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Madurai Travel: 10 जगहें जो आपकी Travel List में जरूर हों

Madurai

अगर आपको ऐसी जगह घूमना पसंद है जहां एक ही शहर में पुराने मंदिर, ऐतिहासिक इमारतें, पहाड़ियां, बाजार और अलग तरह का खाना देखने को मिल जाए, तो मदुरै आपके लिए एक शानदार जगह हो सकती है। तमिलनाडु का यह प्राचीन शहर सिर्फ धार्मिक वजहों से ही खास नहीं है, बल्कि यहां की गलियों और बाजारों में आपको दक्षिण भारत की पुरानी संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी भी करीब से देखने को मिलती है।

Madurai वैगई नदी के तट पर बसा हुआ एक बेहद पुराना और जीवंत शहर है। इसे ‘एथेंस ऑफ द ईस्ट’ भी कहा जाता है। यहां के बड़े-बड़े मंदिर, पुराने महल, बाजार और स्ट्रीट फूड इसे बाकी शहरों से अलग पहचान देते हैं।

Madurai Travel की खास बात यह है कि यहां घूमने के लिए आपको सिर्फ एक तरह की जगहें नहीं मिलेंगी। अगर आप मंदिर देखना चाहते हैं तो मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर है, इतिहास में दिलचस्पी है तो गांधी मेमोरियल म्यूजियम और तिरुमलाई नायक महल हैं, बाजार घूमना है तो पुथु मंडपम और बनाना मार्केट हैं और अगर खाने के शौकीन हैं तो मदुरै का स्ट्रीट फूड अपने आप में एक अलग अनुभव है।

यह शहर दिन के साथ-साथ रात में भी काफी जीवंत नजर आता है। यहां की गलियों में लोगों की चहल-पहल और खाने की अलग-अलग खुशबू आपको लगातार महसूस होती रहती है। इसलिए Madurai को सिर्फ मंदिरों का शहर समझना इसकी पूरी तस्वीर नहीं होगी। अगर आप पहली बार Madurai Travel का प्लान बना रहे हैं, तो शहर की इन दस खास जगहों को अपनी यात्रा में जरूर शामिल कर सकते हैं

मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर से शुरू करें Madurai Travel

Madurai की पहचान की बात करें तो सबसे पहले मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर का नाम आता है। यह मंदिर शहर के बीचों-बीच अपनी भव्यता के साथ खड़ा है और इसे मदुरै का दिल भी कहा जा सकता है। वैगई नदी के दक्षिणी तट पर स्थित यह मंदिर देवी मीनाक्षी और उनके पति भगवान सुंदरेश्वर को समर्पित है। मीनाक्षी देवी को पार्वती का रूप माना जाता है, जबकि सुंदरेश्वर भगवान शिव का रूप हैं।

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मंदिर का पूरा परिसर करीब 14 एकड़ में फैला हुआ है। यहां 14 बड़े गोपुरम हैं, जिन पर हजारों रंग-बिरंगी मूर्तियां बनी हुई हैं। इन गोपुरम में दक्षिणी गोपुरम सबसे ऊंचा है, जिसकी ऊंचाई करीब 170 फीट यानी 52 मीटर है। इन पर बनी मूर्तियों को देखते हुए आपको समझ आता है कि इस मंदिर की वास्तुकला कितनी खास है। Madurai Travel के दौरान मंदिर के अंदर 1000 खंभों वाले हॉल यानी आयिरम काल मंडपम को भी देखा जा सकता है।

हालांकि यहां 985 कलात्मक तरीके से तराशे गए खंभे हैं। हर खंभे की नक्काशी इस जगह को और खास बनाती है। मंदिर परिसर में पोट्रामरई कुलम यानी स्वर्ण कमल तालाब भी है। अगर आप अप्रैल-मई में Madurai जा रहे हैं, तो यहां होने वाला चिथिरई उत्सव भी खास आकर्षण हो सकता है। यह उत्सव करीब 15 दिनों तक चलता है और काफी धूमधाम से मनाया जाता है।

तिरुमलाई नायक महल में दिखेगा पुराना Madurai

मीनाक्षी मंदिर से करीब डेढ़ से दो किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में तिरुमलाई नायक महल स्थित है। Madurai घूमते समय यह जगह इतिहास और वास्तुकला में दिलचस्पी रखने वालों के लिए काफी खास है। इस महल का निर्माण मदुरै के नायक वंश के राजा तिरुमलाई नायक ने 1636 ईस्वी में करवाया था।

महल की बनावट में विजयनगर और द्रविड़ स्थापत्य शैली का प्रभाव देखने को मिलता है। महल के खंभों और मेहराबों को चूने और अंडे की सफेदी के खास मिश्रण यानी चूनम से तैयार किया गया था। इसकी वजह से इनकी सतह पर एक चिकनी और चमकदार बनावट दिखाई देती है। महल का केंद्रीय प्रांगण करीब 40,000 वर्ग फीट में फैला हुआ है।

