नई Electric Double Decker Bus और Mumbai के पुराने ब्रिज
मुंबई की सड़कों पर लाल रंग की डबल-डेकर बस सिर्फ एक बस नहीं है, बल्कि शहर की पहचान का हिस्सा है। सालों से Mumbai की भागती-दौड़ती जिंदगी के बीच इन ऊंची बसों को देखकर लोगों के चेहरे पर अलग ही खुशी दिखाई देती रही है। पुरानी डबल-डेकर बसों में सफर करने की यादें आज भी कई मुंबईकरों के दिल में बसी हुई हैं।
ऊपर वाली सीट पर बैठकर शहर की सड़कों को देखना अपने आप में एक अलग अनुभव था। समय के साथ पुरानी डीजल बसें हटने लगीं और उनकी जगह नई इलेक्ट्रिक बसों ने ले ली। BEST ने भी Mumbai में आधुनिक, एयर-कंडीशनर और पर्यावरण के अनुकूल इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसों को शुरू करने की तैयारी की।
नई बसें देखने में शानदार थीं, सुविधाएं भी बेहतर थीं और सबसे बड़ी बात यह थी कि ये बिना धुआं छोड़े शहर की सड़कों पर चलने वाली थीं। लेकिन Mumbai में एक नई परेशानी सामने आ गई। बस बिल्कुल नई थी, तकनीक आधुनिक थी और सुविधाएं भी शानदार थीं, लेकिन बस की ऊंचाई शहर के कुछ पुराने पुलों के लिए ज्यादा निकल गई।
नतीजा यह हुआ कि जिस डबल-डेकर बस को शहर की सड़कों पर आराम से दौड़ना था, वह कुर्ला के पास एक ब्रिज के नीचे फंस गई। पूरा मामला सिर्फ 17 सेंटीमीटर का है। सुनने में यह दूरी बहुत छोटी लग सकती है, लेकिन इसी 17 सेंटीमीटर ने BEST की नई इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी।
नई डबल-डेकर बसों से Mumbai को थीं बड़ी उम्मीदें
BEST ने पुरानी डीजल डबल-डेकर बसों को हटाने के बाद नई इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसों को Mumbai की सड़कों पर उतारने की योजना बनाई थी। ये नई बसें Switch EiV 22 मॉडल की हैं और इन्हें आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया गया है। इन बसों को खासतौर पर बांद्रा रेलवे स्टेशन ईस्ट और कुर्ला रेलवे स्टेशन वेस्ट के बीच BKC के रास्ते चलाने की योजना थी।
इसके लिए रूट नंबर 310 तय किया गया था। यह रूट Mumbai के व्यस्त इलाकों से होकर गुजरता है और रोजाना बड़ी संख्या में लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। नई डबल-डेकर इलेक्ट्रिक बसों के आने से यात्रियों को उम्मीद थी कि उनका सफर ज्यादा आरामदायक और बेहतर हो जाएगा।
लेकिन बसों के रूट पर उतरते ही एक ऐसी समस्या सामने आई, जिसके बारे में शायद शुरुआत में किसी ने ठीक से नहीं सोचा था। Mumbai की कुछ पुरानी सड़कों और फ्लाईओवर की ऊंचाई नई बसों के हिसाब से पर्याप्त नहीं थी।
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आखिर 17 सेंटीमीटर की दिक्कत क्या है?
