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Delhi के रेलवे स्टेशन बनेंगे स्मार्ट ट्रांसपोर्ट हब

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Delhi में रहने वालों और बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए सफर का सबसे बड़ा झंझट सिर्फ ट्रेन पकड़ना नहीं होता, बल्कि असली परेशानी ट्रेन से उतरने के बाद शुरू होती है। स्टेशन से बाहर निकलो तो ऑटो की तलाश, भारी सामान के साथ सीढ़ियां चढ़ो-उतरो, सड़क पार करो और फिर मेट्रो या बस तक पहुंचने के लिए ट्रैफिक से जूझो। खासकर Delhi-NCR जैसे बड़े इलाके में एक जगह से दूसरी जगह जाने में काफी समय निकल जाता है। लेकिन आने वाले समय में यह तस्वीर काफी बदल सकती है। Delhi के कई बड़े रेलवे स्टेशन और ट्रांसपोर्ट हब अब नए तरीके से विकसित किए जा रहे हैं। आनंद विहार, हज़रत निज़ामुद्दीन, शाहदरा, दिल्ली कैंट, सराय रोहिल्ला और न्यू अशोक नगर जैसे इलाकों में ऐसे प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनका मकसद यात्रियों का सफर आसान बनाना है। इन बदलावों के बाद Delhi Railway Stations सिर्फ ट्रेन पकड़ने और उतरने की जगह नहीं रहेंगे, बल्कि ऐसे बड़े ट्रांसपोर्ट हब बनेंगे जहां ट्रेन, मेट्रो, नमो भारत, बस और दूसरे साधनों के बीच आसानी से सफर किया जा सकेगा। आनंद विहार बनेगा बड़ा ट्रांसपोर्ट हब Delhi-NCR में अगर किसी जगह को ट्रांसपोर्ट का बड़ा केंद्र कहा जाए तो उसमें आनंद विहार का नाम जरूर आता है। यहां पहले से रेलवे स्टेशन, Delhi मेट्रो, ISBT और नमो भारत जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। लेकिन इन सभी के बीच आने-जाने में यात्रियों को काफी परेशानी होती है। अब इस परेशानी को कम करने के लिए NCRTC यहां एक बड़ा और आधुनिक स्काईवॉक बनाने की तैयारी कर रहा है। यह स्काईवॉक करीब 417 मीटर लंबा होगा और पूरी तरह कवर्ड रहेगा। यानी यात्रियों को धूप, बारिश या ट्रैफिक के बीच सड़क पार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस स्काईवॉक में एयरपोर्ट की तरह चलने वाली फर्श यानी ट्रैवलेटर भी लगाए जाएंगे। इससे खासतौर पर बुजुर्ग यात्रियों, बच्चों और भारी सामान लेकर सफर करने वालों को काफी राहत मिलेगी। इस नए सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि एक ही कनेक्टिंग रास्ते के जरिए कई ट्रांसपोर्ट साधनों तक पहुंच आसान हो जाएगी। यात्री आनंद विहार रेलवे स्टेशन से नमो भारत स्टेशन, Delhi मेट्रो की ब्लू और पिंक लाइन और आसपास के बस टर्मिनल तक आसानी से जा सकेंगे। यही वजह है कि आने वाले वर्षों में Delhi Railway Stations की तस्वीर सिर्फ प्लेटफॉर्म और ट्रेनों तक सीमित नहीं रहने वाली है। उन्हें बड़े मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम का हिस्सा बनाया जा रहा है। 5 ट्रांसपोर्ट सिस्टम होंगे एक-दूसरे से जुड़े आनंद विहार में बनने वाला यह स्काईवॉक देश के उन खास प्रोजेक्ट्स में शामिल होगा जहां कई अलग-अलग ट्रांसपोर्ट सिस्टम को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है। अभी अक्सर यात्रियों को ट्रेन से उतरकर मेट्रो स्टेशन तक पहुंचने के लिए सड़क पार करनी पड़ती है। कई बार सामान ज्यादा होने की वजह से यह छोटा सा सफर भी काफी मुश्किल लगने लगता है। बारिश या गर्मी के दिनों में परेशानी और बढ़ जाती है। लेकिन नए स्काईवॉक के बनने के बाद यात्रियों को एक कवर्ड रास्ता मिलेगा। जानकारी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए जून 2026 में टेंडर जारी किया जा चुका है और करीब 15 महीने की समयसीमा में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका मतलब आने वाले समय में आनंद विहार में ट्रेन से उतरकर मेट्रो पकड़ना पहले से कहीं आसान हो सकता है। स्टेशन के पास होटल और मॉल की भी तैयारी आनंद विहार रेलवे स्टेशन के आसपास सिर्फ ट्रांसपोर्ट सुविधाएं ही नहीं बढ़ाई जा रही हैं, बल्कि यात्रियों के लिए दूसरी सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है। योजना के मुताबिक स्टेशन परिसर में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत थ्री-स्टार बजट होटल, मॉल और यात्रियों के ठहरने की सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इसका फायदा खासतौर पर उन लोगों को होगा जो Delhi में कुछ घंटों के लिए रुकते हैं या जिनकी अगली ट्रेन काफी देर बाद है। आजकल