Destination Latest Travel

Mussoorie Travel: 2 दिन में घूमने की पूरी Budget Guide

Mussoorie

Delhi की गर्मी, रोज का ट्रैफिक, ऑफिस या कॉलेज की भागदौड़ और ऊपर से वही रोज का रूटीन… ऐसे में कई बार मन करता है कि बस बैग उठाओ और कहीं पहाड़ों की तरफ निकल जाओ। अगर आपके पास सिर्फ दो दिन हैं और आप ऐसी जगह ढूंढ रहे हैं जहां ज्यादा लंबी छुट्टी भी न लेनी पड़े, तो मसूरी एक आसान और खूबसूरत विकल्प बन जाता है।

Delhi से ज्यादा दूर नहीं, रास्ता भी सीधा और पहुंचने के बाद आपके पास घूमने के लिए पहाड़, झरने, पुराने बाजार, कैफे, जंगल और खूबसूरत व्यू-पॉइंट सब कुछ है। यही वजह है कि Mussoorie सिर्फ लंबे ट्रिप के लिए नहीं, बल्कि वीकेंड पर जल्दी से घूम आने वालों के बीच भी काफी पसंद की जाती है। लेकिन अगर आप पहली बार जा रहे हैं तो एक सवाल जरूर आएगा—दो दिन में आखिर क्या-क्या देखा जाए?

क्या सिर्फ मॉल रोड और कैम्पटी फॉल देखकर वापस आ जाना चाहिए या फिर मसूरी के आसपास की ऐसी जगहें भी हैं जहां कम भीड़ मिलती है? इसीलिए इस गाइड में हम Mussoorie को सिर्फ एक सामान्य हिल स्टेशन की तरह नहीं, बल्कि दो दिन के एक ऐसे ट्रिप की तरह समझेंगे जिसमें आपको घूमने के साथ थोड़ा सुकून भी मिले। Delhi से पहुंचने के रास्ते से लेकर बजट, खाने की जगहों, लैंडौर, जबरखेत और सैंजी गांव तक, पूरी यात्रा हैं।

दो दिन के लिए Mussoorie क्यों है इतना आसान वीकेंड प्लान?

Mussoorie की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां जाने के लिए आपको एक हफ्ते की छुट्टी नहीं चाहिए। Delhi से सड़क के रास्ते देहरादून होते हुए मसूरी पहुंचा जा सकता है और अगर आप शुक्रवार रात निकलते हैं तो शनिवार की सुबह से ही अपना ट्रिप शुरू कर सकते हैं। यही तरीका उन लोगों के लिए काफी अच्छा है जो ऑफिस या कॉलेज के कारण ज्यादा छुट्टी नहीं ले पाते।

Mussoorie

शुक्रवार रात बस पकड़िए, सुबह देहरादून पहुंचिए और वहां से मसूरी निकल जाइए। इस तरह आपके शनिवार और रविवार दोनों दिन घूमने के लिए मिल जाते हैं। हालांकि वीकेंड पर यही सुविधा कभी-कभी परेशानी भी बन जाती है। शुक्रवार रात और शनिवार सुबह बड़ी संख्या में लोग पहाड़ों की तरफ निकलते हैं, जिसकी वजह से देहरादून से मसूरी वाले रास्ते पर ट्रैफिक बढ़ सकता है।

इसलिए Mussoorie की दो दिन की यात्रा में समय का सही इस्तेमाल बहुत जरूरी है। अगर आप शनिवार को सुबह देर से पहुंचेंगे तो दिन का काफी हिस्सा रास्ते और ट्रैफिक में निकल सकता है। इसलिए जितना जल्दी पहुंचेंगे, उतना ज्यादा समय आपको असल में घूमने के लिए मिलेगा।

Delhi से मसूरी कैसे पहुंचें? कार या बस, क्या रहेगा बेहतर?

