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Gulmarg: 2026 में घूमने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

Gulmarg

कश्मीर जाने का प्लान बनाते समय अगर आपकी नजर सिर्फ श्रीनगर की झीलों और खूबसूरत बागों तक जाकर रुक जाती है, तो शायद आपने कश्मीर का एक बेहद खास हिस्सा अभी देखा ही नहीं है। श्रीनगर से कुछ ही घंटे की दूरी पर पहाड़ों के बीच बसा Gulmarg ऐसा ठिकाना है, जहाँ मौसम बदलते ही पूरी जगह का रंग बदल जाता है।

गर्मियों में यही जगह हरे मैदानों और छोटे-छोटे जंगली फूलों से भर जाती है, तो सर्दियों में चारों तरफ बर्फ दिखाई देती है। बारामूला जिले में पीर पंजाल की पहाड़ियों के बीच बसा Gulmarg समुद्र तल से करीब 2,650 मीटर की ऊंचाई पर है। इसका नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में बर्फ, गोंडोला और पहाड़ों की तस्वीर आती है, लेकिन यहाँ घूमने के लिए इसके अलावा भी काफी कुछ है।

पुराने चर्च से लेकर गोल्फ कोर्स, मंदिर, दरगाह, बर्फीली ढलान और ऊंची पहाड़ियों तक, यह जगह अलग-अलग तरह के यात्रियों को अपनी तरफ खींचती है। अगर आप 2026 में Gulmarg जाने का प्लान बना रहे हैं, तो सिर्फ होटल और गाड़ी बुक कर लेना काफी नहीं है।

कब जाना है, गोंडोला का टिकट कैसे लेना है, किस मौसम में कौन-सी जगह देखनी है, कितने गर्म कपड़े चाहिए और ऊंचाई पर किन बातों का ध्यान रखना है—इन सबकी जानकारी पहले से होना जरूरी है। इसी वजह से इस ब्लॉग में हम Gulmarg की यात्रा को शुरुआत से लेकर वापसी तक आसान तरीके से समझेंगे।

श्रीनगर से Gulmarg तक का सफर कितना आसान है?

Gulmarg पहुंचने का सबसे आसान तरीका श्रीनगर से सड़क के रास्ते जाना है। श्रीनगर से इसकी दूरी करीब 51 से 60 किलोमीटर के बीच बताई जाती है और सामान्य मौसम में कार या टैक्सी से लगभग डेढ़ से दो घंटे लग सकते हैं। रास्ते में जैसे-जैसे श्रीनगर पीछे छूटता है, वैसे-वैसे पहाड़ और हरियाली बढ़ने लगती है और सफर अपने आप खूबसूरत लगने लगता है।

श्रीनगर से टंगमर्ग तक का रास्ता सामान्य मौसम में काफी आसान रहता है। टंगमर्ग के बाद Gulmarg की तरफ जाने वाली आखिरी करीब 11 किलोमीटर की सड़क पहाड़ों और चीड़ के जंगलों के बीच से गुजरती है। सर्दियों में यही हिस्सा सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि भारी बर्फबारी के दौरान सामान्य गाड़ियों को आगे जाने की अनुमति नहीं मिलती और चेन लगी गाड़ियों की जरूरत पड़ सकती है।

Gulmarg

अगर आप हवाई जहाज से आ रहे हैं तो श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीकी हवाई अड्डा है। एयरपोर्ट से Gulmarg करीब 54-55 किलोमीटर दूर पड़ता है। ट्रेन से आने वालों के लिए बारामूला रेलवे स्टेशन नजदीकी स्टेशन में से एक है, जबकि देश के दूसरे हिस्सों से आने वाले यात्रियों के लिए जम्मू तवी तक ट्रेन से आना और फिर सड़क मार्ग से आगे बढ़ना एक विकल्प हो सकता है।

गुलमर्ग कब जाएं? मौसम के हिसाब से चुनें अपना सफर

Gulmarg घूमने का सही समय पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप वहां जाकर क्या देखना और करना चाहते हैं। अगर आपके लिए कश्मीर का मतलब बर्फ है, तो सर्दियों का मौसम आपको सबसे ज्यादा पसंद आएगा। दिसंबर से फरवरी के बीच यहां बर्फबारी देखने को मिल सकती है और जनवरी-फरवरी में बर्फ से जुड़ी गतिविधियों के लिए माहौल खास रहता है। मार्च और अप्रैल में मौसम धीरे-धीरे बदलने लगता है। बर्फ पिघलती है और पहाड़ों का रंग भी बदलने लगता है।

