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Railway में टिकट न मिलने पर भी मिलेगा 8 लाख का मुआवजा

Yatra

Railway में सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए गुजरात हाईकोर्ट का एक अहम फैसला सामने आया है। कोर्ट ने साफ किया है कि सिर्फ टिकट न मिलने के आधार पर किसी मृत यात्री के परिवार को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता। अगर परिस्थितियां यह साबित करती हैं कि व्यक्ति ट्रेन से यात्रा कर रहा था और उसकी मौत ट्रेन से गिरने जैसी अनहोनी घटना में हुई है, तो रेलवे को मुआवजा देना पड़ सकता है

यह मामला अगस्त 2021 का है। रज़ुल्लाह शेख नाम का एक युवक अजमेर से मुंबई के बांद्रा टर्मिनस जाने के लिए ट्रेन के जनरल कोच में सफर कर रहा था। यात्रा के दौरान आबू रोड और पालनपुर रेलवे स्टेशनों के बीच वह चलती ट्रेन से नीचे गिर गया। हादसा इतना गंभीर था कि मौके पर ही उसकी मौत हो गई। बेटे की मौत के बाद उसकी विधवा मां ने रेलवे से मुआवजे की मांग की, लेकिन उन्हें राहत मिलने के बजाय लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

Railway ने क्यों ठुकराया मुआवजा?

रेलवे प्रशासन का कहना था कि रज़ुल्लाह के पास कोई टिकट नहीं मिला था। इसलिए उसे वैध यात्री नहीं माना जा सकता। रेलवे ने यह भी दलील दी कि वह अपनी लापरवाही की वजह से ट्रेन से गिरा था। इसी आधार पर रेलवे ने कहा कि इस घटना के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

इसके बाद मामला रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल पहुंचा। जून 2024 में ट्रिब्यूनल ने भी रेलवे की दलीलों को सही मानते हुए मुआवजे की मांग खारिज कर दी। ट्रिब्यूनल ने कहा कि मृतक के पास से टिकट बरामद नहीं हुआ था, इसलिए उसे Bona Fide Passenger यानी वैध यात्री नहीं माना जा सकता। पुलिस रिकॉर्ड और डीआरएम रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि हो सकता है कि चक्कर आने या अपनी गलती की वजह से वह ट्रेन से गिरा हो।

हाईकोर्ट पहुंची मां, बदला पूरा मामला

ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद रज़ुल्लाह की मां ने गुजरात हाईकोर्ट में अपील की। उनकी ओर से दलील दी गई कि हलफनामे में साफ बताया गया है कि उनके बेटे ने यात्रा शुरू करने से पहले वैध टिकट खरीदा था।

परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि अगर रेलवे दावा कर रहा है कि यात्री के पास टिकट नहीं था, तो इसे साबित करने की जिम्मेदारी रेलवे की होनी चाहिए। मामले की सुनवाई करते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने कानून को जरूरत से ज्यादा तकनीकी नजरिए से देखा। ऐसे कानून का उद्देश्य पीड़ित परिवारों को राहत देना है, न कि उन्हें छोटी-छोटी तकनीकी बातों में उलझाना।

 कोरोना काल का भी किया गया जिक्र

Railway

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में एक और महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान दिया। कोर्ट ने कहा कि यह हादसा अगस्त 2021 में हुआ था, जब देश कोरोना महामारी से गुजर रहा था। उस दौरान रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में सामान्य समय की तरह टिकट जांच नहीं हो रही थी। कई जगह यात्रियों की एंट्री और चेकिंग की व्यवस्था भी अलग थी।

ऐसे समय में सिर्फ इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि हादसे के बाद टिकट नहीं मिला, इसलिए यात्री बिना टिकट सफर कर रहा था। कोर्ट ने माना कि हादसे के दौरान टिकट खो जाना या टिकट का बरामद न होना पूरी तरह संभव है। केवल इसी आधार पर किसी परिवार को मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता।

क्या टिकट न मिलने पर भी मिल सकता है मुआवजा?

