Udaipur Travel: झीलों की नगरी की 10 खास जगहें
राजस्थान घूमने का नाम आते ही कई लोगों के मन में रेगिस्तान, ऊँट और रेत के बड़े-बड़े टीले आने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी राजस्थान में एक ऐसा शहर भी है, जहाँ सुबह की शुरुआत झील के किनारे होती है और शाम पुराने महलों की रोशनी पानी में उतरते हुए दिखाई देती है? यहाँ कहीं अरावली की पहाड़ियाँ हैं, कहीं सफेद संगमरमर के महल और कहीं पुरानी गलियों में मिलती कचौरी और जलेबी की खुशबू। हम बात कर रहे हैं उदयपुर की, जिसे झीलों की नगरी (City of Lakes) कहा जाता है। Udaipur Travel उदयपुर सिर्फ घूमने की जगह नहीं है, बल्कि यहाँ का हर कोना मेवाड़ के पुराने इतिहास, राजपूती शान और स्थानीय लोगों की जिंदगी की झलक दिखाता है। एक तरफ पिछोला झील में नाव की सवारी करते हुए महलों को करीब से देखने का मौका मिलता है, तो दूसरी तरफ पुराने बाजारों में घूमते हुए राजस्थानी कपड़े, चित्रकारी और हस्तशिल्प देखने को मिलते हैं। और अगर आप खाने के शौकीन हैं, तो दाल-बाटी-चूरमा से लेकर लाल मांस तक, यहाँ का खाना भी आपकी यात्रा को खास बना देगा। अगर आप अपनी अगली छुट्टी में किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं जहाँ घूमने के साथ-साथ आराम करने, अच्छा खाना खाने और इतिहास जानने का मौका मिले, तो Udaipur Travel आपके लिए एक शानदार अनुभव हो सकता है। अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा है उदयपुर राजस्थान के दक्षिणी हिस्से में स्थित उदयपुर अरावली पर्वतमाला से घिरा हुआ है। शहर का पुराना हिस्सा पहाड़ियों और झीलों के बीच बसा है, जिसकी वजह से यहाँ का नजारा राजस्थान के दूसरे शहरों से काफी अलग दिखाई देता है। उदयपुर को झीलों की नगरी कहने की एक बड़ी वजह यहाँ मौजूद झीलों का खूबसूरत जाल है। पिछोला, फतेह सागर, स्वरूप सागर और रंग सागर जैसी झीलें शहर की पहचान बन चुकी हैं। यहाँ की खास बात यह है कि झीलें सिर्फ घूमने-फिरने के लिए नहीं हैं, बल्कि शहर के पानी और आसपास के पर्यावरण के लिए भी अहम हैं। झीलों के किनारे बने घाट, पुराने महल और पहाड़ियों के बीच दिखाई देता पानी उदयपुर को एक अलग पहचान देते हैं। इसी खूबसूरती के कारण इसे कई बार ‘पूर्व का वेनिस’ भी कहा जाता है। Udaipur Travel की योजना बनाते समय यह बात ध्यान रखें कि शहर की खूबसूरती सिर्फ बड़े पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। कई बार किसी पुराने घाट पर बैठकर पानी को देखना या छोटी-सी गली में घूमना भी आपकी यात्रा का सबसे अच्छा हिस्सा बन सकता है। Udaipur Travel मेवाड़ का इतिहास और उदयपुर की स्थापना की कहानी उदयपुर का इतिहास मेवाड़ के राजपूत शासकों से जुड़ा हुआ है। लंबे समय तक चित्तौड़गढ़ मेवाड़ की राजधानी रहा, लेकिन 1568 में मुगल बादशाह अकबर की सेना ने चित्तौड़गढ़ पर हमला किया। इसके बाद मेवाड़ के महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित गिरवा घाटी में नई राजधानी बसाने का फैसला किया। उदयपुर की स्थापना आमतौर पर 1559 ईस्वी मानी जाती है। महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने यहाँ नए शहर और महल के निर्माण की शुरुआत करवाई। पहाड़ियों से घिरी इस जगह को सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर माना गया। धीरे-धीरे यहाँ महल, मंदिर, बाजार और दूसरी इमारतें बनती गईं और उदयपुर मेवाड़ की नई राजधानी बन गया। मेवाड़ के इतिहास में महाराणा प्रताप का नाम खास जगह रखता है। उन्होंने मुगल सत्ता के खिलाफ संघर्ष किया और 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा। यह युद्ध भारतीय इतिहास में मेवाड़ के संघर्ष और महाराणा प्रताप की वीरता के लिए याद किया जाता है। आज जब आप Udaipur Travel पर निकलते हैं, तो शहर के महलों और पुराने इलाकों में मेवाड़ के इसी इतिहास की झलक दिखाई देती है। यहाँ घूमते हुए आपको सिर्फ खूबसूरत इमारतें नहीं दिखेंगी, बल्कि उन शासकों और लोगों की यादें भी मिलेंगी जिन्होंने इस शहर को बनाया और सँवारा। पिछोला झील: उदयपुर की सबसे खूबसूरत पहचान उदयपुर की बात हो और पिछोला झील का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। यह शहर की सबसे पुरानी और प्रसिद्ध झीलों में से एक है। इसका निर्माण 1362 ईस्वी में पिच्छू बंजारा नाम के व्यक्ति ने करवाया था। बाद में महाराणा उदय सिंह द्वितीय ने शहर बसाने के बाद झील का विस्तार कराया और इसके किनारों को मजबूत करवाया। पिछोला झील के चारों तरफ महल, घाट और पुराने भवन बने हुए हैं। सुबह और शाम के समय यहाँ का नजारा खास तौर पर खूबसूरत लगता है। झील के पानी में सिटी पैलेस और आसपास की इमारतों की परछाई दिखाई देती है। अगर आप उदयपुर जाएँ, तो यहाँ बोटिंग का अनुभव जरूर लें। नाव से घूमते हुए आपको झील के बीच बने महलों और शहर के पुराने हिस्से को देखने का अलग मौका मिलता है। Udaipur Travel झील के बीच बने चार द्वीपों में जग निवास, जग मंदिर, मोहन मंदिर और अरसी विलास शामिल हैं। जग निवास पर बना लेक पैलेस आज एक प्रसिद्ध हेरिटेज होटल है। जग मंदिर भी अपनी खूबसूरत बनावट और इतिहास के लिए जाना जाता है। मोहन मंदिर से मेवाड़ के शासक गणगौर उत्सव की सवारी देखा करते थे। वहीं अरसी विलास पक्षियों को देखने के लिए भी जाना जाता है। Udaipur Travel में पिछोला झील को घूमने के लिए शाम का समय खास हो सकता है। ढलते सूरज की रोशनी में झील और महलों का नजारा बहुत सुंदर दिखाई देता है। अगर आप बोटिंग करना चाहते हैं, तो टिकट और उपलब्धता के बारे में उसी दिन जानकारी ले लें, क्योंकि मौसम और पानी के स्तर के हिसाब से सेवाओं में बदलाव हो सकता है। फतेह सागर झील: जहाँ शाम को घूमने आते हैं शहर के लोग पिछोला झील के बाद उदयपुर की दूसरी बड़ी पहचान फतेह सागर झील है। यह झील पहाड़ियों से घिरी हुई है और यहाँ का माहौल काफी खुला और आरामदायक लगता है। इसका निर्माण 1678 में महाराणा जय सिंह ने करवाया था। बाद में बाढ़ के कारण इसका पुराना बाँध टूट गया, जिसके बाद महाराणा फतेह सिंह के शासनकाल में इसका दोबारा निर्माण कराया गया। इसी वजह से इसका नाम फतेह सागर पड़ा। इस झील में तीन छोटे द्वीप