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Delhi के रेलवे स्टेशन बनेंगे स्मार्ट ट्रांसपोर्ट हब

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Delhi में रहने वालों और बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए सफर का सबसे बड़ा झंझट सिर्फ ट्रेन पकड़ना नहीं होता, बल्कि असली परेशानी ट्रेन से उतरने के बाद शुरू होती है। स्टेशन से बाहर निकलो तो ऑटो की तलाश, भारी सामान के साथ सीढ़ियां चढ़ो-उतरो, सड़क पार करो और फिर मेट्रो या बस तक पहुंचने के लिए ट्रैफिक से जूझो।

खासकर Delhi-NCR जैसे बड़े इलाके में एक जगह से दूसरी जगह जाने में काफी समय निकल जाता है। लेकिन आने वाले समय में यह तस्वीर काफी बदल सकती है। Delhi के कई बड़े रेलवे स्टेशन और ट्रांसपोर्ट हब अब नए तरीके से विकसित किए जा रहे हैं।

आनंद विहार, हज़रत निज़ामुद्दीन, शाहदरा, दिल्ली कैंट, सराय रोहिल्ला और न्यू अशोक नगर जैसे इलाकों में ऐसे प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनका मकसद यात्रियों का सफर आसान बनाना है। इन बदलावों के बाद Delhi Railway Stations सिर्फ ट्रेन पकड़ने और उतरने की जगह नहीं रहेंगे, बल्कि ऐसे बड़े ट्रांसपोर्ट हब बनेंगे जहां ट्रेन, मेट्रो, नमो भारत, बस और दूसरे साधनों के बीच आसानी से सफर किया जा सकेगा

आनंद विहार बनेगा बड़ा ट्रांसपोर्ट हब

Delhi-NCR में अगर किसी जगह को ट्रांसपोर्ट का बड़ा केंद्र कहा जाए तो उसमें आनंद विहार का नाम जरूर आता है। यहां पहले से रेलवे स्टेशन, Delhi मेट्रो, ISBT और नमो भारत जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। लेकिन इन सभी के बीच आने-जाने में यात्रियों को काफी परेशानी होती है। अब इस परेशानी को कम करने के लिए NCRTC यहां एक बड़ा और आधुनिक स्काईवॉक बनाने की तैयारी कर रहा है।

यह स्काईवॉक करीब 417 मीटर लंबा होगा और पूरी तरह कवर्ड रहेगा। यानी यात्रियों को धूप, बारिश या ट्रैफिक के बीच सड़क पार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस स्काईवॉक में एयरपोर्ट की तरह चलने वाली फर्श यानी ट्रैवलेटर भी लगाए जाएंगे। इससे खासतौर पर बुजुर्ग यात्रियों, बच्चों और भारी सामान लेकर सफर करने वालों को काफी राहत मिलेगी।

इस नए सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि एक ही कनेक्टिंग रास्ते के जरिए कई ट्रांसपोर्ट साधनों तक पहुंच आसान हो जाएगी। यात्री आनंद विहार रेलवे स्टेशन से नमो भारत स्टेशन, Delhi मेट्रो की ब्लू और पिंक लाइन और आसपास के बस टर्मिनल तक आसानी से जा सकेंगे। यही वजह है कि आने वाले वर्षों में Delhi Railway Stations की तस्वीर सिर्फ प्लेटफॉर्म और ट्रेनों तक सीमित नहीं रहने वाली है। उन्हें बड़े मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम का हिस्सा बनाया जा रहा है।

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5 ट्रांसपोर्ट सिस्टम होंगे एक-दूसरे से जुड़े

आनंद विहार में बनने वाला यह स्काईवॉक देश के उन खास प्रोजेक्ट्स में शामिल होगा जहां कई अलग-अलग ट्रांसपोर्ट सिस्टम को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अभी अक्सर यात्रियों को ट्रेन से उतरकर मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के लिए सड़क पार करनी पड़ती है।

कई बार सामान ज्यादा होने की वजह से यह छोटा सा सफर भी काफी मुश्किल लगने लगता है। बारिश या गर्मी के दिनों में परेशानी और बढ़ जाती है। लेकिन नए स्काईवॉक के बनने के बाद यात्रियों को एक कवर्ड रास्ता मिलेगा।

जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए जून 2026 में टेंडर जारी किया जा चुका है और करीब 15 महीने की समयसीमा में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका मतलब आने वाले समय में आनंद विहार में ट्रेन से उतरकर मेट्रो पकड़ना पहले से कहीं आसान हो सकता है।

