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Udaipur Travel: झीलों की नगरी की 10 खास जगहें

राजस्थान घूमने का नाम आते ही कई लोगों के मन में रेगिस्तान, ऊँट और रेत के बड़े-बड़े टीले आने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी राजस्थान में एक ऐसा शहर भी है, जहाँ सुबह की शुरुआत झील के किनारे होती है और शाम पुराने महलों की रोशनी पानी में उतरते हुए दिखाई देती है? यहाँ कहीं अरावली की पहाड़ियाँ हैं, कहीं सफेद संगमरमर के महल और कहीं पुरानी गलियों में मिलती कचौरी और जलेबी की खुशबू। हम बात कर रहे हैं उदयपुर की, जिसे झीलों की नगरी (City of Lakes) कहा जाता है। Udaipur Travel

उदयपुर सिर्फ घूमने की जगह नहीं है, बल्कि यहाँ का हर कोना मेवाड़ के पुराने इतिहास, राजपूती शान और स्थानीय लोगों की जिंदगी की झलक दिखाता है। एक तरफ पिछोला झील में नाव की सवारी करते हुए महलों को करीब से देखने का मौका मिलता है, तो दूसरी तरफ पुराने बाजारों में घूमते हुए राजस्थानी कपड़े, चित्रकारी और हस्तशिल्प देखने को मिलते हैं। और अगर आप खाने के शौकीन हैं, तो दाल-बाटी-चूरमा से लेकर लाल मांस तक, यहाँ का खाना भी आपकी यात्रा को खास बना देगा।

अगर आप अपनी अगली छुट्टी में किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं जहाँ घूमने के साथ-साथ आराम करने, अच्छा खाना खाने और इतिहास जानने का मौका मिले, तो Udaipur Travel आपके लिए एक शानदार अनुभव हो सकता है। 

अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा है उदयपुर

राजस्थान के दक्षिणी हिस्से में स्थित उदयपुर अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है। शहर का पुराना हिस्सा पहाड़ियों और झीलों के बीच बसा है, जिसकी वजह से यहाँ का नजारा राजस्थान के दूसरे शहरों से काफी अलग दिखाई देता है। उदयपुर को झीलों की नगरी कहने की एक बड़ी वजह यहाँ मौजूद झीलों का खूबसूरत जाल है। पिछोला, फतेह सागर, स्वरूप सागर और रंग सागर जैसी झीलें शहर की पहचान बन चुकी हैं।

यहाँ की खास बात यह है कि झीलें सिर्फ घूमने-फिरने के लिए नहीं हैं, बल्कि शहर के पानी और आसपास के पर्यावरण के लिए भी अहम हैं। झीलों के किनारे बने घाट, पुराने महल और पहाड़ियों के बीच दिखाई देता पानी उदयपुर को एक अलग पहचान देते हैं। इसी खूबसूरती के कारण इसे कई बार ‘पूर्व का वेनिस’ भी कहा जाता है।

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Udaipur Travel की योजना बनाते समय यह बात ध्यान रखें कि शहर की खूबसूरती सिर्फ बड़े पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। कई बार किसी पुराने घाट पर बैठकर पानी को देखना या छोटी-सी गली में घूमना भी आपकी यात्रा का सबसे अच्छा हिस्सा बन सकता है। Udaipur Travel

मेवाड़ का इतिहास और उदयपुर की स्थापना की कहानी

उदयपुर का इतिहास मेवाड़ के राजपूत शासकों से जुड़ा हुआ है। लंबे समय तक चित्तौड़गढ़ मेवाड़ की राजधानी रहा, लेकिन 1568 में मुगल बादशाह अकबर की सेना ने चित्तौड़गढ़ पर हमला किया। इसके बाद मेवाड़ के महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित गिरवा घाटी में नई राजधानी बसाने का फैसला किया।

उदयपुर की स्थापना आमतौर पर 1559 ईस्वी मानी जाती है। महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने यहाँ नए शहर और महल के निर्माण की शुरुआत करवाई। पहाड़ियों से घिरी इस जगह को सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर माना गया। धीरे-धीरे यहाँ महल, मंदिर, बाजार और दूसरी इमारतें बनती गईं और उदयपुर मेवाड़ की नई राजधानी बन गया।

