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Railway Platform की पीली लाइन क्यों होती है?

Yellow Line

कभी आपने रेलवे स्टेशन या मेट्रो स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते हुए प्लेटफॉर्म के किनारे बनी पीली लाइन पर ध्यान दिया है? हम रोज इस लाइन को देखते हैं, लेकिन अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार ट्रेन आने वाली होती है, लोग आगे बढ़कर दरवाजे के पास खड़े हो जाते हैं और कुछ लोग तो मोबाइल देखते हुए प्लेटफॉर्म के बिल्कुल किनारे तक पहुंच जाते हैं।

लेकिन क्या आपको पता है कि प्लेटफॉर्म पर बनी यह पीली लाइन सिर्फ रंग से बनाई गई एक पट्टी नहीं है? इसके पीछे यात्रियों की सुरक्षा, ट्रेन की रफ्तार और हवा के दबाव से जुड़ी कई जरूरी बातें हैं। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म पर लगी उभरी हुई टाइलें उन लोगों के लिए भी काफी मददगार होती हैं, जिन्हें देखने में परेशानी होती है।

प्लेटफॉर्म पर पीली लाइन क्यों बनाई जाती है?

रेलवे स्टेशन पर बनी पीली लाइन का सबसे बड़ा काम यात्रियों को प्लेटफॉर्म के किनारे से सुरक्षित दूरी पर रखना है। जब आप ट्रेन का इंतजार कर रहे होते हैं, तो आपको इस लाइन के पीछे खड़े रहना चाहिए। खासकर उस समय, जब कोई ट्रेन प्लेटफॉर्म से गुजर रही हो या अभी पूरी तरह रुकी न हो।

Yellow Line यात्रियों को एक साफ संकेत देती है कि प्लेटफॉर्म का किनारा कहां है और उन्हें किस जगह से आगे नहीं बढ़ना चाहिए। इसके आगे पटरियां होती हैं, जहां थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे की वजह बन सकती है।

कई बार लोग ट्रेन को जल्दी पकड़ने के चक्कर में लाइन के पास आ जाते हैं। कुछ लोग दरवाजे के सामने पहले खड़े होने के लिए भी आगे बढ़ने लगते हैं। लेकिन ऐसा करना सही नहीं है। ट्रेन की रफ्तार, उसके गुजरने से पैदा होने वाली हवा और भीड़ के दबाव के कारण संतुलन बिगड़ सकता है।

Yellow Line

इसलिए Yellow Line को सिर्फ एक निशान नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ी जरूरी चेतावनी समझना चाहिए। हमेशा लाइन के पीछे खड़े रहें और ट्रेन के पूरी तरह रुकने के बाद ही दरवाजे की ओर बढ़ें।

चलती ट्रेन के पास खड़े होने पर क्या हवा आपको अपनी तरफ खींच सकती है?

बचपन में आपने भी किसी न किसी से सुना होगा कि चलती ट्रेन के पास खड़े मत होना, वरना ट्रेन आपको अपनी तरफ खींच सकती है। लेकिन क्या इसके पीछे सच में कोई वैज्ञानिक वजह है?

हां, चलती ट्रेन के आसपास हवा का बहाव और दबाव बदल सकता है। जब कोई ट्रेन तेजी से गुजरती है, तो उसके आसपास हवा की हलचल पैदा होती है। ट्रेन के आकार, रफ्तार और प्लेटफॉर्म की बनावट के हिसाब से हवा का दबाव अलग-अलग हो सकता है।

लेकिन यह समझना जरूरी है कि ट्रेन के पास हर बार कोई वैक्यूम नहीं बनता, जो इंसान को अपने आप खींच ले। असल खतरा तेज हवा के झोंकों, हवा के दबाव में बदलाव और ट्रेन से बहुत कम दूरी पर खड़े होने से पैदा होता है। इससे किसी व्यक्ति का संतुलन बिगड़ सकता है, खासकर अगर वह प्लेटफॉर्म के बिल्कुल किनारे खड़ा हो।

मालगाड़ियों और तेज रफ्तार ट्रेनों के गुजरने पर हवा की हलचल काफी तेज हो सकती है। ट्रेन के डिब्बों के बीच की जगह और उनके आकार के कारण हवा का बहाव भी बदलता रहता है।

इसीलिए Yellow Line के पीछे खड़े रहने की सलाह दी जाती है। यह आपको ट्रेन से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की याद दिलाती है। ट्रेन चाहे छोटी हो या लंबी, जब तक वह पूरी तरह रुक न जाए, तब तक किनारे की ओर बढ़ने से बचें।

पीली लाइन के साथ बनी उभरी हुई टाइलें किस काम आती हैं?

