Lingaraj Temple: History, Darshan Timings & Travel Guide
ओडिशा घूमने का प्लान बनाते समय ज्यादातर लोगों के दिमाग में सबसे पहले जगन्नाथ पुरी और कोणार्क सूर्य मंदिर का नाम आता है। लेकिन अगर आप ओडिशा की पुरानी इमारतों, मंदिरों और इतिहास को करीब से देखना चाहते हैं, तो भुवनेश्वर को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें। यहां की गलियों में चलते हुए आपको कई ऐसे मंदिर मिलेंगे, जिनकी बनावट और नक्काशी देखकर आप कुछ देर रुककर उन्हें निहारने लगेंगे।
इन्हीं मंदिरों में एक खास नाम है Lingaraj Temple, जो भुवनेश्वर के पुराने हिस्से में स्थित है। करीब 1000 साल पुराना यह मंदिर अपनी ऊंची पत्थर की इमारत, खूबसूरत नक्काशी और भगवान शिव की अनोखी पूजा परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था का बड़ा केंद्र है, वहीं इतिहास और वास्तुकला में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए भी यह जगह काफी खास है।
भुवनेश्वर का सबसे खास मंदिर कौन-सा है?
भुवनेश्वर को अक्सर भारत का मंदिरों का शहर कहा जाता है। यहां पुराने और नए मिलाकर कई मंदिर हैं, लेकिन Lingaraj Temple को शहर के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यह मंदिर ओल्ड टाउन इलाके में स्थित है और दूर से ही इसका ऊंचा शिखर लोगों का ध्यान खींचता है।
यहां भगवान शिव को लिंगराज के रूप में पूजा जाता है। मंदिर का संबंध सिर्फ धार्मिक मान्यताओं से ही नहीं, बल्कि ओडिशा के इतिहास और स्थानीय संस्कृति से भी जुड़ा है। सदियों से यहां पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजन होते आ रहे हैं।
भुवनेश्वर, पुरी और कोणार्क को मिलाकर ओडिशा का गोल्डन ट्रायंगल भी कहा जाता है। ऐसे में अगर आप पुरी के जगन्नाथ मंदिर और कोणार्क सूर्य मंदिर घूमने जा रहे हैं, तो भुवनेश्वर के Lingaraj Temple को भी अपने यात्रा प्लान में शामिल कर सकते हैं। इससे आपको ओडिशा की मंदिर वास्तुकला के अलग-अलग रूप देखने का मौका मिलेगा।
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Lingaraj Temple का इतिहास कितना पुराना है?
Lingaraj Temple का मौजूदा भव्य रूप मुख्य रूप से 11वीं शताब्दी से जुड़ा है। इसके निर्माण का श्रेय सोमवंशी राजवंश के राजा जजाति केशरी को दिया जाता है। हालांकि, इस जगह पर शिव की पूजा इससे भी पहले होती रही हो सकती है। कुछ ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भों में यहां 7वीं शताब्दी से पूजा होने की मान्यता मिलती है।
इसलिए मंदिर का इतिहास समझते समय दो बातों को अलग रखना जरूरी है। एक है इस जगह पर पूजा की प्राचीन परंपरा और दूसरी है आज दिखाई देने वाली विशाल मंदिर संरचना, जो मध्यकालीन ओडिशा की स्थापत्य कला का शानदार उदाहरण है।
समय के साथ मंदिर परिसर में कई छोटे मंदिर और धार्मिक संरचनाएं भी विकसित हुईं। आज यहां पहुंचने पर आपको सिर्फ एक मुख्य मंदिर नहीं, बल्कि कई देवी-देवताओं से जुड़े छोटे मंदिर भी दिखाई देते हैं।