मेवाड़ के इतिहास में महाराणा प्रताप का नाम खास जगह रखता है। उन्होंने मुगल सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया और 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा। यह युद्ध भारतीय इतिहास में मेवाड़ के संघर्ष और महाराणा प्रताप की वीरता के लिए याद किया जाता है।

आज जब आप Udaipur Travel पर निकलते हैं, तो शहर के महलों और पुराने इलाकों में मेवाड़ के इसी इतिहास की झलक दिखाई देती है। यहाँ घूमते हुए आपको सिर्फ खूबसूरत इमारतें नहीं दिखेंगी, बल्कि उन शासकों और लोगों की यादें भी मिलेंगी जिन्होंने इस शहर को बनाया और सँवारा।

पिछोला झील: उदयपुर की सबसे खूबसूरत पहचान

उदयपुर की बात हो और पिछोला झील का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। यह शहर की सबसे पुरानी और प्रसिद्ध झीलों में से एक है। इसका निर्माण 1362 ईस्वी में पिच्छू बंजारा नाम के व्यक्ति ने करवाया था। बाद में महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने शहर बसाने के बाद झील का विस्तार कराया और इसके किनारों को मजबूत करवाया।

पिछोला झील के चारों तरफ महल, घाट और पुराने भवन बने हुए हैं। सुबह और शाम के समय यहाँ का नजारा खास तौर पर खूबसूरत लगता है। झील के पानी में सिटी पैलेस और आसपास की इमारतों की परछाई दिखाई देती है। अगर आप उदयपुर जाएँ, तो यहाँ बोटिंग का अनुभव जरूर लें। नाव से घूमते हुए आपको झील के बीच बने महलों और शहर के पुराने हिस्से को देखने का अलग मौका मिलता है। Udaipur Travel

झील के बीच बने चार द्वीपों में जग निवास, जग मंदिर, मोहन मंदिर और अरसी विलास शामिल हैं। जग निवास पर बना लेक पैलेस आज एक प्रसिद्ध हेरिटेज होटल है। जग मंदिर भी अपनी खूबसूरत बनावट और इतिहास के लिए जाना जाता है। मोहन मंदिर से मेवाड़ के शासक गणगौर उत्सव की सवारी देखा करते थे। वहीं अरसी विलास पक्षियों को देखने के लिए भी जाना जाता है।

Udaipur Travel में पिछोला झील को घूमने के लिए शाम का समय खास हो सकता है। ढलते सूरज की रोशनी में झील और महलों का नजारा बहुत सुंदर दिखाई देता है। अगर आप बोटिंग करना चाहते हैं, तो टिकट और उपलब्धता के बारे में उसी दिन जानकारी ले लें, क्योंकि मौसम और पानी के स्तर के हिसाब से सेवाओं में बदलाव हो सकता है।

फतेह सागर झील: जहाँ शाम को घूमने आते हैं शहर के लोग

पिछोला झील के बाद उदयपुर की दूसरी बड़ी पहचान फतेह सागर झील है। यह झील पहाड़ियों से घिरी हुई है और यहाँ का माहौल काफी खुला और आरामदायक लगता है। इसका निर्माण 1678 में महाराणा जय सिंह ने करवाया था। बाद में बाढ़ के कारण इसका पुराना बाँध टूट गया, जिसके बाद महाराणा फतेह सिंह के शासनकाल में इसका दोबारा निर्माण कराया गया। इसी वजह से इसका नाम फतेह सागर पड़ा।

इस झील में तीन छोटे द्वीप हैं। इनमें सबसे बड़ा नेहरू पार्क है, जहाँ घूमने के लिए लोग नाव से जाते हैं। दूसरे द्वीप पर फव्वारे वाला सार्वजनिक पार्क है और तीसरे द्वीप पर उदयपुर सोलर ऑब्जर्वेटरी स्थित है। यह वेधशाला झील के बीच एक द्वीप पर बनी होने के कारण खास पहचान रखती है।

फतेह सागर की पाल यानी झील के किनारे बनी सड़क पर शाम के समय काफी चहल-पहल रहती है। यहाँ स्थानीय लोग टहलने आते हैं और पर्यटक भी झील के नजारे का आनंद लेते हैं। आसपास मिलने वाला भुट्टा, चाय, कुल्फी और दूसरे छोटे-मोटे स्नैक्स आपकी शाम को और मजेदार बना सकते हैं।