स्टेशन के पास होटल और मॉल की भी तैयारी

आनंद विहार रेलवे स्टेशन के आसपास सिर्फ ट्रांसपोर्ट सुविधाएं ही नहीं बढ़ाई जा रही हैं, बल्कि यात्रियों के लिए दूसरी सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है। योजना के मुताबिक स्टेशन परिसर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत थ्री-स्टार बजट होटल, मॉल और यात्रियों के ठहरने की सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।

इसका फायदा खासतौर पर उन लोगों को होगा जो Delhi में कुछ घंटों के लिए रुकते हैं या जिनकी अगली ट्रेन काफी देर बाद है। आजकल Delhi Railway Stations को सिर्फ यात्रा की जगह नहीं, बल्कि ऐसे स्पेस के रूप में विकसित करने की सोच है जहां यात्रियों को खाने-पीने, रुकने और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी एक ही जगह मिल सकें।

आनंद विहार में पुराने ओवरब्रिज को चौड़ा करने और ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर बनाने पर भी काम किया जा रहा है। साथ ही आनंद विहार से पश्चिमी Delhi के ज़खीरा तक सिग्नल-फ्री कॉरिडोर बनाने की योजना भी सामने आई है।

आनंद विहार ISBT का भी बदलेगा पूरा रूप

आनंद विहार सिर्फ रेलवे स्टेशन की वजह से व्यस्त नहीं है। यहां का ISBT भी Delhi-NCR के सबसे महत्वपूर्ण बस टर्मिनलों में शामिल है। अब इस बस अड्डे के बड़े हिस्से का पुनर्विकास किया जा रहा है। लगभग 25.20 एकड़ क्षेत्र में फैले इस इलाके में करीब 19.72 एकड़ हिस्से को नए तरीके से विकसित करने की योजना है। यहां G+1 मंजिला नया बस टर्मिनल बनाया जाएगा।

इसके ज्यादातर हिस्से में बसों का संचालन होगा, जबकि बाकी जगह पर रिटेल दुकानें, फूड कोर्ट, ऑफिस स्पेस और यात्रियों के लिए होटल या ठहरने की सुविधा विकसित की जाएगी।

अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यहां यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। मौजूदा समय में जहां रोजाना करीब 64 हजार यात्री आते हैं, वहीं साल 2053 तक यह संख्या करीब 1,17,713 तक पहुंच सकती है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए यह बदलाव बेहद जरूरी माना जा रहा है।

सराय काले खां और निजामुद्दीन में बनेगा बड़ा मल्टीमॉडल हब

Delhi में ट्रेन और बस से सफर करने वालों के लिए सराय काले खां और हज़रत निज़ामुद्दीन का इलाका बहुत महत्वपूर्ण है। यहां रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और दूसरे ट्रांसपोर्ट नेटवर्क मौजूद हैं। अब इस पूरे इलाके को एक बड़े मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इस प्रोजेक्ट पर करीब ₹7,600 करोड़ खर्च किए जाने की योजना है।

इसे ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी TOD मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। इसका सीधा मकसद यात्रियों को एक ट्रांसपोर्ट साधन से दूसरे तक पहुंचने में आसानी देना है। कल्पना कीजिए कि आप हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर उतरते हैं और आपको आगे बस या नमो भारत पकड़नी है।

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अभी इस तरह के इंटरचेंज में काफी समय और मेहनत लग सकती है। लेकिन भविष्य में पूरा इलाका बेहतर तरीके से जुड़ने के बाद यह सफर आसान हो सकता है। ऐसे प्रोजेक्ट्स के जरिए Delhi Railway Stations को शहर की बाकी पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था के साथ मजबूत तरीके से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

बसों की संख्या और क्षमता भी बढ़ेगी

सराय काले खां बस टर्मिनल में भी यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अभी यहां करीब 64 बस बे हैं। लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बसों की क्षमता बढ़ाने की योजना है। अनुमान के अनुसार साल 2033 तक यहां करीब 100 बसों, साल 2043 तक 123 और साल 2053 तक 154 बसों के संचालन की क्षमता विकसित की जा सकती है।

यात्रियों की संख्या भी बढ़ने की उम्मीद है। वर्तमान में जहां यहां करीब 10 हजार यात्री आते हैं, वहीं आने वाले वर्षों में यह संख्या 19 हजार से ज्यादा पहुंच सकती है। बस टर्मिनल के निर्माण को लगभग 24 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि कमर्शियल और रियल एस्टेट वाले हिस्से को करीब 48 महीने में विकसित करने की योजना है।