Lingaraj Temple की खास बात यह है कि इतने लंबे समय के बाद भी यह केवल पुरानी इमारत बनकर नहीं रह गया। यहां आज भी नियमित धार्मिक गतिविधियां होती हैं और बड़े त्योहारों के समय श्रद्धालुओं की काफी भीड़ जुटती है।
एकाम्र क्षेत्र और बिंदु सागर से जुड़ी पौराणिक कथा
भुवनेश्वर के पुराने हिस्से को प्राचीन धार्मिक परंपराओं में एकाम्र क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। यहां के कई मंदिरों और पवित्र स्थलों का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी कथाओं से बताया जाता है।
एक प्रचलित कथा के अनुसार, इस इलाके में कभी एक विशाल आम का पेड़ था। इसी वजह से इस क्षेत्र का नाम एकाम्र क्षेत्र पड़ा। मान्यता है कि भगवान शिव को यह जगह बहुत प्रिय थी और वे यहां निवास करने लगे।
इसी क्षेत्र में बिंदु सागर नाम की पवित्र झील भी है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती की प्यास बुझाने के लिए अलग-अलग पवित्र नदियों के जल को यहां एकत्र किया था। इसी वजह से इस झील को धार्मिक रूप से खास माना जाता है।
Lingaraj Temple के दर्शन करने आने वाले कई श्रद्धालु बिंदु सागर भी जाते हैं। मंदिर के आसपास घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इस झील को देखने के लिए अलग से समय जरूर रखें। यहां के पुराने मंदिर, घाट और आसपास का इलाका भुवनेश्वर के ऐतिहासिक रूप को समझने में मदद करते हैं।
भगवान शिव और विष्णु के हरिहर रूप की खासियत
Lingaraj Temple की सबसे दिलचस्प धार्मिक विशेषताओं में से एक यहां भगवान हरिहर की मान्यता है। हरिहर नाम भगवान विष्णु के ‘हरि’ और भगवान शिव के ‘हर’ नाम से मिलकर बना है। यह रूप दोनों देवताओं से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का प्रतीक माना जाता है।
मंदिर में स्थापित शिवलिंग को स्वयंभू माना जाता है, यानी ऐसी धार्मिक मान्यता है कि यह प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ था। सरकारी पर्यटन जानकारी के अनुसार, शिवलिंग का व्यास करीब आठ फीट है और यह जमीन से लगभग आठ इंच ऊपर दिखाई देता है। यह विवरण इस मंदिर की विशिष्टता को और बढ़ाता है।
यहां पूजा की अपनी पारंपरिक व्यवस्था है। दिन के अलग-अलग समय पर धार्मिक अनुष्ठान और भगवान को भोग अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है। हालांकि, हर पूजा का समय एक जैसा नहीं रहता और विशेष अवसरों पर व्यवस्था में बदलाव हो सकता है।
Lingaraj Temple की यही विशेषता इसे सिर्फ देखने की जगह नहीं, बल्कि आज भी सक्रिय धार्मिक परंपराओं से जुड़ा स्थल बनाती है। यहां जाते समय मंदिर के नियमों का सम्मान करना और पूजा के दौरान शांति बनाए रखना जरूरी है।
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Lingaraj Temple की वास्तुकला इतनी खास क्यों है?