असल परेशानी नई और पुरानी डबल-डेकर बसों की ऊंचाई में अंतर की है। Mumbai की पुरानी डीजल डबल-डेकर बसों की ऊंचाई करीब 4.38 मीटर से 4.58 मीटर तक हुआ करती थी। यानी अधिकतम ऊंचाई लगभग 458 सेंटीमीटर थी। इसी वजह से ये बसें शहर के अलग-अलग पुलों और फ्लाईओवर के नीचे से आसानी से गुजर जाती थीं।
लेकिन नई इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसों की ऊंचाई 4.75 मीटर यानी 475 सेंटीमीटर है। यानी नई बस पुरानी बसों से करीब 17 सेंटीमीटर ज्यादा ऊंची है। साउथ Mumbai की खुली और चौड़ी सड़कों पर इस ऊंचाई से कोई बड़ी समस्या नहीं हुई। लेकिन जैसे ही बसें कुर्ला की तरफ पहुंचीं, मामला बदल गया। कुर्ला के पास SCLR यानी सांताक्रूज़-चेंबूर लिंक रोड के डबल-डेकर फ्लाईओवर के नीचे बसों को निकलना था।
लेकिन यहां फ्लाईओवर और बस की छत के बीच पर्याप्त जगह नहीं बच रही थी। कुछ जगह बस की छत पुल के निचले हिस्से के बेहद करीब पहुंच रही थी। ऐसे में बस को वहां से चलाना सुरक्षित नहीं माना गया। बसों को कुर्ला स्टेशन पहुंचने के लिए इसी इलाके से यू-टर्न लेना पड़ता था। लेकिन ऊंचाई की वजह से यह रास्ता नई डबल-डेकर बसों के लिए मुश्किल बन गया।
रूट 310 को बीच में ही छोटा करना पड़ा
इस समस्या का सीधा असर यात्रियों पर पड़ा। BEST को मजबूरी में रूट नंबर 310 की डबल-डेकर बस सेवा को छोटा करना पड़ा। पहले यह बस बांद्रा से कुर्ला रेलवे स्टेशन वेस्ट तक जाने वाली थी। लेकिन ब्रिज की ऊंचाई की समस्या के कारण इसे MTNL टेलीफोन एक्सचेंज तक ही सीमित करना पड़ा। इसका मतलब यह हुआ कि जो यात्री पहले एक ही बस से अपना सफर पूरा कर सकते थे, अब उन्हें बीच रास्ते में उतरना पड़ रहा है।
इसके बाद कुर्ला स्टेशन तक पहुंचने के लिए यात्रियों को दूसरी सामान्य सिंगल-डेकर बस लेनी पड़ रही है। Mumbai जैसे शहर में, जहां लोग रोजाना समय बचाने के लिए तेज और आसान यात्रा के साधन तलाशते हैं, वहां बीच में बस बदलना यात्रियों के लिए परेशानी बन सकता है।
चिंता सिर्फ रूट 310 तक सीमित नहीं है। BEST को डर है कि रूट नंबर 313 और 332 पर भी यही समस्या सामने आ सकती है। ये रूट भी ऐसे इलाकों से गुजरते हैं जहां कुछ पुलों के नीचे ऊंचाई कम है।
अब बस की ऊंचाई कम करने की तैयारी
जब यह मामला BEST कमेटी के सामने पहुंचा, तो कमेटी की चेयरपर्सन तृष्णा विश्वासराव ने इस पर गंभीरता से ध्यान दिया। उन्होंने बस बनाने वाली कंपनी Switch Mobility को नोटिस भेजने के निर्देश दिए। BEST की तरफ से कहा गया कि आने वाली नई इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसों की ऊंचाई कम की जाए।
योजना यह है कि कम से कम 50 नई इलेक्ट्रिक AC डबल-डेकर बसों की ऊंचाई में करीब 17 सेंटीमीटर की कमी की जाए। बस की ऊंचाई को 475 सेंटीमीटर से घटाकर लगभग 458 सेंटीमीटर करने की बात सामने आई है। अगर ऐसा होता है, तो ये बसें Mumbai के पुराने फ्लाईओवर और कम ऊंचाई वाले ब्रिजों के नीचे से ज्यादा आसानी से गुजर सकेंगी।
BEST ने कुल 200 डबल-डेकर बसों का ऑर्डर दिया था। इनमें शुरुआती 50 बसें 4.75 मीटर ऊंचाई वाली मिली हैं, जबकि बाकी 150 बसें अभी आने वाली हैं। अब आने वाली बसों को संशोधित डिजाइन के साथ तैयार करने पर विचार किया जा रहा है। बदलाव के बाद बसों को दोबारा तकनीकी जांच और RTO रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया से भी गुजरना पड़ सकता है।