अगर आप Udaipur Travel के दौरान कुछ समय बिना किसी जल्दबाजी के बिताना चाहते हैं, तो फतेह सागर झील के किनारे जरूर जाएँ। यहाँ बैठकर अरावली की पहाड़ियों के पीछे ढलते सूरज को देखना अपने आप में अच्छा अनुभव है। Udaipur Travel

सिटी पैलेस: जहाँ मेवाड़ के राजघराने की झलक मिलती है

पिछोला झील के किनारे स्थित सिटी पैलेस उदयपुर की सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारतों में से एक है। इसका निर्माण महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने 1559 में शुरू करवाया था। इसके बाद मेवाड़ के अलग-अलग शासकों ने समय-समय पर इसमें नए महल, आँगन और दूसरे हिस्से जुड़वाए। इसी वजह से आज यह एक बड़े महल परिसर के रूप में दिखाई देता है।

सिटी पैलेस में प्रवेश करते ही इसकी दीवारों, दरवाजों और आँगनों की बनावट आपका ध्यान खींचती है। यहाँ राजपूती स्थापत्य के साथ कई दूसरे स्थापत्य प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। महल के अंदर बने कमरों और संग्रहालय में पुराने हथियार, चित्र, शाही कपड़े और राजघराने से जुड़ी कई चीजें रखी गई हैं।

यहाँ का मोर चौक खास तौर पर देखने लायक है। इसकी दीवारों पर रंगीन काँच और सजावटी काम से बने मोर बहुत सुंदर दिखाई देते हैं। इसके अलावा शीश महल, जनाना महल और बड़ी महल भी परिसर के खास हिस्से हैं। पुराने समय में इन जगहों का इस्तेमाल शाही परिवार के अलग-अलग कामों के लिए किया जाता था।

सिटी पैलेस घूमने के लिए पर्याप्त समय रखें, क्योंकि यहाँ देखने के लिए कई हिस्से हैं। अगर आप इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं, तो गाइड की मदद से महल की जानकारी लेना भी अच्छा रहेगा। Udaipur Travel की लिस्ट में सिटी पैलेस को जरूर शामिल करें।

सज्जनगढ़ यानी मानसून पैलेस: पहाड़ी से दिखता उदयपुर का नजारा

उदयपुर के आसपास की पहाड़ियों पर बना सज्जनगढ़ पैलेस मानसून पैलेस के नाम से भी जाना जाता है। यह समुद्र तल से लगभग 944 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। इसका निर्माण महाराणा सज्जन सिंह ने 19वीं शताब्दी में शुरू करवाया था। उनका इरादा यहाँ से मानसून के बादलों और मौसम की गतिविधियों को देखने का था। बाद में महाराणा फतेह सिंह के समय इस महल का काम आगे बढ़ाया गया। Udaipur Travel

सज्जनगढ़ की सबसे बड़ी खासियत यहाँ से दिखाई देने वाला उदयपुर का नजारा है। एक तरफ झीलें और शहर की इमारतें दिखाई देती हैं, तो दूसरी तरफ अरावली की पहाड़ियाँ दूर तक फैली नजर आती हैं। शाम के समय यहाँ से सूर्यास्त देखना काफी अच्छा अनुभव हो सकता है।

यह महल सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के इलाके में स्थित है। इसलिए यहाँ जाते समय वन क्षेत्र से जुड़े नियमों का पालन करें और कचरा इधर-उधर न फेंकें। मौसम खराब होने या बारिश के दौरान रास्ते की स्थिति भी जाँच लें।

अगर आपको फोटोग्राफी पसंद है, तो Udaipur Travel के दौरान सज्जनगढ़ को अपनी लिस्ट में जरूर रखें। यहाँ से पूरे शहर को एक अलग नजरिए से देखने का मौका मिलता है।

जगदीश मंदिर: पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी

सिटी पैलेस के पास पुराने शहर के बीच स्थित जगदीश मंदिर उदयपुर का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। इसका निर्माण 1651 में महाराणा जगत सिंह प्रथम ने करवाया था। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, जिनकी यहाँ जगन्नाथ रूप में पूजा की जाती है।

