Khajjiar Travel Guide: घूमने की जगहें, रास्ता और बजट
कभी-कभी मन करता है कि कुछ दिनों के लिए शहर की भागदौड़ से दूर निकल जाएँ। न गाड़ियों का शोर हो, न मोबाइल पर लगातार आते मैसेज और न ही किसी काम को जल्दी खत्म करने की टेंशन। बस सामने पहाड़ हों, चारों तरफ हरे-भरे पेड़ हों और सुबह की शुरुआत ठंडी हवा के साथ हो। अगर आप भी ऐसी ही किसी जगह की तलाश में हैं, तो हिमाचल प्रदेश का Khajjiar आपको जरूर पसंद आएगा।
चंबा जिले में डलहौजी के पास बसा Khajjiar अपनी हरी घास से ढकी खुली वादियों, देवदार के घने जंगलों और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। यहाँ पहुँचकर आपको ऐसा लगेगा जैसे पहाड़ों के बीच किसी खूबसूरत तस्वीर में आ गए हों। यही वजह है कि इसे अक्सर भारत का मिनी स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है। लेकिन इस जगह की खूबसूरती सिर्फ इसके मैदानों तक सीमित नहीं है। यहाँ एक पुराना मंदिर, छोटी-सी झील, जंगलों के बीच घूमने वाले वन्यजीव और पैदल घूमने के लिए खूबसूरत रास्ते भी हैं।
अगर आप अपनी अगली छुट्टियों में प्रकृति के करीब कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो यह Khajjiar Travel Guide आपके काम आएगी। इसमें जानिए यहाँ घूमने की खास जगहें, जंगल की सैर, पहुँचने का तरीका, रुकने के विकल्प और यात्रा को बेहतर बनाने के कुछ जरूरी सुझाव।
Khajjiar को मिनी स्विट्जरलैंड क्यों कहा जाता है?
Khajjiar समुद्र तल से करीब 1,900 से 2,000 मीटर की ऊँचाई पर बसा एक खूबसूरत पहाड़ी इलाका है। यहाँ पहुँचते ही सबसे पहले नजर सामने फैले हरे मैदान पर जाती है। मैदान के चारों तरफ ऊँचे देवदार के पेड़ हैं और दूर पहाड़ दिखाई देते हैं। मौसम साफ हो, तो यहाँ का नजारा काफी दूर तक नजर आता है। यही खुला मैदान और उसके आसपास फैले जंगल इस जगह को बाकी पहाड़ी इलाकों से अलग बनाते हैं।
Khajjiar को मिनी स्विट्जरलैंड नाम मिलने के पीछे भी एक दिलचस्प बात बताई जाती है। 7 जुलाई 1992 को स्विट्जरलैंड के तत्कालीन उप-वाणिज्यदूत विली पी. ब्लेजर ने यहाँ का दौरा किया था। स्थानीय पर्यटन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, यहाँ की खूबसूरती से प्रभावित होकर उन्होंने इसे स्विट्जरलैंड जैसे प्राकृतिक नजारों वाली जगह के रूप में पहचान दिलाई। इस दौरे की याद में यहाँ स्विट्जरलैंड के शहर बर्न की दूरी बताने वाला एक बोर्ड भी लगाया गया था।
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हालाँकि, Khajjiar की खूबसूरती को समझने के लिए किसी दूसरे देश से तुलना करना जरूरी नहीं है। यहाँ का अपना अलग पहाड़ी माहौल है। गर्मियों में मैदान हरा-भरा दिखाई देता है, बारिश के दिनों में चारों तरफ हरियाली बढ़ जाती है और सर्दियों में मौसम के हिसाब से बर्फबारी भी देखने को मिल सकती है। अगर आपको खुले मैदानों में घूमना, तस्वीरें लेना और बिना किसी जल्दी के बैठकर पहाड़ों को निहारना पसंद है, तो यह जगह आपके लिए अच्छी रहेगी।
कालाटोप वाइल्डलाइफ सेंचुरी: देवदार के जंगलों के बीच एक अलग दुनिया