ऐसा मामला Mumbai में पहले भी हो चुका है
अगर आपको लगता है कि Mumbai में पहली बार किसी वाहन की ऊंचाई इंफ्रास्ट्रक्चर से टकराई है, तो ऐसा नहीं है। साल 2016 में Mumbai की लोकल ट्रेन के साथ भी इसी तरह की परेशानी सामने आई थी। उस समय चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री यानी ICF ने मुंबई के लिए पहली AC लोकल ट्रेन का प्रोटोटाइप तैयार किया था।
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उस ट्रेन की ऊंचाई करीब 4.335 मीटर थी। लेकिन Mumbai के सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे रूट पर कई पुराने पुल बने हुए हैं। इन पुलों के नीचे ट्रेनों के लिए अधिकतम ऊंचाई करीब 4.25 मीटर तय थी। यानी नई AC लोकल ट्रेन भी ऊंचाई की सीमा से ज्यादा बड़ी निकल गई।
इस वजह से ट्रेन को सीधे ट्रैक पर उतारना आसान नहीं था। अब लगभग वैसा ही मामला नई डबल-डेकर इलेक्ट्रिक बसों के साथ देखने को मिल रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार बात लोकल ट्रेन की नहीं, बल्कि शहर की मशहूर BEST बसों की है।
सिग्नल लगाने का सुझाव भी आया था
इस समस्या को हल करने के लिए एक समय BEST की तरफ से दूसरा विकल्प भी सामने आया था। सुझाव दिया गया कि SCLR और SG Barve Marg के जंक्शन पर एक नया ट्रैफिक सिग्नल लगाया जाए। इससे डबल-डेकर बसों को ब्रिज के नीचे यू-टर्न लेने की जरूरत नहीं पड़ती और वे दूसरे रास्ते से कुर्ला स्टेशन तक पहुंच सकती थीं।
लेकिन इस सुझाव के सामने भी एक बड़ी परेशानी थी। SCLR को सिग्नल-फ्री बनाने के लिए पहले ही इलाके में कई बदलाव किए जा चुके थे। साल 2015 में ट्रैफिक को बिना रुके आगे बढ़ाने के लिए पुराने जंक्शन और मीडियन में बदलाव किए गए थे।
ऐसे में दोबारा वहां ट्रैफिक सिग्नल लगाना Mumbai के भारी ट्रैफिक को और बढ़ा सकता था। इसलिए फिलहाल बस की ऊंचाई कम करना ज्यादा व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है।
Mumbai में फिर लौट सकती हैं ओपन-डेक बसें
इस पूरे विवाद के बीच Mumbai के घूमने-फिरने के शौकीन लोगों के लिए एक अच्छी खबर भी सामने आई है। BEST की तरफ से बची हुई नई बसों में से 5 बसों को ओपन-डेक डिजाइन में तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया है। यानी बस का निचला हिस्सा पूरी तरह एयर-कंडीशनर होगा, जबकि ऊपर वाला हिस्सा खुला रहेगा। पुरानी ओपन-टॉप डबल-डेकर बसें Mumbai की सड़कों पर घूमने वाले पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ करती थीं।
इन बसों से मरीन ड्राइव, कोस्टल रोड और बांद्रा-वर्ली सी लिंक जैसे इलाकों का नजारा देखने का अपना अलग ही मजा है। नई ओपन-डेक बसों को सिर्फ सामान्य यात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि खास मौकों के लिए भी इस्तेमाल करने की योजना है। लोग इन बसों को जन्मदिन की पार्टी, शादी के छोटे आयोजन और वीकेंड जॉयराइड के लिए किराए पर ले सकेंगे।
कोरोना से पहले पुरानी ओपन-टॉप बसों में हर वीकेंड करीब 2,000 से 4,000 यात्री सफर करते थे। इनसे BEST को हर वीकेंड लगभग 2 लाख से 4 लाख रुपये तक की कमाई होती थी। अगर ये नई बसें शुरू होती हैं, तो Mumbai में एक बार फिर ओपन-डेक बसों का दौर लौट सकता है।
Switch EiV22 बस में क्या-क्या खास है?