Delhi Railway Stations को सिर्फ यात्रा की जगह नहीं, बल्कि ऐसे स्पेस के रूप में विकसित करने की सोच है जहां यात्रियों को खाने-पीने, रुकने और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी एक ही जगह मिल सकें। आनंद विहार में पुराने ओवरब्रिज को चौड़ा करने और ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर बनाने पर भी काम किया जा रहा है। साथ ही आनंद विहार से पश्चिमी Delhi के ज़खीरा तक सिग्नल-फ्री कॉरिडोर बनाने की योजना भी सामने आई है। आनंद विहार ISBT का भी बदलेगा पूरा रूप आनंद विहार सिर्फ रेलवे स्टेशन की वजह से व्यस्त नहीं है। यहां का ISBT भी Delhi-NCR के सबसे महत्वपूर्ण बस टर्मिनलों में शामिल है। अब इस बस अड्डे के बड़े हिस्से का पुनर्विकास किया जा रहा है। लगभग 25.20 एकड़ क्षेत्र में फैले इस इलाके में करीब 19.72 एकड़ हिस्से को नए तरीके से विकसित करने की योजना है। यहां G+1 मंजिला नया बस टर्मिनल बनाया जाएगा। इसके ज्यादातर हिस्से में बसों का संचालन होगा, जबकि बाकी जगह पर रिटेल दुकानें, फूड कोर्ट, ऑफिस स्पेस और यात्रियों के लिए होटल या ठहरने की सुविधा विकसित की जाएगी। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यहां यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। मौजूदा समय में जहां रोजाना करीब 64 हजार यात्री आते हैं, वहीं साल 2053 तक यह संख्या करीब 1,17,713 तक पहुंच सकती है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए यह बदलाव बेहद जरूरी माना जा रहा है। सराय काले खां और निजामुद्दीन में बनेगा बड़ा मल्टीमॉडल हब Delhi में ट्रेन और बस से सफर करने वालों के लिए सराय काले खां और हज़रत निज़ामुद्दीन का इलाका बहुत महत्वपूर्ण है। यहां रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और दूसरे ट्रांसपोर्ट नेटवर्क मौजूद हैं। अब इस पूरे इलाके को एक बड़े मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इस प्रोजेक्ट पर करीब ₹7,600 करोड़ खर्च किए जाने की योजना है। इसे ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी TOD मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। इसका सीधा मकसद यात्रियों को एक ट्रांसपोर्ट साधन से दूसरे तक पहुंचने में आसानी देना है। कल्पना कीजिए कि आप हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर उतरते हैं और आपको आगे बस या नमो भारत पकड़नी है। अभी इस तरह के इंटरचेंज में काफी समय और मेहनत लग सकती है। लेकिन

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जानिए भारत की सबसे बड़ी और प्रसिद्ध दरगाहों के बारे में

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(India’s most famous mosque) “रमजान का महीना हो और ईद आने वाली हो तो जिस जगह आपको सबसे ज्यादा भीड़ देखने को मिलेगी वह है मस्जिद! रमजान के महीने में नमाज अदा करने के लिए बहुत अधिक मात्रा में लोग मस्जिदों की तरफ रुख़ करते हैं, और करे भी क्यों ना? मुस्लिम समुदाय के लिए यह त्यौहार उनका सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार जो होता है। लोग बड़े ही जतन से महीने भर रोजा़ रखने के बाद साफ और सच्चे मन से अल्लाह की इबादत के लिए दरगाह और मस्जिद जाते हैं।” ईद एक महत्वपूर्ण इस्लामी त्योहार है जो मुसलमान समुदाय में मनाया जाता है। यह प्रत्येक साल मुस्लिम कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है और यह ईद-उल-फ़ित्र और ईद-उल-अज़हा के रूप में दो भिन्न प्रकार की होती है। ईद का महत्व इस्लाम धर्म में अल्लाह की कृपा, धार्मिकता, सामाजिक एकता और धार्मिक समर्थन को अवतरित करता है।आज के ब्लॉग में हम आपको बताएँगे भारत की सबसे प्रसिद्ध मस्जिदों (India’s most famous mosque) के बारे में। जामा मस्जिद दिल्ली अब भारत के सबसे प्रसिद्ध दरगाह की बात हो और भारत के सबसे प्रसिद्ध शहर का नाम ना आए तो यह तो नाइंसाफी होगी। जी हाँ, भारत की सबसे प्रसिद्ध दरगाह भारत के सबसे प्रसिद्ध शहर दिल्ली में हीं स्थित है, जिसे हम जामा मस्जिद के नाम से जानते हैं।