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कालका-कटरा Train फिर शुरू, जानें किराया, Timing और Route

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माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालु कटरा पहुंचते हैं। चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और आसपास के इलाकों से आने वाले यात्रियों के लिए रेल यात्रा हमेशा से आसान और बजट वाला विकल्प रही है। ऐसे में कालका से श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच चलने वाली train का दोबारा शुरू होना यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है।

लगभग छह महीने से बंद पड़ी कालका-श्री माता वैष्णो देवी कटरा एक्सप्रेस अब फिर से चलने लगी है। इस सेवा के बहाल होने से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो माता के दर्शन के लिए बस या महंगे निजी वाहनों की बजाय train से सफर करना पसंद करते हैं। इस train के दोबारा शुरू होने से कालका, चंडीगढ़, मोहाली, पंजाब और जम्मू क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। खासकर धार्मिक यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सेवा काफी उपयोगी साबित हो सकती है।

आखिर इतने समय तक क्यों बंद रही train?

कालका-कटरा एक्सप्रेस के बंद होने की वजह केवल सामान्य रेलवे काम नहीं था। पिछले मानसून में जम्मू क्षेत्र में हुई भारी बारिश और बाढ़ से रेलवे ट्रैक और पुलों को काफी नुकसान पहुंचा था। इस दौरान कठुआ और माधोपुर के बीच रेलवे ब्रिज नंबर 17 भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। पुल की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने इस हिस्से में ट्रेनों की आवाजाही रोक दी थी।

इसके कारण कई train सेवाओं को रद्द करना पड़ा या उन्हें दूसरे रास्तों से चलाया गया। बारिश और बाढ़ के बाद रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस पुल को दोबारा सुरक्षित बनाना थी।

इसके लिए लंबे समय तक मरम्मत और बहाली का काम किया गया। करीब नौ महीने तक चले काम के बाद रेलवे ने इस हिस्से को फिर से यातायात के लिए तैयार किया। इसके बाद जम्मू और कटरा की तरफ जाने वाली रेल सेवाओं को धीरे-धीरे सामान्य किया गया। इसी बहाली के बाद कालका और कटरा के बीच चलने वाली train को भी दोबारा शुरू किया गया है।

कालका से कटरा तक रातभर का सफर

इस train की सबसे अच्छी बात यह है कि यात्रियों को रात के समय सफर करने का विकल्प मिलता है। यानी यात्री शाम को कालका से train में बैठ सकते हैं और अगली सुबह कटरा पहुंच सकते हैं। इससे दिनभर के काम निपटाने के बाद रात में यात्रा करना आसान हो जाता है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार 14503 नंबर की train कालका से हर मंगलवार और शुक्रवार को रवाना होती है। कालका से इसका प्रस्थान रात करीब 7:35 बजे होता है और अगले दिन सुबह लगभग 5:05 बजे यह श्री माता वैष्णो देवी कटरा पहुंचती है। सुबह कटरा पहुंचने के बाद श्रद्धालु होटल या धर्मशाला में सामान रखकर अपनी आगे की यात्रा की योजना बना सकते हैं। जो यात्री उसी दिन माता के दर्शन की योजना बना रहे हैं, उनके लिए सुबह कटरा पहुंचना काफी सुविधाजनक हो सकता है।

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करीब 479 किलोमीटर की दूरी तय करेगी train

कालका से कटरा तक यह train लगभग 479 किलोमीटर की दूरी तय करती है। रास्ते में कई बड़े शहर और महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन आते हैं। इसलिए यह सेवा केवल माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि रास्ते में आने वाले शहरों के यात्रियों के लिए भी काफी उपयोगी है।

इस train में करीब 16 कोच बताए जा रहे हैं। इसमें अलग-अलग श्रेणी के कोच रखे गए हैं, ताकि कम बजट में यात्रा करने वाले यात्रियों से लेकर AC में सफर करने वालों तक सभी को विकल्प मिल सके। अगर आप परिवार के साथ कटरा जाने की योजना बना रहे हैं, तो अपनी सुविधा और बजट के अनुसार कोच का चुनाव कर सकते हैं।

कितना है टिकट का किराया?