अगर आपने रेलवे स्टेशन पर ध्यान दिया हो, तो कई जगह पीली लाइन के साथ उभरी हुई बिंदियों या लंबी धारियों वाली टाइलें भी दिखाई देती हैं। ये टाइलें सजावट के लिए नहीं लगाई जातीं। इनका एक खास काम है।

इन टाइलों को टेक्टाइल पेविंग कहा जाता है। इन्हें इस तरह बनाया जाता है कि देखने में परेशानी होने वाले लोग अपने पैरों या छड़ी से इन्हें महसूस करके रास्ते की जानकारी ले सकें।

Yellow Line के पास लगी उभरी हुई बिंदियों वाली टाइलें आमतौर पर चेतावनी देने के लिए होती हैं। इनका मतलब है कि आगे प्लेटफॉर्म का किनारा या कोई ऐसा हिस्सा है, जहां सावधानी बरतने की जरूरत है। इन्हें महसूस करके यात्री समझ सकते हैं कि उन्हें रुकना चाहिए या आगे बढ़ते समय ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

Yellow Line

वहीं, लंबी उभरी हुई धारियों वाली टाइलें रास्ता पहचानने में मदद करती हैं। इनकी दिशा को महसूस करके दृष्टिबाधित यात्री सुरक्षित रास्ते पर चल सकते हैं।हालांकि, इन टाइलों का सही मतलब और इन्हें लगाने का तरीका स्टेशन की व्यवस्था और तय मानकों के अनुसार अलग हो सकता है। इनका मुख्य उद्देश्य रास्ते की जानकारी देना और यात्रियों को सुरक्षित चलने में मदद करना है।

इस तरह प्लेटफॉर्म पर बनी Yellow Line और उभरी हुई टाइलें मिलकर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा में अहम भूमिका निभाती हैं।

जापान में कैसे हुई इन खास टाइलों की शुरुआत?

प्लेटफॉर्म पर लगी उभरी हुई टाइलों का इतिहास काफी दिलचस्प है। इनका आविष्कार जापान में हुआ था और इसके पीछे एक ऐसी सोच थी, जिसने दुनिया भर में दृष्टिबाधित लोगों के लिए यात्रा करना आसान बनाने में मदद की। Yellow Line

साल 1965 में जापानी आविष्कारक सेइची मियाके ने टेक्टाइल पेविंग का विचार विकसित किया। बताया जाता है कि अपने एक दृष्टिबाधित दोस्त की परेशानी देखकर उन्हें ऐसा तरीका बनाने की प्रेरणा मिली, जिससे लोग रास्ते में आने वाले खतरों को छूकर पहचान सकें।

मियाके ने उभरी हुई सतह वाली टाइलों का डिजाइन तैयार किया। साल 1967 में जापान के ओकायामा शहर में पहली बार इन टाइलों को सार्वजनिक रास्ते के पास लगाया गया। धीरे-धीरे इनका इस्तेमाल दूसरे इलाकों और रेलवे स्टेशनों पर भी होने लगा।

समय के साथ यह तकनीक कई देशों तक पहुंची। आज अलग-अलग डिजाइन और मानकों के साथ ऐसी टाइलें रेलवे स्टेशनों, मेट्रो, फुटपाथ और सार्वजनिक इमारतों में दिखाई देती हैं।

इसका उद्देश्य सिर्फ किसी को रास्ता बताना नहीं, बल्कि उसे बिना हर समय किसी दूसरे व्यक्ति की मदद लिए चलने में सक्षम बनाना भी है। यही वजह है कि Yellow Line के आसपास की टाइलें सार्वजनिक जगहों को ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने का अहम हिस्सा हैं।

आखिर पीला रंग ही क्यों चुना गया?

अब सवाल आता है कि सुरक्षा के लिए पीला रंग ही क्यों इस्तेमाल किया जाता है? लाल, नीला या हरा रंग क्यों नहीं?

