सरिस्का जंगल की सफारी, इतनी प्यारी कि थकान उतार दे सारी!
क्या आपने कभी सोचा है कि राजस्थान की रेतीली भूमि में एक ऐसा जंगल है जहां बाघ घूमते हैं और प्रकृति ने अपना जादू बिखेर रखा है? जी हां, मैं बात कर रहा हूं सरिस्का जंगल सफारी की, जो अलवर जिले में स्थित है। सरिस्का टाइगर रिजर्व एक राष्ट्रीय उद्यान है, जहां आप प्रकृति के साथ सामंजस्य बना सकते हैं। यहां पहाड़, घास के मैदान, सूखे जंगल और चट्टानें हैं, जो इसे खास बनाते हैं। यह जगह करीब 800 वर्ग किलोमीटर में फैली है और अरावली पहाड़ियों की गोद में है। जीप में बैठकर रोमांचक सफर का आनंद लें दरअसल, सरिस्का का नाम सुनते ही दिमाग में बाघ की दहाड़ आ जाती है। यह जगह उत्तरी भारत का एक बड़ा टाइगर रिजर्व है। यहां आप जीप में बैठकर जंगल घूम सकते हैं और जानवरों को करीब से देख सकते हैं। हमने यही किया बर्षात का मौसम था, रिमझिम बारिश में क्या खूब मजे किए हमने! मेरे पास बताने के लिए शब्द काम पड़ रहे हैं। और सच में कितना मजा आएगा जब आप बाघ को देखेंगे! सरिस्का अलवर से ज्यादा दूर नहीं है, बस कुछ किलोमीटर। अलवर राजस्थान का एक पुराना शहर है जो अपने किलों और इतिहास के लिए मशहूर है। लेकिन सरिस्का ने इसे वन्यजीव प्रेमियों की पसंदीदा जगह बना दिया है। सरिस्का पहले अलवर के राजपरिवार का शिकारगाह था। राजा यहां शिकार करने आते थे। 1955 में इसे वन्यजीव आरक्षित क्षेत्र बना दिया गया था। फिर 1958 में अभयारण्य और 1979 में टाइगर रिजर्व। लेकिन एक दुखद कहानी है 2004 तक यहां सभी बाघ खत्म हो गए थे। शिकार और अन्य कारणों से। फिर 2008 में रणथंबोर से बाघ लाकर यहां बसाए गए। अब यहां कई बाघ हैं, जैसे एसटी2 और एसटी10 जो बच्चे पैदा कर चुके हैं। यह सफल कहानी है वन्यजीव संरक्षण की। सरिस्का में बहुत सारी पुरानी इमारतें भी हैं। जैसे नीलकंठ मंदिर जो छठी सदी का है। इसमें सुंदर मूर्तियां हैं। पांडुपोल हनुमान मंदिर भी है, जो महाभारत से जुड़ा है। कहा जाता है कि पांडव यहां निर्वासन में रहे थे। मंदिर के पास एक झरना है जो दृश्य को और सुंदर बनाता है। कंकवाड़ी किला भी है, जो राजपूत राजा जय सिंह द्वितीय ने बनवाया था। इस किले तक जीप से ही पहुंच सकते हैं। सच में सरिस्का सिर्फ एक जंगल नहीं, बल्कि इतिहास का अनमोल खजाना है। सरिस्का जंगल, सिर्फ जंगल नहीं बल्कि प्रकृति का अनमोल खजाना है हम तीन लोग थे, हमने शेरिंग में सफारी की जिसमें हमें प्रत्येक व्यक्ति का 1250 देना पढ़ा। बाला किला की सड़क टूटी हुई थी, जिससे हम बाला किला नहीं घूम पाए यह हमारे भाग्य में नहीं था सायद लेकिन हमने जंगल सफारी के सच में खूब मजे लिए। सड़क खराब होने के चलते हमें जंगल के अंदर पहले पूरे अलवर शहर घुमाया फिर जंगल के अंदर ले जय गया। हम लोग सात थे इसलिए हमारे साथ गाइड नहीं था। पर सच में हमारे सफारी ड्राइवर बहुत ही अच्छे आदमी थे। पूरे रास्ते उनने हमें एक गाइड की तरह समझाया। खैर, हम सरिस्का गए और बाघ को देखकर इतना खुश हुए कि घर आकर हमने सबको बताया। वास्तव में, सरिस्का