कालका से कटरा जाने वाले यात्रियों के लिए इस train में अलग-अलग श्रेणियों के विकल्प मौजूद हैं। स्लीपर क्लास का किराया करीब 310 रुपये बताया गया है। वहीं 3AC में सफर करने के लिए लगभग 810 रुपये और 2AC के लिए करीब 1,145 रुपये खर्च हो सकते हैं।

हालांकि किराए में यात्रा की तारीख, कोच और रेलवे के लागू नियमों के अनुसार बदलाव हो सकता है। इसलिए टिकट बुक करने से पहले उस दिन का वास्तविक किराया जरूर जांच लें। इस ट्रेन में जनरल कोच भी मौजूद हैं। कम बजट में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह सबसे सस्ता विकल्प हो सकता है। हालांकि जनरल कोच में सीट की गारंटी नहीं होती। त्योहारों, छुट्टियों और धार्मिक आयोजनों के समय इसमें भीड़ काफी बढ़ सकती है।

कौन-कौन से बड़े स्टेशन रास्ते में आएंगे?

कालका से कटरा तक का सफर कई महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरता है। कालका से चलने के बाद train चंडीगढ़ पहुंचती है। इसके बाद इसका रास्ता मोहाली, लुधियाना, जालंधर कैंट, पठानकोट कैंट, जम्मू तवी और उधमपुर की तरफ बढ़ता है।

आखिर में train श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्टेशन पहुंचती है। इन स्टेशनों से अलग-अलग शहरों के लोग इस सेवा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसलिए इसे केवल कालका से कटरा जाने वाली train मानना सही नहीं होगा। यह train रास्ते में आने वाले कई शहरों के यात्रियों को भी जम्मू और कटरा की तरफ जाने का सुविधाजनक विकल्प देती है।

चंडीगढ़ में कितना समय रुकेगी train?

चंडीगढ़ इस रूट का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। यहां train के संचालन और दूसरी प्रक्रियाओं की वजह से कुछ समय का ठहराव रहता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ में train करीब 25 से 30 मिनट तक रुक सकती है। अगर आप चंडीगढ़ से इस train में बैठने वाले हैं, तो स्टेशन पर समय से पहुंचना जरूरी है। केवल प्रस्थान का समय देखकर आखिरी मिनट में स्टेशन पहुंचना सही नहीं रहेगा।

खासकर रात के समय चलने वाली train में यात्रियों को कोशिश करनी चाहिए कि वे कुछ समय पहले प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाएं। यात्रा से पहले चंडीगढ़ स्टेशन पर train के आने का वास्तविक समय जरूर जांच लें।

लुधियाना के बाद बढ़ सकती है भीड़

जनरल कोच से सफर करने वाले यात्रियों के लिए इस रूट पर एक बात ध्यान रखने वाली है। शुरुआत में भीड़ अपेक्षाकृत कम हो सकती है, लेकिन लुधियाना पहुंचने के बाद यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है। यहां से बड़ी संख्या में लोग जम्मू और कटरा की तरफ यात्रा करते हैं।

इस वजह से अगर आप जनरल कोच में सफर कर रहे हैं, तो लुधियाना के बाद भीड़ के लिए तैयार रहना बेहतर होगा। train में कई जनरल कोच होने से यात्रियों को कुछ राहत जरूर मिलती है, लेकिन छुट्टियों, त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ काफी ज्यादा हो सकती है। अगर आपका बजट अनुमति देता है, तो पहले से आरक्षित स्लीपर या AC टिकट लेना ज्यादा आरामदायक विकल्प हो सकता है।

पठानकोट से जम्मू तक सफर का अलग अनुभव

पठानकोट के बाद train जम्मू क्षेत्र की तरफ बढ़ती है। इस हिस्से में यात्रा करने वाले यात्रियों को मौसम और भौगोलिक बदलाव भी महसूस होने लगते हैं। पठानकोट कैंट स्टेशन पर ट्रेन का छोटा ठहराव रहता है। इसके बाद रास्ता कठुआ और जम्मू की तरफ जाता है। जम्मू तवी इस रूट का सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है। देश के कई बड़े शहरों से जम्मू के लिए ट्रेनें आती हैं और यहां से कटरा जाने वाले यात्रियों को आगे की कनेक्टिविटी मिलती है। कालका से आने वाली यह सेवा यात्रियों को जम्मू क्षेत्र की ओर जाने के लिए एक और सीधा विकल्प देती है।

