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Vrindavan Travel: कैसे जाएं, क्या देखें और क्या खाएं

Vrindavan

सुबह के करीब छह बजे का समय था। दिल्ली अभी पूरी तरह जागी भी नहीं थी और हमारी गाड़ी वृंदावन की तरफ निकल चुकी थी। मन में बस यही था कि दो दिन में जितना हो सके, वृंदावन को थोड़ा करीब से देखा जाए। सिर्फ बड़े मंदिरों के दर्शन नहीं, बल्कि यहां की गलियां, बाजार, खाना और शाम का माहौल भी महसूस किया जाए।

जन्माष्टमी के आसपास वृंदावन जाना अपने आप में अलग अनुभव है। शहर में कदम रखते ही जगह-जगह कृष्ण भक्ति से जुड़े रंग दिखाई देने लगते हैं। कहीं मंदिर से भजन की आवाज आ रही होती है, कहीं दुकान के बाहर लड्डू गोपाल के कपड़े सजे होते हैं और कहीं दीवारों पर बनी कृष्ण की तस्वीरें आपका ध्यान खींच लेती हैं। हमारी यह Vrindavan यात्रा भी कुछ ऐसी ही रही।

दो दिनों में हमने इस्कॉन मंदिर से लेकर रंगनाथ मंदिर और केशी घाट तक कई जगहें देखीं। बीच में कुछ ऐसी स्थानीय खाने की चीजें भी मिलीं, जिनके लिए किसी बड़े रेस्टोरेंट की जरूरत ही नहीं पड़ी। अगर आप भी Vrindavan Travel की योजना बना रहे हैं, खासकर दिल्ली से दो दिन के लिए, तो यह यात्रा आपके लिए एक अच्छा आइडिया दे सकती है कि यहां पहुंचकर दिन कैसे बिताया जा सकता है

दिल्ली से Vrindavan तक का सफर

दिल्ली से Vrindavan जाने के लिए हमने सड़क का रास्ता चुना। सुबह जल्दी निकलने का फायदा यह रहा कि रास्ते में ट्रैफिक ज्यादा नहीं मिला। बदरपुर बॉर्डर पार करने के बाद वल्लभगढ़ और फरीदाबाद की तरफ से होते हुए हम आगे बढ़े और फिर एक्सप्रेसवे पकड़ लिया। करीब दो घंटे के सफर के बाद सुबह लगभग 8:15 बजे हम Vrindavan पहुंच गए।

अगर आप अपनी गाड़ी से जा रहे हैं तो यात्रा का बजट बनाते समय टोल का खर्च भी जोड़ना अच्छा रहेगा। हमारे रास्ते में गढ़पुरी और करमन की तरफ टोल देना पड़ा और आने-जाने का कुल खर्च करीब ₹560 के आसपास रहा। टोल और सड़क की व्यवस्था समय के साथ बदल सकती है, इसलिए यात्रा से पहले ताजा जानकारी देख लेना बेहतर है। Vrindavan पहुंचने के बाद सबसे पहले हमने थोड़ा नाश्ता किया और फिर इस्कॉन मंदिर की तरफ निकल गए।

Vrindavan की गलियों में पहला कदम

Vrindavan को समझने के लिए शायद सबसे अच्छा तरीका यही है कि कुछ देर इसकी गलियों में पैदल चला जाए। यहां की सड़कें और गलियां आपको एकदम अलग माहौल में ले जाती हैं। मंदिरों के आसपास छोटी-छोटी दुकानें हैं। कहीं भगवान के कपड़े मिल रहे हैं, कहीं मुकुट और आभूषण सजे हैं और कहीं लड्डू गोपाल के लिए छोटी-छोटी पोशाकें रखी हैं।

Vrindavan

दीवारों पर बनी कृष्ण और राधा की चित्रकारी भी इस पूरे माहौल को और खूबसूरत बनाती है। हालांकि त्योहारों के दिनों में यहां भीड़ काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में अपनी गाड़ी को मंदिर के बिल्कुल पास ले जाने की कोशिश करने के बजाय पार्किंग में खड़ी करके आगे ई-रिक्शा लेना ज्यादा सुविधाजनक रहता है। कई जगहों पर बैरिकेडिंग की वजह से वाहनों की आवाजाही सीमित रहती है। हमें भी आगे जाने के लिए ई-रिक्शा लेना पड़ा, जिसका किराया करीब ₹10 प्रति व्यक्ति था।

