Bali के 5 प्रसिद्ध मंदिर: इतिहास, दर्शन और जरूरी नियम
माउंट आगुंग (Mount Agung) ज्वालामुखी की ढलानों पर बना पुरा बेसाकिह Bali का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण मंदिर परिसर माना जाता है। इसे अक्सर यहां का मदर टेम्पल भी कहा जाता है। यह कोई एक मंदिर नहीं, बल्कि कई मंदिरों का विशाल समूह है। यहां अलग-अलग पूजा स्थल बने हुए हैं और पूरा परिसर पहाड़ की ढलान पर सीढ़ीनुमा तरीके से फैला हुआ है।
इस मंदिर का मुख्य हिस्सा पुरा पेनातारान आगुंग (Pura Penataran Agung) है। यहां पहुंचने पर आपको ऊंची सीढ़ियां, पारंपरिक बालिनी द्वार, पत्थरों पर की गई नक्काशी और आसपास फैली पहाड़ियों के शानदार नज़ारे दिखाई देते हैं। साफ मौसम में यहां से माउंट आगुंग का दृश्य भी बेहद खूबसूरत लगता है।
पुरा बेसाकिह का महत्व सिर्फ इसकी बनावट तक सीमित नहीं है। यह Bali के हिंदू समुदाय के लिए बेहद पवित्र जगह है। यहां साल भर कई धार्मिक आयोजन होते हैं और खास त्योहारों के समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। 1963 में माउंट आगुंग में हुए बड़े ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान इस इलाके को भी खतरा पहुंचा था। मंदिर परिसर के पास लावा पहुंचने और मुख्य मंदिर के बच जाने की घटना को स्थानीय लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर देखते हैं। इस घटना को बताते समय यह समझना जरूरी है कि इसे स्थानीय आस्था के रूप में ही देखा जाए।
अगर आप अपनी पहली Bali यात्रा में इस मंदिर को देखने जा रहे हैं, तो यहां घूमने के लिए पर्याप्त समय रखें। यह बड़ा परिसर है और इसे जल्दबाजी में देखना ठीक नहीं होगा। आधिकारिक पर्यटन जानकारी के अनुसार यहां विदेशी पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क 1,50,000 इंडोनेशियाई रुपिया और घरेलू पर्यटकों के लिए 80,000 रुपिया बताया गया है। टिकट में स्थानीय गाइड, सारोंग और परिसर में एक बार इलेक्ट्रिक वाहन की सुविधा शामिल है। शुल्क बदल सकते हैं, इसलिए जाने से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर देख लें।
ताना लोत (Tanah Lot) – समुद्र के बीच चट्टान पर बना मंदिर
Bali की तस्वीरों में आपने समुद्र के बीच एक बड़ी चट्टान पर बने मंदिर को जरूर देखा होगा। यह ताना लोत मंदिर है। ताबानान इलाके के बेराभान गांव में स्थित यह मंदिर Bali के सबसे लोकप्रिय दर्शनीय स्थलों में गिना जाता है। इसका नाम भी इसकी जगह को बताता है। ताना लोत का अर्थ लगभग ‘समुद्र में जमीन’ या ‘समुद्र की भूमि’ माना जाता है।
इस मंदिर की सबसे खास बात है इसका समुद्र के बीच चट्टान पर बना होना। ज्वार के समय पानी चट्टान के आसपास भर जाता है और मंदिर चारों तरफ से समुद्र से घिरा दिखाई देता है। कम ज्वार के समय पानी उतरने पर लोग चट्टान के निचले हिस्से तक पैदल पहुंच सकते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर समय मुख्य मंदिर में प्रवेश की अनुमति मिल जाती है। मंदिर का पवित्र हिस्सा पूजा के लिए सुरक्षित है और पर्यटकों को तय सीमा का ध्यान रखना चाहिए।