उधमपुर के बाद पहुंचेंगे माता के दरबार के करीब

जम्मू तवी के बाद train उधमपुर की तरफ जाती है। उधमपुर के बाद कटरा ज्यादा दूर नहीं रहता। कटरा स्टेशन पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं की असली तीर्थ यात्रा शुरू होती है। यहां से माता वैष्णो देवी भवन तक जाने के लिए पैदल मार्ग के साथ कुछ दूसरे विकल्प भी उपलब्ध रहते हैं।

जो यात्री पहली बार कटरा जा रहे हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि रेलवे स्टेशन तक पहुंचना यात्रा का आखिरी हिस्सा नहीं है। इसके बाद भवन तक जाने के लिए अलग से समय और तैयारी रखनी होती है। अगर आप सुबह कटरा पहुंच रहे हैं, तो आगे की यात्रा का प्लान पहले से बना लेना बेहतर रहेगा।

चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन भी हो रहा है तैयार

इस ट्रेन के यात्रियों के लिए चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित करने का काम चल रहा है। स्टेशन के पुनर्विकास प्रोजेक्ट में नए शेड, बेहतर यात्री सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।

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काम का बड़ा हिस्सा पूरा होने के बाद स्टेशन का रूप पहले से काफी अलग दिखाई देने लगा है। यात्रियों के लिए बेहतर प्रवेश और निकास व्यवस्था के साथ फुट ओवरब्रिज जैसी सुविधाओं को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। अगर आप कालका से इस ट्रेन में यात्रा कर रहे हैं, तो चंडीगढ़ स्टेशन पर ये बदलाव साफ दिखाई दे सकते हैं।

चंडीगढ़ स्टेशन पर खाने का क्या इंतजाम है?

लंबी यात्रा में खाने-पीने की जरूरत हर यात्री को पड़ती है। अगर आपकी ट्रेन चंडीगढ़ स्टेशन पर कुछ समय रुकती है, तो यहां खाने के कई विकल्प मिल सकते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार स्टेशन पर करीब 100 रुपये के आसपास वेज थाली और वेज बिरयानी जैसे विकल्प मिल सकते हैं।

दाल, सब्जी और चावल जैसे सामान्य खाने के विकल्प उन यात्रियों के लिए काम आ सकते हैं, जो सफर के दौरान हल्का और सस्ता भोजन करना चाहते हैं। हालांकि स्टेशन पर खाने की कीमत और उपलब्धता समय के साथ बदल सकती है। इसलिए किसी खास चीज के लिए पूरी तरह निर्भर रहने की बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ स्नैक्स और पानी साथ रखना बेहतर रहेगा।

लुधियाना में भी मिल सकता है खाने का सामान

अगर आपको ट्रेन के अंदर खाने की जरूरत पड़ती है, तो लुधियाना जैसे बड़े स्टेशनों पर खाने-पीने के कई विकल्प मिल सकते हैं। कई बार स्थानीय विक्रेता प्लेटफॉर्म पर यात्रियों को खाना और दूसरी जरूरी चीजें उपलब्ध कराते हैं।

फिर भी किसी अनजान विक्रेता से खाना लेते समय साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। खासकर लंबी यात्रा में खराब खाना पूरी यात्रा का मजा खराब कर सकता है। परिवार और बच्चों के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो पानी और कुछ जरूरी स्नैक्स पहले से रखना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

कठुआ के बाद नेटवर्क को लेकर रहें सावधान

कालका से कटरा की यात्रा करने वाले यात्रियों को मोबाइल नेटवर्क को लेकर भी सावधान रहना चाहिए। जैसे ही ट्रेन जम्मू-कश्मीर के कठुआ क्षेत्र की तरफ बढ़ती है, कुछ मोबाइल कनेक्शन में परेशानी आ सकती है।

खासकर प्रीपेड मोबाइल कनेक्शन को लेकर यात्रियों को पहले से जानकारी रखनी चाहिए। अगर आपके परिवार में कोई व्यक्ति यात्रा के दौरान आपसे संपर्क में रहना चाहता है, तो जरूरी कॉल या मैसेज पहले ही कर देना बेहतर रहेगा।

यात्रा से पहले अपने फोन में जरूरी नंबर सेव कर लें। जरूरी दस्तावेजों की डिजिटल कॉपी भी ऑफलाइन रख लें, ताकि नेटवर्क की समस्या होने पर आपको परेशानी न हो।

कटरा पहुंचकर क्या करें?

