Monsoon Food: बारिश में खाए जाने वाले 10 Best भारतीय पकवान
बारिश का मौसम आते ही हम सबका दिल कुछ चटपटा और गरमा-गरम खाने के लिए मचलने लगता है। खिड़की के पास बैठकर बारिश की बूंदों को देखना और हाथ में एक कप कड़क चाय के साथ पकौड़े हों, तो दिन ही बन जाता है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बारिश में हमें फ्राइड और तीखा खाना ही क्यों पसंद आता है? इसके पीछे एक वैज्ञानिक वजह भी है। मानसून में धूप कम होने से हमारे शरीर में ‘सेरोटोनिन’ (serotonin) नाम का हैप्पी हॉर्मोन कम हो जाता है, इसलिए हमें ऐसे कार्बोहाइड्रेट और मसालेदार चीज़ों की craving होती है जो तुरंत मूड को ऊपर उठा दे। साथ ही मिर्च में मौजूद ‘कैप्साइसिन’ (capsaicin)डोपामाइन रिलीज कराता है, जिससे खुशी मिलती है। आज हम आपको इंडिया की एक स्वाद-भरी सैर पर ले चलेंगे जहाँ हर स्टेट का अपना खास Monsoon Food है।
Maharashtra Monsoon Food
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महाराष्ट्र की बारिश और वहां का स्ट्रीट फूड पूरे देश में मशहूर है। मुंबई में तो बारिश का मतलब ही वडा पाव और कांदा भजिया माना जाता है। वडा पाव का इतिहास 1960 के दशक से जुड़ा है जब इसे मिल वर्कर्स के लिए सस्ता और भरपेट नाश्ता बनाया गया था। बारिश में गरमा-गरम पाव के साथ तीखी लहसुन की चटनी और कुरकुरा वडा — मजा ही कुछ और है।
इसके अलावा कांदा भजिया यानी प्याज़ के पकौड़े हर नुक्कड़ पर मिलते हैं और मुंबईकरों के फेवरेट कंफर्ट फूड हैं।
कोस्टल महाराष्ट्र यानी कोंकण में लोग ‘बॉम्बिल भुजना’ (Bombil Bhujna) यानी बॉम्बे डक मछली की करी बड़ा चाव से खाते हैं। पुराने लोग कहते हैं कि बारिश में ताज़ा मछली का तीखा स्वाद मौसम को और भी खास बना देता है। मिसल पाव की तीखी ग्रेवी और गरम पाव भी बारिश की सुबहों को एनर्जेटिक बना देते हैं।
Gujarat Monsoon Food
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गुजरात की रसोई मानसून में बेहद संतुलित और स्वादिष्ट होती है। भुट्टा (कॉर्न) मानसून का बड़ा हिस्सा है और गुजरात में ‘मकई नो चेवडो’ या ‘मकई खिचड़ी’ खूब पसंद की जाती है। देसी मकई या स्वीट कॉर्न को कद्दूकस करके दूध, घी और हरी मिर्च के साथ पकाया जाता है, जो हल्का मीठा और थोड़ा तीखा लगता है।
इसके अलावा अहमदाबाद जैसे शहरों में फाफड़ा-जलेबी का कॉम्बिनेशन हमेशा हिट रहता है। बारिश में मेथी ना मुठिया और हांडवो जैसे हल्के, जल्दी पचने वाले स्नैक्स भी खाए जाते हैं। खमन और ढोकला भी इस मौसम में पसंद किए जाते हैं क्योंकि ये स्टीम्ड होते हैं और पेट के लिए हल्के होते हैं। ताज़ा कॉर्न की डिश का अपना अलग ही मजा होता है।
Rajasthan Monsoon Food
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राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में भी मानसून का जश्न खाने-पीने के साथ मनाया जाता है। यहाँ की ‘बीकानेरी गेहूं की खिचड़ी’ बारिश के दिनों में खास कंफर्ट फूड मानी जाती है। बीकानेर के लोग बताते हैं कि चावल कम खाने की वजह से गेहूं और मूंग दाल से बनने वाली यह खिचड़ी बहुत पसंद की जाती है।
राजस्थान में बारिश में ‘मिर्ची वडा’ और प्याज़ की कचौड़ी की डिमांड बढ़ जाती है। लेकिन मानसून में ‘घेवर’ के बिना काम नहीं चलता। घेवर खास तौर पर मानसून के मौसम में बनाया और खाया जाता है क्योंकि नमी इसे सही टेक्सचर देती है। ये मीठी-क्रिस्पी चीज़ तीज-त्योहारों पर हर घर में बनती है।