Khajjiar के आसपास घूमने की सबसे खास जगहों में कालाटोप वाइल्डलाइफ सेंचुरी का नाम जरूर आता है। यहाँ घने जंगल, पहाड़ी रास्ते और ऊँचे पेड़ों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। शहरों में रहने वालों के लिए ऐसे जंगल के बीच समय बिताना अपने आप में एक अलग अनुभव हो सकता है। रास्ते पर चलते हुए कभी पेड़ों से छनकर आती धूप दिखती है, तो कभी हवा के साथ पत्तों की आवाज सुनाई देती है।
कालाटोप का जंगल प्राकृतिक रूप से कई तरह के वन्यजीवों और पक्षियों का घर है। यहाँ हिमालयन काला भालू, तेंदुआ, घोरल, काकड़ और दूसरे जंगली जीवों की मौजूदगी दर्ज की गई है। इसके अलावा कुछ छोटे स्तनधारी जीव भी इस इलाके में पाए जाते हैं। लेकिन जंगल में घूमने का मतलब यह नहीं कि हर जानवर आपको आसानी से दिखाई दे जाएगा। वन्यजीव अपने प्राकृतिक माहौल में रहते हैं और कई बार उनकी मौजूदगी का पता सिर्फ आवाज या पैरों के निशान से चलता है।
यही वजह है कि कालाटोप घूमते समय शांति बनाए रखना और वन विभाग के नियमों का पालन करना जरूरी है। किसी जानवर को देखने के लिए उसके करीब जाने, उसे खाना खिलाने या उसका रास्ता रोकने की कोशिश न करें। जंगल के अंदर अकेले अनजान रास्तों पर निकलने के बजाय स्थानीय गाइड की मदद लेना बेहतर रहेगा। अगर आप प्रकृति को करीब से देखना चाहते हैं, तो यह जगह आपको एक शांत और यादगार अनुभव दे सकती है।
लकड़मंडी से कालाटोप तक का ट्रैक: पैदल घूमने वालों के लिए खास अनुभव
अगर आपको पैदल घूमना पसंद है, तो लकड़मंडी से कालाटोप की तरफ जाने वाले रास्तों पर चलना आपकी यात्रा का अच्छा हिस्सा बन सकता है। इस इलाके में जंगल के बीच से गुजरने वाले रास्ते मिलते हैं, जहाँ दोनों तरफ ऊँचे पेड़ और बीच-बीच में खुली जगहें दिखाई देती हैं। कई लोगों के लिए इस तरह की सैर किसी लोकप्रिय पर्यटन स्थल पर सिर्फ तस्वीरें लेने से ज्यादा यादगार होती है।
ट्रैक की दूरी और समय चुने गए रास्ते, मौसम और आपकी चलने की गति पर निर्भर करता है। कुछ रास्ते छोटे हो सकते हैं, जबकि लंबे रूट पर कई घंटे लग सकते हैं। इसलिए निकलने से पहले स्थानीय लोगों या गाइड से रास्ते की मौजूदा स्थिति जरूर पूछ लें। बरसात के समय पगडंडियाँ फिसलन भरी हो सकती हैं और सर्दियों में बर्फ पड़ने पर रास्ता मुश्किल हो सकता है।
जंगल में चलते हुए देवदार के लंबे तने, जमीन पर गिरे सूखे पत्ते और पेड़ों के बीच से आती रोशनी देखने को मिलती है। कहीं-कहीं छोटे झरने या पानी के बहाव वाली जगहें भी नजर आ सकती हैं, लेकिन हर मौसम में पानी उपलब्ध होने की गारंटी नहीं है। बिना जानकारी के किसी भी प्राकृतिक स्रोत का पानी सीधे पीने से बचें।
इस ट्रैक पर आरामदायक जूते पहनकर जाएँ और अपने साथ पानी, हल्का नाश्ता, गर्म कपड़े तथा जरूरी दवाएँ रखें। अगर आप पहली बार पहाड़ों में ट्रैकिंग कर रहे हैं, तो अपनी क्षमता के हिसाब से छोटा रास्ता चुनें। Khajjiar की यात्रा में पैदल घूमने का असली मजा तभी आएगा, जब आप जल्दबाजी के बजाय आराम से आसपास की खूबसूरती का आनंद लेंगे।
कालाटोप का पुराना फॉरेस्ट रेस्ट हाउस और फिल्मी यादें
कालाटोप के जंगलों के बीच बना पुराना फॉरेस्ट रेस्ट हाउस इस इलाके की पहचान का एक खास हिस्सा है। इसकी लकड़ी से बनी बनावट और आसपास फैले ऊँचे पेड़ इसे अलग रूप देते हैं। पुराने समय में ऐसे रेस्ट हाउस जंगलों की देखरेख और वन विभाग के कामों के लिए इस्तेमाल किए जाते थे। आज भी यह जगह उन यात्रियों को आकर्षित करती है, जिन्हें प्राकृतिक माहौल के बीच पुरानी इमारतें देखना पसंद है।