श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्टेशन इस यात्रा का आखिरी रेलवे स्टॉप है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यहां से आगे की तीर्थ यात्रा शुरू होती है। कटरा पहुंचने के बाद अगर आप पहली बार माता वैष्णो देवी जा रहे हैं, तो जल्दबाजी करने की बजाय अपनी जरूरत के अनुसार थोड़ा आराम कर लें।

रातभर ट्रेन में सफर करने के बाद शरीर को कुछ समय आराम देने से आगे की चढ़ाई आसान हो सकती है। कटरा से माता वैष्णो देवी भवन तक श्रद्धालु पैदल मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा यात्रा की जरूरत के अनुसार उपलब्ध दूसरी सुविधाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आपके साथ बुजुर्ग, बच्चे या ज्यादा सामान है, तो यात्रा शुरू करने से पहले पूरी योजना बना लेना बेहतर रहेगा।

सुबह कटरा पहुंचने का क्या फायदा है?

इस ट्रेन की टाइमिंग का एक फायदा यह भी है कि यह सुबह कटरा पहुंचाती है। सुबह पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं के पास पूरे दिन का समय रहता है। आप पहले होटल या धर्मशाला में सामान रख सकते हैं और फिर आगे की यात्रा शुरू कर सकते हैं।

अगर आपने पहले से रहने की जगह बुक कर रखी है, तो चेक-इन का समय भी पहले देख लें। जिन यात्रियों ने उसी दिन माता के दर्शन की योजना बनाई है, उन्हें अपनी फिटनेस और मौसम को ध्यान में रखकर समय तय करना चाहिए। धार्मिक यात्रा में सबसे जरूरी चीज जल्दबाजी नहीं, बल्कि आराम से और सुरक्षित आगे बढ़ना है।

त्योहारों में बढ़ सकती है ट्रेन में भीड़

माता वैष्णो देवी जाने वाली ट्रेन में सामान्य दिनों में भी यात्रियों की अच्छी संख्या रहती है। नवरात्रि, गर्मी की छुट्टियों, लंबे वीकेंड और दूसरे धार्मिक अवसरों पर भीड़ काफी बढ़ सकती है। ऐसे समय में ट्रेन दोबारा शुरू होने की खबर देखकर आखिरी समय में टिकट लेने की कोशिश न करें।

अगर आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो रिजर्वेशन पहले कराना बेहतर रहेगा। खासकर स्लीपर और AC कोच में सीटों की मांग ज्यादा हो सकती है। जनरल कोच से यात्रा करने वाले यात्रियों को भीड़ के हिसाब से अपनी तैयारी रखनी चाहिए।

टिकट बुक करने से पहले ये जानकारी जरूर जांचें

रेलवे की टाइमिंग और सेवा में समय-समय पर बदलाव हो सकते हैं। इसलिए किसी पुराने शेड्यूल के आधार पर यात्रा की योजना बनाना सही नहीं है। टिकट बुक करने से पहले ट्रेन नंबर, प्रस्थान का समय, चलने के दिन और कटरा पहुंचने का समय जरूर जांचें। अगर आपकी यात्रा मंगलवार या शुक्रवार को है, तो विशेष रूप से यह देख लें कि उस तारीख पर ट्रेन निर्धारित शेड्यूल के अनुसार चल रही है या नहीं। यात्रा से पहले रेलवे के आधिकारिक रिजर्वेशन सिस्टम, NTES या 139 जैसी सेवाओं से ताजा जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