शाहदरा स्टेशन अब बनेगा बड़ा टर्मिनल

पूर्वी Delhi के लिए शाहदरा रेलवे स्टेशन का अपग्रेड भी बड़ी खबर है। शाहदरा अब सिर्फ एक सामान्य रेलवे स्टेशन नहीं रहने वाला। इसे आनंद विहार टर्मिनल की तर्ज पर एक बड़े और आधुनिक टर्मिनल के रूप में विकसित करने की योजना है। अभी इस स्टेशन पर 4 प्लेटफॉर्म हैं और यहां से रोजाना 123 से ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं। इतने बड़े ट्रैफिक को देखते हुए स्टेशन का विस्तार जरूरी हो गया है।

नए मास्टर प्लान के तहत स्टेशन को इस तरह विकसित करने की तैयारी है कि यहां ज्यादा ट्रेनों और यात्रियों का दबाव आसानी से संभाला जा सके। आने वाले 2 से 3 साल में इसके अपग्रेडेशन का काम पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद यहां नमो भारत रैपिड ट्रेन की कनेक्टिविटी भी एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। इससे पूर्वी Delhi और आसपास के इलाकों के यात्रियों को तेज और बेहतर यात्रा विकल्प मिलेंगे।

शाहदरा से नई MEMU ट्रेन सेवाएं भी

शाहदरा रूट पर हाल ही में दो नई MEMU सेवाएं भी शुरू की गई हैं। ट्रेन नंबर 04496 और 04495 Delhi शाहदरा को बदायूं से जोड़ती हैं। ये ट्रेनें रास्ते में बागपत रोड, खेकड़ा, नोली और गोकुलपुर सबोलिया जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकती हैं। इसका फायदा सिर्फ रोजाना नौकरी करने वालों को ही नहीं, बल्कि छात्रों, छोटे व्यापारियों और आसपास के किसानों को भी मिल सकता है।

बेहतर रेलवे नेटवर्क का मतलब सिर्फ यात्रा आसान होना नहीं है। इससे स्थानीय व्यापार और लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही भी आसान होती है। इसी वजह से Delhi Railway Stations के आधुनिकीकरण को आसपास के इलाकों के विकास से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

Delhi कैंट स्टेशन को मिलेगा एयरपोर्ट जैसा लुक

पश्चिमी Delhi के जनकपुरी इलाके के पास स्थित Delhi कैंट रेलवे स्टेशन भी आने वाले समय में बिल्कुल नए रूप में नजर आ सकता है। रेल भूमि विकास प्राधिकरण यानी RLDA ने करीब ₹335 करोड़ की लागत से स्टेशन के पुनर्विकास की योजना बनाई है। इस प्रोजेक्ट का मकसद यात्रियों को स्टेशन पर बेहतर और आधुनिक सुविधाएं देना है।

सबसे बड़ा बदलाव स्टेशन तक पहुंचने वाली सड़क व्यवस्था में होगा। यहां एक एलिवेटेड एक्सेस रोड बनाई जाएगी, जिससे स्टेशन पर आने और जाने वाले यात्रियों का ट्रैफिक अलग-अलग हो सकेगा। Arrival और Departure के लिए अलग रास्ते होने से स्टेशन के बाहर होने वाली गाड़ियों की भीड़ कम होने की उम्मीद है।

एस्केलेटर, लिफ्ट और बेहतर फूड सुविधाएं

Delhi कैंट स्टेशन के अंदर यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं देने की तैयारी है। यहां एस्केलेटर, लिफ्ट, साफ-सुथरे टॉयलेट और एयरपोर्ट की तरह फूड और रिटेल कियोस्क बनाए जाएंगे। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए स्टेशन पर इंतजार करना कई बार काफी थकाने वाला होता है।

ऐसे में खाने-पीने और आराम से बैठने जैसी सुविधाएं काफी काम आती हैं। नए डिजाइन में प्राकृतिक रोशनी का भी ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा। स्टेशन की छत में स्काईलाइट स्टाइल ग्लास इंटीग्रेशन की योजना है। Delhi कैंट को ग्रीन स्टेशन के रूप में भी विकसित करने की तैयारी है।

यहां सिंगल-यूज प्लास्टिक को कम करने और बारिश के पानी को रीसायकल करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। यह बदलाव दिखाता है कि अब Delhi Railway Stations को सिर्फ बड़ा नहीं बल्कि पर्यावरण के हिसाब से भी बेहतर बनाने की कोशिश हो रही है।