स्थानीय परंपरा के अनुसार इस मंदिर का संबंध 16वीं सदी के हिंदू संत डांग ह्यांग निरार्थ (Dang Hyang Nirartha) से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि Bali की यात्रा के दौरान वे इस जगह पहुंचे थे और इसकी धार्मिक महत्ता को पहचानते हुए यहां मंदिर की स्थापना से जुड़ी परंपरा शुरू हुई। यह मंदिर समुद्र से जुड़े देवता देव बारूना को समर्पित माना जाता है।
ताना लोत घूमने का सबसे लोकप्रिय समय शाम का होता है। सूर्यास्त के समय आसमान के रंग बदलते हैं और समुद्र के सामने मंदिर की परछाईं बेहद खूबसूरत दिखाई देती है। इसी वजह से शाम को यहां काफी भीड़ रहती है। अगर आप कम भीड़ में घूमना चाहते हैं, तो दिन में थोड़ा पहले पहुंच सकते हैं। सूर्यास्त के बाद भी आसपास का नज़ारा सुंदर लगता है, लेकिन मंदिर परिसर के बंद होने के समय का ध्यान रखें।
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यहां जाने से पहले समुद्र की स्थिति और ज्वार का समय देख लेना अच्छा रहेगा। चट्टानों पर पानी होने से रास्ता फिसलन भरा हो सकता है। तेज लहरों के पास जाने या चट्टानों पर चढ़ने से बचें। ताना लोत की आधिकारिक वेबसाइट पर विदेशी वयस्क पर्यटकों का टिकट 75,000 रुपिया और घरेलू वयस्कों का टिकट 30,000 रुपिया बताया गया है। पार्किंग का शुल्क अलग है और दरें बदल सकती हैं।
उलुवातु मंदिर (Pura Luhur Uluwatu) – ऊंची चट्टान और केचक डांस का खूबसूरत मेल
Bali के दक्षिणी हिस्से में स्थित उलुवातु मंदिर उन जगहों में से है जहां समुद्र और धार्मिक वास्तुकला एक साथ देखने को मिलते हैं। यह मंदिर पेकातु इलाके में समुद्र से करीब 70 मीटर ऊंची चट्टान के किनारे बना है। नीचे हिंद महासागर की लहरें चट्टानों से टकराती हैं और ऊपर मंदिर का पारंपरिक परिसर दिखाई देता है। यहां से मिलने वाला समुद्र का नज़ारा इसे Bali के सबसे यादगार स्थानों में शामिल करता है।
उलुवातु मंदिर Bali के नौ दिशात्मक मंदिरों में से एक माना जाता है। स्थानीय धार्मिक परंपरा में ऐसे मंदिर द्वीप की अलग-अलग दिशाओं और पवित्र सीमाओं की रक्षा से जुड़े हैं। इस मंदिर का संबंध भगवान रुद्र से बताया जाता है। इसकी स्थापना और विकास को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक और धार्मिक परंपराएं मिलती हैं। इसलिए यहां की यात्रा के दौरान मंदिर की आस्था और स्थानीय मान्यताओं को समझना भी अच्छा अनुभव हो सकता है।
उलुवातु मंदिर का एक बड़ा आकर्षण यहां होने वाला केचक डांस (Kecak Dance) है। यह पारंपरिक प्रस्तुति रामायण की कहानी से जुड़ी होती है। इसमें कलाकारों का समूह एक खास लय में आवाजें निकालता है और नृत्य के जरिए कहानी को आगे बढ़ाता है। समुद्र के सामने बने खुले मंच पर सूर्यास्त के समय यह प्रस्तुति देखने का अनुभव खास बन जाता है। इंडोनेशिया के आधिकारिक पर्यटन पोर्टल पर यहां के केचक डांस का समय शाम 6 बजे बताया गया है। अच्छी जगह पाने और सूर्यास्त देखने के लिए शाम 5 बजे से पहले पहुंचना बेहतर रहता है। कार्यक्रम का समय और टिकट उपलब्धता बदल सकती है।
