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Udaipur- उदयपुर यात्रा – पार्ट -2 – शिल्प ग्राम, फतेह सागर झील और सज्जनगढ़ फोर्ट

by Pardeep Kumar

उदयपुर की यात्रा के पहले पार्ट में मैंने आपको उदयपुर शहर के सिटी पैलेस, सहेलियों की बाड़ी और पिछौला झील के बारे में विस्तार से बताया था। आज जुड़िये यात्रा के दूसरे दिन से….

दूसरे दिन हमारा उदयपुर के शिल्पग्राम, सज्जन गढ़ किले और फतेहसागर झील का शेड्यूल था। इसलिए सुबह नाश्ता करने के बाद हम निकल पड़े शिल्पग्राम की और।

उदयपुर का शिल्पग्राम- राजस्थानी ग्रामीण कल्चर की शानदार झांकी

उदयपुर सिटी से लगभग 6 किलोमीटर दूर शिल्पग्राम, जो एक विस्तृत परिसर में बिलकुल गाँव जैसा वातावरण विकसित करके बनाया गया जीवंत संग्रहालय जैसा है। अंदर प्रवेश करते ही आपको एक बार तो ऐसा लगेगा जैसे किसी राजस्थानी गांव में ही प्रवेश कर गए हो। शिल्पग्राम में पारम्परिक संस्कृति को दर्शाती सात झोपडियां बनाई गयी हैं, जो राजस्थान के अलावा गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र के पारंपररिक घरों और अलग-अलग आदिवासी समुदाय के प्रतिरूप को परिभाषित करती हैं। कुल मिलाकर आप जितना भी समय यहाँ गुजारोगे आपको उतना ही आनंद की अनुभूति होगी। जिस समय हमनें शिल्पग्राम में प्रवेश किया तब टिकट काउंटर पर बैठे महाशय ने बताया की दो घंटे बाद ओपन एयर थिएटर में सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू होंगे, आप वहां राजस्थानी लोक गायन और नृत्य दोनों का आनंद ले सकते हैं। तब तक आप मजे से पूरे परिसर को घूमिये, देखिये।

हमने दो घंटे में वहां बने हुए अलग-अलग तरह के झूले, शिल्प बाज़ार, मृण कला संग्रहालय, मिटटी और शिल्पकला के बेहतरीन नमूने देखे। यहाँ बनी झोपड़ियों में, आप कढ़ाई का काम, लकड़ी का काम, दर्पण और मनका काम और मिटटी के बर्तन देख सकते हैं। घोड़े व ऊँट की सवारी की भी व्यवस्था थी। देखा जाए तो पूरे शिल्प ग्राम में राजस्थानी ग्रामीण कल्चर की शानदार झांकी देखने को मिली। बाजार से थोड़ी खरीददारी की और चल पड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल की और।

ओपन एयर थिएटर में सामने छोटा-सा मंच बना हुआ था जिसमें लोक नृत्यों का रंगा-रंग कार्यक्रम चल रहा था। लगभग एक घंटा हमने जम कर नृत्य और गायन का आनंद लिया। वहां जितनी भी देर रहे ऐसा लगा जैसे थकान को कहीं पीछे ही छोड़ आये हो।

आप राजस्थान के किसी भी पर्यटन स्थल पर चले जाएँ वहां आपको राजस्थानी कल्चर के लिए मशहूर चौखी ढाणी मिल ही जाएँगी लेकिन उदयपुर का ये शिल्पग्राम अपनी संजीदगी और अरावली की मनोहर घाटियों के कारण उन सबमें बहुत अलग है। (Udaipur- Shilpgram)

हमें शिल्पग्राम में दो बज गए थे। वहां से निकल कर सबसे पहले लंच किया और वहीँ से चल पड़े अगले पड़ाव की और शहर से करीब 8 किलोमीटर दूर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित सज्जनगढ़ का किला देखने जिसे मानसून पैलेस भी कहते हैं।

सज्जनगढ़ का किला- मानसून पैलेस

ये किला काफी ऊँचाई पर है, उदयपुर सिटी से भी आप इस किले को आसानी से देख सकते हैं। पहाड़ी पर चढ़ते हुए दोनों ओर घने-गहरे जंगल है जिसमें कई बार जंगली जानवर भी दिखाई देते हैं। बरसात के मौसम में बादलों को देखने के लिए मेवाड़ के महाराणा सज्जनसिंह ने यह महल बनवाया था। यह सफ़ेद संगमरमर से बनी सुन्दर इमारत है जो कि उनकी मृत्यु के बाद महाराणा फतहसिंह द्वारा पूरी कराई गयी। ऊपर किले के बिलकुल साथ लगते परिसर में एक शानदार कैफ़े है जहाँ आप कॉफी और स्नैक्स का आनंद ले सकते हैं। यहाँ से सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए पर्यटक शाम ढ़लने का इंतज़ार करते हैं। क्योंकि हमें इसके बाद फ़तेह सागर झील जाना था इसलिए हम तक़रीबन पांच बजे वहां से निकल कर फ़तेह सागर झील पहुंचे।