सुरक्षा पर भी रहेगा पूरा ध्यान

बड़े और आधुनिक स्टेशन का मतलब सिर्फ सुंदर इमारत नहीं होता। यात्रियों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। Delhi कैंट स्टेशन के पूरे परिसर में 24 घंटे CCTV कैमरों से निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।

स्टेशन का लेआउट भी इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि परिसर में कोई अंधेरा या सुनसान कोना न रहे। महिलाओं, बुजुर्गों और देर रात सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

सराय रोहिल्ला स्टेशन भी बदलेगा

Delhi के पुराने रेलवे स्टेशनों में शामिल सराय रोहिल्ला को भी अपग्रेड किया जा रहा है। यहां मुख्य फोकस यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर रहेगा। खासतौर पर बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों के लिए स्टेशन तक पहुंच आसान बनाने की योजना है। स्टेशन को आसपास के दूसरे ट्रांसपोर्ट साधनों से बेहतर तरीके से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

अक्सर यात्रियों को ट्रेन से उतरने के बाद आगे जाने के लिए काफी समय तक ऑटो या दूसरी गाड़ियों का इंतजार करना पड़ता है। बेहतर कनेक्टिविटी होने पर यह परेशानी कम हो सकती है। आने वाले समय में Delhi Railway Stations का मकसद यही होगा कि ट्रेन से उतरने के बाद आपकी आगे की यात्रा भी उतनी ही आसान हो।

न्यू अशोक नगर में इंजीनियरिंग का कमाल

Delhi-गाजियाबाद-मेरठ RRTS कॉरिडोर पर बना न्यू अशोक नगर स्टेशन भी अपने डिजाइन की वजह से खास है। यह स्टेशन Delhi मेट्रो की मौजूदा लाइन के ऊपर करीब 20 मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है। यह अपने आप में एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि है। इतनी ऊंचाई पर स्टेशन और ट्रैक तैयार करना आसान काम नहीं होता।

यात्रियों की सुविधा के लिए यहां तीन बड़े फुटओवर ब्रिज बनाए गए हैं। इनमें एक करीब 80 मीटर लंबा और 6 मीटर चौड़ा ब्रिज है, जो सीधे मेट्रो स्टेशन और RRTS स्टेशन को जोड़ता है। दूसरा 41 मीटर लंबा ब्रिज चिल्ला गांव और मयूर विहार एक्सटेंशन की तरफ कनेक्टिविटी देता है।

तीसरा करीब 49 मीटर लंबा ब्रिज प्राचीन शिव मंदिर के पास पहुंचने में मदद करता है। इसके अलावा यहां 500 से ज्यादा वाहनों की क्षमता वाले दो बड़े पार्किंग लॉट भी बनाए गए हैं। इस तरह के स्टेशन दिखाते हैं कि Delhi का ट्रांसपोर्ट सिस्टम अब अलग-अलग साधनों की बजाय एक-दूसरे से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कौशांबी से आनंद विहार तक अब आसान होगा सफर

Delhi और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित कौशांबी बस टर्मिनल से आनंद विहार तक पहुंचना कई यात्रियों के लिए हमेशा थोड़ा मुश्किल रहा है। लेकिन अब दोनों जगहों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने की योजना है। कौशांबी बस टर्मिनल को उसी 417 मीटर लंबे स्काईवॉक के जरिए आनंद विहार RRTS, रेलवे स्टेशन और मेट्रो नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

गाजियाबाद और मेरठ की तरफ से आने वाले यात्रियों को अब सड़क पर ऑटो या रिक्शा ढूंढने की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है। कवर्ड रास्ते और ट्रैवलेटर के जरिए यात्री एक ट्रांसपोर्ट सिस्टम से दूसरे तक आसानी से जा सकेंगे। यही बदलाव आने वाले समय में Delhi-NCR की यात्रा को एक नया अनुभव देने वाला है।

Delhi का सफर क्यों बदलने वाला है?

Delhi एक ऐसा शहर है जहां हर दिन लाखों लोग ट्रेन, मेट्रो, बस और निजी वाहनों से सफर करते हैं। समस्या तब होती है जब ये सभी ट्रांसपोर्ट सिस्टम एक-दूसरे से सही तरीके से जुड़े नहीं होते। कई बार ट्रेन स्टेशन से मेट्रो स्टेशन सिर्फ कुछ सौ मीटर दूर होता है, लेकिन बीच में सड़क, ट्रैफिक और पैदल चलने की परेशानी सफर को मुश्किल बना देती है। अब नए प्रोजेक्ट्स का मुख्य उद्देश्य इसी गैप को खत्म करना है।

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आनंद विहार का स्काईवॉक हो, सराय काले खां का मल्टीमॉडल हब हो या न्यू अशोक नगर में मेट्रो और नमो भारत का इंटरचेंज, हर जगह कोशिश यही है कि यात्री को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में कम से कम परेशानी हो। भविष्य में Delhi Railway Stations सिर्फ रेलवे नेटवर्क का हिस्सा नहीं बल्कि पूरे Delhi-NCR ट्रांसपोर्ट सिस्टम की मजबूत कड़ी बन सकते हैं।

यात्रियों को क्या-क्या फायदे मिलेंगे?