अगर आपको पुरानी इमारतों और पत्थरों पर की गई नक्काशी देखना पसंद है, तो Lingaraj Temple आपको काफी पसंद आएगा। यह कलिंग शैली की मंदिर वास्तुकला का प्रमुख उदाहरण है। मंदिर का ऊंचा शिखर, पत्थरों पर बनी आकृतियां और अलग-अलग हिस्सों की बनावट इसे भुवनेश्वर की सबसे खास ऐतिहासिक इमारतों में शामिल करती है।
मुख्य मंदिर का शिखर लगभग 180 फीट ऊंचा बताया जाता है। इसकी बनावट नीचे से ऊपर की ओर उठती हुई दिखाई देती है और इस पर कई छोटी-छोटी आकृतियां बनी हैं। दूर से देखने पर भी मंदिर का शिखर आसपास की इमारतों से अलग नजर आता है।
मंदिर की मुख्य संरचना के चार प्रमुख हिस्से माने जाते हैं:
विमान: यह मंदिर का मुख्य हिस्सा है, जहां गर्भगृह स्थित है। इसके ऊपर बना ऊंचा शिखर मंदिर की पहचान है।
जगमोहन: यह सभा मंडप है, जहां श्रद्धालु एकत्र होते हैं। इसकी बनावट मुख्य शिखर से अलग है।
नाटमंदिर: यह हिस्सा पारंपरिक रूप से धार्मिक प्रस्तुतियों और नृत्य-संगीत से जुड़ा माना जाता है।
भोग मंडप: यहां भगवान को भोग अर्पित करने से जुड़े अनुष्ठान होते हैं।
मंदिर की बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं, नर्तकियों, संगीतकारों और कई तरह की आकृतियों की बारीक नक्काशी देखने को मिलती है। इन आकृतियों को ध्यान से देखने पर अंदाजा लगता है कि उस दौर के कारीगर पत्थर पर कितनी मेहनत से काम करते थे।
Lingaraj Temple के बड़े परिसर में कई छोटे मंदिर भी हैं। उनकी बनावट और धार्मिक महत्व अलग-अलग हैं। हालांकि, परिसर के अंदर जाने और घूमने की सुविधा मंदिर के नियमों और उस समय की व्यवस्था के अनुसार ही मिलेगी।
Lingaraj Temple दर्शन टाइमिंग 2026
अगर आप मंदिर में दर्शन करना चाहते हैं, तो निकलने से पहले समय की जानकारी जरूर जांच लें। ओडिशा पर्यटन की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, मंदिर सुबह पांच बजे से रात नौ बजे तक खुलता है, लेकिन दोपहर में कुछ घंटों के लिए बंद रहता है।
सामान्य तौर पर दर्शन की योजना इस समय के हिसाब से बना सकते हैं:
सुबह: लगभग 5:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक।
दोपहर का विराम: लगभग 12:30 बजे से 3:30 बजे तक।
शाम: लगभग 3:30 बजे से रात 9:00 बजे तक।
ध्यान रखें कि अलग-अलग स्रोतों पर खुलने और बंद होने के समय में थोड़ा अंतर मिल सकता है। मंदिर में विशेष पूजा, धार्मिक आयोजन या त्योहार होने पर सामान्य समय-सारणी बदल सकती है। इसलिए यात्रा वाले दिन स्थानीय स्तर पर समय की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
आरती और पूजा का समय
मंदिर में दिनभर अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। इनमें सुबह की पूजा, भगवान को भोग अर्पित करना और शाम के अनुष्ठान शामिल हैं। लेकिन हर आरती का सटीक समय हमेशा एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है।
अगर आप किसी खास आरती में शामिल होना चाहते हैं, तो पहुंचने से पहले मंदिर प्रशासन या स्थानीय लोगों से उसकी जानकारी ले लें। केवल इंटरनेट पर दिए गए अनुमानित समय के आधार पर अपनी पूरी यात्रा तय न करें।
क्या मंदिर में प्रवेश के लिए टिकट लगता है?
सामान्य दर्शन के लिए Lingaraj Temple में प्रवेश शुल्क नहीं है। हालांकि, मंदिर के अंदर प्रवेश धार्मिक परंपराओं और वहां लागू नियमों के अनुसार होता है।
मंदिर परिसर में गैर-हिंदू पर्यटकों को प्रवेश की अनुमति नहीं है। ऐसे पर्यटक मंदिर की बाहरी वास्तुकला देखने के लिए परिसर की दीवार के पास बने निर्धारित व्यूइंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसे आम तौर पर कर्जन मंडप के नाम से जाना जाता है।
मंदिर में जाने से पहले इन नियमों का ध्यान रखें
किसी भी धार्मिक स्थल पर जाते समय वहां की परंपराओं और नियमों का ध्यान रखना जरूरी है। Lingaraj Temple में भी कुछ बातों का पहले से ध्यान रखने पर आपकी यात्रा आसान हो सकती है।
कपड़े कैसे पहनें?