यहां एक बात का खास ध्यान रखें। मंदिर परिसर में बंदर काफी संख्या में रहते हैं। वे चश्मा, टोपी, मोबाइल और खाने-पीने का सामान उठा सकते हैं। इसलिए अपने सामान को अच्छी तरह संभालकर रखें और बंदरों को खाना देने की कोशिश न करें। समुद्र की तरफ बनी ऊंची चट्टानों के पास भी सावधानी रखें। अगर आप केचक डांस देख रहे हैं, तो कलाकारों और आसपास बैठे दर्शकों का ध्यान रखते हुए ही फोटो लें। धार्मिक कार्यक्रम के दौरान फ्लैश का इस्तेमाल न करें और आयोजकों के निर्देशों का पालन करें।
पुरा लेमपुयांग (Pura Lempuyang) – मशहूर ‘गेट ऑफ हेवन’
Bali के पूर्वी हिस्से में कारांगासेम इलाके में स्थित पुरा लेमपुयांग अपने खूबसूरत द्वार और माउंट आगुंग के नज़ारे के लिए मशहूर है। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली इसकी तस्वीरों में अक्सर एक बड़ा दो हिस्सों में बंटा हुआ पारंपरिक द्वार नजर आता है। इसे देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक यहां पहुंचते हैं। इसी द्वार को लोकप्रिय रूप से ‘गेट ऑफ हेवन’ कहा जाता है।
यहां एक बात समझना जरूरी है कि लेमपुयांग सिर्फ फोटो खिंचवाने वाला एक द्वार नहीं है। यह कई मंदिरों का धार्मिक परिसर है। इसमें अलग-अलग ऊंचाइयों पर मंदिर बने हैं और सबसे ऊपर स्थित पुरा लेमपुयांग लुहुर तक पहुंचने के लिए लंबी चढ़ाई और सीढ़ियां तय करनी पड़ती हैं। आधिकारिक पर्यटन जानकारी के अनुसार रास्ते में 1,700 से अधिक सीढ़ियां हैं। इसलिए अगर आप ऊपर तक जाने का इरादा रखते हैं, तो अपनी शारीरिक क्षमता और मौसम को ध्यान में रखकर ही योजना बनाएं।
यहां का सबसे प्रसिद्ध हिस्सा पुरा पेनातारान आगुंग लेमपुयांग (Pura Penataran Agung Lempuyang) है। इसके सफेद विभाजित द्वार के बीच से माउंट आगुंग का दृश्य दिखाई देता है। साफ मौसम में पहाड़ और मंदिर का यह मेल बेहद खूबसूरत लगता है। हालांकि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तस्वीरों के लिए कई बार लंबी लाइन लगती है। इसलिए अगर आप यहां जाना चाहते हैं, तो सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहेगा।
आधिकारिक पर्यटन पोर्टल के मुताबिक पर्यटकों के लिए सामान्य प्रवेश समय सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक है। विदेशी पर्यटकों के लिए टिकट 1,00,000 रुपिया और घरेलू पर्यटकों के लिए 50,000 रुपिया बताया गया है। पार्किंग से मुख्य प्रवेश तक जाने के लिए शटल की सुविधा भी मिल सकती है, जिसका शुल्क अलग हो सकता है। टिकट और समय में बदलाव संभव है।
लेमपुयांग में घूमते समय मंदिर के नियमों का पालन करें। पूजा चल रही हो तो फोटो लेने से बचें और वेदी या धार्मिक संरचनाओं पर चढ़कर तस्वीरें बिल्कुल न खिंचवाएं। अगर आप सिर्फ प्रसिद्ध द्वार की तस्वीर लेने के बजाय मंदिर के बाकी हिस्सों को भी देखेंगे, तो इस जगह की धार्मिक और सांस्कृतिक अहमियत को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।
तिरता एम्पुल (Tirta Empul) – पवित्र जल और मेलुकत की परंपरा
Bali के तांपाकसिरिंग इलाके में स्थित तिरता एम्पुल मंदिर अपने प्राकृतिक जलस्रोत और पवित्र जलकुंडों के लिए जाना जाता है। यह मंदिर Bali के उन धार्मिक स्थलों में से है जहां आज भी स्थानीय लोग पूजा और पारंपरिक अनुष्ठानों के लिए आते हैं। यहां का वातावरण बाकी मंदिरों से थोड़ा अलग महसूस होता है। परिसर में पत्थर के बने जलकुंड, पानी के फव्वारे और पूजा स्थल दिखाई देते हैं।