इसका एक बड़ा कारण पीले रंग की अच्छी दृश्यता है। कई तरह की रोशनी और आसपास के रंगों के बीच पीला रंग आसानी से नजर आ सकता है। खासकर जब प्लेटफॉर्म का फर्श गहरे रंग का हो, तो पीली पट्टी उससे अलग दिखाई देती है।

यह बात उन लोगों के लिए भी मददगार है, जिन्हें कम रोशनी में देखने में परेशानी होती है। पीली पट्टी और आसपास की सतह के बीच साफ अंतर होने से उन्हें प्लेटफॉर्म का किनारा पहचानने में मदद मिल सकती है। Yellow Line

हालांकि, हर स्टेशन पर केवल पीला रंग ही इस्तेमाल हो, ऐसा जरूरी नहीं है। अलग-अलग देशों और रेलवे प्रणालियों में सुरक्षा के लिए अलग रंग और डिजाइन भी अपनाए जाते हैं। रंग के साथ-साथ पट्टी की जगह, उसकी चौड़ाई और आसपास के संकेत भी महत्वपूर्ण होते हैं।

Yellow Line का मकसद लोगों का ध्यान प्लेटफॉर्म के किनारे की ओर खींचना और उन्हें सावधान करना है। इसलिए इसे देखते ही आपको याद रखना चाहिए कि ट्रेन आने पर अपनी जगह सुरक्षित रखें और आगे बढ़ने की जल्दबाजी न करें।

पीली लाइन से कितनी दूरी पर खड़ा होना चाहिए?

इस सवाल का जवाब हर स्टेशन पर एक जैसा नहीं होता, क्योंकि पीली लाइन की जगह और प्लेटफॉर्म की बनावट अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसी एक दूरी को हर रेलवे स्टेशन या मेट्रो पर लागू मानना सही नहीं है।

सबसे आसान और सुरक्षित नियम यही है कि Yellow Line के पीछे खड़े रहें। लाइन के ऊपर या उसके आगे जाकर ट्रेन का इंतजार न करें। अगर स्टेशन पर सुरक्षा से जुड़ा कोई अलग निशान या निर्देश दिया गया है, तो उसका भी पालन करें।

जब ट्रेन प्लेटफॉर्म से गुजर रही हो, तो किनारे से और पीछे हटकर खड़े रहना बेहतर है। भीड़ के समय धक्का-मुक्की से बचें और ट्रेन के दरवाजे के सामने जगह बनाने के लिए आगे न बढ़ें।

अगर आप बच्चों के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो उनका हाथ पकड़कर रखें। छोटे बच्चे अक्सर ट्रेन देखकर उत्साहित हो जाते हैं और आगे बढ़ने की कोशिश कर सकते हैं। इसी तरह बुजुर्गों और चलने में परेशानी का सामना करने वाले लोगों को भी सुरक्षित जगह पर खड़े होने में मदद करें।

ध्यान रखें कि पीली लाइन कोई ऐसी दीवार नहीं है जो आपको हर खतरे से बचा लेगी। सुरक्षा के लिए जरूरी है कि आप सही दूरी बनाए रखें और स्टेशन पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।

रेलवे स्टेशन पर इन गलतियों से हमेशा बचें

रेलवे स्टेशन पर छोटी सी लापरवाही भी बड़ा हादसा बन सकती है। इसलिए कुछ बातों का खास ध्यान रखना जरूरी है। चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश न करें। ट्रेन के पूरी तरह रुकने का इंतजार करें। दरवाजे के पास धक्का-मुक्की करने के बजाय आराम से अपनी बारी का इंतजार करें। Yellow Line

पटरी पर गिरा सामान खुद लेने न जाएं। अगर मोबाइल, बैग या कोई दूसरी चीज पटरियों पर गिर जाए, तो उसे उठाने के लिए नीचे न उतरें। रेलवे कर्मचारी या सुरक्षा कर्मियों को इसकी जानकारी दें।

Yellow Line

मोबाइल में देखते हुए प्लेटफॉर्म के किनारे न चलें। फोन पर ध्यान देने के कारण आप सामने आने वाले लोगों, ट्रेन या स्टेशन की चेतावनी को नजरअंदाज कर सकते हैं। कान में इयरफोन लगाकर तेज आवाज में संगीत सुनने से भी बचें।