मई से जुलाई तक Gulmarg के मैदान हरे-भरे नजर आते हैं और जगह-जगह जंगली फूल दिखाई देते हैं। इस समय मौसम भी अपेक्षाकृत सुहावना रहता है, इसलिए परिवार के साथ घूमने या आराम से पहाड़ों का आनंद लेने वालों के लिए यह समय अच्छा हो सकता है। सितंबर से नवंबर के बीच भी यहां एक अलग तरह की खूबसूरती देखने को मिलती है।

इस समय मौसम ठंडा होने लगता है, भीड़ कई बार कम मिलती है और आसपास के पहाड़ों व मैदानों में बदलते रंग फोटोग्राफी के लिए अच्छा माहौल बनाते हैं। इसलिए सिर्फ बर्फ देखने के लिए ही Gulmarg को चुनना जरूरी नहीं है।

Gulmarg Gondola की असली कहानी: दो फेज में पूरा सफर

Gulmarg की सबसे चर्चित चीजों में से एक गोंडोला राइड है। यह केबल कार आपको पहाड़ों की ऊंचाई तक ले जाती है और इसके दो मुख्य फेज हैं। अगर आप पहली बार जा रहे हैं तो पहले से समझ लेना अच्छा रहेगा कि दोनों फेज का अनुभव अलग है। पहला फेज गुलमर्ग से कोंगडूरी तक जाता है। इसमें करीब 2,650 मीटर की ऊंचाई से लगभग 3,050 मीटर तक पहुंचते हैं।

राइड कुछ ही मिनटों की होती है, लेकिन ऊपर पहुंचने के बाद खुला मैदान, पहाड़ और मौसम का अनुभव अलग ही लगता है। खासकर बर्फ के मौसम में कोंगडूरी बच्चों और परिवारों के लिए काफी आकर्षक हो सकता है।

दूसरा फेज कोंगडूरी से अफहरवत की तरफ जाता है और यहां ऊंचाई करीब 3,980 मीटर तक पहुंच जाती है। इस हिस्से में पेड़ों की संख्या कम होने लगती है और सामने ऊंचे पहाड़ तथा बर्फीली ढलान दिखाई देते हैं। मौसम साफ हो तो ऊपर से मिलने वाला नजारा पूरे सफर की सबसे यादगार चीजों में से एक बन सकता है।

गोंडोला टिकट लेते समय इन बातों को न करें नजरअंदाज

गोंडोला की बुकिंग के मामले में सबसे जरूरी बात है कि टिकट आधिकारिक माध्यम से ही लिया जाए। अनजान वेबसाइट, सोशल मीडिया पर मिले एजेंट या किसी स्थानीय बिचौलिए से टिकट लेने से बचना चाहिए। टिकट बुक करते समय जिस पहचान पत्र की जानकारी दी गई है, यात्रा के दौरान वही मूल पहचान पत्र साथ रखना जरूरी हो सकता है।

फेज 1 और फेज 2 के टिकट और उनकी बुकिंग प्रक्रिया को समझकर ही भुगतान करें। अगर फेज 2 खराब मौसम की वजह से बंद हो जाता है, तो आपका पूरा प्लान प्रभावित हो सकता है। इसलिए जिस दिन आप Gulmarg जा रहे हैं, उस दिन मौसम की स्थिति और गोंडोला के संचालन की जानकारी जरूर जांच लें। गोंडोला के संचालन का समय मौसम और प्रशासनिक व्यवस्था के हिसाब से बदल सकता है।

रखरखाव के लिए तय दिनों पर सेवा बंद भी रह सकती है। इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक जानकारी देखना सबसे सुरक्षित तरीका है। सिर्फ किसी पुराने ब्लॉग या सोशल मीडिया पोस्ट में दिए समय के आधार पर अपना पूरा दिन तय न करें।

गुलमर्ग गोल्फ कोर्स से शुरू करें पहाड़ों की सैर

अगर आप सोच रहे हैं कि Gulmarg में गोंडोला के अलावा क्या किया जा सकता है, तो गुलमर्ग गोल्फ कोर्स से शुरुआत कर सकते हैं। हरे-भरे मैदानों और आसपास की पहाड़ियों की वजह से यह जगह सिर्फ गोल्फ खेलने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि घूमने और तस्वीरें लेने वालों के लिए भी आकर्षक है।