तिरता एम्पुल का सबसे खास आकर्षण मेलुकत (Melukat) नाम का शुद्धि अनुष्ठान है। इसमें लोग पवित्र जल के नीचे स्नान करके धार्मिक मान्यता के अनुसार मन और आत्मा की शुद्धि की कामना करते हैं। इस प्रक्रिया में लोग जलकुंड के फव्वारों के नीचे बारी-बारी से जाते हैं और सिर व शरीर पर पानी डालते हैं। यह स्थानीय धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, इसलिए इसे सिर्फ पर्यटकों के लिए बनाया गया कोई मनोरंजन कार्यक्रम नहीं समझना चाहिए।
इस मंदिर के जलकुंड में करीब 30 जलधाराएं हैं। हर फव्वारे का अपना धार्मिक महत्व बताया जाता है। कुछ फव्वारे विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सुरक्षित रखे जाते हैं, इसलिए सभी फव्वारों के नीचे स्नान करना सही नहीं है। अगर आप मेलुकत में शामिल होना चाहते हैं, तो मंदिर के कर्मचारियों या स्थानीय गाइड से पहले पूरी प्रक्रिया समझ लें।
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मेलुकत में शामिल होने के लिए आपको बदलने वाले कपड़े और तौलिया साथ रखना चाहिए, क्योंकि स्नान के दौरान कपड़े भीग सकते हैं। मंदिर में प्रवेश के लिए सारोंग और कमर पर बांधा जाने वाला कपड़ा पहनना जरूरी होता है। जलकुंड में इस्तेमाल होने वाले कपड़े और सामान्य मंदिर भ्रमण के कपड़ों को लेकर वहां के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए दो सारोंग की जरूरत है या नहीं, यह पहले से तय मानने के बजाय प्रवेश द्वार पर जानकारी ले लें।
तिरता एम्पुल सुबह के समय घूमने के लिए अच्छा माना जाता है। सुबह करीब 8 से 10 बजे के बीच पहुंचने पर कई बार भीड़ कम मिल सकती है। हालांकि पूर्णिमा, अमावस्या और खास धार्मिक अवसरों पर यहां स्थानीय श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। अगर आप अनुष्ठान में हिस्सा नहीं लेना चाहते, तब भी आप परिसर की बनावट, जलकुंड और धार्मिक गतिविधियों को सम्मान के साथ देख सकते हैं।
Bali के मंदिरों में घूमने का सही समय क्या है?
Bali के मंदिरों में घूमने के लिए सुबह का समय अक्सर बेहतर रहता है। सुबह मौसम अपेक्षाकृत सुहावना होता है और कई जगहों पर पर्यटकों की भीड़ भी कम रहती है। हालांकि हर मंदिर का अनुभव अलग है, इसलिए सभी जगहों के लिए एक ही समय तय करना सही नहीं होगा।
पुरा बेसाकिह के लिए सुबह का समय अच्छा है, क्योंकि परिसर बड़ा है और यहां घूमने में समय लगता है। साफ मौसम में पहाड़ों का नज़ारा भी बेहतर दिखाई दे सकता है। ताना लोत के लिए शाम का समय लोकप्रिय है, क्योंकि यहां सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए लोग खास तौर पर आते हैं। अगर आप भीड़ से बचना चाहते हैं, तो सूर्यास्त से काफी पहले पहुंचें।
उलुवातु मंदिर में केचक डांस और सूर्यास्त दोनों का अनुभव लेना है, तो शाम को समय से पहुंचना जरूरी है। वहीं लेमपुयांग में प्रसिद्ध द्वार की तस्वीर के लिए सुबह जल्दी पहुंचने से लंबी कतार से बचने में मदद मिल सकती है। तिरता एम्पुल में अगर आप मेलुकत अनुष्ठान करना चाहते हैं, तो सुबह पहुंचकर वहां की प्रक्रिया और भीड़ के बारे में जानकारी लें।