इसके चारों तरफ करीब 82 फीट ऊंचे और 19 फीट चौड़े बड़े गोल खंभे बने हैं। Madurai Travel में तिरुमलाई नायक महल की खास बात यह है कि यहां सिर्फ पुरानी इमारत देखने को नहीं मिलती, बल्कि शाम के समय लाइट एंड साउंड शो भी आयोजित किया जाता है। महल का स्वर्ग विलासम और डांस हॉल भी यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। अगर आपको पुराने राजाओं के समय की इमारतें और उनकी बनावट पसंद है, तो Madurai में इस महल को जरूर देखें।

वंडियूर मरिअम्मन तेप्पकुलम का बड़ा तालाब

Madurai के बड़े और खास मंदिर तालाबों में वंडियूर मरिअम्मन तेप्पकुलम का नाम आता है। यह मीनाक्षी मंदिर से करीब दो से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक बड़ा चौकोर तालाब है, जिसका निर्माण 1645 ईस्वी में राजा तिरुमलाई नायक ने करवाया था। तालाब में पानी वैगई नदी से भूमिगत नहरों के जरिए आता है।

इस तालाब की सबसे खास बात इसके बीच में बना हुआ छोटा मानवनिर्मित द्वीप है। इस द्वीप पर भगवान विग्नेश्वर यानी गणेश जी का मंदिर बना हुआ है। Madurai Travel के दौरान अगर आप जनवरी या फरवरी में यहां पहुंचते हैं, तो पूर्णिमा की रात होने वाला फ्लोट फेस्टिवल यानी तेप्पोत्सवम भी देखा जा सकता है।

इस दौरान तालाब हजारों दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है। भगवान सुंदरेश्वर और देवी मीनाक्षी की मूर्तियों को सजे हुए तैरते रथ पर तालाब में लाया जाता है। यही वजह है कि यह जगह Madurai की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का एक खास हिस्सा बन जाती है।

गांधी मेमोरियल म्यूजियम में इतिहास को करीब से जानें

अगर Madurai Travel में आप मंदिरों के अलावा इतिहास से जुड़ी जगहें भी देखना चाहते हैं, तो गांधी मेमोरियल म्यूजियम जरूर जाएं। यह संग्रहालय रानी मंगम्मल के 17वीं शताब्दी के ऐतिहासिक तमुकम पैलेस में बनाया गया है। इसका उद्घाटन 1959 में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था।

मदुरै का महात्मा गांधी के जीवन से भी खास संबंध रहा है। यहीं उन्होंने दलितों के साथ मीनाक्षी मंदिर में प्रवेश कर सामाजिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया था। संग्रहालय में ‘इंडिया फाइट्स फॉर फ्रीडम’, ‘विजुअल बायोग्राफी ऑफ महात्मा गांधी’ और ‘रेलिक्स एंड रिप्लिका’ जैसी दीर्घाएं हैं। यहां महात्मा गांधी से जुड़ी कई चीजें देखने को मिलती हैं।

संग्रहालय में शीशे के बॉक्स में वह खून से सना कपड़ा भी रखा हुआ है, जिसे गांधी जी ने अपनी हत्या के दिन पहना था। इस वजह से Madurai आने वाले इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए यह संग्रहालय काफी महत्वपूर्ण जगह बन जाता है।

कूडल अझगर मंदिर की तीन अलग मुद्राएं

मदुरै के पुराने धार्मिक स्थलों में कूडल अझगर मंदिर का भी खास स्थान है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। यहां भगवान को वियोग सुंदरराजन के रूप में पूजा जाता है और उनकी पत्नी लक्ष्मी जी को मथुरावल्ली के नाम से जाना जाता है।

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मंदिर द्रविड़ वास्तुकला में बनाया गया है और इसमें पांच मंजिला राजा गोपुरम और अष्टांग विमानम है। Madurai Travel के दौरान इस मंदिर की सबसे अलग बात आपको इसके गर्भगृह में देखने को मिलती है। यहां भगवान विष्णु की तीन अलग-अलग मुद्राओं में मूर्तियां स्थापित हैं। एक बैठी हुई मुद्रा में, दूसरी खड़ी मुद्रा में और तीसरी लेटी हुई मुद्रा में।

यह मंदिर वैष्णव परंपरा के 108 दिव्य देसमों में भी शामिल है। मंदिर परिसर में नवग्रहों यानी नौ ग्रहों का मंदिर भी है, जो आमतौर पर शिव मंदिरों में देखने को मिलता है। इसलिए Madurai के धार्मिक स्थलों को समझने के लिए कूडल अझगर मंदिर भी आपकी यात्रा का हिस्सा होना चाहिए।