जिस बस की ऊंचाई इस समय चर्चा में है, उसके फीचर्स भी काफी आधुनिक हैं। Switch EiV22 भारत की आधुनिक इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसों में से एक है। इसमें परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस AC मोटर का इस्तेमाल किया गया है। यह मोटर करीब 235 किलोवाट की पीक पावर और 3100 Nm का पीक टॉर्क देती है। बस में आधुनिक लीथियम-आयन NMC बैटरी दी गई है।
एक बार पूरी तरह चार्ज होने के बाद यह बस करीब 250 किलोमीटर तक चल सकती है। चार्जिंग के लिए इसमें डबल-गन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है और बस लगभग 1.5 से 3 घंटे में चार्ज हो सकती है। Mumbai की खराब और गड्ढों वाली सड़कों को देखते हुए बस में सस्पेंशन पर भी ध्यान दिया गया है। आगे बेहतर सस्पेंशन और पीछे एयर सस्पेंशन दिया गया है।
बस में कुल 65 सीटें हैं। इसके अलावा यात्रियों के लिए एयर कंडीशनिंग, एयर प्यूरीफायर, वाई-फाई और USB चार्जिंग पोर्ट जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। दो सीढ़ियां और एक इमरजेंसी एग्जिट भी बस में मौजूद है। यानी सुविधा और तकनीक के मामले में यह बस आधुनिक है, लेकिन Mumbai के पुराने ब्रिजों के सामने इसकी ऊंचाई सबसे बड़ी चुनौती बन गई।
बसों की सेफ्टी और मेंटेनेंस पर भी सवाल
नई इलेक्ट्रिक बसों को लेकर सिर्फ ऊंचाई की समस्या ही चर्चा में नहीं है। BEST कमेटी के सदस्य अजय सिंह ने मुंबई में इलेक्ट्रिक और वेट-लीज बसों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि हाल के समय में कुर्ला, भांडुप और दादर में बस हादसे हुए हैं। इसके अलावा ओशिवारा डिपो में कुछ इलेक्ट्रिक बसों की जांच के दौरान छत से पानी टपकने की समस्या भी सामने आई।
बताया गया कि करीब 22 इलेक्ट्रिक बसों में लीकेज की परेशानी थी। बसों के ब्रेकिंग सिस्टम में एयर प्रेशर लीक होने की शिकायतें भी सामने आईं। अप्रैल 2026 में करीब 89 बसों में यह समस्या दर्ज हुई। मई में यह संख्या बढ़कर 91 तक पहुंच गई। जून के शुरुआती 15 दिनों में ही करीब 49 बसों में इस तरह की तकनीकी परेशानी सामने आई।
इन समस्याओं को देखते हुए BEST के अपने अनुभवी तकनीशियनों को बसों के रखरखाव में शामिल करने का सुझाव दिया गया है। BEST के करीब 125 अनुभवी तकनीशियनों को निजी ऑपरेटरों की बसों की मरम्मत के काम में लगाने की बात कही गई है। इससे बसों का ब्रेकडाउन कम हो सकता है और यात्रियों की सुरक्षा भी बेहतर हो सकती है।
क्या London का मॉडल Mumbai के काम आ सकता है?