गर्मियों में जब बर्फ की जगह हरी घास दिखाई देती है, तब गोल्फ कोर्स के आसपास का पूरा इलाका बेहद शांत और खूबसूरत लगता है। यहां घूमते हुए आपको समझ आएगा कि Gulmarg को सिर्फ सर्दियों वाली जगह मानना सही नहीं है। मौसम बदलने के साथ यहां का पूरा दृश्य बदल जाता है।

सेंट मैरी चर्च और महारानी मंदिर की शांत खूबसूरती

गुलमर्ग का सेंट मैरी चर्च उन जगहों में से है जहां पहुंचकर Gulmarg का एक अलग रूप देखने को मिलता है। पुरानी वास्तुकला, पत्थरों की दीवारें और आसपास के पहाड़ इसे बाकी पर्यटन स्थलों से अलग बनाते हैं। सर्दियों में जब चर्च के आसपास बर्फ जमा होती है, तो इसकी तस्वीर और भी खूबसूरत लगती है।

इसके अलावा महारानी मंदिर भी गुलमर्ग के मैदानों के बीच एक ऊंची जगह पर स्थित है। यह छोटा लेकिन लोकप्रिय मंदिर दूर से ही दिखाई देता है। यहां कुछ समय शांति से बिताने के बाद आप आसपास के मैदानों और पहाड़ों को देख सकते हैं। दोनों जगहों को अपने घूमने के कार्यक्रम में शामिल करना आसान है क्योंकि इनके लिए अलग से पूरा दिन निकालने की जरूरत नहीं पड़ती।

अफहरवत और अलब्पाथर झील के लिए कितना समय रखें?

अगर आप Gulmarg में थोड़ा एडवेंचर चाहते हैं, तो अफहरवत और अलब्पाथर की तरफ का सफर आपके लिए खास हो सकता है। अफहरवत की ऊंचाई करीब 4,000 मीटर के आसपास है और यहां मौसम नीचे के मुकाबले काफी अलग हो सकता है। तेज हवा, ठंड और अचानक बदलता मौसम सामान्य बात है। अलब्पाथर झील अफहरवत के आगे की तरफ स्थित ऊंचाई वाली झील है।

मौसम और रास्ते की स्थिति के आधार पर यहां पहुंचने की योजना बनाई जाती है। बर्फ वाले मौसम में इसका रूप बिल्कुल अलग नजर आता है, जबकि गर्मियों में आसपास का इलाका ट्रेकिंग और प्रकृति पसंद करने वालों को आकर्षित करता है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऊंचाई वाली जगहों पर हर व्यक्ति का शरीर एक जैसा प्रतिक्रिया नहीं करता। इसलिए सिर्फ तस्वीर लेने के लिए बहुत ज्यादा आगे जाने या शरीर की परेशानी को नजरअंदाज करने से बचें।

बाबा ऋषि की दरगाह और गुलमर्ग का दूसरा रंग

Gulmarg में बाबा ऋषि की दरगाह एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। पहाड़ी ढलान पर स्थित यह जगह स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों के बीच जानी जाती है। यहां जाकर आपको गुलमर्ग के पर्यटन से अलग उसका धार्मिक और सांस्कृतिक पक्ष देखने को मिलता है।

किसी भी धार्मिक स्थल पर जाते समय वहां के स्थानीय नियमों और मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए। यात्रा का असली मजा तब आता है जब हम किसी जगह को सिर्फ तस्वीरों के लिए नहीं, बल्कि उसके स्थानीय जीवन और संस्कृति के साथ भी समझने की कोशिश करते हैं।

बर्फ में स्कीइंग से लेकर गर्मियों की ट्रेकिंग तक

सर्दियों में Gulmarg की पहचान स्कीइंग और बर्फ से जुड़ी गतिविधियों से होती है। यहां शुरुआती लोगों के लिए भी सीखने के विकल्प मिलते हैं। अगर आपने पहले कभी स्कीइंग नहीं की है तो किसी प्रशिक्षित प्रशिक्षक की मदद लेना बेहतर रहेगा। स्नोबोर्डिंग, स्लेजिंग और बर्फ में खेलना भी पर्यटकों को काफी पसंद आता है। वहीं गर्मियों में यही पहाड़ ट्रेकिंग के लिए आकर्षक हो जाते हैं।

