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Kausani: 2 दिन में घूमें उत्तराखंड का ‘भारत का स्विट्जरलैंड’

Kausani

क्या आपने कभी ऐसी जगह की कल्पना की है, जहाँ सुबह आंख खुलते ही सामने बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां दिखाई दें, हवा में चीड़ के पेड़ों की खुशबू हो और शहर का शोर-शराबा कई किलोमीटर दूर छूट जाए? अगर हाँ, तो Kausani आपके लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन हो सकता है

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में लगभग 1,890 मीटर की ऊंचाई पर बसा Kausani उन चुनिंदा जगहों में शामिल है, जहाँ प्रकृति, शांति और पहाड़ी संस्कृति एक साथ देखने को मिलती है। महात्मा गांधी ने इस जगह की खूबसूरती से प्रभावित होकर इसे “भारत का स्विट्जरलैंड” कहा था। अगर आपके पास सिर्फ दो दिन हैं, तब भी आप इस छोटे से पहाड़ी कस्बे की खूबसूरती को करीब से महसूस कर सकते हैं।

Kausani को भारत का स्विट्जरलैंड क्यों कहा जाता है?

Kausani की सबसे बड़ी पहचान यहां से दिखाई देने वाला लगभग 300 किलोमीटर लंबा हिमालयी दृश्य है। यहां से नंदा देवी, त्रिशूल और पंचाचूली जैसी कई प्रसिद्ध चोटियों को साफ देखा जा सकता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय इन पहाड़ों पर पड़ने वाली सुनहरी रोशनी पूरे वातावरण को जादुई बना देती है।

इसी प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के कारण यह जगह वर्षों से प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफर्स और शांति की तलाश में आने वाले यात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करती रही है।

Kausani कैसे पहुंचें?

Kausani तक पहुंचना काफी आसान है। सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जो यहां से लगभग 135 किलोमीटर दूर स्थित है। काठगोदाम से टैक्सी और बस सेवाएं आसानी से मिल जाती हैं।

यदि आप हवाई यात्रा करना चाहते हैं, तो पंतनगर एयरपोर्ट सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। यहां से सड़क मार्ग के जरिए लगभग 5 से 6 घंटे में Kausani पहुंचा जा सकता है।

दिल्ली से सड़क मार्ग द्वारा भी बड़ी संख्या में पर्यटक सीधे Kausani पहुंचते हैं।

Kausani

Day 1: सुकून, हिमालय और गांधीजी की यादें

Kausani पहुंचने के बाद सबसे पहले अपने होटल या होमस्टे में चेक-इन करें। यहां अनासक्ति आश्रम और मॉल रोड के आसपास ठहरना सुविधाजनक माना जाता है क्योंकि इन इलाकों से हिमालय के शानदार दृश्य दिखाई देते हैं।

शाम के समय अनासक्ति आश्रम जरूर जाएं। वर्ष 1929 में महात्मा गांधी कुछ समय के लिए यहां रुके थे और उन्होंने यहीं “अनासक्ति योग” पर अपनी प्रसिद्ध व्याख्या लिखी थी।

आश्रम परिसर में बैठकर हिमालय के ऊपर डूबते सूरज को देखना Kausani के सबसे यादगार अनुभवों में शामिल है। जैसे-जैसे सूरज नीचे जाता है, बर्फ से ढकी चोटियां सुनहरे और गुलाबी रंग में रंगने लगती हैं।

रात के भोजन में कुमाऊंनी व्यंजनों का स्वाद जरूर लें। भट की चुड़कानी, मडुवे की रोटी और पहाड़ी दाल यहां आने वाले पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

Day 2: सूर्योदय, चाय के बागान और साहित्यिक विरासत

Kausani में सूर्योदय देखे बिना यात्रा अधूरी मानी जाती है। सुबह जल्दी उठकर हिमालय के पीछे से निकलते सूरज को देखना किसी यादगार दृश्य से कम नहीं लगता।

सुबह की पहली किरणों के साथ नंदा देवी और त्रिशूल की चोटियां सुनहरी चमकने लगती हैं। यही कारण है कि फोटोग्राफर्स के बीच Kausani काफी लोकप्रिय है।