Delhi से Mussoorie की दूरी करीब 250 से 260 किलोमीटर के आसपास है। अपनी कार से जाने पर Delhi से देहरादून की तरफ निकलकर आगे मसूरी का पहाड़ी रास्ता पकड़ना होता है। Delhi-देहरादून एक्सप्रेसवे की वजह से यात्रा के कुछ हिस्से पहले की तुलना में आसान हुए हैं, लेकिन आखिरी पहाड़ी हिस्सा अभी भी मौसम और ट्रैफिक के हिसाब से समय ले सकता है। अगर आप अपनी कार से जा रहे हैं तो सुबह बहुत जल्दी निकलना बेहतर रहेगा।

खासकर वीकेंड पर सुबह के समय शहरों से निकलने वाली भीड़ से बच जाएंगे और पहाड़ी चढ़ाई भी दिन में आराम से कर पाएंगे। कार से जाने का फायदा यह है कि आपके पास आसपास की जगहों तक जाने की आजादी रहती है। लेकिन अगर सिर्फ दो लोग जा रहे हैं तो पेट्रोल, टोल और पार्किंग जोड़ने के बाद यह बस से महंगा पड़ सकता है।

दूसरी तरफ बस बजट यात्रियों के लिए काफी काम की है। Delhi के कश्मीरी गेट से देहरादून के लिए रात में कई बसें मिल जाती हैं। किराया बस के प्रकार के हिसाब से बदलता है, इसलिए बुकिंग से पहले उस दिन का किराया देख लेना बेहतर है। देहरादून पहुंचने के बाद मसूरी के लिए स्थानीय बस या टैक्सी ली जा सकती है। अगर आपका लक्ष्य कम खर्च में Mussoorie घूमना है तो सार्वजनिक परिवहन वाला विकल्प काफी पैसा बचा सकता है।

दो दिन की यात्रा में पहला दिन कैसे बिताएं?

दो दिन के ट्रिप में सबसे बड़ी गलती होती है कि पहले ही दिन बहुत सारी जगहों को ठूंस दिया जाए। इससे घूमने का मजा कम और जगह-जगह भागने की परेशानी ज्यादा हो जाती है। इसलिए पहले दिन ऐसी जगहों को रखें जो एक-दूसरे के रास्ते में आती हों। अगर आप सुबह मसूरी पहुंचते हैं तो सामान होटल में रखकर पहले कैम्पटी फॉल की तरफ जा सकते हैं।

इसके बाद वापस शहर की तरफ आते हुए क्लाउड्स एंड या दूसरे आसपास के स्थान देखे जा सकते हैं। दोपहर बाद गन हिल और कैमेल्स बैक रोड का समय रखा जा सकता है। शाम को मॉल रोड पर आराम से घूमना इस दिन का अच्छा अंत रहेगा। इस तरह आपका पहला दिन प्रकृति, व्यू-पॉइंट और मसूरी की शाम—तीनों का मिश्रण बन सकता है।

कैम्पटी फॉल से शुरू करें पहाड़ी सफर

कैम्पटी फॉल Mussoorie के सबसे चर्चित पर्यटन स्थलों में से एक है। मसूरी से करीब 15 किलोमीटर दूर यह झरना पहाड़ों से नीचे गिरते पानी की वजह से खास लगता है। यहां पानी के आसपास बैठने और मौसम अच्छा हो तो पानी में उतरने का अनुभव भी लिया जा सकता है।

लेकिन यहां एक बात ध्यान रखें कि वीकेंड पर कैम्पटी फॉल में भीड़ काफी बढ़ सकती है। इसलिए अगर आप शांत माहौल चाहते हैं तो सुबह जल्दी पहुंचने की कोशिश करें। झरने के आसपास छोटी-छोटी खाने की दुकानें भी मिलती हैं।

पहाड़ों में घूमते हुए गरमा-गरम चाय और मैगी का अपना अलग मजा है। हालांकि खाने की कीमत और उपलब्धता जगह के हिसाब से बदल सकती है, इसलिए सिर्फ फोटो देखकर बहुत सटीक बजट न बनाएं। कैम्पटी फॉल को दो घंटे के आसपास का समय देना काफी हो सकता है, लेकिन अगर आप वहां ज्यादा समय बिताना चाहते हैं तो आगे के कार्यक्रम को उसी हिसाब से रखें।