मंदिरों के खुलने और बंद होने का समय धार्मिक आयोजनों या स्थानीय परिस्थितियों के कारण बदल सकता है। इसलिए होटल से निकलने से पहले मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय गाइड से समय की पुष्टि जरूर कर लें।
Bali के मंदिरों में जाने से पहले जान लें ये जरूरी नियम
Bali के मंदिरों में घूमते समय सबसे जरूरी बात है कि आप वहां की धार्मिक परंपराओं का सम्मान करें। मार्च 2025 में Bali के गवर्नर वायान कोस्टर ने विदेशी पर्यटकों के लिए सर्कुलर नंबर 7 जारी किया था। इसमें मंदिरों और पवित्र स्थलों के नियमों के साथ पर्यटकों के व्यवहार को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य स्थानीय संस्कृति और धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना है।
1. कपड़ों का रखें खास ध्यान
Bali के मंदिरों में छोटे कपड़े पहनकर जाना ठीक नहीं माना जाता। पुरुषों और महिलाओं दोनों को पैरों को ढकने वाला सारोंग पहनना पड़ सकता है। कमर पर सेलेंडांग (Selendang) यानी कपड़े की पट्टी भी बांधी जाती है। कई मंदिरों के प्रवेश द्वार पर सारोंग उपलब्ध कराया जाता है या किराये पर मिल जाता है। कंधे ढकने वाले साधारण और आरामदायक कपड़े पहनना बेहतर है। मंदिर के नियम के अनुसार कपड़े पहनें और जरूरत पड़ने पर वहां उपलब्ध पारंपरिक वस्त्र इस्तेमाल करें।
2. पूजा के समय शांति बनाए रखें
मंदिर में पूजा या कोई धार्मिक आयोजन चल रहा हो, तो तेज आवाज में बात न करें। श्रद्धालुओं के रास्ते में खड़े न हों और पूजा के बीच से गुजरने से बचें। अगर किसी जगह प्रवेश रोकने के लिए रस्सी या संकेत लगा हो, तो उसे पार न करें। मंदिर में घूमते समय यह याद रखें कि वहां आने वाले स्थानीय लोगों के लिए यह रोजमर्रा की आस्था का हिस्सा है।
3. मंदिर की वेदियों और मूर्तियों पर न चढ़ें
कई पर्यटक अच्छी तस्वीर लेने के लिए मंदिर की दीवारों, मूर्तियों या वेदियों पर चढ़ जाते हैं। ऐसा बिल्कुल न करें। पवित्र पेड़ों और धार्मिक प्रतीकों पर चढ़ना भी नियमों के खिलाफ है। तस्वीर लेने के लिए केवल उन्हीं जगहों का इस्तेमाल करें जहां इसकी अनुमति हो। मंदिर की सुंदरता को कैमरे में कैद करना ठीक है, लेकिन इसके लिए धार्मिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचाना सही नहीं है।
4. केनांग सारी और पूजा की चीजों को न छुएं
मंदिरों के बाहर और रास्तों पर रखी फूलों की छोटी टोकरियां स्थानीय लोगों की पूजा का हिस्सा होती हैं। इन्हें केनांग सारी कहा जाता है। चलते समय इनके ऊपर पैर न रखें। अगर रास्ते में ऐसी कोई भेंट रखी हो, तो उसके आसपास से निकलें। पूजा में इस्तेमाल होने वाली चीजों को उठाने या अपनी तस्वीर के लिए जगह बदलने से बचें।
5. मासिक धर्म के नियम को समझें
Bali की धार्मिक परंपराओं में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के मंदिर के पवित्र हिस्सों में प्रवेश पर रोक है। 2025 के सरकारी दिशा-निर्देशों में भी इसका उल्लेख किया गया है। अलग-अलग मंदिरों में नियम और प्रवेश की सीमा को लेकर जानकारी अलग हो सकती है, इसलिए वहां लगे निर्देशों को ध्यान से पढ़ें। किसी भी स्थिति में कर्मचारियों से बहस करने के बजाय स्थानीय परंपरा का सम्मान करें।
