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Chail में घूमने की 10 Offbeat जगहें-जो आपकी यात्रा को Super बना देंगी

हिमाचल प्रदेश की गोद में बसा चैल(Chail) अक्सर शिमला की भीड़भाड़ से दूर सुकून चाहने वालों की पहली पसंद होता है। महाराजा पटियाला की इस पूर्व ग्रीष्मकालीन राजधानी का इतिहास जितना समृद्ध है, इसकी प्राकृतिक सुंदरता उतनी ही जादुई है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि chail केवल ‘चैल पैलेस’ और ‘दुनिया के  सबसे ऊंचे क्रिकेट ग्राउंड’ तक ही सीमित नहीं है?

इस ब्लॉग में हम आपको चैल के उन 10 छिपे हुए स्थानों की सैर पर ले जाएंगे, जिनके बारे में बहुत कम पर्यटक जानते हैं। यदि आप प्रकृति प्रेमी या एडवेंचर के शौकीन हैं, तो यह सूची आपके लिए है।

  1. खारीयौन चीयर तीतर प्रजनन केंद्र, Chail (Cheer Pheasant Conservation Breeding Centre, Chail)

चैल वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित, खारीयौन में दुनिया का इकलौता ‘चीयर तीतर’ प्रजनन केंद्र है। यह लुप्तप्राय पक्षी (चीयर फिजेंट) आईयूसीएन (IUCN) की ‘वल्नरेबल’ श्रेणी में आता है।

  • क्यों खास है? यहां इन पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास जैसा वातावरण दिया जाता है ताकि उन्हें फिर से जंगलों में छोड़ा जा सके।
  • कैसे पहुंचें? यह चैल ब्लॉक ऑफिस से लगभग 7 किमी की दूरी पर स्थित है। यह उन लोगों के लिए एक बेहतरीन जगह है जो वन्यजीव संरक्षण और दुर्लभ पक्षियों में रुचि रखते हैं।

Cheer Pheasant Conservation Breeding Centre, Chail

  1. महोग गांव: एशिया का फ्लोरीकल्चर हब, Chail (Mahog Village, Chail)

चैल के पास स्थित महोग गांव को एशिया का पहला ‘फ्लोरीकल्चर विलेज’ (फूलों की खेती वाला गांव) होने का गौरव प्राप्त है।

  • क्यों खास है? यहां के ग्रीनहाउस और खुले खेतों में उगने वाले कार्नेशन और अन्य रंग-बिरंगे फूल इस गांव को एक कैनवास जैसा बना देते हैं।
  • अनुभव: यदि आप बागवानी और खेती की नई तकनीकों को करीब से देखना चाहते हैं, तो महोग की यात्रा आपके लिए एक ताज़ा अनुभव होगी।
  1. स्टोन कुंभ’ – प्राचीन शिव मंदिर (Stone Kumbd Shiv Mandir, chail)

चैल के घने जंगलों के बीच एक छिपी हुई पहाड़ी की चोटी पर स्टोन कुंभ नामक शिव मंदिर स्थित है।

  • क्यों खास है? स्थानीय लोग और गिने-चुने ट्रेकर्स ही इस जगह तक पहुंचते हैं। टैक्सी चालकों और स्थानीय लोगों के अनुसार, यह जंगल के काफी ऊपर स्थित है और यहां की शांति और शिव जी की मूर्ति आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है।
  • ट्रेक: यहां तक पहुंचने के लिए आपको जंगल के रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है, जो अपने आप में एक रोमांचक अनुभव है।
  1. रानीताल से स्नो व्यू ट्रेक, Chail (Ranital to Snow View Trek, Chail)

चैल अभयारण्य के भीतर रानीताल से स्नो व्यू तक का लगभग 5.4 किमी का ट्रेक मार्ग है।

  • क्यों खास है? अधिकांश पर्यटक मुख्य सड़कों पर ही रुक जाते हैं, लेकिन यह ट्रेक आपको देवदार और ओक के उन घने जंगलों के बीच ले जाता है जहां वन्यजीवों को देखने की संभावना सबसे अधिक होती है।
  • नज़ारा: जैसा कि नाम से पता चलता है, इस रास्ते के अंत में आपको हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों का शानदार नज़ारा देखने को मिलता है।
  1. अश्विनी नदी कैंपसाइट (Ashwini River Campsite, Chail)

अगर आप होटल के कमरों के बजाय तारों की छांव में सोना चाहते हैं, तो गुथान गांव (Guthan Village) के पास अश्विनी नदी का तट एक आदर्श ‘कार-कैंपिंग’ स्थल है।

  • क्यों खास है? यह एक एकांत कैंपिंग स्थल है जहां आप अपनी गाड़ी सीधे नदी के किनारे तक ले जा सकते हैं।
  • सावधानी: हालांकि यह स्थान बहुत सुंदर है, लेकिन मानसून के दौरान यहां जाने से बचना चाहिए। कैंपिंग के लिए अप्रैल से अक्टूबर का समय सबसे अच्छा माना जाता है।

chail, solan

  1. जज्जा और गौरा रिज वॉक (Jhajja & Gaura Ridge Walks, Chail)