मंदिर जाने के लिए साफ-सुथरे और शालीन कपड़े पहनना बेहतर रहेगा। पारंपरिक कपड़े पहनना अच्छा विकल्प है। अगर मंदिर प्रशासन की ओर से किसी खास तरह की वेशभूषा से जुड़ा निर्देश हो, तो उसका पालन करें।
मोबाइल और कैमरा ले जा सकते हैं?
मंदिर परिसर के अंदर मोबाइल फोन, कैमरे और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान पर प्रतिबंध हो सकता है। इसलिए इन्हें साथ लेकर पहुंचने से पहले मौजूदा नियम जांच लें। सामान जमा करने की सुविधा उपलब्ध है या नहीं, यह भी पहले पता कर लें। जरूरी नहीं कि हर समय सभी जगह लॉकर की सुविधा एक जैसी हो।
जूते-चप्पल कहां रखें?
मंदिर में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल उतारने होते हैं। इन्हें रखने की व्यवस्था के बारे में प्रवेश द्वार पर पूछ सकते हैं। गर्मियों में पत्थर का फर्श गर्म हो सकता है, इसलिए मौसम के हिसाब से तैयारी करें।
भीड़ से कैसे बचें?
अगर आप अपेक्षाकृत शांत समय में दर्शन करना चाहते हैं, तो सुबह जल्दी पहुंचने की कोशिश करें। सोमवार, महाशिवरात्रि और अन्य खास धार्मिक अवसरों पर भीड़ काफी बढ़ सकती है। ऐसे दिनों में दर्शन के लिए अतिरिक्त समय रखें।
महाशिवरात्रि और दूसरे त्योहारों पर मंदिर का माहौल
Lingaraj Temple में पूरे साल पूजा होती है, लेकिन कुछ त्योहारों के समय यहां का माहौल खास हो जाता है। अगर आप धार्मिक परंपराओं को करीब से देखना चाहते हैं, तो यात्रा की तारीख तय करते समय इन अवसरों की जानकारी लेना उपयोगी रहेगा।
महाशिवरात्रि: यह मंदिर के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में विशेष पूजा होती है और रात के समय शिखर पर महादीप चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन सामान्य दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ हो सकती है।
अशोकाष्टमी और रुकुणा रथ यात्रा: इस अवसर पर भगवान लिंगराज की उत्सव मूर्ति को सजे हुए रथ में विराजमान कर शोभायात्रा निकाली जाती है। रथ यात्रा का संबंध रामेश्वर मंदिर तक जाने वाली धार्मिक परंपरा से है। तारीख और आयोजन की व्यवस्था हर साल के कैलेंडर के अनुसार जांचनी चाहिए।
चंदन यात्रा: यह उत्सव चंदन अर्पित करने और धार्मिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है। इस दौरान बिंदु सागर से जुड़ी परंपराएं भी देखने को मिल सकती हैं।
अगर आप त्योहार के समय Lingaraj Temple जाने की सोच रहे हैं, तो होटल और आने-जाने की व्यवस्था पहले से कर लें। भीड़ के कारण आसपास की सड़कों पर आवाजाही और दर्शन में लगने वाला समय सामान्य दिनों से अलग हो सकता है।
Lingaraj Temple कैसे पहुंचें?
