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Kurukshetra – शेख चिल्ली का मकबरा

Kurukshetra – शेख चिल्ली का मकबरा: हरियाणा का ताज महल

कुरुक्षेत्र को कौन नहीं जानता। मगर कुरुक्षेत्र को लोग जानते भी हैं तो केवल महाभारत के युद्ध की वजह से। शायद ही कोई जानता होगा कि यहां पर मिनी ताजमहल भी है। अब आप सोच रहे होंगे कि ताज महल तो आगरा में है फिर कुरुक्षेत्र में कहां से आ गया। इतना सोचने की जरूरत नहीं है इसे केवल हरियाणा का मिनी ताजमहल कहा जाता है। अपने नए सफर में फाइव कलर्स ऑफ ट्रैवल की टीम आज आपको ऐसी ही जगह का दीदार करवाएगी जो देखने में सैंकड़ों सालों बाद भी आगरा के ताज महल की तरह आकर्षक दिखता है। (Sheikh Chilli Tomb, Kurukshetra)

पवित्र गीता की जन्मस्थली कुरुक्षेत्र सिर्फ महाभारत, शक्तिपीठों ओर दूसरे हिंदू धर्म स्थलों के लिए ही नहीं, शेख चिल्ली के मकबरे के लिए भी प्रसिद्ध है। यही कारण है कि शेख चिल्ली के मकबरे को देश के प्रमुख राष्ट्रीय स्मारकों में शुमार हरियाणा का ताजमहल भी कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि राजधानी दिल्ली से अमृतसर के बीच इसके अलावा कोई भी ऐसा स्मारक नहीं है जिसमें शाहजहां के समकालीन संगमरमर का प्रयोग किया गया हो।

शेख चिल्ली के कार्टून और चुटकुले तो बचपन में बहुत सुने थे। मगर मकबरे के बारे में पहली बार सुना था। शेख चिल्ली के मकबरे का नाम सुनते ही वहां पर जाने को लेकर मन में खलबली मचना स्वाभाविक है।  शेख चिल्ली का मकबरा कुरुक्षेत्र के थानेसर में स्थित है। शेख चिल्ली के मकबरे तक पहुंचने के लिए आपको कड़ी मशक्कत करने की जरूरत नहीं है। किसी भी ऑटो चालक से बात करके वहां पर आसानी से पहुंच सकते हैं। बाहर से देखने पर मकबरा महल लग रहा था। क्योंकि मकबरे की दीवारें बहुत बड़ी-बड़ी थी, लग ही नही रहा था कि यहां पर किसी सूफी संत का मकबरा है।

पार्किंग की सुविधा की बात करें तो वहां पर पार्किंग की सुविधा बहुत अच्छी है। गेट के अंदर प्रवेश होते ही सबसे पहले टिकट लेनी होती है। आप टिकट कैश से भी प्राप्त कर सकते हैं और ऑनलाइन पेमेंट के माध्यम से भी टिकट ले सकते हैं। टिकट का मूल्य ज्यादा नहीं है, मात्र 25 रूपये ही टिकट का मूल्य है। हालांकि विदेशी पर्यटकों  के लिए 100 रुपए इसका मूल्य रखा गया है।  आप टिकट लेकर जैसे ही अंदर प्रवेश करेंगे सामने ही खूबसूरत सा पार्क और वहां का मनमोहक वातावरण एक बार तो आपके दिल को छू लेगा।

हालांकि शेख चिल्ली का मकबरा अंदर से बहुत ज्यादा बड़ा नहीं था, मगर फिर भी  दिल को सुकून दे रहा था।

शेख चिल्ली का इतिहास

दारा शिकोह अपने अध्यात्मिक गुरु शेखचिल्ली का बहुत सम्मान करते थे। उनके सम्मान में यह मकबरा बनवाया गया था। सूफी संत शेख चिल्ली का असली नाम सूफी अब्द उर रज्जाक था। वह शेख चिल्ली के नाम से अधिक लोकप्रिय थे। वह अपनी बुद्धिमत्ता और उदारता के लिए जाने जाते थे। शेख चिल्ली मुगल राजकुमार दारा शिकोह  के गुरु थे। शाहजहाँ खुद उनका बहुत सम्मान करते थे। कहा जाता है कि मुगल बादशाह शाहजहां के बेटे शिकोह शेख चिल्ली के बहुत बड़े प्रशसंक थे। उनसे उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। उन्हें अब्द उर रहीम, अलैस अब्द उई करीम, अलैस अब्द उर रज्जाक के नाम से भी जाना जाता था। उस समय के लोगों का मानना था कि वह एक महान दरवेश था। ऐसा माना जाता है कि शेख चिल्ली का जन्म बलूचिस्तान की एक खानाबदोश जनजाति में हुआ था। यही घुमक्कड़ पन उन्हे भारत ले आया। वैसे शेख चिल्ली ऐसी कहानियों के नायक हैं, जो बार-बार आम लोक जीवन के संघर्षों पर विजय प्राप्त करती हैं।