नाश्ते के बाद कुमाऊं के प्रसिद्ध चाय बागानों की ओर निकलें। Kausani Tea Estate में हरियाली के बीच घूमना और ताजी चाय की खुशबू का आनंद लेना बेहद सुकून भरा अनुभव है। यहां से आप ऑर्गेनिक चाय भी खरीद सकते हैं।

इसके बाद प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत संग्रहालय जाएं। यह संग्रहालय उनके जीवन, साहित्य और रचनाओं को करीब से जानने का अवसर देता है।

यदि आपके पास थोड़ा अतिरिक्त समय है, तो Baijnath Temple भी जा सकते हैं। लगभग 12वीं शताब्दी में बने ये मंदिर समूह गोमती नदी के किनारे स्थित हैं और अपनी प्राचीन वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं।

इसके अलावा Rudradhari Falls भी प्रकृति प्रेमियों के लिए अच्छा विकल्प माना जाता है। यहां छोटी ट्रेकिंग करते हुए आप झरनों और घने जंगलों की खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं।

Kausani घूमने का सबसे अच्छा समय

वैसे तो Kausani पूरे साल घूमने योग्य डेस्टिनेशन है, लेकिन अलग-अलग मौसम यहां अलग अनुभव लेकर आते हैं।

मार्च से जून के बीच मौसम काफी सुहावना रहता है और घूमने-फिरने के लिए यह समय सबसे लोकप्रिय माना जाता है।

जुलाई से सितंबर के दौरान Kausani पूरी तरह हरियाली से भर जाता है। बादलों और बारिश के बीच पहाड़ों का नजारा बेहद खूबसूरत दिखाई देता है।

अक्टूबर और नवंबर के दौरान आसमान साफ रहता है, जिससे हिमालय की चोटियां सबसे स्पष्ट दिखाई देती हैं।

यदि आप बर्फबारी देखना चाहते हैं, तो दिसंबर और जनवरी के दौरान यात्रा की योजना बना सकते हैं।

Kausani में कहाँ ठहरें?

Kausani में बजट होटल से लेकर प्रीमियम रिसॉर्ट और होमस्टे तक कई विकल्प उपलब्ध हैं।

यदि आप शांत वातावरण चाहते हैं, तो स्थानीय होमस्टे अच्छा विकल्प साबित हो सकते हैं। यहां आपको स्थानीय भोजन, पहाड़ी संस्कृति और ग्रामीण जीवन को करीब से जानने का अवसर मिलता है।

कई रिसॉर्ट्स ऐसे भी हैं जहां से कमरे की खिड़की खोलते ही सीधे हिमालय का शानदार दृश्य दिखाई देता है।

Kausani की संस्कृति और स्थानीय जीवन

Kausani केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए भी जाना जाता है।

यहां के लोग बेहद सरल और मेहमाननवाज माने जाते हैं। स्थानीय बाजारों में हाथ से बनी ऊनी शॉल, पहाड़ी मसाले, ऑर्गेनिक चाय और शहद आसानी से मिल जाते हैं।

कुमाऊं की पारंपरिक जीवनशैली और सादगी आज भी यहां की सबसे बड़ी पहचान बनी हुई है।

Five Colors of Travel की ओर से 5 खास सुझाव

  1. Kausani की सबसे खूबसूरत यादें सूर्योदय के समय बनती हैं।
  2. गर्मियों में भी सुबह और शाम का मौसम ठंडा हो सकता है।
  3. भट की चुड़कानी, मडुवे की रोटी और झंगोरे की खीर का स्वाद यात्रा को और खास बना देता है।
  4. यहां की ऑर्गेनिक चाय, शहद और हाथ से बनी ऊनी वस्तुएं बेहतरीन स्मृति चिन्ह साबित होती हैं।
  5. प्लास्टिक का उपयोग कम करें और पहाड़ों की स्वच्छता बनाए रखने में अपना योगदान दें।

अगर आप भी ऐसी जगह की तलाश में हैं जहाँ दो दिन में मन और दिमाग दोनों को सुकून मिल जाए, तो Kausani आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए। हिमालय की गोद में बसा यह छोटा सा पहाड़ी कस्बा सिर्फ एक डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि ऐसा अनुभव है जिसे आप लंबे समय तक याद रखेंगे।

Nandani Varshney

Nandani Varshney

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