अलब्पाथर झील, आसपास की घाटियां और ऊंचे मैदान प्रकृति पसंद करने वालों को अलग तरह का अनुभव देते हैं। पोनी राइड भी यहां लोकप्रिय गतिविधियों में शामिल है। लेकिन किसी भी गतिविधि के लिए पहले कीमत और अवधि साफ कर लें। स्थानीय सेवा लेने से पहले तय दर के बारे में जानकारी रखना आपको अनावश्यक बहस से बचा सकता है।

Gulmarg जाने से पहले कपड़ों की तैयारी कैसे करें?

Gulmarg में कपड़ों की तैयारी करते समय सिर्फ श्रीनगर का मौसम देखकर सामान पैक करना सही नहीं होगा। जैसे-जैसे आप ऊंचाई की तरफ जाएंगे, तापमान तेजी से नीचे जा सकता है। खासकर सर्दियों में बर्फ के बीच लंबे समय तक रहने के लिए शरीर को अच्छी तरह ढककर रखना जरूरी है।

एक मोटी जैकेट के बजाय कपड़ों की कई परतें रखना ज्यादा उपयोगी रहता है। अंदर थर्मल, उसके ऊपर गर्म स्वेटर या फ्लीस और सबसे ऊपर हवा व पानी से बचाने वाली जैकेट रख सकते हैं।

इससे मौसम के हिसाब से कपड़े कम या ज्यादा करना आसान रहता है। बर्फ के समय सामान्य जूते पहनकर चलना परेशानी पैदा कर सकता है। अच्छी पकड़ वाले वाटरप्रूफ जूते, गर्म मोजे, दस्ताने, टोपी और मफलर जरूर रखें। बर्फ से सूरज की तेज रोशनी आंखों पर पड़ सकती है, इसलिए धूप का चश्मा भी काम आता है।

गुलमर्ग में क्या खाएं? कश्मीर का स्वाद जरूर लें

Gulmarg में घूमते समय सिर्फ बाहर का नजारा ही नहीं, बल्कि स्थानीय खाने का स्वाद लेना भी यात्रा का हिस्सा होना चाहिए। कश्मीरी कहवा यहां की ठंड में शरीर को गर्म रखने के साथ-साथ सफर की थकान भी कुछ कम कर सकता है। इसमें आमतौर पर केसर, बादाम और इलायची का स्वाद मिलता है। नून चाय यानी नमकीन गुलाबी चाय भी कश्मीर की पहचान है।

Gulmarg

इसके अलावा हाक साग, नदरू और यखनी जैसे स्थानीय व्यंजन भी आजमाए जा सकते हैं। अगर आप शाकाहारी खाना पसंद करते हैं तो पहले से होटल या रेस्टोरेंट में उपलब्ध विकल्प पूछ लेना अच्छा रहेगा।

गुलमर्ग में बहुत बड़े शहर जैसी रेस्टोरेंट की भरमार नहीं है। कई यात्री होटल में ही खाना पसंद करते हैं। इसलिए अगर आप बजट में यात्रा कर रहे हैं तो होटल बुक करते समय खाने की व्यवस्था और उसकी कीमत पहले ही पूछ लें।

ऊंचाई पर जाते समय सेहत का खास ध्यान रखें

Gulmarg के मुख्य इलाके से ऊपर अफहरवत की तरफ जाते ही ऊंचाई काफी बढ़ जाती है। करीब 4,000 मीटर के आसपास की ऊंचाई पर कुछ लोगों को सिरदर्द, चक्कर, थकान या जी मिचलाने जैसी परेशानी महसूस हो सकती है।

ऐसी स्थिति में शरीर को जबरदस्ती आगे बढ़ाने के बजाय आराम करना चाहिए। पानी पीते रहें और अगर परेशानी बढ़ रही है तो नीचे की तरफ लौटना बेहतर है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों को ऊंचाई वाले हिस्से में ज्यादा सावधानी रखनी चाहिए।

बर्फ में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में न रहें। Gulmarg का मौसम कभी-कभी कुछ ही समय में बदल सकता है, इसलिए बैग में अतिरिक्त मोजे और जरूरी सामान रखना काफी काम आता है।