जामा मस्जिद भारत की एक ऐसी मस्जिद है जिसे शायद ही कोई न जानता हो। लाल किला के सामने बनी यह मस्जिद देश की सबसे प्रसिद्ध मस्जिद मानी जाती है। जामा मस्जिद अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और वास्तुकला के कारण खास है। यह दिल्ली की सबसे बड़ी मस्जिद है और मुग़ल वास्तुकला का अद्वितीय उदाहरण है। इसे मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने 17वीं सदी में 1656 ईसवी में बनवाया था। इसकी बड़ी शानदार मीनारें, व्यापक सजावट, और विशाल आंगन उसे विशेष बनाती हैं। जामा मस्जिद में ईद के दिन लाखों लोग एक साथ ईद की नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा होते हैं। हजरत निजामुद्दीन की दरगाह हजरत निजामुद्दीन की दरगाह एक महत्वपूर्ण सूफी संत के समाधि स्थल के रूप में जानी जाती है। यह दिल्ली में स्थित है और सूफी संत हजरत निजामुद्दीन के नाम पर नामित है, जिन्होंने 14वीं सदी में यहां बहुत से सामाजिक कार्य किए थे। हजरत निजामुद्दीन की दरगाह की सबसे खास बात यह है कि यहां के माहौल में एक अपनेपन का भाव है। यहां के चारों और की रौनक, शांति और भक्ति का वातावरण यहाँ आने वाले आगंतुकों को आकर्षित करता है। अगर बात करें हजरत निजामुद्दीन औलिया के बारे में तो वह भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण सूफी संतों में से एक थे। उनका असली नाम शाहबुद्दीन मोहम्मद था और वे दिल्ली में 13वीं और 14वीं सदी के बीच रहा करते थे। उन्होंने विशेष रूप से सूफी पंथ को फैलाने और धार्मिक समरसता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी दरगाह पर आज भी लाखों श्रद्धालु आते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। अजमेर शरीफ दरगाह जब हम भारतीय संस्कृति की बात करते हैं तो भारत एक ऐसा देश है जहां हर तरह के रहन-सहन खानपान और बोलचाल वाले लोग एक साथ मिलजुल कर रहते हैं। भारतीय संस्कृति की इसी विशालता का एक बेहतरीन उदाहरण है अजमेर शरीफ दरगाह! अजमेर शरीफ दरगाह जिसे ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह शरीफ के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान के अजमेर में स्थित एक ऐसी दरगाह है, जो संतों सद्गुरुओं और अराधकों की भक्ति और श्रद्धा का केंद्र है। अजमेर शरीफ की दरगाह एक ऐतिहासिक स्थल है। जो सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती से जुड़ा हुआ है। अजमेर शरीफ दरगाह को मुस्लिम धर्म का पवित्रतम स्थान माना जाता है। यहाँ आने वाले लोग अपनी इच्छाएं मनोकामनाएं और संकल्प ख्वाजा साहब के समक्ष रखते हैं और उनकी दुआओं के पूरी होने की कामना करते हैं। अजमेर शरीफ के दरगाह में माथा टेकने के लिए भारत अन्य राज्यों के पर्यटकों के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी पर्यटक घूमने आते हैं। सलीम चिश्ती की दरगाह फतेहपुर सीकरी शहर में सलीम चिश्ती की दरगाह भी है। यहां सिर्फ देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कोने-कोने से लोग मन्नत मांगने आते हैं। जामा मस्जिद सफेद संगमरमर से बनी है जहां आकर आपको अलग शांति महसूस होगी। फतेहपुर सीकरी में सलीम चिश्ती की दरगाह का इतिहास गौरतलब है। यह दरगाह मुग़ल बादशाह अकबर के पुत्र सलीम जिन्हें बाद में जहाँगीर के नाम से जाना गया, के समय में बनवाई गई थी। यह दरगाह उनकी मासूम बेटी के मृत बचपन की यादों को समर्पित थी। इसे अकबर ने अपने बेटी के नाम पर “मारियम-उल-वश्त” का नाम दिया था। आज यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और लोग यहाँ आकर मन्नतें माँगते हैं। हाजी अली दरगाह, मुंबई हाजी अली दरगाह मुंबई के महिम परिसर में स्थित है और मुस्लिम समुदाय के लोग यहाँ नमाज अदा करने आते हैं। हाजी अली दरगाह की निर्माण तारीखों के मामले में कुछ अनिश्चितताएं हैं, लेकिन इसे इस्लामिक धर्मावलम्बियों के प्रमुख स्थलों में से एक के रूप में जाना जाता है। इस मस्जिद से बॉलीवुड अभिनेता धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे कई फ़िल्मी सितारों का संबंध रहा है। हाजी अली दरगाह के पास मस्जिद और एक बड़ी मस्जिद है। यहाँ एक मुख्य महल भी है जिसमें विशाल अधिवेशन हॉल, श्रद्धालुओं के लिए आरामदायक बैठकरी, और प्रसाद की दुकानें शामिल हैं। दरगाह के चारों ओर रखी गई छतें और जालियां उसे भव्य बनाती हैं। हाजी अली दरगाह एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है और यहाँ हर वर्ष बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ आती है। खासतौर पर जुम्मे के दिन और ईद के मौके पर यहाँ बहुत अधिक भीड़ रहती है। खास करके मुंबई में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए यह सबसे प्रसिद्ध इबादतगाह है।