गुजरात हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि टिकट का बरामद न होना अकेले मुआवजा खारिज करने का आधार नहीं बन सकता। अगर मृतक के परिवार की ओर से हलफनामा देकर बताया जाता है कि यात्री के पास वैध टिकट था और घटना की परिस्थितियां भी यात्रा की पुष्टि करती हैं, तो दावे पर विचार करना जरूरी है। ऐसे मामलों में Railway को यह साबित करना पड़ सकता है कि यात्री वास्तव में बिना टिकट यात्रा कर रहा था।

अगर Railway इस बात का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाता, तो केवल अनुमान के आधार पर मुआवजा नहीं रोका जा सकता। इस मामले में रेलवे ऐसा कोई प्रत्यक्ष सबूत पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो कि रज़ुल्लाह बिना टिकट यात्रा कर रहा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट था कि उसकी मौत चलती ट्रेन से गिरने के कारण सिर में आई गंभीर चोटों की वजह से हुई थी। रिकॉर्ड में आत्महत्या, नशे की हालत या जानबूझकर जोखिम उठाने जैसी कोई बात सामने नहीं आई।

Railway एक्ट क्या कहता है?

Railway एक्ट, 1989 की धारा 124A यात्रियों को महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा देती है। इस कानून के तहत अगर कोई यात्री किसी Untoward Incident यानी अनहोनी घटना का शिकार होता है, जैसे चलती ट्रेन से अचानक गिर जाना, तो सामान्य परिस्थितियों में रेलवे को मुआवजा देना होता है।

कानून में कुछ विशेष परिस्थितियों में रेलवे को जिम्मेदारी से छूट मिल सकती है। इनमें आत्महत्या, खुद को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना, आपराधिक गतिविधि के दौरान हुई घटना और नशे की हालत में हुआ हादसा शामिल है। रज़ुल्लाह शेख के मामले में इनमें से कोई भी स्थिति साबित नहीं हुई। इसलिए हाईकोर्ट ने माना कि यह रेलवे एक्ट के तहत मुआवजा देने योग्य मामला है।

कोर्ट ने कितना मुआवजा देने का आदेश दिया?

सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद गुजरात हाईकोर्ट ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल का पुराना आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने Railway को निर्देश दिया कि रज़ुल्लाह शेख की मां को 8 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

इसके साथ ही हादसे की तारीख से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश भी दिया गया। कोर्ट ने रेलवे को पूरी राशि जमा करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है। यह फैसला उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो रेलवे हादसों के बाद केवल तकनीकी कारणों से अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं।

 यात्रियों के लिए यह फैसला क्यों अहम है?

यह निर्णय बताता है कि केवल टिकट का न मिलना किसी यात्री के अधिकार खत्म नहीं करता। अगर दुर्घटना की परिस्थितियां यह साबित करती हैं कि व्यक्ति ट्रेन में यात्रा कर रहा था और रेलवे अपनी दलील को ठोस सबूतों से साबित नहीं कर पाता, तो पीड़ित परिवार को न्याय मिल सकता है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बिना टिकट यात्रा करने वाले हर व्यक्ति के परिवार को मुआवजा मिलेगा। हर मामले में घटना के सबूत, पुलिस रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और यात्रा से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जाएगी। यह फैसला रेलवे को भी अपनी जिम्मेदारियों के प्रति अधिक सतर्क रहने का संदेश देता है।

Railway हादसे के बाद परिवार को क्या करना चाहिए?

Railway

अगर किसी यात्री के साथ ट्रेन में हादसा हो जाता है, तो परिवार को सबसे पहले पुलिस और Railway अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। हादसे से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें। इनमें टिकट, पीएनआर, पहचान पत्र, एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र और Railway की रिपोर्ट शामिल हो सकती है।

अगर टिकट उपलब्ध नहीं है, तो परिवार को यात्रा से जुड़े दूसरे सबूत भी जमा करने चाहिए। टिकट की फोटो, ऑनलाइन बुकिंग का रिकॉर्ड, बैंक से हुआ भुगतान, सहयात्रियों की जानकारी या परिवार को भेजे गए यात्रा विवरण का इस्तेमाल किया जा सकता है। जितने ज्यादा दस्तावेज उपलब्ध होंगे, दावा उतना ही मजबूत हो सकता है।

Railway क्लेम के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है?