काली टिब्बा मंदिर के आसपास से शुरू होने वाले जज्जा और गौरा के रिज वॉक आपको चैल की उन पहाड़ियों पर ले जाते हैं जो नक्शे पर कम ही नज़र आती हैं।

  • क्यों खास है? ये रास्ते छोटे-छोटे गांवों और चीड़ के जंगलों से होकर गुजरते हैं, जहां से चैल घाटी का 360-डिग्री नज़ारा दिखता है।
  • अनुभव: यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो लंबी दूरी के ट्रेक के बजाय पहाड़ियों की ढलानों पर इत्मीनान से टहलना पसंद करते हैं।

  1. मोहन शक्ति नेशनल हेरिटेज पार्क (Mohan Shakti National Heritage Park,Chail)

चैल से लगभग 15-20 किमी की दूरी पर अश्विनी खड्ड के पास स्थित यह पार्क भारतीय संस्कृति और वैदिक विज्ञान का एक अद्भुत केंद्र है।

  • क्यों खास है? यहां संगमरमर की बनी देवी-देवताओं की भव्य मूर्तियां और महाभारत काल की घटनाओं को दर्शाती कलाकृतियां हैं।
  • अद्भुत कला: यह पार्क पहाड़ियों को काटकर बनाया गया है और इसकी नक्काशी देखने लायक है। हालांकि यह सोलन के करीब है, लेकिन चैल आने वाले पर्यटकों के लिए यह एक अनिवार्य ‘साइड ट्रिप’ होनी चाहिए।
  1. कैंथ कंडी से कानो ट्रेक (Kainth Kandi to Kano Trek, Chail)

प्रकृति प्रेमियों के लिए एक और गुप्त रास्ता कैंथ कंडी से कानो तक का 2 किमी का ट्रेक है。

  • क्यों खास है? यह रास्ता ऊंचे देवदार के पेड़ों और विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों से भरा है।
  • वन्यजीव: यदि आप सुबह जल्दी या शाम के समय यहां टहलते हैं, तो आपको ‘हिमालयन गोराल’ या ‘बार्किंग डियर’ देखने को मिल सकते हैं।
  1. चोरघाटी से स्नो व्यू ट्रेल (Chorghatti to Snow View Trail, Chail)

यह लगभग 4 किमी का एक ‘सॉफ्ट’ नेचर ट्रेल है।

  • क्यों खास है? चोरघाटी क्षेत्र अपनी शांत वादियों के लिए जाना जाता है। यहां की पगडंडियां आपको उन जगहों पर ले जाती हैं जहां पक्षियों की चहचहाहट के अलावा और कोई शोर नहीं होता।
  • बर्ड वाचिंग: पक्षी प्रेमियों के लिए यह जन्नत है, जहां आप हिमालयन वुडपेकर और वर्डीटर फ्लाईकैचर जैसे पक्षी देख सकते हैं।
  1. ब्लॉसम बीट और नेचर ट्रेल (Blossom Beat & Nature Trail, chail)

चैल वन्यजीव अभयारण्य का ब्लॉसम बीट क्षेत्र अपनी प्राकृतिक घास के मैदानों (Ghasnis) के लिए प्रसिद्ध है।

  • क्यों खास है? यहां एक नेचर ट्रेल है जो खारीयौन से काली टिब्बा तक जाता है।
  • अनुभव: इस क्षेत्र में आपको ‘वाइल्ड रोज’ और ‘रॉडोडेंड्रोन’ के फूलों की खुशबू के साथ घने ओक के जंगलों का अहसास होगा। यहाँ की घास के मैदानों में गोराल का झुंड देखना एक आम लेकिन रोमांचक अनुभव है।

यात्रा के लिए कुछ जरूरी टिप्स:

  1. सही समय: चैल घूमने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और फिर सितंबर से नवंबर तक है। मानसून में पहाड़ों पर ट्रेकिंग थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
  2. जिम्मेदार पर्यटन: चैल अभयारण्य एक ‘नो प्लास्टिक ज़ोन’ है, इसलिए अपनी यात्रा के दौरान कूड़ा न फैलाएं।
  3. तैयारी: ट्रेकिंग के लिए मजबूत जूते और परतों में कपड़े साथ रखें, क्योंकि ऊंचाई पर तापमान अचानक गिर सकता है।

चैल की ये 10 जगहें आपको न केवल प्रकृति के करीब ले जाएंगी, बल्कि आपको एक ऐसी शांति का अनुभव कराएंगी जो अक्सर लोकप्रिय पर्यटन केंद्रों में खो जाती है। अगली बार जब आप हिमाचल आएं, तो चैल के इन छिपे हुए रत्नों को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें!

 

Dr. Pardeep Kumar

Dr. Pardeep Kumar

About Author

डॉ. प्रदीप कुमार को मीडिया इंडस्ट्री में 16 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने डिजिटल मीडिया के साथ-साथ प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी सक्रिय रूप से कार्य किया है। वे एक अनुभवी पत्रकार होने के साथ-साथ शिक्षक, लेखक, फोटोग्राफर और डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर भी हैं। ग्राउंड लेवल की कहानियों को कैमरे और कलम के ज़रिए लोगों तक पहुँचाना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। उनकी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘चाय-चाय’ को इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।

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