क्लाउड्स एंड: जहां जाकर शहर पीछे छूट जाता है

अगर Mussoorie की भीड़ से थोड़ी दूरी चाहिए तो क्लाउड्स एंड का रास्ता आपको ज्यादा शांत अनुभव दे सकता है। यह इलाका घने जंगलों से घिरा है और यहां पहुंचते-पहुंचते शहर की आवाजाही काफी कम महसूस होने लगती है। रास्ते में देवदार और ओक के पेड़, पहाड़ी मोड़ और खुली घाटियां आपको लगातार अपनी तरफ खींचती हैं।

अगर मौसम साफ हो तो आसपास के पहाड़ और घाटी के दृश्य काफी अच्छे दिखाई देते हैं। क्लाउड्स एंड को देखने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि यहां जल्दी-जल्दी फोटो लेकर वापस न आएं। कुछ समय रुकें, आसपास टहलें और मौसम का आनंद लें। अगर आपका उद्देश्य सिर्फ मशहूर जगहों की सूची पूरी करना नहीं बल्कि Mussoorie को थोड़ा महसूस करना है, तो यह जगह आपके कार्यक्रम में जरूर होनी चाहिए।

गन हिल और कैमेल्स बैक रोड पर शाम का मजा

पहले दिन दोपहर के बाद गन हिल का रुख किया जा सकता है। यह मसूरी के प्रमुख व्यू-पॉइंट्स में शामिल है और यहां से आसपास की पहाड़ियों तथा देहरादून की तरफ का दृश्य देखा जा सकता है। गन हिल तक पहुंचने के लिए रोपवे का विकल्प भी मिलता है, हालांकि किराया और संचालन की स्थिति समय के साथ बदल सकती है।

इसलिए जाने से पहले मौजूदा टिकट दर और संचालन की जानकारी देख लें। इसके बाद कैमेल्स बैक रोड पर पैदल घूमना एक अच्छा विकल्प है। यह रास्ता अपने प्राकृतिक आकार और पहाड़ी माहौल के लिए जाना जाता है। शाम के समय यहां टहलते हुए सूर्यास्त और आसपास के पहाड़ों का नजारा काफी खूबसूरत लग सकता है। यही वह समय है जब Mussoorie का दूसरा रूप दिखता है—दिनभर घूमने वाली भीड़ के बाद शाम की ठंडी हवा और पहाड़ी रास्तों पर धीमी चाल।

मॉल रोड पर सिर्फ खरीदारी नहीं, मसूरी की शाम देखिए

मॉल रोड Mussoorie की सबसे पहचान वाली जगहों में से एक है। यहां दुकानों, खाने-पीने की जगहों और लोगों की आवाजाही के बीच शाम काफी चहल-पहल वाली रहती है। यहां आपको स्थानीय चीजों से लेकर कपड़े, छोटी-मोटी यादगार चीजें और खाने-पीने के कई विकल्प मिल जाएंगे। लेकिन मॉल रोड का मजा सिर्फ खरीदारी में नहीं है।

शाम को बिना किसी जल्दी के सड़क पर घूमना, किसी दुकान से कुछ खाना और फिर किसी शांत जगह बैठकर पहाड़ी हवा का मजा लेना भी अपने आप में एक अनुभव है। अगर आप दो दिन की यात्रा में Mussoorie आए हैं तो कम से कम एक शाम मॉल रोड के लिए जरूर रखें। यहां की शाम आपको शहर की पर्यटन वाली पहचान से रूबरू कराती है।

दूसरे दिन की शुरुआत लैंडौर से करें

अगर पहला दिन मसूरी के लोकप्रिय स्थानों में बीता है तो दूसरे दिन थोड़ा अलग रास्ता पकड़ें और लैंडौर की तरफ जाएं। लैंडौर Mussoorie के ऊपर बसा शांत इलाका है, जहां पुराने औपनिवेशिक दौर की इमारतें, देवदार के पेड़, शांत सड़कें और पहाड़ी वातावरण देखने को मिलता है। यहां घूमते समय सबसे जरूरी चीज है—जल्दबाजी न करना।