मंदिर की सबसे खास बात इसकी पत्थर पर की गई बारीक नक्काशी है। बाहर की दीवारों, खंभों और प्रवेश द्वार पर बनी आकृतियाँ उस समय के कारीगरों की मेहनत दिखाती हैं। मंदिर की ऊँची शिखर और तीन मंजिला बनावट इसे आसपास की इमारतों से अलग पहचान देती है।

मंदिर के आसपास पुराना बाजार है, जहाँ छोटी दुकानें, खाने-पीने की जगहें और स्थानीय सामान बेचने वाले दुकानदार मिल जाते हैं। सुबह या शाम के समय यहाँ जाना अच्छा रहता है। दर्शन के दौरान मंदिर के नियमों का ध्यान रखें और धार्मिक जगह की शांति बनाए रखें।

Udaipur Travel के दौरान जगदीश मंदिर देखने के बाद आप पैदल ही सिटी पैलेस और आसपास के घाटों की तरफ जा सकते हैं। इस तरह एक ही इलाके में कई प्रमुख जगहें घूमी जा सकती हैं।

सहेलियों की बाड़ी: पुराने समय का खूबसूरत बगीचा

उदयपुर की सहेलियों की बाड़ी एक सुंदर ऐतिहासिक उद्यान है। इसका निर्माण महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय के शासनकाल में करवाया गया था। इसे राजघराने की महिलाओं के आराम और मनोरंजन के लिए बनवाया गया था। इसके नाम से ही पता चलता है कि यह जगह महारानी और उनकी सहेलियों के साथ जुड़ी हुई है।

इस बगीचे में संगमरमर के छोटे-छोटे मंडप, फव्वारे, कमल का तालाब और हरे-भरे पेड़ देखने को मिलते हैं। यहाँ का माहौल शहर की भीड़ से थोड़ा अलग और शांत है। बगीचे की बनावट में पानी और हरियाली का अच्छा इस्तेमाल किया गया है, जो इसे खास बनाता है। Udaipur Travel

अगर आप परिवार के साथ घूम रहे हैं या फोटोग्राफी करना पसंद करते हैं, तो यहाँ कुछ समय जरूर बिताएँ। सुबह के समय रोशनी अच्छी रहती है और बगीचे में घूमना भी आरामदायक होता है। Udaipur Travel में इस जगह को शामिल करने से आपकी यात्रा में महलों और झीलों के अलावा एक सुंदर बगीचे का अनुभव भी जुड़ जाएगा।

राजस्थानी खाने का स्वाद: दाल-बाटी से लेकर लाल मांस तक

उदयपुर घूमने आएँ और यहाँ के खाने का स्वाद न लें, तो यात्रा अधूरी-सी लग सकती है। मेवाड़ के खाने में देसी घी, दाल, मसालों और स्थानीय सामग्री का खूब इस्तेमाल होता है। यहाँ शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के खाने के कई विकल्प मिलते हैं।

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  • दाल-बाटी-चूरमा: राजस्थान का यह पारंपरिक खाना उदयपुर में जरूर चखना चाहिए। बाटी को गेहूँ के आटे से बनाया जाता है और सेंकने के बाद उस पर घी डाला जाता है। इसके साथ पंचमेल दाल और मीठा चूरमा परोसा जाता है। यह खाना स्वादिष्ट होने के साथ काफी पेट भरने वाला भी होता है।
  • लाल मांस: अगर आप मांसाहारी खाना पसंद करते हैं, तो राजस्थानी लाल मांस चख सकते हैं। यह आमतौर पर मटन से बनाया जाता है और इसमें लाल मिर्च, दही और मसालों का इस्तेमाल होता है। इसका स्वाद तीखा होता है, इसलिए ऑर्डर करते समय अपनी पसंद के हिसाब से तीखापन पूछ लें।
  • केर-सांगरी: यह राजस्थान की पारंपरिक सब्जी है, जिसे केर और सांगरी नाम के स्थानीय पौधों से तैयार किया जाता है। इसे मसालों के साथ पकाया जाता है और अक्सर रोटी या पारंपरिक थाली के साथ परोसा जाता है।
  • घेवर और मालपुआ: मीठा खाने के शौकीन लोगों के लिए घेवर और मालपुआ अच्छे विकल्प हैं। घेवर जालीदार मिठाई होती है, जिसे रबड़ी या मलाई के साथ खाया जाता है। मालपुआ चाशनी में डूबा मीठा पकवान है, जिसे कई जगह रबड़ी के साथ परोसा जाता है।