मकबरे को देखने के लिए  आम तौर पर बहुत ज्यादा भीड़ नहीं होती, लेकिन फिर भी देखने वालों की संख्या बहुत कम भी नहीं कह सकते। यहाँ पर असली नजारा तो ऊपर की ओर जाने के बाद मिलता है। महान संत की कब्र मकबरे के निचले सदन में बिल्कुल केंद्र में स्थित है। इस मकबरे के ठीक बगल में संत की पत्नी की भी कब्र है। मकबरे के प्रत्येक ओर प्रवेश द्वार के भांति मेहराब बना है जो संगमरमर निर्मित जालियों से सुसज्जित है। मकबरे की चारों दिशाओं में बाहर की और छतरिया बनी है जिसके गुंबद पर हरे, पीले, नीले ओर जामुनी रंग की चमकदार टाइल्स से निर्मित विभिन्न प्रकार की ज्यामिति आकृतियां देखी जा सकती हैं।

मकबरे के पीछे नजर घुमाने के बाद  एक बड़ा सा हरा भरा ग्राउंड खूबसूरती का एक अलग ही नज़ारा पेश कर अपनी और आकर्षित करता है। अभी मकबरे के अंदर बने म्यूजियम में घूमना बाकी था। (Sheikh Chilli Tomb)

अगर आप इतिहास के प्रेमी हैं और प्राचीन चीजों को देखने में दिलचस्पी रखते हैं तो आपके लिए यह मकबरा सोने पर सुहागा है, क्योंकि इस मकबरे के म्यूजियम के अंदर आपको पहली शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी तक की काफी पुरानी चीजें देखने को मिलेंगी। (Sheikh Chilli Tomb)

राहत वाली बात यह है कि म्यूजियम के अंदर जाने के लिए किसी भी तरह की टिकट नहीं लगती है। आप म्यूजियम के अंदर जितना चाहे उतना समय बिता सकते हैं। मगर म्यूजियम के अंदर की चीजों को आप बिल्कुल भी छू कर नहीं देख सकते। चारों तरफ गार्ड का पहरा होता है। गार्ड आप पर नजर गड़ाय रहते हैं ताकि कोई किसी भी तरह का नुकसान ना पहुंचा सके। आप चाहो तो कैमरे में सभी खूबसूरत नजारों को कैद कर सकते हैं। म्यूजियम के अंदर आपको कुषाण,  गुप्त,  उत्तर गुप्त या वर्धन, राजपूत, सल्तनत और मुगल काल की प्राचीन वस्तुएं देखने को मिलेंगी। मात्र 25 रूपये में प्राचीन चीजों को देखना साथ में मकबरे में घूमना, किसी सपने से कम नहीं।

राजा हर्ष का टीला

आपको बिल्कुल मकबरे के साथ ही राजा हर्ष का टीला भी देखने को मिलेगा। हालांकि राजा हर्ष के टीले में अंदर जाने की अनुमति नहीं है। मगर आप शेख चिल्ली के मकबरे के ऊपर से ही राजा हर्ष के टीले का नजारा देख सकते हैं। अगर आप कुरुक्षेत्र के 200  किलोमीटर के दायरे में हैं  तो आप एक दिन में आना जाना कर सकते हैं।

यदि आप 200 किलोमीटर के दायरे से बाहर हैं तो आपको कुरुक्षेत्र घूमने के लिए फुर्सत में आना होगा, क्योंकि साथ में आप महाभारत युद्ध के स्थलों और कई प्राचीन मंदिरों में भी घूमने का आनंद उठा सकते हैं।  आप कभी भी यहाँ घूमने आए तो समय निकालकर ही आएं, क्योंकि कुरुक्षेत्र में देखने के लिए बहुत कुछ है और इन सभी जगहों पर घूमने के लिए आपके पास पूरा समय होना चाहिए।

कैसे पहुंचे शेख चिल्ली मकबरा

शेख चिल्ली का मकबरा पहुंचने के लिए आपको रेलवे स्टेशन सबसे ज्यादा निकट पड़ेगा। रेलवे स्टेशन से आपको 10 किलोमीटर की दूरी मकबरे तक पहुंचने के लिए तय करनी होगी। आप रेलवे स्टेशन  से आसानी से ऑटो और कैब की सहायता से मकबरे तक पहुंच सकते हैं। कुरुक्षेत्र का नजदीकी हवाई अड्डा चंडीगढ़ है। चंडीगढ़ से कुरुक्षेत्र की दूरी 100 किलोमीटर की है। आप कैब या बस की सहायता से कुरुक्षेत्र आसानी से पहुंच सकते हैं।

बस स्टैंड से आपको शेख चिल्ली के मकबरे तक की दूरी 7 किलोमीटर के आसपास पड़ेगी। आप वहां से भी आसानी से कैब या आटों की सहायता से पहुंच सकते हैं।

 

Research by Pravesh Chauhan
Edited by Pardeep Kumar

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