Mussoorie

लैंडौर का मजा किसी बड़े पर्यटन स्थल की तरह नहीं है जहां आपको एक के बाद एक दस चीजें देखनी हों। यहां असल खूबसूरती इसकी शांत गलियों और पुराने माहौल में है। सुबह का समय इसके लिए सबसे अच्छा हो सकता है। हवा ठंडी होती है और सड़कें भी दिन के मुकाबले शांत मिल सकती हैं।

लाल टिब्बा और अपर चक्कर वॉक का अनुभव

लैंडौर में लाल टिब्बा सबसे लोकप्रिय स्थानों में गिना जाता है। यहां से साफ मौसम में दूर की हिमालयी चोटियों के दृश्य देखने को मिल सकते हैं। यहां दूरबीन से पहाड़ देखने की सुविधा भी मिलती है, हालांकि मौसम साफ न होने पर आपको वह दृश्य नहीं मिल पाएगा जिसकी उम्मीद आपने तस्वीरों में की होगी।

लाल टिब्बा के बाद अगर समय और ऊर्जा हो तो आसपास की शांत सड़कों पर पैदल घूमना ज्यादा अच्छा रहेगा। अपर चक्कर की तरफ जाने वाले रास्तों में आपको Mussoorie के व्यस्त पर्यटन क्षेत्र से बिल्कुल अलग माहौल देखने को मिलता है। यही वजह है कि लैंडौर को सिर्फ एक फोटो स्पॉट की तरह देखने के बजाय धीरे-धीरे घूमना बेहतर है।

चार दुकान और सिस्टर्स बाजार में क्या खाएं?

लैंडौर की यात्रा चार दुकान और सिस्टर्स बाजार के बिना अधूरी लग सकती है। चार दुकान इलाके में कई छोटे कैफे और खाने की जगहें हैं, जहां बैठकर पहाड़ी मौसम में नाश्ता किया जा सकता है। यहां जिंजर-लेमन टी, बन-ऑमलेट और दूसरे नाश्ते काफी लोकप्रिय हैं। इसके आसपास पुराने बाजार की छोटी दुकानों में स्थानीय और घर में बने उत्पाद भी मिलते हैं।

लैंडौर बेकहाउस जैसे लोकप्रिय स्थानों पर बेकरी की चीजें मिलती हैं, जबकि प्रकाश स्टोर जैसे पुराने स्टोर अपने स्थानीय उत्पादों के लिए जाने जाते हैं। हालांकि लोकप्रिय जगहों पर वीकेंड में भीड़ मिल सकती है, इसलिए अगर आप आराम से बैठना चाहते हैं तो सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहेगा।

तिब्बती खाने के लिए डोमा’ज़ इन का रुख करें

अगर आप सामान्य उत्तर भारतीय खाने से कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं तो लैंडौर में तिब्बती भोजन का स्वाद ले सकते हैं। थुकपा और फल्ले जैसी चीजें ठंडे मौसम में खास तौर पर अच्छी लगती हैं। डोमा’ज़ इन जैसे लोकप्रिय स्थानों पर तिब्बती स्वाद का अनुभव लिया जा सकता है।

लेकिन यहां भी वही बात लागू होती है—लोकप्रिय जगह पर जाने से पहले उस दिन के खुलने का समय और भीड़ की स्थिति देख लेना बेहतर है। दो दिन की यात्रा में खाने को सिर्फ पेट भरने की चीज न मानें। पहाड़ी यात्रा में स्थानीय और अलग तरह के स्वाद भी पूरे अनुभव का हिस्सा होते हैं।