Udaipur

फ़तेह सागर झील

क्योंकि फ़तेह सागर झील घूमने और देखने का सबसे उपयुक्त समय शाम का ही रहता है। फतह सागर झील का पुनर्निर्माण महाराणा फतह सिंह द्वारा कराया गया था। यह पिछोला झील से जुडी हुई है और जिसके जल प्रवाह को रोकने के लिए एक छोटा-सा बाँध भी बनाया गया है। हमने वहां जाकर सबसे पहले साइकिल किराये पर ली और चल पड़े एक लम्बी राइडिंग पर बिलकुल झील के किनारे-किनारे। हमारी लगभग तीन किलोमीटर राइडिंग खत्म हुई झील के एक कोने पर बने उस छोटे से बांध पर जाकर, उस जगह से दूर-दूर तक फैली ये झील बेहद शानदार लग रही थी। एक खास बात जो मैंने नोट की वो ये कि फ़तेह सागर झील के आसपास रहने वाले बहुत से लोग शाम की वॉक के लिए यहाँ रोजाना आते हैं। जितनी चहल-पहल सैलानियों की थी, उतनी ही वहां रोजाना वॉक पर आने वालों की भी थी।

जैसे-जैसे शाम गहरा रही थी झील की ख़ूबसूरती बढ़ती ही जा रही थी। झील के किनारे आपको बहुत सारे चाय, मैग्गी और समोसे वाले मिल जायेंगे। हमने साइकिलिंग करने के बाद वहीँ झील के किनारे चाय और मैगी का आनंद लिया। यहाँ सूर्यास्त के समय नीले आकाश में आपको बहुत सारे पक्षी भी उड़ते दिखेंगे।

ऐसे शानदार दृश्य देखकर आप यहां फोटोग्राफी से अपने आपको रोक ही नहीं पाओगे। एक बात और फतेह सागर झील में बोटिंग करे बिना आपकी यहां की यात्रा पूरी नहीं हो सकती, इसलिए अगर आप इस झील को घूमने के लिए आ रहे हैं तो बोटिंग करते हुए चले जाईये झील के बीचों-बीच बने शानदार उद्यान में। जहाँ सूर्यास्त के समय जाकर आपको ऐसा लगेगा जैसे जन्नत यहीं हैं, यहीं हैं और यहीं हैं। झील के मध्य एक टापू पर बना यह उद्यान अपने शांत वातावरण से यहां आने वाले पर्यटकों को एक अद्भुद शांति का एहसास कराता है। आप जब भी किसी यात्रा पर होते हैं तो यकीनन ऐसी शांति और प्राकृतिक सुंदरता आपकी सारी थकान पल भर में मिटा देती है। यहाँ आकर पहली बार महसूस हुआ क्यों दुनिया भर के शायर अपनी महबूबा की आँखों की ख़ूबसूरती की तुलना झील से करते हैं। सच में ऐसे ही थोड़े उदयपुर को देश के सबसे रोमांटिक शहरों में शुमार किया जाता है। फतेह सागर झील के ऐसे मनमोहक दृश्य आपको लम्बें समय तक अनायास ही याद रहते हैं।

क्यों जाएँ उदयपुर? Five Reasons to Visit Udaipur–

1.उदयपुर के शिल्पग्राम में आप पारम्परिक खरीददारी के अलावा राजस्थानी लोक गायन और नृत्य दोनों का आनंद ले सकते हैं।
2.उदयपुर झीलों का शहर है एक से बढ़कर एक सुन्दर झील आपको यहाँ दिखाई देगी।
3.सज्जनगढ़ फोर्ट उदयपुर की एक बेहद खूबसूरत जगह है जहाँ से आप सूर्यास्त का अद्भुत नज़ारा देख सकते हैं।
4.फतेहसागर झील के मध्य एक टापू पर बना उद्यान अपने शांत वातावरण से यहां आने वाले पर्यटकों को एक अद्भुद शांति का एहसास कराता है।
5.क्वालिटी टाइम बिताने के लिए उदयपुर एक बेहतरीन जगह है।

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