इस रेस्ट हाउस का संबंध हिंदी फिल्म लुटेरा से भी जोड़ा जाता है। फिल्म के कुछ दृश्य कालाटोप के आसपास शूट किए जाने की जानकारी मिलती है, जिसके बाद इस जगह को देखने में फिल्म पसंद करने वाले लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ी। हालाँकि, किसी खास कमरे या इमारत में फिल्म का दृश्य शूट हुआ था या नहीं, इसकी पुष्टि स्थानीय स्तर पर कर लेना बेहतर है।
अगर आप यहाँ ठहरने का अनुभव लेना चाहते हैं, तो पहले वन विभाग से संपर्क करके बुकिंग, उपलब्धता और प्रवेश के नियमों की जानकारी लें। यह सामान्य होटल जैसा विकल्प नहीं है, इसलिए बिना पुष्टि के वहाँ कमरा मिलने की उम्मीद करके न जाएँ। अगर रुकने की जगह उपलब्ध न हो, तो डलहौजी और Khajjiar के आसपास कई होटल और होमस्टे मिल सकते हैं।
Khajjiar की झील और तैरता हुआ टापू
Khajjiar के बीच में बनी छोटी-सी झील यहाँ के सबसे पहचाने जाने वाले नजारों में से एक है। चारों तरफ फैले मैदान और पीछे दिखाई देते पहाड़ों के बीच यह झील पूरे इलाके को एक अलग खूबसूरती देती है। यहाँ आकर लोग अक्सर मैदान में टहलते हैं, तस्वीरें लेते हैं और कुछ समय बैठकर आसपास का नजारा देखते हैं।
इस झील की एक खास बात इसके पानी पर दिखाई देने वाला घास और वनस्पतियों का तैरता हुआ हिस्सा है, जिसे आम तौर पर तैरता हुआ टापू कहा जाता है। यह कोई बड़ा पक्का द्वीप नहीं, बल्कि पानी की सतह पर जमा वनस्पतियों का प्राकृतिक हिस्सा है। मौसम और पानी की स्थिति के हिसाब से इसका रूप बदल सकता है, इसलिए हर बार यहाँ आने पर एक जैसा नजारा दिखे, यह जरूरी नहीं।
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इस खूबसूरत जगह के सामने पर्यावरण को लेकर कुछ चुनौतियाँ भी हैं। पर्यटकों की भीड़, प्लास्टिक कचरा, घोड़ों की आवाजाही और आसपास से बहकर आने वाली मिट्टी झील की हालत पर असर डाल सकती है। ऐसे में घूमने आने वाले हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह कचरा इधर-उधर न फेंके और पानी या घास वाले हिस्सों को नुकसान न पहुँचाए।
Khajjiar की असली खूबसूरती इसी प्राकृतिक माहौल में है। इसलिए झील के किनारे समय बिताते हुए उसे साफ रखना और स्थानीय नियमों का ध्यान रखना भी आपकी यात्रा का हिस्सा होना चाहिए।
खज्जी नाग मंदिर: लकड़ी की नक्काशी और पुरानी मान्यताएँ
Khajjiar के मैदान के पास स्थित खज्जी नाग मंदिर इस इलाके की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान है। यह मंदिर नाग देवता को समर्पित है और अपनी पारंपरिक लकड़ी की बनावट तथा नक्काशी के लिए जाना जाता है। पहाड़ी इलाकों में लकड़ी से बने पुराने मंदिर स्थानीय कारीगरी और धार्मिक परंपराओं की झलक देते हैं। इस मंदिर को देखकर भी हिमाचल की पारंपरिक स्थापत्य शैली के बारे में जानने का मौका मिलता है।
मंदिर का इतिहास कई सदियों पुराना माना जाता है। इसके निर्माण और बाद में हुए बदलावों को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक विवरण मिलते हैं, इसलिए किसी एक तारीख या शासक के बारे में जानकारी देते समय स्थानीय मंदिर प्रशासन या विश्वसनीय ऐतिहासिक स्रोत से पुष्टि करना ठीक रहेगा। मंदिर के भीतर पांडवों और कौरवों से जुड़ी लकड़ी की आकृतियाँ भी देखने को मिलती हैं, जिनका संबंध महाभारत की कथाओं से जोड़ा जाता है।