उदयपुर में पुराने शहर, जगदीश चौक और क्लॉक टावर के आसपास कई खाने-पीने की दुकानें मिलती हैं। फतेह सागर झील के किनारे भी शाम के समय स्नैक्स का आनंद लिया जा सकता है। Udaipur Travel का प्लान बनाते समय खाने के लिए भी थोड़ा समय जरूर रखें। Udaipur Travel

बाजार और हस्तशिल्प: उदयपुर से क्या खरीदकर लाएँ?

उदयपुर की पुरानी गलियों और बाजारों में घूमना भी अपने आप में एक अच्छा अनुभव है। यहाँ आपको राजस्थानी कपड़े, बंधेज की साड़ियाँ, रंगीन चूड़ियाँ, चांदी के गहने, कठपुतलियाँ और संगमरमर से बनी सजावटी चीजें मिल जाएँगी। अगर आप घर के लिए कोई यादगार सामान खरीदना चाहते हैं, तो इन बाजारों में घूम सकते हैं।

हाथीपोल बाजार खासकर चित्रकारी, कपड़ों और हस्तशिल्प के लिए जाना जाता है। यहाँ मेवाड़ की लघु चित्रकारी और पिछवाई पेंटिंग भी देखने को मिलती हैं। बड़ा बाजार और घंटाघर के आसपास भी कई पुरानी दुकानें हैं, जहाँ स्थानीय सामान मिलता है।

खरीदारी करते समय कीमत की तुलना जरूर करें। अगर आप कोई पारंपरिक पेंटिंग या हस्तशिल्प खरीद रहे हैं, तो दुकानदार से उसके बारे में जानकारी भी लें। इससे आपको उस कला और उसे बनाने वाले कारीगरों के बारे में जानने का मौका मिलेगा।

Udaipur Travel के दौरान बाजारों में घूमने के लिए शाम का समय अच्छा हो सकता है, लेकिन त्योहारों और छुट्टियों में भीड़ बढ़ सकती है। इसलिए आराम से घूमने के लिए थोड़ा समय निकालें।

शिल्पग्राम: राजस्थान और आसपास के राज्यों की लोक कला

उदयपुर के पास स्थित शिल्पग्राम एक ग्रामीण कला और शिल्प परिसर है। यहाँ राजस्थान के साथ गुजरात, गोवा और महाराष्ट्र की पारंपरिक कला, घरों की बनावट और हस्तशिल्प की झलक देखने को मिलती है। इस जगह का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों की लोक कला और कारीगरों की मेहनत को लोगों तक पहुँचाना है।

शिल्पग्राम में आपको पारंपरिक ग्रामीण घरों के नमूने, मिट्टी और लकड़ी से बनी चीजें, कपड़े, आभूषण और दूसरी हस्तशिल्प वस्तुएँ देखने को मिलती हैं। यहाँ समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। दिसंबर में होने वाला शिल्पग्राम उत्सव खास तौर पर प्रसिद्ध है, जिसमें अलग-अलग राज्यों के कलाकार और कारीगर हिस्सा लेते हैं। उत्सव की तारीख और कार्यक्रम की जानकारी यात्रा से पहले जाँच लें।

अगर आप सिर्फ महल और झीलें देखने के बजाय स्थानीय कला और संस्कृति को भी समझना चाहते हैं, तो Udaipur Travel के दौरान शिल्पग्राम जरूर जाएँ।

बागोर की हवेली: शाम को देखें राजस्थानी लोक नृत्य

पिछोला झील के पास गणगौर घाट पर स्थित बागोर की हवेली उदयपुर की पुरानी हवेलियों में से एक है। इस हवेली का निर्माण 18वीं शताब्दी में हुआ था। यहाँ के कमरों में पुराने समय के कपड़े, सजावटी सामान, चित्र और राजघराने से जुड़ी कई चीजें देखी जा सकती हैं।

