकड़ता है, कोई पढ़ाई के लिए दूसरे शहर जाता है और कोई छुट्टियों में परिवार के साथ घूमने निकलता है। ऐसे में अगर स्टेशन पर बैठने की अच्छी जगह हो, साफ शौचालय हों, प्लेटफॉर्म पर सही शेल्टर हो और आने-जाने की व्यवस्था आसान हो, तो पूरी यात्रा थोड़ी बेहतर हो जाती है। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार ने अमृत भारत स्टेशन योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत देश के पुराने और महत्वपूर्ण Railway Stations को आधुनिक बनाने की योजना बनाई गई। उम्मीद थी कि आने वाले समय में यात्रियों को बेहतर वेटिंग एरिया, साफ प्लेटफॉर्म, आधुनिक शौचालय, बेहतर कनेक्टिविटी और दिव्यांग यात्रियों के लिए सुविधाजनक व्यवस्था मिलेगी। लेकिन कर्नाटक से सामने आए नए आंकड़े इस योजना की रफ्तार को लेकर सवाल जरूर खड़े करते हैं। राज्यसभा में 7 अगस्त 2026 को दिए गए एक लिखित जवाब के मुताबिक, कर्नाटक के 61 Railway Stations को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चुना गया था। इनमें से अभी तक केवल 12 स्टेशनों का काम पूरा हो पाया है। इसका मतलब है कि 61 में से 49 स्टेशन अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुए हैं। यानी जिस बदलाव का इंतजार यात्रियों को था, उसका बड़ा हिस्सा अभी बाकी है। कर्नाटक में 61 Railway Stations चुने गए थे कर्नाटक में Railway का नेटवर्क राज्य के बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे शहरों और कस्बों को भी जोड़ता है। इसी वजह से अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत राज्य के अलग-अलग हिस्सों के 61 स्टेशनों को चुना गया। इस योजना का मकसद केवल स्टेशन की बिल्डिंग को नया रंग देना नहीं है। यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर करना, प्लेटफॉर्म और शेल्टर को सुधारना, स्टेशन तक पहुंचने की व्यवस्था आसान बनाना और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर स्टेशन तैयार करना भी इस योजना का हिस्सा है। लेकिन किसी बड़े स्टेशन को नए सिरे से तैयार करना एक दिन या कुछ महीनों का काम नहीं होता। खासकर तब, जब उस स्टेशन पर पहले से ट्रेनें चल रही हों और रोज बड़ी संख्या में यात्री आते-जाते हों। यही वजह है कि कर्नाटक के इन स्टेशनों पर भी काम अलग-अलग चरणों में चल रहा है। ये 12 स्टेशन हो चुके हैं तैयार कर्नाटक में अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत अब तक जिन 12 Railway Stations का काम पूरा हुआ है, उनमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों के स्टेशन शामिल हैं। इनमें अल्नावर, बादामी, बागलकोट, बंटवाल, धारवाड़, गदग, गोकक रोड, होसपेटे, कोप्पल, मुनिराबाद, राणेबेन्नूर और सुब्रमण्या रोड शामिल हैं। इन स्टेशनों पर यात्रियों को पहले के मुकाबले बेहतर सुविधाएं मिलने लगी हैं। बेहतर शेल्टर, साफ प्लेटफॉर्म और आधुनिक शौचालय जैसी सुविधाएं तैयार की गई हैं। सुनने में ये चीजें छोटी लग सकती हैं, लेकिन स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करने वाले यात्री जानते हैं कि इन सुविधाओं की जरूरत कितनी होती है। गर्मी में प्लेटफॉर्म पर छांव मिलना, बारिश में शेल्टर होना और लंबे सफर के दौरान साफ शौचालय मिलना यात्रियों के लिए काफी मायने रखता है। इन 12 स्टेशनों का काम पूरा होना योजना की एक उपलब्धि जरूर है। लेकिन दूसरी तरफ बाकी 49 स्टेशनों का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। इसलिए कर्नाटक के Railway Stations की पूरी तस्वीर अभी बदलती हुई नहीं दिख रही है। बाकी 49 स्टेशनों का क्या हुआ? यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल है। अगर कर्नाटक में 61 स्टेशन इस योजना के तहत चुने गए थे और 12 तैयार हो चुके हैं, तो बाकी 49 स्टेशनों पर काम किस स्थिति में है और उन्हें पूरा होने में कितना समय लगेगा, यह यात्रियों के लिए जानना जरूरी है। कई बार स्टेशन पर निर्माण शुरू होने के बाद यात्रियों को काफी समय तक अधूरे काम के बीच से गुजरना पड़ता है। कहीं रास्ता बंद होता है, कहीं प्लेटफॉर्म पर निर्माण सामग्री रखी होती है और कहीं आने-जाने के लिए अस्थायी रास्ता बनाया जाता है। ऐसे समय में यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग यात्रियों को होती है। योजना का अंतिम लक्ष्य Railway Station को बेहतर बनाना है, लेकिन निर्माण के दौरान भी यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है। बेंगलुरु के 9 स्टेशनों पर भी काम जारी कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में Railway Stations को लेकर हमेशा ज्यादा चर्चा रहती है। यहां यात्रियों की संख्या अधिक है और कई स्टेशनों पर रोज काफी भीड़ रहती है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत बेंगलुरु के 9 प्रमुख स्टेशनों को चुना गया है। इनमें बेंगलुरु कैंटोनमेंट, KSR बेंगलुरु, यशवंतपुर और व्हाइटफील्ड जैसे प्रमुख स्टेशन शामिल हैं। इन स्टेशनों को आधुनिक बनाने के लिए अलग-अलग काम किए जा रहे हैं। हालांकि सभी जगह काम एक ही रफ्तार से नहीं चल रहा है। कहीं कुछ हिस्सा तैयार हो चुका है, तो कहीं अभी मुख्य निर्माण बाकी है। यानी बेंगलुरु के यात्रियों को पूरी तरह बदले हुए Railway Station का अनुभव लेने के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। यशवंतपुर में क्या तैयार हुआ? यशवंतपुर बेंगलुरु के महत्वपूर्ण Railway Stations में से एक है। यहां अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। स्टेशन से जुड़ा एलिवेटेड रोड और मल्टी-लेवल कार पार्किंग का सिविल वर्क पूरा हो चुका है। यह बदलाव स्टेशन तक पहुंचने और वाहनों की पार्किंग के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन स्टेशन का पूरा काम अभी खत्म नहीं हुआ है। यशवंतपुर स्टेशन की पश्चिमी तरफ बनने वाली स्टेशन बिल्डिंग का काम अभी बाकी है। यानी स्टेशन का एक बड़ा हिस्सा अभी निर्माण के दौर में है। यात्रियों के लिए इसका मतलब यही है कि कुछ नई सुविधाएं दिखाई देने लगी हैं, लेकिन पूरा स्टेशन अभी उस रूप में तैयार नहीं हुआ है, जैसा अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत कल्पना की गई है। बेंगलुरु कैंटोनमेंट में भी अधूरा है काम बेंगलुरु कैंटोनमेंट स्टेशन पर भी कई काम पूरे हो चुके हैं, लेकिन यहां भी पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। यहां नई डायवर्जन रोड और बिजली का सब-स्टेशन तैयार हो चुका है। ये दोनों काम स्टेशन की