Bihar Monsoon Food
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बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून का स्वाद घरेलू और दिल को छू लेने वाला होता है। भोजपुरी इलाकों में बारिश के दिनों में ‘दाल पूरी’ और ‘आलू भुजिया’ बनना आम बात है। पुराने समय में लोग बताते हैं कि बारिश में चना दाल भरी पूरियाँ बनती थीं जो मौसम का खास नाश्ता होती थीं।
इसके साथ ही ‘बचका’ यानी आलू या बैंगन के पकौड़े हर घर में बनते हैं। एक और खास डिश ‘गिरवंच’ या ‘रिकवंच’ है, जिसमें अरबी के पत्तों पर बेसन-मसाले लगा कर रोल बनाकर तला जाता है। सावन के महीने में इसे खाने का अलग महत्व है। भोजपुरी हिस्सों में ‘पुआ’ यानी मीठे पैनकेक्स भी बारिश के दिनों में खूब बनते हैं। लिट्टी चोखा का मज़ा तो हर मौसम में अलग है, बारिश में इसे आग पर सेंक कर खाने का अनुभव डबल हो जाता है।
West Bengal Monsoon Food
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बंगाल में बारिश का मतलब इलिश माछ (Hilsa) भी है। हिल्सा को बंगाली सिर्फ मछली नहीं, एक एहसास मानते हैं। मानसून में हिल्सा नदियों की तरफ आती है और स्वाद में सबसे बेहतरीन होती है क्योंकि उस समय उसमें प्राकृतिक तेल और फैट ज़्यादा होता है।
यानी सरसों-आधारित हिल्सा और गरमा-गरम चावल बंगाल का अल्टीमेट मानसून मील है। कोलकाता में लोग बारिश के साथ ‘खिचड़ी’ के साथ ‘बेगुनी’ यानी बैंगन के पकोड़े और ‘लाबरा’ खाना पसंद करते हैं। ‘कबीराजी कटलेट’ का क्रिस्पी स्वाद भी बारिश की शामों को यादगार बनाता है। बंगाल में बारिश और हिल्सा का रिश्ता गहरा है — लोक-गीतों और कहानियों में भी मिलता है।
Kerala Monsoon Food
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केरल में मानसून का अपना ही मतलब है, इसे ‘करकिडकम’ कहा जाता है और इसे शरीर की सफाई के समय के रूप में भी देखा जाता है। केरल में मानसून में ‘करकिडका कंजी’ (Karkidaka Kanji) नामक औषधीय दलिया पीया जाता है।
यह दलिया नर्म चावल, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों और मसालों से बनता है, जो इम्युनिटी बढ़ाने और पाचन सुधारने में मदद करता है। केरल के कुछ हिस्सों में ‘अरीकदुक्का’ (Arikadukka) यानी मसल्स के अंदर चावल का मिश्रण भरकर फ्राई किया हुआ स्नैक बारिश में चाय के साथ खूब पसंद किया जाता है। साथ में ‘पझम पोरी’ यानी बनाना फ्रिटर्स भी घर-घर बनते हैं। केरल की बारिश में ये गरम और हेल्दी चीज़ें शरीर को बीमारियों से बचाती हैं।
Karnataka Monsoon Food
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कर्नाटक में मानसून का नजारा बेहद खूबसूरत होता है और यहाँ का खाना भी रंगीन और रोचक है। तटीय कर्नाटक और मलनाड में बारिश आते ही ‘पात्रोडे’ बनाने की तैयारी हो जाती है। यह अरबी के पत्तों पर मसालेदार चावल का पेस्ट लगा कर बनाया जाता है, फिर स्टीम या फ्राई किया जाता है।
उत्तर कर्नाटक के बाजारों में बारिश के वक्त ‘कुम्मू पाल्या’ यानी जंगली मशरूम की सब्ज़ी मिलती है, जो जंगल से ताज़ा चुनी जाती है। ‘आलंदी कुम्मू’ जैसा मशरूम बारिश की पहली बूंदों के बाद उगता है और इसमें ज़बर्दस्त अर्थी (earthy) स्वाद होता है। इसके अलावा हल्दी के पत्तों में लपेट कर बनाए ‘कदुबू’ बारिश की सुबह का पौष्टिक नाश्ता होते हैं।
Punjab Monsoon Food