जॉर्ज एवरेस्ट हाउस में दिन का सबसे खूबसूरत अंत

दूसरे दिन शाम को हाथीपांव की तरफ जॉर्ज एवरेस्ट हाउस जा सकते हैं। यह जगह भारत के पूर्व सर्वेयर जनरल सर जॉर्ज एवरेस्ट से जुड़ी ऐतिहासिक इमारत और आसपास के खुले पहाड़ी दृश्यों के कारण जानी जाती है। यहां का खुला वातावरण और दूर तक दिखाई देने वाली पहाड़ियां इसे सूर्यास्त के लिए लोकप्रिय बनाती है। अगर मौसम साफ हो तो शाम का दृश्य काफी खूबसूरत हो सकता है।

हालांकि यहां जाने का समय रखते हुए वापसी का रास्ता भी ध्यान में रखें। पहाड़ी इलाकों में अंधेरा होने के बाद यात्रा करना दिन की तुलना में अलग अनुभव हो सकता है। इसलिए सूर्यास्त देखने के बाद बहुत देर तक रुकने के बजाय अपनी वापसी की योजना पहले से बना लेना बेहतर रहेगा।

Mussoorie के छिपे हुए रास्ते: भीड़ से दूर जाना है तो यहां जाएं

अगर आपने Mussoorie की सामान्य जगहें देख ली हैं और अब कुछ अलग करना चाहते हैं, तो आसपास के कम चर्चित इलाकों की तरफ जा सकते हैं। लैंडौर का शांत हिस्सा, जबरखेत नेचर रिजर्व और सैंजी गांव जैसे स्थान आपको पर्यटन वाले मसूरी से अलग अनुभव देते हैं।

लेकिन इन जगहों पर जाते समय एक बात याद रखें—हर जगह को सिर्फ इसलिए “हिडन” मानकर न जाएं क्योंकि इंटरनेट पर उसका नाम कम दिखाई देता है। किसी भी प्राकृतिक क्षेत्र में जाने से पहले उसके खुलने का समय, प्रवेश नियम, गाइड की जरूरत और स्थानीय नियम जांच लेना जरूरी है।

जबरखेत नेचर रिजर्व में जंगल को करीब से देखें

जबरखेत नेचर रिजर्व Mussoorie के आसपास प्रकृति पसंद करने वालों के लिए खास जगह है। यहां जंगल के अंदर अलग-अलग ट्रेल्स पर वॉक की जा सकती है और गाइड के साथ प्रकृति को समझने का मौका मिलता है। यह जगह उन लोगों के लिए ज्यादा अच्छी है जिन्हें सिर्फ व्यू-पॉइंट पर खड़े होकर फोटो लेने के बजाय जंगल, पेड़-पौधों और स्थानीय वन्यजीवन को करीब से देखना पसंद है।

यहां वन्यजीव दिखना तय नहीं है। जंगल में तेंदुआ या दूसरे जानवर कैमरा ट्रैप में दर्ज हुए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर यात्री को वे दिखाई देंगे। इसलिए इसे वन्यजीव देखने की गारंटी वाली जगह की तरह नहीं, बल्कि नेचर वॉक के रूप में देखना बेहतर है।

सैंजी कॉर्न विलेज की अलग पहचान

कैम्पटी फॉल के आसपास सैंजी गांव अपनी एक खास पहचान के लिए जाना जाता है। गांव के कई घरों के बाहर मक्के के भुट्टे सूखते हुए दिखाई देते हैं, जिसकी वजह से इसे कॉर्न विलेज के नाम से भी जाना जाता है। यहां की सबसे खूबसूरत बात कोई बड़ा पर्यटन ढांचा नहीं, बल्कि गांव की सामान्य जिंदगी है।

घरों की बनावट, छोटे रास्ते, पहाड़ी वातावरण और स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आपको उत्तराखंड के गांवों को करीब से देखने का मौका देती है। अगर यहां जाएं तो इसे सिर्फ फोटो खींचने की जगह न समझें। गांव के लोगों की निजता का सम्मान करें और बिना अनुमति किसी के घर या व्यक्ति की फोटो न लें।

दो दिन की Mussoorie ट्रिप का बजट कितना रखें?