यहाँ पहुँचकर सिर्फ तस्वीरें लेने के बजाय मंदिर की बनावट और स्थानीय मान्यताओं को समझने की कोशिश करें। धार्मिक जगह होने के कारण शांत रहें, जूते उतारने से जुड़े नियमों का पालन करें और बिना अनुमति के अंदर तस्वीरें न लें। Khajjiar घूमते समय यह मंदिर आपको यहाँ की प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति को जानने का अवसर भी देता है।
पक्षियों को देखने का शौक है, तो कालाटोप जरूर जाएँ
कालाटोप और Khajjiar का आसपास का जंगल पक्षियों को देखने में दिलचस्पी रखने वालों के लिए अच्छा इलाका है। घने पेड़ों, पहाड़ी ढलानों और अलग-अलग तरह की वनस्पतियों के कारण यहाँ कई प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं। सुबह का समय पक्षियों की आवाज सुनने और उन्हें देखने के लिए खास तौर पर अच्छा हो सकता है। अगर आप थोड़ी देर शांत बैठें, तो आसपास की हलचल पर ध्यान देना आसान हो जाता है।
इस क्षेत्र में कोकलास तीतर, कलीज तीतर और हिमालयन मोनल जैसे पहाड़ी पक्षियों की मौजूदगी की जानकारी मिलती है। इसके अलावा अलग-अलग प्रकार की बुलबुलें, ड्रोंगो और छोटे गाने वाले पक्षी भी दिखाई दे सकते हैं। कुछ शिकारी पक्षी भी इस इलाके के आसमान में उड़ते नजर आ सकते हैं। हालांकि, किसी खास पक्षी को देखने की संभावना मौसम, समय और आपके चुने हुए रास्ते पर निर्भर करती है।
अगर आप बर्ड-वॉचिंग करना चाहते हैं, तो दूरबीन साथ रखना उपयोगी रहेगा। पक्षियों की आवाज सुनने के लिए मोबाइल पर तेज संगीत न चलाएँ और उन्हें पास बुलाने के लिए आवाजें निकालने से बचें। जंगल में धैर्य रखना जरूरी है, क्योंकि कई बार एक खूबसूरत पक्षी को देखने के लिए काफी देर इंतजार करना पड़ता है।
Khajjiar घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
Khajjiar जाने का समय इस बात पर निर्भर करता है कि आप वहाँ किस तरह का मौसम और नजारा देखना चाहते हैं। अगर आपको हरे मैदान, खुला आसमान और आराम से घूमने के लिए सुहावना मौसम पसंद है, तो मार्च से जून के बीच यात्रा की योजना बना सकते हैं। इस दौरान दिन में मौसम आम तौर पर आरामदायक रहता है, हालांकि सुबह और शाम को ठंड महसूस हो सकती है।
जुलाई से सितंबर के बीच बारिश के कारण आसपास की हरियाली बढ़ जाती है। लेकिन इसी समय रास्ते फिसलन भरे हो सकते हैं और कभी-कभी भारी बारिश के कारण यात्रा में परेशानी आ सकती है। अगर आप बरसात में जा रहे हैं, तो मौसम का पूर्वानुमान देखकर निकलें और स्थानीय प्रशासन की सलाह पर ध्यान दें।
अक्टूबर से फरवरी के बीच यहाँ ठंड बढ़ जाती है। सर्दियों में बर्फबारी होने पर Khajjiar का नजारा बेहद खूबसूरत हो सकता है, लेकिन हर साल और हर दिन बर्फ मिले, यह जरूरी नहीं। बर्फ पड़ने पर सड़कें बंद हो सकती हैं या गाड़ी चलाना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सर्दियों में यात्रा से पहले सड़क की स्थिति, मौसम और होटल की उपलब्धता जरूर जाँच लें।
अगर आप पहली बार जा रहे हैं और आराम से घूमना चाहते हैं, तो सुहावने मौसम वाला समय चुनना अच्छा रहेगा। वहीं, बर्फ देखने की इच्छा है तो मौसम की ताजा जानकारी के आधार पर अपनी तारीख तय करें।
Khajjiar कैसे पहुँचें?