मुआवजे का दावा करते समय मृत यात्री का पहचान पत्र और परिवार से जुड़े दस्तावेज जरूरी होते हैं। इसके अलावा मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस रिपोर्ट, एफआईआर और हादसे से जुड़ी Railway रिपोर्ट भी जमा करनी पड़ सकती है। अगर मृतक के पास टिकट नहीं मिला है, तो परिवार की ओर से हलफनामा भी दिया जा सकता है। इसमें यात्रा की तारीख, ट्रेन का नाम, चढ़ने और उतरने वाले स्टेशन तथा हादसे की पूरी जानकारी लिखी जाती है। दावे से जुड़े सभी दस्तावेजों की फोटो कॉपी और डिजिटल कॉपी अपने पास जरूर रखें।

 अगर Railway क्लेम खारिज कर दे तो क्या करें?

अगर Railway क्लेम ट्रिब्यूनल आपका दावा खारिज कर देता है, तो आप उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत ऊपरी अदालत में अपील कर सकते हैं। अपील करने से पहले ट्रिब्यूनल के आदेश को ध्यान से पढ़ना जरूरी है। इसके बाद देखें कि फैसला किन कारणों के आधार पर दिया गया है और आपके पास उसके विरोध में कौन से सबूत मौजूद हैं। ऐसे मामलों में कानूनी विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है। सही दस्तावेज और मजबूत दलील के आधार पर परिवार आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

यात्रा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

यात्रा शुरू करने से पहले टिकट या ई-टिकट का स्क्रीनशॉट अपने मोबाइल में सेव कर लें। अपने किसी करीबी व्यक्ति को ट्रेन का नाम, पीएनआर नंबर, यात्रा की तारीख और कोच की जानकारी भेज दें। भीड़ होने पर भी ट्रेन के दरवाजे के पास खड़े होकर यात्रा न करें। चलती ट्रेन में दरवाजे पर खड़ा होना बेहद खतरनाक हो सकता है। ट्रेन की खिड़की, दरवाजे और फुटबोर्ड के पास बैठने या खड़े होने से बचें। अगर ट्रेन में कोई संदिग्ध स्थिति दिखाई दे, तो तुरंत टीटीई, आरपीएफ या रेलवे पुलिस को जानकारी दें।

 FiveColorsOfTravel की ओर से खास सुझाव

  • यात्रा शुरू करने से पहले टिकट या ई-टिकट का स्क्रीनशॉट मोबाइल में जरूर सेव कर लें।
  • अपने परिवार के किसी सदस्य के साथ पीएनआर नंबर और ट्रेन की पूरी जानकारी साझा करें।
  • भीड़ होने पर भी दरवाजे के पास खड़े होकर यात्रा न करें, क्योंकि चलती ट्रेन में यह बहुत खतरनाक हो सकता है।
  • दुर्घटना होने पर तुरंत जीआरपी, आरपीएफ या स्टेशन मास्टर को सूचना दें ताकि आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार हो सके।
  • अगर रेलवे क्लेम अस्वीकार कर दे, तो सभी दस्तावेजों के साथ उचित कानूनी सलाह लेकर आगे अपील जरूर करें।

गुजरात हाईकोर्ट का यह फैसला Railway हादसों में मुआवजे का दावा करने वाले परिवारों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने साफ किया है कि सिर्फ टिकट न मिलने के आधार पर किसी मृत यात्री को वैध यात्री मानने से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर परिस्थितियां यह साबित करती हैं कि व्यक्ति ट्रेन में यात्रा कर रहा था और उसकी मौत किसी अनहोनी Railway घटना में हुई है, तो परिवार को मुआवजा मिल सकता है।

रज़ुल्लाह शेख के मामले में Railway को 8 लाख रुपये का मुआवजा और 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश दिया गया है। इस फैसले से यह संदेश मिलता है कि पीड़ित परिवारों को केवल तकनीकी कारणों से अपने अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। इसलिए हादसे के बाद सभी दस्तावेज संभालकर रखें, समय पर दावा दाखिल करें और जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद जरूर लें।

Shivani Pal

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