अगर आप बस से Delhi से देहरादून जाते हैं, लोकल बस या साझा परिवहन का इस्तेमाल करते हैं और होटल दो लोगों में शेयर करते हैं, तो दो दिन का ट्रिप काफी कम बजट में किया जा सकता है। लेकिन ₹6,000 का बजट हर व्यक्ति के लिए हर मौसम में एक जैसा नहीं रहेगा।

वीकेंड, छुट्टियों, त्योहारों और पर्यटन सीजन में होटल और परिवहन की कीमतें बढ़ सकती है। एक सामान्य बजट में Delhi-देहरादून आने-जाने का किराया, देहरादून से मसूरी का स्थानीय किराया, दो रातों का साझा होटल, खाना और कुछ प्रवेश टिकट शामिल किए जा सकते हैं। अगर आप दो लोग हैं और कम खर्च वाला होटल शेयर करते हैं तो स्टे का प्रति व्यक्ति खर्च काफी कम हो जाता है।

इसी तरह लोकल बस या साझा वाहन लेने से परिवहन पर बचत हो सकती है। वहीं अगर आप निजी टैक्सी, महंगा कैफे और अलग कमरा लेते हैं तो यही ट्रिप आसानी से ₹6,000 से ऊपर जा सकती है। इसलिए बजट तय करते समय यह देखना जरूरी है कि आप किस तरह की यात्रा करना चाहते हैं।

Mussoorie में पैसे बचाने का सबसे आसान तरीका

अगर आपका बजट सीमित है तो सबसे पहले होटल की जगह और यात्रा का समय सही चुनें। मॉल रोड के बिल्कुल बीच में होटल लेना जरूरी नहीं है। थोड़ा बाहर रहने पर कीमत कम मिल सकती है, हालांकि आने-जाने का खर्च और समय भी ध्यान में रखना होगा। दूसरा बड़ा खर्च खाना हो सकता है। हर भोजन महंगे कैफे में करने के बजाय स्थानीय ढाबे, छोटी दुकानों और साधारण रेस्तरां का विकल्प रखें।

तीसरी चीज है स्थानीय परिवहन। जहां संभव हो बस या साझा वाहन का इस्तेमाल करें। अगर स्कूटी किराए पर लेते हैं तो लाइसेंस, सुरक्षा और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखें। इस तरह Mussoorie को कम बजट में घूमना संभव हो सकता है, लेकिन बहुत कम बजट के लिए हर चीज पहले से बुक और जांच लेना जरूरी है।

Mussoorie जाते समय इन बातों का ध्यान जरूर रखें

पहाड़ी यात्रा में मौसम का सबसे ज्यादा असर होता है। बारिश के समय सड़क पर फिसलन और ट्रैफिक बढ़ सकता है, जबकि सर्दियों में ठंड और कभी-कभी मौसम के कारण यात्रा की स्थिति बदल सकती है। वीकेंड पर पार्किंग और ट्रैफिक भी बड़ी समस्या बन सकते हैं।

Mussoorie

इसलिए अपनी कार लेकर जा रहे हैं तो होटल की पार्किंग पहले से कन्फर्म करें और शहर में हर जगह कार लेकर जाने की कोशिश न करें। लैंडौर जैसे शांत इलाकों में तेज संगीत और हॉर्न से बचें।

प्राकृतिक जगहों पर प्लास्टिक या कचरा बिल्कुल न छोड़ें। और सबसे जरूरी—सिर्फ दो दिन हैं तो भी पूरे पहाड़ को एक साथ देखने की कोशिश न करें। दो दिन में कम जगहें देखना लेकिन आराम से देखना, दस जगहों पर जाकर हर जगह सिर्फ पंद्रह मिनट बिताने से ज्यादा अच्छा रहेगा।

दो दिन का पूरा Mussoorie प्लान एक नजर में

अगर आप शुक्रवार रात Delhi से निकल रहे हैं तो शनिवार सुबह देहरादून पहुंचकर मसूरी जा सकते हैं। होटल में सामान रखने के बाद कैम्पटी फॉल, क्लाउड्स एंड और फिर गन हिल या कैमेल्स बैक रोड को कार्यक्रम में रखा जा सकता है। शाम मॉल रोड पर बिताएं। रविवार सुबह लैंडौर जाएं। लाल टिब्बा, शांत पैदल रास्ते, चार दुकान और सिस्टर्स बाजार को समय दें।