बागोर की हवेली में शाम के समय होने वाला ‘धरोहर’ लोक कला कार्यक्रम भी काफी लोकप्रिय है। इसमें राजस्थान के पारंपरिक लोक नृत्य, संगीत और कठपुतली का प्रदर्शन किया जाता है। घूमर और भवई जैसे नृत्य देखने को मिल सकते हैं। कार्यक्रम की टाइमिंग और टिकट की जानकारी पहले जाँच लें, क्योंकि छुट्टियों के दिनों में सीटें जल्दी भर सकती हैं। Udaipur Travel

अगर आप दिन में झील और महल घूम रहे हैं, तो शाम को बागोर की हवेली का कार्यक्रम आपकी यात्रा में एक अच्छा सांस्कृतिक अनुभव जोड़ सकता है। Udaipur Travel के दौरान यहाँ जाना न भूलें।

उदयपुर घूमने का सही समय और कैसे पहुँचें?

उदयपुर घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय आमतौर पर अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहता है और शहर घूमना आसान होता है। गर्मियों में दिन के समय तापमान काफी बढ़ सकता है, इसलिए उस मौसम में सुबह और शाम को घूमने की योजना बनाना बेहतर रहेगा। मानसून में झीलें और पहाड़ियाँ हरी-भरी दिखाई देती हैं, लेकिन बारिश के कारण कुछ जगहों पर आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

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उदयपुर हवाई, रेल और सड़क—तीनों रास्तों से जुड़ा हुआ है। शहर का महाराणा प्रताप हवाई अड्डा देश के कुछ प्रमुख शहरों से उड़ानों के जरिए जुड़ा है। रेल से आने वाले यात्रियों के लिए उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन प्रमुख विकल्प है। इसके अलावा दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और दूसरे शहरों से सड़क मार्ग के जरिए भी यहाँ पहुँचा जा सकता है।

शहर के अंदर घूमने के लिए ऑटो, टैक्सी और स्थानीय परिवहन के विकल्प मिल जाते हैं। पुराने शहर की कई गलियाँ संकरी हैं, इसलिए वहाँ हर जगह अपनी कार ले जाना आसान नहीं होता। Udaipur Travel के दौरान एक ही इलाके की जगहों को साथ में घूमने की योजना बनाएँ, इससे समय और किराया दोनों बच सकते हैं। Udaipur Travel

Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव

  • पिछोला झील में बोटिंग जरूर करें। शाम के समय नाव की सवारी से झील, सिटी पैलेस और आसपास के महलों का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। टिकट और उपलब्धता पहले जाँच लें।
  • सिटी पैलेस के लिए पर्याप्त समय रखें। यहाँ कई आँगन, कमरे और संग्रहालय हैं। जल्दबाजी में घूमने के बजाय कम से कम दो घंटे का समय रखें।
  • फतेह सागर की पाल पर शाम बिताएँ। यहाँ स्थानीय लोगों के बीच बैठकर चाय, भुट्टा या हल्के स्नैक्स का मजा लें और झील के नजारे देखें।
  • स्थानीय बाजारों से हस्तशिल्प खरीदें। हाथीपोल और बड़ा बाजार में घूमकर बंधेज, चित्रकारी और स्थानीय सामान देख सकते हैं। खरीदारी से पहले कीमत की तुलना जरूर करें।
  • बागोर की हवेली का लोक कला कार्यक्रम देखें। अगर आप उदयपुर की संस्कृति को करीब से समझना चाहते हैं, तो शाम के धरोहर कार्यक्रम के लिए पहले से टिकट और समय की जानकारी ले लें।

उदयपुर की खूबसूरती इस बात में है कि यहाँ हर तरह के यात्री के लिए कुछ न कुछ है। किसी को झील के किनारे बैठकर सुकून मिलता है, तो किसी को पुराने महलों और मंदिरों का इतिहास जानना पसंद आता है। किसी के लिए यहाँ के बाजार खास हैं, तो किसी के लिए दाल-बाटी-चूरमा और राजस्थानी मिठाइयाँ। यही वजह है कि Udaipur Travel सिर्फ एक आम छुट्टी नहीं, बल्कि ऐसा सफर बन सकता है जिसकी याद लंबे समय तक आपके साथ रहती है। तो अगली बार राजस्थान जाने का प्लान बने, उदयपुर को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें। Udaipur Travel

Shivani Pal

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