6. फोटो और वीडियो बनाने से पहले अनुमति लें
Bali के मंदिरों में फोटो लेना कई जगह संभव है, लेकिन हर हिस्से में इसकी अनुमति नहीं होती। पूजा कर रहे लोगों, पुजारियों और धार्मिक अनुष्ठानों की तस्वीर लेने से पहले अनुमति जरूर लें। पवित्र हिस्सों में कैमरा ले जाने या वीडियो बनाने पर रोक हो सकती है। ड्रोन उड़ाने के लिए भी संबंधित प्रबंधन और अधिकारियों की अनुमति जरूरी हो सकती है। बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने या व्यावसायिक शूट करने से परेशानी हो सकती है। ताना लोत का प्रबंधन भी फोटो सेशन, ड्रोन और व्यावसायिक शूट के लिए पहले जानकारी देने को कहता है।
7. स्थानीय नियमों को हल्के में न लें
Bali सरकार के दिशा-निर्देशों में पवित्र स्थलों का अपमान करने, अनुचित व्यवहार करने और स्थानीय परंपराओं की अनदेखी करने पर कार्रवाई का प्रावधान है। गंभीर मामलों में स्थानीय कानून के तहत कानूनी कार्रवाई और विदेशी पर्यटकों के लिए आव्रजन संबंधी कार्रवाई भी हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि छोटी-सी गलती पर हर पर्यटक को देश से निकाल दिया जाएगा। लेकिन नियमों को जानबूझकर तोड़ना या धार्मिक स्थल पर अपमानजनक व्यवहार करना गंभीर मामला बन सकता है।
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पहली Bali यात्रा को बेहतर बनाने के लिए कुछ और जरूरी बातें
Bali के मंदिर एक-दूसरे से काफी दूरी पर हैं। इसलिए एक ही दिन में पांचों मंदिर देखने की योजना बनाने के बजाय आसपास के इलाकों के हिसाब से यात्रा तय करें। उदाहरण के लिए तिरता एम्पुल को उबुद और आसपास के दूसरे दर्शनीय स्थलों के साथ देखा जा सकता है। ताना लोत को पश्चिमी Bali की यात्रा में शामिल किया जा सकता है, जबकि उलुवातु मंदिर दक्षिणी हिस्से में घूमने के लिए अच्छा विकल्प है।
मंदिरों में घूमने के लिए आरामदायक जूते पहनें, पानी की बोतल साथ रखें और धूप से बचने के लिए टोपी या छाता रख सकते हैं। पहाड़ी रास्तों और सीढ़ियों वाले मंदिरों में बच्चों और बुजुर्गों के साथ अतिरिक्त सावधानी रखें। अगर आप किसी धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो पहले उसकी प्रक्रिया और नियम समझें। केवल तस्वीर लेने के लिए किसी परंपरा में शामिल होना जरूरी नहीं है।
Bali की यात्रा का असली आनंद तभी आएगा जब आप यहां के प्राकृतिक नज़ारों के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति को भी समझेंगे। यहां के मंदिर आपको सिर्फ सुंदर तस्वीरें नहीं देते, बल्कि यह भी बताते हैं कि किसी जगह की पहचान उसकी इमारतों से आगे बढ़कर वहां के लोगों की आस्था और जीवनशैली से बनती है।
Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव
- Bali के मंदिरों में जाने से पहले सारोंग, कमरबंद और कपड़ों से जुड़े नियम जरूर जांच लें।
- सुबह जल्दी पहुंचें, ताकि मंदिरों को आराम से देख सकें और भीड़ से भी बच सकें।
- केनांग सारी यानी पूजा की छोटी टोकरियों पर पैर न रखें और धार्मिक चीजों को न छुएं।
- मंदिर में फोटो या वीडियो बनाने से पहले वहां के कर्मचारियों से अनुमति जरूर लें।
- हर मंदिर के स्थानीय नियमों का सम्मान करें और पूजा के समय शांति बनाए रखें।