ISKCON Temple में दर्शन का अनुभव

Vrindavan आने वालों के लिए इस्कॉन मंदिर आमतौर पर यात्रा की सूची में रहता ही है। मंदिर का वातावरण बाकी शहर से थोड़ा अलग महसूस होता है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से आए भक्तों के साथ बड़ी संख्या में विदेशी भक्त भी नजर आते हैं। मंदिर में प्रवेश करने के बाद सफेद संगमरमर का बड़ा और साफ परिसर दिखाई देता है।

मुख्य मंदिर में कृष्ण-बलराम के साथ स्वामी प्रभुपाद जी की प्रतिमाएं हैं। पास ही राधा-कृष्ण और गोपियों के दर्शन भी होते हैं। मंदिर के बाहर और आसपास धार्मिक किताबों से लेकर भगवान के वस्त्रों तक काफी चीजें मिलती हैं। अगर आप Vrindavan से लड्डू गोपाल के लिए कपड़े, मुकुट या कोई छोटी धार्मिक वस्तु लेना चाहते हैं तो यहां कई दुकानें मिल जाएंगी।

मंदिर के सामने सामान रखने के लिए लगेज रूम की सुविधा भी है। सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। मंदिर जाते समय जूते-चप्पल भी जूता घर में जमा करना ज्यादा ठीक रहता है।

इस्कॉन मंदिर कब जाएं?

इस्कॉन मंदिर में सुबह जप का समय करीब 5:15 से 7 बजे तक बताया जाता है। सुबह के दर्शन 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक और शाम के दर्शन 4 बजे से रात 8:15 बजे तक होते हैं।

शाम के समय 7 से 8 बजे तक कीर्तन होता है और करीब 7:25 बजे संध्या आरती होती है। अगर आपकी Vrindavan trip का समय ऐसा है कि आप शाम तक यहां रुक रहे हैं, तो कीर्तन और आरती के आसपास का समय निकालना अच्छा रहेगा। त्योहारों और विशेष अवसरों पर मंदिर का कार्यक्रम बदल सकता है, इसलिए उसी दिन का समय जांच लेना जरूरी है।

कम बजट में Vrindavan में ठहरने का तरीका

Vrindavan में रहने के लिए आपको बहुत बड़ा बजट रखने की जरूरत नहीं है। यहां होटल के अलावा आश्रम और धर्मशाला जैसे विकल्प भी मिलते हैं। फोगला आश्रम में नॉन-एसी कमरे की कीमत करीब ₹500 और एसी कमरे की कीमत करीब ₹600 बताई गई। बजट में यात्रा करने वालों के लिए इस तरह के विकल्प काफी काम के हो सकते हैं। खाने के लिए भी यहां सात्विक भोजन की व्यवस्था मिलती है।

करीब ₹100 की थाली में रोटी, दाल, आलू की सब्जी, मिक्स वेज, रायता और सलाद जैसी चीजें शामिल थीं और भोजन अनलिमिटेड था। अगर आप परिवार या दोस्तों के साथ Vrindavan Travel कर रहे हैं और होटल पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना चाहते, तो आश्रमों के विकल्प पहले से देखना फायदेमंद हो सकता है।

प्रेम मंदिर के आसपास ठहरने का विकल्प

हमारी यात्रा के दौरान प्रेम मंदिर से करीब 1 से 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक होटल में भी ठहरने का अनुभव रहा। वहां थोड़ा आराम करने के बाद अगले पड़ाव की तैयारी की गई।

Vrindavan में जगह चुनते समय यह देखना जरूरी है कि आपका होटल या आश्रम किन मंदिरों और मुख्य इलाकों के पास है। क्योंकि एक जगह से दूसरी जगह की दूरी छोटी लग सकती है, लेकिन त्योहारों की भीड़ में आने-जाने में समय काफी लग जाता है। इसलिए सिर्फ कमरे की कीमत देखकर ठहरने की जगह तय करने के बजाय आसपास की लोकेशन भी देख लें।

रंगनाथ मंदिर: जब Vrindavan में दिखे दक्षिण भारत का रंग

अगले पड़ाव में हम रंगनाथ मंदिर पहुंचे। यहां पहुंचते ही सबसे पहले जो चीज ध्यान खींचती है, वह है मंदिर की बनावट। Vrindavan के बाकी प्रसिद्ध मंदिरों से इसकी स्थापत्य शैली काफी अलग दिखाई देती है और इसमें दक्षिण भारतीय मंदिरों की साफ झलक मिलती है। यह मंदिर भगवान रंगनाथ यानी भगवान विष्णु को समर्पित है।