अझगर कोविल में पहाड़ियों के बीच मंदिर

शहर से करीब 21 किलोमीटर दूर अलगर पहाड़ियों की तलहटी में अझगर कोविल मंदिर स्थित है। Madurai से थोड़ा बाहर जाकर किसी पहाड़ी इलाके में मंदिर देखने का मन हो, तो यह जगह अच्छी रहेगी। यह एक पवित्र विष्णु मंदिर है।

यहां मुख्य देवता भगवान परमस्वामी हैं, जबकि उत्सव मूर्ति सुंदरराजन यानी अलगर के रूप में जानी जाती है। इन्हें देवी मीनाक्षी का भाई माना जाता है। इस मंदिर का संबंध संगम युग से जोड़ा जाता है और इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों तथा सिलप्पदिकारम जैसे महाकाव्य में भी मिलता है। मंदिर में पांड्य और नायक राजाओं के समय की नक्काशीदार कलाकृतियां भी देखने को मिलते हैं।

मंदिर के पास नूपुर गंगा नाम का एक प्राकृतिक जलस्रोत या तीर्थम है। इससे जुड़ी मान्यता है कि यह सीधे स्वर्ग से उतरा है और इसमें स्नान करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। अगर आप Madurai Travel में शहर के धार्मिक स्थलों के साथ पहाड़ी वातावरण भी देखना चाहते हैं, तो अझगर कोविल को शामिल किया जा सकता है।

समणर हिल्स में मिलेगा शांति वाला अनुभव

मदुरै की भीड़भाड़ से थोड़ी दूरी पर अगर आप शांत जगह देखना चाहते हैं, तो समणर हिल्स यानी समणर मलाई जा सकते हैं। यह मदुरै से करीब 10 किलोमीटर पश्चिम में कीलाकूयिलकुडी गांव के पास स्थित है। Madurai की इस पहाड़ी जगह का इतिहास काफी पुराना है। यहां दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 12वीं शताब्दी ईस्वी तक के ऐतिहासिक स्मारक और शिलालेख पाए जाते हैं।

यह जगह प्राचीन जैन और हिंदू परंपराओं से जुड़ी रही है। पहाड़ियों पर सेट्टीपोडवू और पेच्चिपल्लम जैसी जैन गुफाएं हैं। सेट्टीपोडवू गुफा में तीर्थंकर महावीर स्वामी की एक बड़ी बैठी हुई मूर्ति चट्टान पर उकेरी गई है। यहां चट्टानों पर तमिल-ब्राह्मी और वट्टेळुत्तु लिपि में लिखे शिलालेख भी मिलते हैं।

इनसे जैन भिक्षुओं और दानदाताओं से जुड़े पुराने इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है। Madurai Travel में अगर आपको पुरानी जगहों के साथ प्राकृतिक वातावरण पसंद है, तो समणर हिल्स एक अलग तरह का अनुभव दे सकती है।

तिरुप्परंकुंड्रम मुरुगन मंदिर

मदुरै शहर से करीब आठ किलोमीटर दक्षिण में तिरुप्परंकुंड्रम मुरुगन मंदिर स्थित है। भगवान मुरुगन को समर्पित यह मंदिर उनके छह पवित्र धामों यानी अरुपडाइवेडु में से एक है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसे चट्टानों को काटकर बनाया गया है। मंदिर सोलाइमलाई या कांजमलाई पहाड़ी के पास स्थित है।

Madurai के इस इलाके में आपको सिर्फ हिंदू मंदिर ही नहीं, बल्कि प्राचीन जैन गुफाओं के अवशेष भी देखने को मिलते हैं। इससे इस क्षेत्र के पुराने और अलग-अलग धार्मिक इतिहास का अंदाजा मिलता है। अगर आप Madurai Travel में धार्मिक स्थलों के साथ इतिहास भी देखना चाहते हैं, तो तिरुप्परंकुंड्रम को अपनी सूची में रखा जा सकता है।

पुथु मंडपम और बनाना मार्केट में दिखेगा असली बाजार

Madurai को समझना है तो सिर्फ बड़े मंदिरों और ऐतिहासिक इमारतों तक सीमित न रहें। शहर के पुराने बाजारों में घूमना भी जरूरी है। यहीं आपको स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और शहर की असली चहल-पहल देखने को मिलती है। मीनाक्षी मंदिर के पास स्थित पुथु मंडपम 17वीं शताब्दी का ऐतिहासिक खंभों वाला हॉल है।

