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रेलवे की Bedsheet धुलाई का खर्च सुनकर चौंक जाएंगे आप!

रेलवे की Bedsheet धुलाई का खर्च सुनकर चौंक जाएंगे आप!

ट्रेन के AC कोच में सफर करने वाले ज्यादातर यात्रियों ने कभी न कभी यह जरूर सोचा होगा कि हर दिन लाखों लोगों को मिलने वाली सफेद Bedsheet आखिर साफ कैसे होती हैं और रेलवे इस पर कितना खर्च करता होगा। लेकिन जब इसकी असली कीमत सामने आई तो कई लोग हैरान रह गए। जिस Bedsheet को देखकर लोग सोचते हैं कि उसकी धुलाई पर अच्छा-खासा खर्च आता होगा, उसकी सफाई की लागत उम्मीद से कहीं कम है।

AC कोच की सबसे जरूरी सुविधा

लंबी दूरी की यात्रा में AC कोच यात्रियों को ज्यादा आरामदायक सफर का अनुभव देते हैं। इन कोचों में यात्रियों को Bedsheet, तकिये का कवर, तौलिया और कंबल जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। जैसे ही यात्री अपनी सीट पर पहुंचता है, उसे सीलबंद पैकेट में ये सामान दिया जाता है। हर दिन लाखों लोग इनका इस्तेमाल करते हैं, इसलिए इन्हें साफ और हाइजेनिक रखना रेलवे के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है।

रेलवे एक Bedsheet की धुलाई पर कितना खर्च करता है?

रेलवे से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक, एक Bedsheet को धोने का खर्च सिर्फ 3.16 रुपये प्रति पीस है। वहीं तकिये के कवर की धुलाई पर करीब 1.24 रुपये खर्च होते हैं। फेस टॉवेल को साफ करने की लागत लगभग 1.12 रुपये और बाथ टॉवेल की धुलाई का खर्च करीब 1.08 रुपये बताया गया है।

रेलवे की Bedsheet धुलाई का खर्च सुनकर चौंक जाएंगे आप!

यानी जिस कीमत में आप एक कप चाय खरीदते हैं, उतने पैसों में रेलवे कई बेडरोल आइटम साफ करवा लेता है। यही वजह है कि यह आंकड़ा सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रहा।

आखिर इतना कम खर्च कैसे आता है?

इसके पीछे रेलवे का बड़ा और आधुनिक लॉन्ड्री सिस्टम है। देशभर में रोजाना करीब 18 लाख बेडरोल सेट यात्रियों को दिए जाते हैं। इतनी बड़ी संख्या में Bedsheet और तौलियों की धुलाई मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर की जाती है।

रेलवे कई जगहों पर आधुनिक मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री का इस्तेमाल करता है, जहां एक साथ हजारों Bedsheet और तौलिये साफ किए जाते हैं। बड़े पैमाने पर होने वाली धुलाई की वजह से प्रति आइटम लागत काफी कम हो जाती है। इसे ही इकोनॉमी ऑफ स्केल का फायदा कहा जाता है, जिसमें ज्यादा संख्या में काम होने पर प्रति यूनिट खर्च घट जाता है

कंबलों की सफाई को लेकर क्या नियम है?

Bedsheet और तौलिया हर इस्तेमाल के बाद धोए जाते हैं, लेकिन कंबलों के लिए नियम अलग हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कंबलों की धुलाई आमतौर पर महीने में एक बार की जाती है।

हालांकि यात्रियों की सुविधा और साफ-सफाई को ध्यान में रखते हुए रेलवे अब बेडरोल किट में एक अतिरिक्त Bedsheet भी उपलब्ध कराता है। यात्री इस Bedsheet का इस्तेमाल कंबल के ऊपर कर सकते हैं, जिससे सफर के दौरान बेहतर हाइजीन बनी रहती है।

गंदी Bedsheet मिलने पर क्या करें?

कभी-कभी यात्रियों को शिकायत रहती है कि उन्हें साफ Bedsheet नहीं मिली या Bedsheet पर दाग दिखाई दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले कोच अटेंडेंट से संपर्क कर नई Bedsheet मांगी जा सकती है।

अगर समस्या का समाधान नहीं होता है, तो रेलवे हेल्पलाइन 139 पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। रेलवे का कहना है कि ऐसी शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जाती है और जरूरत पड़ने पर यात्रियों को तुरंत नई Bedsheet उपलब्ध कराई जाती है।

लाखों यात्रियों के लिए रोज चलता है बड़ा सिस्टम

भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है और हर दिन लाखों लोग इसकी सेवाओं का उपयोग करते हैं। इतने बड़े स्तर पर यात्रियों को साफ बेडरोल उपलब्ध कराना आसान काम नहीं है। इसके लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में आधुनिक लॉन्ड्री सेंटर लगातार काम करते हैं।

आधुनिक मशीनों, बड़े स्तर पर होने वाली धुलाई और बेहतर प्रबंधन की वजह से रेलवे यह काम बेहद कम लागत में पूरा कर पाता है। यही कारण है कि ट्रेन में मिलने वाली साफ-सुथरी Bedsheet के पीछे एक बड़ा, संगठित और किफायती सिस्टम काम करता है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

Five Colors of Travel की ओर से यात्रियों के लिए कुछ खास सुझाव

  1. यात्रा से पहले मौसम की जानकारी जरूर जांच लें, ताकि आपकी ट्रिप बिना किसी परेशानी के पूरी हो सके।
  2. स्थानीय संस्कृति, खानपान और परंपराओं का सम्मान करें, इससे आपका यात्रा अनुभव और यादगार बनता है।
  3. जरूरी दस्तावेज, टिकट और पहचान पत्र हमेशा अपने साथ रखें, खासकर लंबी दूरी की यात्राओं में।
  4. लोकल जगहों और कम प्रसिद्ध आकर्षणों को भी एक्सप्लोर करें, क्योंकि कई बार असली अनुभव भीड़ से दूर ही मिलता है।
  5. यात्रा के दौरान साफ-सफाई और पर्यावरण का ध्यान रखें, ताकि आने वाले पर्यटक भी उसी खूबसूरती का आनंद ले सकें।
Shivani Pal

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