 ट्रेन में सफर करते समय सामान का रखें ध्यान

रातभर की यात्रा होने की वजह से यात्रियों को अपने सामान को लेकर भी सावधान रहना चाहिए। मोबाइल, वॉलेट, पहचान पत्र, टिकट और दूसरे जरूरी दस्तावेज ऐसी जगह रखें, जहां उन्हें आसानी से संभाला जा सके। अगर आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो सभी यात्रियों के टिकट और जरूरी दस्तावेज एक ही जगह रखने की बजाय जरूरत के अनुसार अलग-अलग रखना बेहतर होगा।

बच्चों के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो उनके लिए पानी, हल्का खाना, दवाइयां और जरूरी कपड़े अपने पास रखें। बड़े बैग को सीट के नीचे चेन और मजबूत ताले से लॉक करना भी अच्छा रहेगा।

माता के दर्शन के लिए मौसम को हल्के में न लें

कटरा और उसके आसपास का मौसम मैदानी इलाकों से अलग हो सकता है। पहाड़ी क्षेत्र में मौसम तेजी से बदल सकता है। अगर आप बारिश के मौसम में यात्रा कर रहे हैं, तो छाता या रेनकोट साथ रखना काम आ सकता है। आरामदायक और मजबूत ग्रिप वाले जूते भी जरूरी हैं, क्योंकि आगे पैदल चलना पड़ सकता है।

गर्मी के दिनों में पानी की कमी न होने दें और ठंड के मौसम में पर्याप्त गर्म कपड़े रखें। यात्रा की तारीख तय करने से पहले मौसम का पूर्वानुमान देख लेना भी अच्छी आदत है।

कटरा पहुंचने से पहले यात्रा की योजना बनाएं

अगर आपका मकसद केवल ट्रेन से कटरा पहुंचना नहीं, बल्कि माता के दर्शन करना है, तो पूरी यात्रा को एक साथ प्लान करें। सबसे पहले तय करें कि कटरा पहुंचने के बाद कहां रुकेंगे। इसके बाद भवन तक जाने का समय, वापसी का समय और कटरा रेलवे स्टेशन पहुंचने की जरूरत को ध्यान में रखें।

अगर वापसी की ट्रेन उसी दिन है, तो दर्शन और स्टेशन वापसी के बीच पर्याप्त समय रखें। पहाड़ी यात्रा में कभी-कभी उम्मीद से ज्यादा समय लग सकता है। सिर्फ ट्रेन के आने और जाने के समय को देखकर बहुत कम अंतर वाला शेड्यूल बनाना परेशानी खड़ी कर सकता है।

इस ट्रेन से किन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?

कालका-कटरा एक्सप्रेस की बहाली का फायदा खास तौर पर उन यात्रियों को मिलेगा, जो कालका, चंडीगढ़, मोहाली, पंजाब और आसपास के इलाकों से माता वैष्णो देवी की यात्रा करते हैं। पहले जिन यात्रियों को दूसरी ट्रेन या बस के विकल्प देखने पड़ते थे, उनके पास अब एक और सीधा रेलवे विकल्प है।

छात्रों, परिवारों, बुजुर्ग यात्रियों और धार्मिक यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह सेवा काफी उपयोगी हो सकती है। कम किराए और अलग-अलग कोच विकल्पों की वजह से यह ट्रेन अलग-अलग बजट वाले यात्रियों को सुविधा देती है।

सिर्फ श्रद्धालु ही नहीं, आम यात्री भी कर सकते हैं सफर

इस ट्रेन को केवल वैष्णो देवी जाने वाले यात्रियों से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। रास्ते में आने वाले शहरों के लोग भी इसका इस्तेमाल नौकरी, पढ़ाई, परिवार से मिलने या दूसरे निजी कामों के लिए कर सकते हैं। चंडीगढ़, लुधियाना, जालंधर, पठानकोट और जम्मू जैसे शहरों को जोड़ने वाली यह सेवा कई यात्रियों के लिए रोजमर्रा की कनेक्टिविटी का हिस्सा बन सकती है। यही वजह है कि इस train की बहाली धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ सामान्य रेल कनेक्टिविटी के लिए भी महत्वपूर्ण है।