आपको शहर की भागदौड़ से दूर ले जाता है। यहां की हवा में सुकून है। अगर आप प्रकृति प्रेमी हैं, तो यह जगह आपके लिए ही है। सरिस्का में 220 से ज्यादा पक्षी हैं, जैसे मोर, बाज, और उल्लू भी। सर्दियों में प्रवासी पक्षी आते हैं। जंगल में सांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली सूअर घूमते रहते हैं। लंगूर और बंदर तो हर जगह दिखते हैं। सरिस्का का वन क्षेत्र सूखा पर्णपाती है। धोक के पेड़ सबसे ज्यादा हैं, जो 90 प्रतिशत क्षेत्र कवर करते हैं। अन्य पेड़ जैसे सालर, बेर, अर्जुन, और अमला। यह सब मिलकर जंगल को हरा-भरा बनाते हैं। सरिस्का है राजस्थान पर्यटन का खुबसूरत हिस्सा सरिस्का राजस्थान पर्यटन का हिस्सा है और हर साल हजारों पर्यटक यहां आते हैं। अगर आप फोटोग्राफी पसंद करते हैं, तो यहां के नजारे कमाल के हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय जंगल और भी सुंदर लगता है। यह जगह परिवार के साथ घूमने के लिए बेस्ट है। बच्चे जानवरों को देखकर उत्साहित होते हैं। सरिस्का में शांति है, जो आपको रिचार्ज कर देगी। इसके बाद बात करते हैं कि यहां क्या-क्या देखने लायक है। इस ब्लॉग में मैं आपको सब बताऊंगा ताकि आपका सफर मजेदार बन सके। जंगल में क्या-क्या देखने लायक है? सरिस्का में देखने की चीजें बहुत हैं। सबसे पहले बाघ! यहां बंगाल टाइगर हैं, जो जंगल के राजा हैं। आप सफारी में उन्हें देख सकते हैं। लेकिन सिर्फ बाघ नहीं, तेंदुआ, लकड़बग्घा, जैकाल, जंगल बिल्ली भी हैं। शाकाहारी जानवर जैसे चार सींग वाला हिरण, जो दुर्लभ है। सांभर, चीतल, नीलगाय, जंगली सूअर, खरगोश। बंदरों की तो भरमार है। पक्षियों की बात करें तो 200 से ज्यादा प्रजातियां यहां हैं जिनमें। मोर, ग्रे पार्ट्रिज, पेंटेड स्परफाउल, सैंड ग्राउज, ट्रपी, वुडपेकर, ईगल, बाज। सर्दियों में यूरोप और मध्य एशिया से पक्षी सरिस्का आते हैं, जो इस जंगल की अहमियत और खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। अगर आप पक्षी प्रेमी हैं, तो दूरबीन ले जाना बिल्कुल न भूलें। इस जंगल में सरीसृप भी हैं जैसे कोबरा, क्रेट, वाइपर, अजगर, मॉनिटर छिपकली, मगरमच्छ आदि। अगर कुछ देखना हो जंगल के आस पास? ये देखिये! जगहों की बात करें तो पांडुपोल हनुमान मंदिर। यह जंगल के बीच में है, जहां झरना बहता है। यह मंदिर महाभारत से जुड़ा है। यहां बंदर बहुत हैं, जो हनुमान जी के भक्त माने जाते हैं। नीलकंठ मंदिर छठी सदी का है, जहां सुंदर मूर्तियां हैं। कंकवाड़ी किला 17वीं सदी का है, जहां से जंगल का नजारा कमाल का है। भानगढ़ किला पास में है, जो भूतिया माना जाता है। झीलें भी हैं जहां जानवर पानी पीने आते हैं। जैसे सिलिसेर झील पास में है। सरिस्का में घास के मैदान और चट्टानें हैं जहां आप पैदल घूम सकते हैं, लेकिन गाइड के साथ। जंगल में पुराने खंडहर हैं जो इतिहास बताते हैं। सरिस्का में फोटो खींचने के लिए बेस्ट स्पॉट हैं। सूर्यास्त के समय पहाड़ियां लाल हो जाती हैं। अगर आप एडवेंचर पसंद करते हैं, तो यहां ट्रेकिंग भी कर सकते