इसके बाद तिब्बती खाना खाकर दोपहर में जॉर्ज एवरेस्ट हाउस की तरफ जा सकते हैं। शाम को देहरादून लौटकर रात की बस पकड़ना आपके लिए सुविधाजनक हो सकता है। अगर आप कार से हैं तो वापसी के समय भी ट्रैफिक और पहाड़ी सड़क की स्थिति को ध्यान में रखें। इस तरह सिर्फ दो दिनों में Mussoorie के लोकप्रिय स्थानों के साथ लैंडौर और आसपास के कुछ शांत इलाकों को भी देखा जा सकता है।

Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव

  • अगर आपके पास सिर्फ शनिवार और रविवार की छुट्टी है तो रात की बस या देर रात कार से निकलना समय बचा सकता है। शनिवार सुबह जितनी जल्दी मसूरी पहुंचेंगे, उतना ज्यादा समय आपके पास घूमने के लिए रहेगा।
  • Mussoorie के लोकप्रिय इलाकों में शनिवार और रविवार को काफी भीड़ हो सकती है। इसलिए कैम्पटी फॉल और लैंडौर जैसी जगहों पर सुबह जल्दी जाना और शहर के व्यस्त हिस्सों में बाद में घूमना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा।
  • अगर आप कार से जा रहे हैं तो सिर्फ कमरे की कीमत देखकर होटल बुक न करें। पहले यह कन्फर्म करें कि पार्किंग उपलब्ध है या नहीं और वहां से मुख्य पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंचना कितना आसान रहेगा।
  • गर्मियों में भी पहाड़ों की शाम अचानक ठंडी लग सकती है और बारिश के बाद तापमान और नीचे जा सकता है। इसलिए मौसम चाहे जैसा हो, एक हल्का गर्म कपड़ा और जरूरत के हिसाब से छाता या रेन जैकेट साथ रखें।
  • मॉल रोड और कैम्पटी फॉल जरूर देखें, लेकिन समय मिले तो लैंडौर, जबरखेत या आसपास के गांवों की तरफ भी जाएं। इन जगहों पर आपको Mussoorie का थोड़ा शांत और स्थानीय रूप देखने को मिलेगा।

Mussoorie की खूबसूरती सिर्फ इस बात में नहीं है कि यहां कितने पर्यटन स्थल हैं। असली मजा तो उस ठंडी हवा, घुमावदार पहाड़ी सड़कों, पुराने घरों, छोटे कैफे और रास्ते में अचानक सामने आ जाने वाले खूबसूरत नजारों में है। इसलिए अगर आपके पास सिर्फ दो दिन हैं तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं।

बस कार्यक्रम को थोड़ा समझदारी से बनाइए, सुबह जल्दी निकलिए, जरूरत से ज्यादा जगहें एक दिन में मत भरिए और पहाड़ों को देखने के लिए थोड़ा खाली समय जरूर बचाकर रखिए। यही छोटा-सा बदलाव आपके Mussoorie ट्रिप को सिर्फ घूमने की यात्रा नहीं, बल्कि एक अच्छी वीकेंड याद बना सकता है।

Shivani Pal

Shivani Pal

About Author

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Culture Himachal Pradesh Travel

Chail- Amazing places to visit in Chail

चंडीगढ़ से महज 110 किमी की दूरी पर है खूबसूरत चैल हिल स्टेशन by Pardeep Kumar मैं प्रदीप कुमार फाइव
Culture Destination Lifestyle Uttar Pradesh

Garh Mukteshwar

Garh Mukteshwar – गढ़मुक्तेश्वर: जहाँ कौरवों और पांडवों का पिंडदान हुआ था By Pardeep Kumar नमस्कार, आदाब, सत श्री अकाल