मोबाइल, पैसे और पहचान पत्र की तैयारी पहले करें

कश्मीर यात्रा पर निकलने से पहले अपने मोबाइल नेटवर्क की स्थिति जांच लेना जरूरी है। दूसरे राज्यों से आने वाले यात्रियों के सिम को लेकर स्थानीय परिस्थितियों और नेटवर्क नियमों में बदलाव हो सकता है, इसलिए अपने नेटवर्क की मौजूदा स्थिति पहले से पता कर लें। Gulmarg में एटीएम के विकल्प सीमित हो सकते हैं और हर समय मशीन में नकदी मिले, यह जरूरी नहीं है।

इसलिए श्रीनगर से निकलते समय जरूरत के हिसाब से कुछ नकद पैसे साथ रखना समझदारी है। साथ ही कार्ड या डिजिटल भुगतान का विकल्प भी रखें। एक वैध सरकारी फोटो पहचान पत्र हमेशा अपने साथ रखें। खासकर गोंडोला जैसी गतिविधियों में टिकट बुकिंग के दौरान इस्तेमाल किए गए पहचान पत्र से जुड़ी जानकारी का ध्यान रखना जरूरी है।

एक दिन में Gulmarg घूमना है तो ऐसा रखें प्लान

अगर आपके पास सिर्फ एक दिन है तो सुबह जल्दी श्रीनगर से निकलना बेहतर रहेगा। करीब 7 बजे के आसपास निकलकर आप सुबह तक Gulmarg पहुंच सकते हैं और दिन का बड़ा हिस्सा घूमने के लिए बचा सकते हैं। सबसे पहले गोंडोला की तरफ जाना ठीक रहेगा, क्योंकि मौसम और भीड़ दोनों का असर आपकी राइड पर पड़ सकता है।

फेज 1 और फेज 2 करने के बाद नीचे लौटकर दोपहर का खाना खाएं। इसके बाद गोल्फ कोर्स, सेंट मैरी चर्च और महारानी मंदिर जैसे आसपास के स्थान देखे जा सकते हैं। अगर मौसम खराब हो या गोंडोला बंद हो तो पूरा दिन उसी पर निर्भर न रखें।

ऐसे समय में स्थानीय जगहों, मैदानों और आसपास के पर्यटन स्थलों को अपनी योजना में शामिल करें। शाम तक श्रीनगर लौटने की कोशिश करें, खासकर अगर आप उसी दिन वापस जाना चाहते हैं।

दो दिन का सफर ज्यादा आरामदायक रहेगा

अगर आपके पास दो दिन हैं तो Gulmarg को जल्दबाजी में देखने के बजाय एक रात यहीं रुकना बेहतर अनुभव दे सकता है। पहले दिन श्रीनगर से पहुंचकर होटल में सामान रखें और फिर आसपास के मैदान, चर्च, मंदिर और गोल्फ कोर्स जैसी जगहों पर आराम से घूम सकते हैं। शाम को होटल में बैठकर पहाड़ों का मौसम और ठंड का आनंद लेना भी यात्रा का हिस्सा बन सकता है।

अगले दिन सुबह गोंडोला के लिए निकलें। अगर मौसम साफ हो और फेज 2 चल रहा हो तो ऊपर जाकर पहाड़ों का नजारा लें। समय और रास्ते की स्थिति ठीक हो तो अलब्पाथर की तरफ जाने की योजना बनाई जा सकती है।

दो दिन रखने का फायदा यह है कि अगर पहले दिन मौसम खराब हो जाए या गोंडोला का संचालन प्रभावित हो, तो आपके पास अगले दिन विकल्प रहता है। एक दिन की यात्रा में मौसम बिगड़ने पर पूरा प्लान बदल सकता है।

Gulmarg यात्रा का बजट कैसे समझें?

Gulmarg की यात्रा का खर्च आपके आने-जाने के साधन, होटल, मौसम और गतिविधियों पर काफी निर्भर करता है। श्रीनगर से टैक्सी लेने पर खर्च ज्यादा हो सकता है, जबकि साझा वाहन या पहले से तय परिवहन विकल्प बजट को कुछ नियंत्रित कर सकते हैं। होटल का किराया भी मौसम के हिसाब से बदलता है। बर्फबारी के समय मांग बढ़ने के कारण कमरे महंगे मिल सकते हैं।