इसे राजा तिरुमलाई नायक ने बनवाया था। आज यह एक जीवंत बाजार बन चुका है। यहां हाथ से बुने पारंपरिक कपड़े, रेशमी साड़ियां, सूती धोती और हस्तशिल्प का सामान मिल सकता है। Madurai Travel में खरीदारी करने वालों के लिए यह जगह काफी अच्छी हो सकती है, क्योंकि यहां बाजार और इतिहास दोनों एक साथ देखने को मिलते हैं।

इसके अलावा रुकमणीपालयम में स्थित बनाना मार्केट भी काफी अलग अनुभव देता है। यहां एक ही जगह पर केले की एक दर्जन से ज्यादा किस्में बिकती हैं। यही वजह है कि यह बाजार पर्यटकों और फोटोग्राफरों को भी आकर्षित करता है। अगर आप Madurai के स्थानीय जीवन को करीब से देखना चाहते हैं, तो इन दोनों बाजारों में घूमना जरूर चाहिए।

Madurai आए और स्ट्रीट फूड नहीं खाया तो क्या खाया!

Madurai Travel सिर्फ मंदिरों और इतिहास तक सीमित नहीं है। इस शहर की यात्रा का एक बड़ा हिस्सा यहां का खाना भी है। मदुरै अपने स्ट्रीट फूड और अलग तरह के स्थानीय स्वाद के लिए काफी मशहूर है। यहां का सबसे खास पेय है जिगरठंडा। इसे दूध, बादाम पिसिन यानी गोंद, नन्नारी सिरप, चीनी और आइसक्रीम से तैयार किया जाता है।

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खासकर गर्म मौसम में यह ठंडा पेय काफी पसंद किया जाता है। इसके अलावा पारुथी पाल भी यहां का एक खास पेय है। इसे कपास के बीज के दूध, अदरक, इलायची और बादाम से बनाया जाता है। यह एक पौष्टिक और सुपाच्य गर्म पेय माना जाता है। Madurai की खाने की सूची में बन परोटा भी जरूर आता है। देखने में यह बन जैसा लगता है, लेकिन खाने में परोटे की तरह परतदार होता है।

अगर आप Madurai Travel के दौरान और भी स्थानीय स्वाद लेना चाहते हैं, तो मुरुगन इडली शॉप की मुलायम इडली, जयराम बेकरी का कोथु परोटा, कीरई वडै और मुरुक्कू भी आजमा सकते हैं। यानी Madurai में घूमते हुए खाने के शौकीनों के लिए भी काफी कुछ है।

Madurai Travel में मंदिर से बाजार तक सब मिलेगा

मदुरै की सबसे खास बात शायद यही है कि यहां आपको हर जगह कुछ अलग देखने को मिलता है। एक तरफ मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर के ऊंचे गोपुरम हैं, तो दूसरी तरफ पुराने बाजारों की चहल-पहल। कहीं तिरुमलाई नायक महल की पुरानी वास्तुकला है, तो कहीं गांधी मेमोरियल म्यूजियम में देश के इतिहास से जुड़ी चीजें हैं। वंडियूर मरिअम्मन तेप्पकुलम में बड़ा तालाब और धार्मिक उत्सव देखने को मिलता है, जबकि समणर हिल्स और तिरुप्परंकुंड्रम में पुराने धार्मिक इतिहास की झलक मिलती है।

Madurai Travel में अझगर कोविल जैसी जगह आपको शहर से बाहर पहाड़ी वातावरण तक लेकर जाती है। वहीं पुथु मंडपम और बनाना मार्केट आपको स्थानीय बाजार और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ते हैं। और आखिर में यहां का स्ट्रीट फूड इस पूरी यात्रा में स्वाद का एक अलग हिस्सा जोड़ देता है। इसलिए अगर आप Madurai जाने का प्लान बना रहे हैं, तो सिर्फ एक-दो प्रसिद्ध जगह देखकर वापस न लौटें।

इस शहर को थोड़ा समय दें और मंदिरों के साथ महल, बाजार, पहाड़ियां, संग्रहालय और स्थानीय खाना भी देखें। Madurai Travel का असली मजा इसी में है कि एक ही यात्रा में आपको इतिहास, संस्कृति, धार्मिक विरासत और स्थानीय स्वाद सब एक साथ देखने को मिलते हैं।

Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव

  • मीनाक्षी मंदिर सुबह जाएं: भीड़ कम मिलेगी और मंदिर की वास्तुकला आराम से देख पाएंगे।
  • नायक महल का शो देखें: शाम का लाइट एंड साउंड शो जरूर देखें।
  • जिगरठंडा जरूर पिएं: Madurai का यह खास ठंडा पेय यात्रा में जरूर आजमाएं।
  • पुराने बाजार घूमें: पुथु मंडपम में स्थानीय कपड़े और हस्तशिल्प देखना न भूलें।
  • समणर हिल्स का समय सोचकर रखें: सुबह या शाम के समय यहां जाना बेहतर अनुभव दे सकता है।
Shivani Pal

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