बच्चों और पहियों वाले सामान पर ध्यान रखें। बच्चों को प्लेटफॉर्म के किनारे अकेला न छोड़ें। ट्रॉली बैग और दूसरे पहियों वाले सामान को संभालकर रखें, ताकि वे ढलान या धक्के से आगे न बढ़ें। Yellow Line

ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच की खाली जगह को नजरअंदाज न करें। ट्रेन में चढ़ते और उतरते समय नीचे देखकर कदम रखें। कई जगह दोनों के बीच का अंतर अलग हो सकता है। इन छोटी-छोटी सावधानियों के साथ Yellow Line का पालन करना आपकी यात्रा को ज्यादा सुरक्षित बनाने में मदद कर सकता है।

क्या मेट्रो और रेलवे स्टेशन की पीली लाइन का काम एक जैसा है?

कई लोग सोचते हैं कि मेट्रो और रेलवे प्लेटफॉर्म पर बनी पीली लाइन में कोई अंतर नहीं होता। दोनों का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को प्लेटफॉर्म के किनारे से सुरक्षित दूरी पर रखना है, लेकिन इनके इस्तेमाल का तरीका स्टेशन की व्यवस्था पर निर्भर करता है। Yellow Line

कुछ मेट्रो स्टेशनों पर ट्रेन के दरवाजों के सामने स्क्रीन डोर लगे होते हैं। ऐसे स्टेशनों पर यात्रियों को ट्रेन के आने और दरवाजे खुलने तक तय जगह पर इंतजार करना होता है। वहीं, खुले प्लेटफॉर्म पर ट्रेन गुजरने के दौरान किनारे से सुरक्षित दूरी बनाए रखना खास तौर पर जरूरी होता है।

Yellow Line के अलावा स्टेशन पर दिशा बताने वाले निशान, फर्श पर बनी धारियां और दूसरी चेतावनी पट्टियां भी हो सकती हैं। हर निशान का अपना उद्देश्य होता है। इसलिए केवल रंग देखकर फैसला करने के बजाय स्टेशन पर लगे संकेतों को समझना चाहिए।

मेट्रो में भीड़ के समय दरवाजों के पास धक्का-मुक्की न करें। पहले उतरने वाले यात्रियों को रास्ता दें और उसके बाद ही डिब्बे में चढ़ें। इससे गिरने और चोट लगने का खतरा कम होता है।

Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव

  • पीली लाइन के पीछे रहें। ट्रेन आने या गुजरने के दौरान प्लेटफॉर्म के किनारे से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
  • ट्रेन रुकने का इंतजार करें। चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश कभी न करें।
  • बच्चों का हाथ पकड़कर रखें। भीड़ में बच्चों को प्लेटफॉर्म के किनारे अकेला न छोड़ें।
  • गिरा हुआ सामान खुद न उठाएं। पटरियों पर कुछ गिरने पर रेलवे स्टाफ की मदद लें।
  • मोबाइल से ध्यान हटाकर रखें। प्लेटफॉर्म के किनारे चलते समय फोन और इयरफोन से बचें, ताकि आप आसपास की गतिविधियों और चेतावनियों पर ध्यान दे सकें।

रेलवे और मेट्रो प्लेटफॉर्म पर बनी पीली लाइन हमें हर दिन एक जरूरी बात याद दिलाती है कि सफर में थोड़ी सी सावधानी भी बहुत मायने रखती है। इसके पीछे यात्रियों को सुरक्षित दूरी पर रखने, ट्रेन के आसपास हवा के बहाव से होने वाले खतरे को कम करने और प्लेटफॉर्म के किनारे की पहचान आसान बनाने जैसे कई कारण हैं।

इसके साथ लगी उभरी हुई टाइलें दृष्टिबाधित यात्रियों को रास्ता पहचानने में मदद करती हैं। वहीं, पीले रंग की अच्छी दृश्यता लोगों का ध्यान सुरक्षा सीमा की ओर खींच सकती है।

अगली बार जब आप स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करें, तो Yellow Line के पीछे ही खड़े रहें। ट्रेन के पूरी तरह रुकने का इंतजार करें और जल्दबाजी में अपनी सुरक्षा को खतरे में न डालें। आखिर एक सुरक्षित यात्रा की शुरुआत स्टेशन पर उठाए गए छोटे-छोटे सावधानी भरे कदमों से ही होती है। Yellow Line

Shivani Pal

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