अगर आपका बजट सीमित है तो यात्रा की तारीख पहले तय करके होटल की कीमतों की तुलना करना बेहतर रहेगा। इसके अलावा गोंडोला, खाने, स्थानीय वाहन, बर्फ से जुड़ी गतिविधियों और खरीदारी का खर्च अलग से जोड़ें। सिर्फ होटल और यात्रा का खर्च देखकर बजट तय करने से बाद में अतिरिक्त खर्च संभालना मुश्किल हो सकता है।

यात्रा से पहले मौसम और आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें

Gulmarg जैसी पहाड़ी जगहों में मौसम आपकी पूरी यात्रा बदल सकता है। सड़क खुली है या नहीं, बर्फ कितनी है, गोंडोला चल रहा है या नहीं और ऊंचाई वाले हिस्से में जाना सुरक्षित है या नहीं—इन सभी चीजों की जानकारी यात्रा से पहले लेना जरूरी है। खासकर सर्दियों में सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो देखकर वर्तमान स्थिति का अंदाजा न लगाएं।

Gulmarg

जिस तारीख को आप जा रहे हैं, उसी तारीख की मौसम और स्थानीय प्रशासन से जुड़ी जानकारी को प्राथमिकता दें। यात्रा जितनी खूबसूरत हो, उतनी ही जिम्मेदारी से करना भी जरूरी है। पहाड़ों में जल्दबाजी करने के बजाय मौसम और स्थानीय नियमों के हिसाब से चलना हमेशा बेहतर रहता है।

आखिर क्यों याद रह जाता है Gulmarg का सफर?

कश्मीर में घूमने की कई खूबसूरत जगहें हैं, लेकिन Gulmarg की खासियत यह है कि यहां एक ही जगह पर मौसम, पहाड़, बर्फ, हरियाली, रोमांच और स्थानीय संस्कृति सब कुछ देखने को मिलता है। सर्दियों में यह सफेद बर्फ की दुनिया जैसा लगता है और गर्मियों में वही मैदान हरे रंग में बदल जाते हैं।

अगर आप सिर्फ गोंडोला की सवारी करके वापस आ जाएंगे तो शायद इस जगह का एक छोटा हिस्सा ही देख पाएंगे। असली अनुभव तब मिलेगा जब आप इसके मैदानों में थोड़ा समय बिताएंगे, पुराने चर्च और मंदिर देखेंगे, स्थानीय खाना चखेंगे और पहाड़ों के बदलते मौसम को महसूस करेंगे।

इसलिए 2026 में अगर आपकी कश्मीर यात्रा की योजना बन रही है, तो Gulmarg के लिए कम से कम एक पूरा दिन जरूर रखें। और अगर समय हो तो दो दिन का कार्यक्रम बनाएं, ताकि मौसम के साथ थोड़ा लचीलापन भी रहे और आपको हर जगह जल्दबाजी में न देखनी पड़े।

Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव

  • गोंडोला की बुकिंग पहले करें। यात्रा की तारीख तय होते ही आधिकारिक माध्यम से गोंडोला की उपलब्धता और टिकट की जानकारी जांच लें। अनजान एजेंट या नकली वेबसाइट से टिकट लेने से बचें।
  • मौसम देखकर दिन का प्लान बदलें। पहाड़ों का मौसम कभी भी बदल सकता है। फेज 2 बंद होने की स्थिति में आसपास के गोल्फ कोर्स, चर्च, मंदिर और दूसरे स्थानों को अपनी योजना में रखें।
  • जूते और कपड़ों में समझौता न करें। खासकर बर्फ के मौसम में अच्छे ग्रिप वाले वाटरप्रूफ जूते और लेयरिंग वाले गर्म कपड़े साथ रखें। सिर्फ एक भारी जैकेट पूरी ठंड के लिए पर्याप्त नहीं होती।
  • ऊंचाई पर शरीर की सुनें। अफहरवत जैसी ऊंचाई वाली जगहों पर सिरदर्द, चक्कर या सांस लेने में परेशानी महसूस हो तो खुद को जबरदस्ती आगे न बढ़ाएं। आराम करें और जरूरत पड़ने पर नीचे लौटें।
  • बजट में अतिरिक्त खर्च जोड़कर चलें। होटल, टैक्सी और गोंडोला के अलावा खाने, स्थानीय वाहन, गतिविधियों और जरूरी सामान का खर्च भी पहले से जोड़ें। इससे यात्रा के दौरान अचानक बजट बिगड़ने की परेशानी कम होगी।
Shivani Pal

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