Mumbai में कम ऊंचाई वाले ब्रिजों की समस्या से बचने के लिए विदेशों की तकनीक से भी सीख ली जा सकती है। लंदन में डबल-डेकर बसों की संख्या काफी ज्यादा है। वहां बसों को कम ऊंचाई वाले पुलों से टकराने से बचाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसे लो-ब्रिज अवॉयडेंस सिस्टम कहा जाता है।
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यह सिस्टम GPS आधारित मैपिंग या बस की छत पर लगे सेंसर की मदद से काम कर सकता है। जैसे ही कोई ऊंची बस कम हाइट वाले ब्रिज के पास पहुंचती है, सिस्टम ड्राइवर को पहले ही चेतावनी दे सकता है। कुछ आधुनिक सिस्टम जरूरत पड़ने पर वाहन की गति को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं। अगर भविष्य में BEST भी ऐसी तकनीक अपनाती है, तो Mumbai में डबल-डेकर बसों को पुराने पुलों के नीचे से सुरक्षित तरीके से चलाने में मदद मिल सकती है।
कुर्ला के लिए एलिवेटेड रोड से भी उम्मीद
Mumbai के कुर्ला इलाके की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए रेलवे की तरफ से भी काम किया जा रहा है। कुर्ला एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट के तहत करीब 1,300 मीटर लंबा वायाडक्ट बनाया जा रहा है। यह परियोजना चूनाभट्टी के स्वदेशी मिल्स के पास से शुरू होकर तिलक नगर स्टेशन के आगे तक जाएगी।
इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 89.26 करोड़ रुपये बताई गई है। कुर्ला स्टेशन का इलाका भारी बारिश के दौरान पानी भरने की समस्या के लिए जाना जाता है। ऐसे में एलिवेटेड प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद बारिश के दौरान रेल सेवाओं को बेहतर तरीके से चलाने में मदद मिल सकती है। Mumbai जैसे शहर में जहां बारिश और ट्रैफिक दोनों ही रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, वहां इस तरह के प्रोजेक्ट काफी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
सिर्फ बस की ऊंचाई नहीं, शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर की भी परीक्षा
नई डबल-डेकर इलेक्ट्रिक बसों का मामला सिर्फ 17 सेंटीमीटर की कहानी नहीं है। यह मामला यह भी दिखाता है कि जब किसी पुराने शहर में नई तकनीक लाई जाती है, तो उसे पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से ढालना कितना जरूरी होता है। Mumbai लगातार बदल रहा है। शहर में नई सड़कें, फ्लाईओवर, मेट्रो लाइनें और इलेक्ट्रिक वाहन आ रहे हैं।
लेकिन कई पुराने ब्रिज और रास्ते आज भी उसी डिजाइन के साथ मौजूद हैं, जो कई साल पहले बनाए गए थे। ऐसे में नई तकनीक को शुरू करने से पहले हर रूट और हर ब्रिज की जांच करना जरूरी हो जाता है। BEST की इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसें Mumbai के सार्वजनिक परिवहन के लिए एक अच्छा कदम हैं।
ये बसें पर्यावरण के लिए बेहतर हैं, आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और शहर की पुरानी डबल-डेकर पहचान को भी वापस ला रही हैं। अब देखना होगा कि बसों की ऊंचाई में बदलाव के बाद ये कुर्ला और दूसरे इलाकों में बिना किसी परेशानी के चल पाती हैं या नहीं।
Five Colors of Travel की ओर से कुछ खास सुझाव
- नई डबल-डेकर बसों से सफर करने से पहले उनका अपडेटेड रूट जरूर चेक करें।
- Mumbai घूमने का प्लान हो तो भविष्य में शुरू होने वाली ओपन-डेक बसों का अनुभव जरूर लें।
- बारिश के मौसम में बस यात्रा के दौरान रूट और ट्रैफिक अपडेट पहले से देख लें।
- इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल बढ़ाएं, इससे शहर का प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
- कुर्ला जैसे व्यस्त इलाकों में यात्रा के लिए थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर निकलें।
Mumbai की डबल-डेकर बसों की यह कहानी दिखाती है कि कभी-कभी एक छोटा सा अंतर भी बड़ी परेशानी बन सकता है। सिर्फ 17 सेंटीमीटर की ऊंचाई ने एक आधुनिक इलेक्ट्रिक बस को उसके तय रूट पर रोक दिया। लेकिन अब बसों के डिजाइन में बदलाव की तैयारी हो रही है और आने वाले समय में Mumbai की सड़कों पर नई इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसें फिर से पूरी रफ्तार के साथ दौड़ती नजर आ सकती हैं।