भुवनेश्वर हवाई, रेल और सड़क मार्ग से देश के कई शहरों से जुड़ा हुआ है। शहर पहुंचने के बाद ऑटो, टैक्सी या स्थानीय परिवहन से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।
हवाई मार्ग से: भुवनेश्वर का बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शहर का प्रमुख एयरपोर्ट है। यहां से Lingaraj Temple तक सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं। दूरी और यात्रा का समय आपके चुने हुए रास्ते और ट्रैफिक के अनुसार बदल सकता है।
ट्रेन से: भुवनेश्वर रेलवे स्टेशन शहर का मुख्य रेलवे स्टेशन है। स्टेशन से मंदिर के लिए ऑटो, कैब या दूसरे स्थानीय साधन मिल सकते हैं।
सड़क मार्ग से: भुवनेश्वर आसपास के शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। आप बस, टैक्सी या अपनी गाड़ी से शहर पहुंच सकते हैं। मंदिर के आसपास पुराना और व्यस्त इलाका होने के कारण गाड़ी पार्क करने की जगह पहले से पता कर लेना अच्छा रहेगा।
अगर आप पुरी या कोणार्क से आ रहे हैं, तो वहां से भुवनेश्वर के लिए बस, टैक्सी और अन्य परिवहन विकल्प देख सकते हैं। यात्रा शुरू करने से पहले दूरी, ट्रैफिक और उस दिन उपलब्ध परिवहन की जानकारी जांच लें।
Lingaraj Temple के आसपास घूमने की जगहें
मंदिर के दर्शन के बाद आपके पास समय बचता है, तो भुवनेश्वर के पुराने इलाके में मौजूद दूसरी ऐतिहासिक जगहों को भी देख सकते हैं। इनमें से कई स्थान मंदिर से कुछ दूरी पर हैं और इन्हें एक ही दिन के प्लान में शामिल किया जा सकता है।
बिंदु सागर झील: यह झील Lingaraj Temple के पास स्थित है और स्थानीय धार्मिक परंपराओं में इसका खास महत्व है। सुबह या शाम के समय यहां घूम सकते हैं। आसपास कई पुराने मंदिर भी हैं, इसलिए इसे देखने के लिए कुछ समय निकालें।
मुक्तेश्वर मंदिर: यह भुवनेश्वर के प्रसिद्ध पुराने मंदिरों में से एक है। इसका नक्काशीदार प्रवेश तोरण और पत्थर पर किया गया काम खास तौर पर देखने लायक है। अगर आपको मंदिरों की वास्तुकला पसंद है, तो यहां जरूर जाएं।
राजारानी मंदिर: यह मंदिर अपनी खूबसूरत पत्थर की बनावट और बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता है। यहां का परिसर दूसरे बड़े मंदिरों से अलग अनुभव देता है। जाने से पहले प्रवेश समय और लागू टिकट संबंधी जानकारी जांच लें।
उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं: अगर आपको प्राचीन इतिहास में दिलचस्पी है, तो इन गुफाओं को अपनी लिस्ट में शामिल करें। यहां चट्टानों को काटकर बनाई गई पुरानी संरचनाएं और ऐतिहासिक नक्काशी देखने को मिलती हैं। यह जगह मंदिर वाले पुराने इलाके से कुछ दूर है, इसलिए आने-जाने का समय अलग से रखें।
एकाम्र हेरिटेज वॉक: भुवनेश्वर के पुराने मंदिरों, गलियों और स्थानीय विरासत को समझने के लिए हेरिटेज वॉक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसके आयोजन का दिन, शुरुआती जगह और समय बदल सकता है, इसलिए जाने से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर जांच लें।
इन जगहों को देखने के लिए आप एक दिन का प्लान बना सकते हैं। अगर गुफाओं को भी आराम से देखना है, तो दो दिन रखना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा।
Lingaraj Temple घूमने का सबसे अच्छा समय
भुवनेश्वर घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय आम तौर पर अच्छा माना जाता है। इन महीनों में मौसम गर्मियों के मुकाबले अधिक आरामदायक रहता है और मंदिरों के आसपास घूमना आसान होता है।
गर्मियों में दोपहर के समय गर्मी और उमस परेशान कर सकती है। अगर आप गर्मियों में जा रहे हैं, तो सुबह जल्दी दर्शन करें, पानी साथ रखें और दिन के सबसे गर्म समय में ज्यादा पैदल घूमने से बचें। बारिश के मौसम में बाहर निकलने से पहले मौसम का हाल देख लेना भी जरूरी है।
दिन के समय की बात करें, तो सुबह जल्दी मंदिर पहुंचना अच्छा विकल्प है। इससे आप दर्शन के बाद बिंदु सागर और आसपास के मंदिरों को देखने के लिए समय निकाल सकते हैं। हालांकि, सुबह भीड़ बिल्कुल नहीं होगी, इसकी गारंटी नहीं है। सोमवार और त्योहारों के समय सुबह भी काफी श्रद्धालु आ सकते हैं।
भुवनेश्वर में क्या खाएं और यात्रा कैसे प्लान करें?