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पंजाब में मानसून का स्वागत मिठास और गर्माहट के साथ होता है। बारिश आते ही ‘पुडा’ या ‘पूरे’ बनाए जाते हैं — ये आटा, गुड़ और सौंफ के घोल से बने मीठे पैनकेक्स होते हैं जो घी में बने होते हैं।
सर्द बारिश में ‘सरसों दा साग’ और ‘मक्की दी रोटी’ भी बहुत पसंद किए जाते हैं क्योंकि ये शरीर को अंदर से गर्म रखते हैं। हिमाचल में लोग ‘लिंगडू की सब्ज़ी’ (Fiddlehead Ferns) और दुर्लभ ‘गुच्ची’ मशरूम खाते हैं जो मानसून में पहाड़ों पर मिलते हैं। हरियाणा में ‘सिंघाड़े की सब्ज़ी’ भी इस मौसम में खाई जाती है क्योंकि यह पौष्टिक और सर्दी-खांसी से बचाने वाली मानी जाती है।
Northeast India Monsoon Food
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नॉर्थ-ईस्ट में बारिश बहुत ज़्यादा होती है और खाना प्रकृति के काफ़ी करीब होता है। मेघालय में ‘जादोह’ (Jadoh) खासी जनजाति की फेवरेट है — नाम का मतलब ही है चावल और मांस, कम तेल और अलग मसालों के साथ तैयार किया जाता है।
अरुणाचल में ‘पा सा’ (Paa Saa) जैसा मछली सूप मिलता है जिसमें स्थानीय पत्तों का इस्तेमाल होता है जो मछली की खुशबू कम कर देते हैं और सूप को हरा रंग देते हैं। मणिपुर की ‘इरोम्बा’ (Eromba) फर्मेंटेड मछली और उबली सब्ज़ियों से बनती है और मानसून में खूब खाई जाती है। असम में ‘ढेकिया शाक’ यानी फर्न की सब्ज़ी बारिश में हर घर की थाली में मिलती है और यह सेहत के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है।
Kashmir Monsoon Food
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कश्मीर की ठंडी बारिश में शरीर को गरम रखना ज़रूरी होता है। बारिश के दिनों में वहाँ ‘चरोलिया’ (Charolia) खाते हैं — यह कुट्टू के आटे से बने स्टीम्ड डम्पलिंग्स होते हैं, हल्के पर पेट भरने वाले।
कश्मीर का असली मानसून कंफर्ट फूड ‘हरीसा’ (Harisa) है। हरीसा में मटन, चावल और दालों को रात भर धीमी आंच पर पकाया जाता है जब तक वो स्मूद पेस्ट न बन जाए। इसे गरम घी और नान के साथ परोसा जाता है, जो ठंडी बारिश में अंदर से गर्म रखता है। साथ में वहाँ की ‘कहवा’ चाय भी बारिश के मज़े को दुगना कर देती है।
Monsoon Food Tips: मानसून में सेहत का रखें ख्याल
आयुर्वेद में ‘ऋतुचर्या’ यानी मौसम के हिसाब से खाने-पिने का बड़ा महत्व बताया गया है। आयुर्वेद के अनुसार मानसून में हमारी पाचन आग (अग्नि) थोड़ी धीमी हो जाती है, इसलिए इस मौसम में हल्का और गरम खाना खाना चाहिए।
पुराना चावल, गेहूं और दालों का इस्तेमाल बेहतर माना जाता है। मसालों में अदरक, काली मिर्च और लहसुन शामिल करने से पाचन मददगार रहता है। साथ ही बाहर का या खुले में रखा हुआ खाना खाने से बचें क्योंकि बारिश में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। हमेशा उबला हुआ या साफ पानी ही पिएं ताकि मानसून की बीमारियों से बचाव रहे।
five colors of travel की ओर से खास सुझाव
- हमेशा फ्रेश और गरम खाना खाएं।
- अदरक, हल्दी और काली मिर्च जैसे मसाले शामिल रखें।
- बाहर का खाना सिर्फ साफ-सुथरी जगह से ही लें।
- हर्बल टी या उबला हुआ पानी पीते रहें।
- मानसून के सीज़नल फल और सब्ज़ियाँ ज़रूर खाएँ।
ये थी पूरे इंडिया की एक मसालेदार Monsoon Food यात्रा। अगली बार बारिश में सिर्फ पकौड़ों पर ही रुकें ना, किसी एक स्टेट की खास डिश ट्राई करें और बारिश का मज़ा बढ़ा दें!