Khajjiar पहुँचने के लिए आप सड़क, रेल या हवाई यात्रा का विकल्प चुन सकते हैं। आम तौर पर डलहौजी को आधार बनाकर यहाँ घूमना आसान रहता है, क्योंकि दोनों जगहों के बीच सड़क से यात्रा की जा सकती है। डलहौजी से Khajjiar की दूरी चुने गए रास्ते के अनुसार लगभग 20 से 25 किलोमीटर के आसपास हो सकती है। पहाड़ी सड़क होने के कारण सफर में लगने वाला समय दूरी से ज्यादा भी हो सकता है।
सड़क मार्ग से: Delhi, चंडीगढ़ और पंजाब के कई शहरों से डलहौजी के लिए बस या टैक्सी मिल सकती है। वहाँ पहुँचने के बाद स्थानीय टैक्सी से Khajjiar जाया जा सकता है। अपनी गाड़ी से जा रहे हैं, तो पहाड़ी सड़कों पर सावधानी से चलाएँ और अंधेरा होने से पहले पहुँचने की कोशिश करें।
ट्रेन से: पठानकोट एक उपयोगी रेल विकल्प है। वहाँ से डलहौजी और Khajjiar के लिए टैक्सी या दूसरे स्थानीय परिवहन का सहारा लिया जा सकता है। स्टेशन से आगे का सफर शुरू करने से पहले गाड़ी और किराये की जानकारी तय कर लें।
हवाई जहाज से: गग्गल यानी कांगड़ा एयरपोर्ट एक विकल्प हो सकता है, लेकिन वहाँ से सड़क मार्ग का सफर लंबा पड़ सकता है। उड़ानों की उपलब्धता और किराये के हिसाब से आप दूसरे एयरपोर्ट भी देख सकते हैं। टिकट बुक करने से पहले सड़क की दूरी और आगे पहुँचने में लगने वाले समय का हिसाब जरूर लगा लें।
कहाँ ठहरें और कितने दिन का प्लान बनाएँ?
अगर आप Khajjiar को आराम से घूमना चाहते हैं, तो दो से तीन दिन का प्लान अच्छा रह सकता है। पहले दिन डलहौजी पहुँचकर आसपास घूम सकते हैं। दूसरे दिन Khajjiar का मैदान, झील और खज्जी नाग मंदिर देखें। समय और मौसम साथ दें, तो कालाटोप की तरफ जंगल की सैर भी कर सकते हैं। तीसरे दिन वापसी से पहले किसी ऐसी जगह पर कुछ समय बिताएँ, जहाँ आप बिना जल्दबाजी के पहाड़ों का नजारा देख सकें।
ठहरने के लिए Khajjiar के आसपास होटल और होमस्टे मिल सकते हैं। अगर आपको ज्यादा सुविधाएँ, बाजार और खाने के कई विकल्प चाहिए, तो डलहौजी में ठहरना भी सही रहेगा। वहीं, जंगल के बीच बने फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में रुकने का अनुभव लेना चाहते हैं, तो पहले वन विभाग से उसकी उपलब्धता, बुकिंग की प्रक्रिया और प्रवेश से जुड़े नियमों की पुष्टि करें।
बजट बनाते समय आने-जाने का किराया, होटल, स्थानीय टैक्सी, खाना और घूमने के खर्च को शामिल करें। छुट्टियों, लंबे वीकेंड और बर्फबारी के समय होटल जल्दी भर सकते हैं, इसलिए पहले से बुकिंग करना बेहतर है। कालाटोप के कुछ हिस्सों में गाड़ी ले जाने के लिए प्रवेश नियम या शुल्क लागू हो सकते हैं। इसकी मौजूदा जानकारी वन विभाग या स्थानीय प्रशासन से जरूर लें, क्योंकि फीस और नियम बदल सकते हैं।
Khajjiar जाते समय इन बातों का ध्यान रखें
पहाड़ों की यात्रा में थोड़ी तैयारी आपके सफर को आसान बना सकती है। सबसे पहले मौसम के हिसाब से कपड़े रखें। गर्मियों में भी हल्की जैकेट काम आ सकती है, जबकि सर्दियों में गर्म कपड़े, टोपी, दस्ताने और अच्छी पकड़ वाले जूते जरूरी हैं। बारिश की संभावना हो, तो रेनकोट या छाता भी रख लें।