भुवनेश्वर की यात्रा में स्थानीय ओड़िया खाने का स्वाद लेना न भूलें। शहर में आपको पारंपरिक मिठाइयां, स्थानीय नाश्ते और अलग-अलग तरह के शाकाहारी व्यंजन मिल सकते हैं। खाजा और गजा जैसी मिठाइयां भी कई जगह मिलती हैं।
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मंदिर के आसपास खाना खाते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें और भीड़ वाली जगह पर खाने से पहले दुकान की स्थिति देख लें। अगर आप किसी धार्मिक नियम के अनुसार भोजन करते हैं, तो उसी हिसाब से विकल्प चुनें।
यात्रा की योजना बनाते समय सबसे पहले दर्शन का समय तय करें। फिर आसपास की जगहों को दूरी के हिसाब से जोड़ें। मंदिर के लिए सुबह का समय रखें और उसके बाद बिंदु सागर तथा आसपास के पुराने मंदिर देख सकते हैं। उदयगिरि और खंडगिरि गुफाओं के लिए अलग से पर्याप्त समय रखना बेहतर रहेगा।
अगर आप ओडिशा का गोल्डन ट्रायंगल घूम रहे हैं, तो भुवनेश्वर में Lingaraj Temple देखने के बाद पुरी और कोणार्क की यात्रा भी प्लान कर सकते हैं। बस हर जगह के दर्शन समय, आने-जाने के साधन और स्थानीय नियमों की जानकारी पहले से जांच लें।
Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव
- दर्शन के लिए सुबह जल्दी पहुंचें। सुबह का समय रखने से आपको दर्शन के बाद आसपास की ऐतिहासिक जगहों को देखने के लिए भी पर्याप्त समय मिल सकता है। निकलने से पहले मंदिर के मौजूदा समय की पुष्टि जरूर करें।
- मंदिर के नियम पहले जान लें। मोबाइल, कैमरा, जूते-चप्पल और कपड़ों से जुड़े नियमों की जानकारी पहले से रखें। इससे प्रवेश के समय परेशानी नहीं होगी।
- बिंदु सागर को प्लान में शामिल करें। मंदिर के दर्शन के बाद इस झील और आसपास के पुराने मंदिरों को देखने के लिए समय निकालें। इससे आपकी यात्रा और भी अच्छी हो सकती है।
- त्योहारों पर अतिरिक्त समय रखें। महाशिवरात्रि और रुकुणा रथ यात्रा के दौरान भीड़ बढ़ सकती है। ऐसे समय पर होटल, परिवहन और दर्शन की योजना पहले से बना लें।
- सिर्फ एक मंदिर तक सीमित न रहें। अगर आपके पास समय है, तो मुक्तेश्वर मंदिर, राजारानी मंदिर और उदयगिरि-खंडगिरि गुफाओं को भी अपनी यात्रा में शामिल करें। इससे आपको भुवनेश्वर के इतिहास और वास्तुकला को बेहतर तरीके से समझने का मौका मिलेगा।
Lingaraj Temple भुवनेश्वर की उन खास जगहों में से एक है, जहां धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ पुराने समय की वास्तुकला को भी करीब से देखा जा सकता है। अगर आप 2026 में ओडिशा घूमने जा रहे हैं, तो अपनी यात्रा में इस मंदिर के लिए समय जरूर निकालें। सही जानकारी के साथ बनाया गया छोटा-सा प्लान आपके सफर को ज्यादा आसान और यादगार बना सकता है।