पुल की मरम्मत के बाद मजबूत हुई कनेक्टिविटी

कठुआ और माधोपुर के बीच रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचने के बाद इस क्षेत्र की रेल सेवाएं प्रभावित हुई थीं। ब्रिज नंबर 17 की मरम्मत के बाद अब इस हिस्से में रेल कनेक्टिविटी को दोबारा मजबूत किया गया है।

रेलवे के लिए ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित बनाना जरूरी है, क्योंकि जम्मू और कटरा की तरफ जाने वाली कई महत्वपूर्ण ट्रेनें इसी नेटवर्क का इस्तेमाल करती हैं। एक पुल की मरम्मत से केवल एक train सेवा बहाल नहीं होती, बल्कि पूरे रेलवे नेटवर्क में यात्रियों और माल की आवाजाही को फायदा मिलता है।

यात्रियों के लिए सबसे जरूरी बात: Latest Status जरूर देखें

कालका-कटरा एक्सप्रेस के दोबारा चलने से यात्रियों को राहत जरूर मिली है, लेकिन यात्रा से पहले Latest Running Status देखना जरूरी है। रेलवे में रखरखाव, मौसम, तकनीकी समस्या या दूसरे परिचालन कारणों से शेड्यूल बदल सकता है। इसलिए घर से निकलने से पहले ट्रेन नंबर 14503 और 14504, चलने के दिन और प्रस्थान के समय की दोबारा पुष्टि कर लें। अगर आप किसी दूसरे स्टेशन से train पकड़ रहे हैं, तो उस स्टेशन पर ट्रेन के पहुंचने का सही समय भी जरूर जांचें।

 माता के दरबार तक पहुंचने का सफर फिर हुआ आसान

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कालका-कटरा एक्सप्रेस की वापसी उन यात्रियों के लिए राहत लेकर आई है, जो train के जरिए माता वैष्णो देवी की यात्रा करना चाहते हैं। करीब 479 किलोमीटर का यह सफर कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ता है और रातभर की यात्रा के बाद श्रद्धालुओं को सुबह कटरा पहुंचाता है। कम बजट वाले यात्रियों के लिए जनरल और स्लीपर जैसे विकल्प हैं, जबकि ज्यादा आराम चाहने वाले यात्री AC कोच चुन सकते हैं।

करीब छह महीने तक बंद रहने के बाद इस ट्रेन का दोबारा पटरी पर आना जम्मू-कटरा रूट के यात्रियों के लिए निश्चित तौर पर अच्छी खबर है। अगर आप आने वाले दिनों में माता वैष्णो देवी जाने की योजना बना रहे हैं, तो इस ट्रेन को अपने Travel Options में जरूर शामिल कर सकते हैं। बस टिकट बुक करने से पहले रेलवे की Latest जानकारी जरूर जांचें और मौसम के हिसाब से अपनी तैयारी रखें।

 FiveColorsOfTravel की ओर से कुछ खास सुझाव

  •  नवरात्रि, छुट्टियों और लंबे वीकेंड पर भीड़ बढ़ सकती है। इसलिए यात्रा की तारीख तय होते ही रिजर्वेशन करा लेना बेहतर रहेगा।
  •  घर से निकलने से पहले NTES, 139 या रेलवे के आधिकारिक सिस्टम पर train नंबर और रनिंग स्टेटस जरूर जांचें।
  • अगर रात की यात्रा के बाद सीधे दर्शन का प्लान है, तो कटरा में ठहरने की जगह पहले से तय कर लें।
  •  जम्मू-कश्मीर की तरफ जाते समय मोबाइल नेटवर्क में परेशानी आ सकती है। इसलिए जरूरी कॉल और मैसेज पहले कर लें।
  •  माता के भवन तक आगे पैदल यात्रा करनी पड़ सकती है। इसलिए जरूरत का ही सामान लेकर चलें और आरामदायक जूते जरूर पहनें।
  • यात्रा से पहले बारिश, गर्मी या ठंड की स्थिति के बारे में जानकारी जरूर प्राप्त करें।
  •  दर्शन और रेलवे स्टेशन लौटने के बीच पर्याप्त समय रखें, ताकि किसी तरह की जल्दबाजी न हो।

https://youtu.be/GjvhfXiVCOk?t=71

Shivani Pal

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