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अगर आप ट्रैकिंग करना चाहते हैं, तो पानी, हल्का नाश्ता, जरूरी दवाएँ और पूरी तरह चार्ज मोबाइल साथ रखें। जंगल के रास्तों पर नेटवर्क कमजोर हो सकता है, इसलिए अपने ठहरने की जगह और लौटने का समय किसी को बता दें। स्थानीय गाइड की मदद लेने से रास्ते और मौसम से जुड़ी जानकारी मिल सकती है।
घूमते समय प्लास्टिक की बोतलें, खाने के रैपर और दूसरा कचरा खुले में न छोड़ें। वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और उन्हें खाना न खिलाएँ। पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी चलाते समय अचानक ब्रेक लगाने और तेज रफ्तार से बचें। अगर मौसम खराब हो या सड़क पर बर्फ जमी हो, तो स्थानीय प्रशासन की सलाह को प्राथमिकता दें।
Khajjiar की खूबसूरती का आनंद लेने के लिए बहुत सारी गतिविधियाँ करना जरूरी नहीं है। कभी-कभी मैदान में बैठकर आसपास का नजारा देखना, जंगल की आवाज सुनना और बिना किसी जल्दी के समय बिताना ही यात्रा का सबसे अच्छा हिस्सा बन जाता है।
Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव
- सुबह का समय घूमने के लिए रखें। मैदान और जंगल में सुबह का माहौल शांत रहता है। अगर पक्षियों को देखना चाहते हैं, तो दिन की शुरुआत जल्दी करें।
- ट्रैकिंग से पहले रास्ते की जानकारी लें। लकड़मंडी से कालाटोप की तरफ निकलने से पहले स्थानीय गाइड से दूरी, मौसम और रास्ते की स्थिति पूछ लें। अपनी क्षमता के हिसाब से ही ट्रैक चुनें।
- मौसम के हिसाब से पैकिंग करें। गर्मियों में भी हल्की जैकेट रखें और सर्दियों में गर्म कपड़े व अच्छी पकड़ वाले जूते पहनें। बर्फबारी के समय सड़क की स्थिति जरूर जाँचें।
- झील और जंगल को साफ रखें। कचरा अपने बैग में वापस रखें, वन्यजीवों को खाना न खिलाएँ और प्राकृतिक जगहों को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों से बचें।
- रहने और आने-जाने की बुकिंग पहले करें। खासकर लंबे वीकेंड और सर्दियों में होटल, टैक्सी और सड़क की स्थिति की जानकारी पहले से ले लें। फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में रुकने के लिए भी बुकिंग की पुष्टि जरूरी है।
Khajjiar उन जगहों में से है जहाँ घूमने के लिए बहुत लंबी गतिविधियों की सूची बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। हरे मैदान, देवदार के जंगल, पुराना मंदिर और पहाड़ों की शांत हवा मिलकर इस सफर को खास बना देते हैं। यहाँ आप परिवार के साथ छुट्टियाँ बिता सकते हैं, दोस्तों के साथ ट्रैकिंग कर सकते हैं या अकेले कुछ समय प्रकृति के बीच गुजार सकते हैं।
बस निकलने से पहले मौसम और रास्तों की जानकारी ले लें, अपनी जरूरत का सामान पैक करें और इस खूबसूरत इलाके को साफ रखने की जिम्मेदारी भी निभाएँ। फिर तैयार हो जाइए हिमाचल की वादियों में कुछ सुकून भरे दिन बिताने के लिए।