इन प्रोजेक्ट्स का सबसे बड़ा फायदा समय की बचत हो सकता है। अभी एक यात्री को ट्रेन से उतरने के बाद मेट्रो पकड़ने के लिए कई बार स्टेशन से बाहर निकलना पड़ता है। नए कनेक्टिंग कॉरिडोर और स्काईवॉक बनने के बाद यह सफर आसान हो जाएगा। भारी सामान वाले यात्रियों को ट्रैवलेटर और लिफ्ट की सुविधा मिलेगी।

बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों के लिए स्टेशनों तक पहुंच पहले से आसान होगी। स्टेशन के अंदर बेहतर फूड, रिटेल और ठहरने की सुविधाएं मिलने से लंबी यात्रा करने वालों को भी राहत मिलेगी।

साथ ही Arrival और Departure के लिए अलग रास्ते होने से स्टेशनों के बाहर ट्रैफिक को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। कुल मिलाकर देखा जाए तो Delhi Railway Stations आने वाले समय में यात्रियों के लिए ज्यादा आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक बनने की तरफ बढ़ रहे हैं।

Delhi-NCR के ट्रांसपोर्ट का नया दौर

Delhi में तेजी से बढ़ती आबादी और यात्रियों की संख्या को देखते हुए सिर्फ नई सड़कें बनाना काफी नहीं है। जरूरत ऐसे सिस्टम की है जहां ट्रेन, मेट्रो, बस और रैपिड रेल एक-दूसरे से जुड़े हों। इसी सोच के साथ Delhi-NCR में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी पर जोर दिया जा रहा है।

आनंद विहार का पांच ट्रांसपोर्ट सिस्टम को जोड़ने वाला स्काईवॉक, सराय काले खां का बड़ा हब और शाहदरा को मेगा टर्मिनल बनाने की योजना इसी बदलाव की तस्वीर दिखाती है। आने वाले कुछ सालों में जब ये प्रोजेक्ट पूरे होंगे तो Delhi में यात्रा का अनुभव काफी अलग हो सकता है।

अब ट्रेन से उतरने के बाद ऑटो ढूंढने और ट्रैफिक में फंसने के बजाय यात्री सीधे एक कवर्ड रास्ते से मेट्रो या नमो भारत तक पहुंच सकेंगे। यही वजह है कि Delhi के ये बदलाव सिर्फ स्टेशन के विकास तक सीमित नहीं हैं। ये पूरे शहर के सफर करने के तरीके को बदलने की तैयारी हैं।

Five Colors of Travel की ओर से 5 खास सुझाव

  • आनंद विहार जैसे बड़े हब से सफर करते समय अपना ट्रेन-मेट्रो इंटरचेंज पहले से प्लान करें।
  • भारी सामान होने पर स्काईवॉक, लिफ्ट और ट्रैवलेटर जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल करें।
  • पीक ऑवर्स में निजामुद्दीन और सराय काले खां जैसे व्यस्त स्टेशनों पर थोड़ा पहले पहुंचें।
  • नमो भारत और मेट्रो से सफर के लिए डिजिटल टिकट या स्मार्ट कार्ड रखना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा।
  • नए ग्रीन स्टेशनों पर यात्रा करते समय प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करें और स्टेशन को साफ रखने में सहयोग दें।

Delhi-NCR का सफर अब धीरे-धीरे एक नए दौर में पहुंच रहा है। आने वाले समय में Delhi Railway Stations सिर्फ ट्रेन पकड़ने की जगह नहीं रहेंगे, बल्कि ऐसे स्मार्ट ट्रांसपोर्ट हब बनेंगे जहां एक यात्रा खत्म होते ही दूसरी यात्रा शुरू करना बेहद आसान होगा। ट्रेन से उतरो, कुछ कदम चलो और मिनटों में मेट्रो, बस या नमो भारत पकड़ लो—Delhi का भविष्य अब कुछ ऐसा ही दिखाई दे रहा है।

Shivani Pal

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