मंदिर के निर्माण को लेकर स्थानीय गाइड कुंज बिहारी जी ने कई जानकारियां साझा कीं। उनके अनुसार इसका निर्माण 1845 में शुरू हुआ था और 1851 में पूरा हुआ। मंदिर के निर्माण से जुड़ी कथा में सेठ लक्ष्मीचंद जैन और उनके गुरु रंगाचार्य जी का उल्लेख मिलता है। मंदिर को बनाने में जयपुर की पत्थर नक्काशी का भी इस्तेमाल हुआ था।

पूजा की परंपरा में दक्षिण भारत से जुड़े पुजारियों की भूमिका बताई जाती है। मंदिर परिसर में घूमते हुए आपको सिर्फ मुख्य गर्भगृह ही नहीं, बल्कि कई दूसरी चीजें भी देखने को मिलती हैं।

रंगनाथ मंदिर के अंदर क्या खास है?

मुख्य गर्भगृह में भगवान विष्णु को शेषनाग पर शयन करते हुए देखा जा सकता है। इसके साथ ही चल मूर्ति के दर्शन की भी परंपरा है। मंदिर के शिखर पर सात कलश होने की जानकारी मिलती है और परिसर में सात बड़े प्रवेश द्वार बताए जाते हैं। यहां वैकुंठ द्वार भी है, जिसके बारे में बताया जाता है कि इसे साल में एक बार वैकुंठ एकादशी के अवसर पर खोला जाता है।

मंदिर में सोने-चांदी से जुड़े हाथी, घोड़े और पालकी जैसे वाहन भी रखे हुए हैं। इनके दर्शन के लिए छोटा सा शुल्क लिया जाता है। गरुड़ स्तंभ भी मंदिर की खास चीजों में शामिल है। इसके अलावा हाऊ और बिलाऊ से जुड़ी मूर्तियां भी यहां देखने को मिलती हैं, जिनका संबंध बाल कृष्ण की पौराणिक कथा से बताया जाता है।

मंदिर परिसर में तिरुपति बालाजी से जुड़ा मंदिर भी है। इसलिए अगर आपको Vrindavan temples के साथ अलग-अलग स्थापत्य परंपराओं को देखने में दिलचस्पी है तो रंगनाथ मंदिर आपकी यात्रा में खास जगह बना सकता है।

मंदिरों के बीच बंदरों से बचकर चलें

Vrindavan की यात्रा में एक चीज आपको बार-बार याद रखनी पड़ेगी और वह है बंदरों से सावधानी। मंदिरों के आसपास बंदर काफी दिखाई देते हैं और हाथ में चश्मा, मोबाइल या खाने का सामान हो तो विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

अचानक बंदर सामान लेकर भाग सकते हैं। इसलिए मंदिरों के रास्ते में मोबाइल हाथ में लेकर ज्यादा देर तक न घूमें और चश्मा भी संभालकर रखें। छोटी सी सावधानी आपकी यात्रा को परेशानी से बचा सकती है। रंगनाथ मंदिर में जूते रखने के लिए जूता घर की सुविधा भी है, जिसका शुल्क करीब ₹2 प्रति जोड़ी बताया गया।

शाम को पहुंचें Keshi Ghat

दिनभर मंदिर घूमने के बाद Vrindavan में शाम बिताने के लिए केशी घाट की तरफ जाना हमारी यात्रा का अगला हिस्सा था। यमुना किनारे पहुंचते ही माहौल थोड़ा बदल जाता है। मंदिरों और बाजारों की भीड़ से अलग यहां नदी का किनारा और शाम की आरती देखने को मिलती है। आरती के समय घाट पर मंगल गीतों के बीच पूजा होती है।

आसपास नावें भी दिखाई देती हैं और चाहें तो नौका विहार का विकल्प लिया जा सकता है। शाम के समय Keshi Ghat पर बैठकर कुछ देर आसपास का माहौल देखना Vrindavan trip का काफी अच्छा हिस्सा हो सकता है। अगर आप यात्रा के दौरान सिर्फ मंदिरों की दौड़ में नहीं रहना चाहते, तो घाट के लिए समय जरूर निकालें।

Vrindavan

Vrindavan Food: मंदिरों के साथ स्वाद भी जरूरी है

Vrindavan घूमते हुए सिर्फ दर्शन ही नहीं, यहां का देसी खाना भी यात्रा का हिस्सा बन जाता है। मंदिरों के आसपास कई छोटी और पुरानी खाने की दुकानें हैं, जहां बिना ज्यादा खर्च किए स्थानीय स्वाद लिया जा सकता है।

रंगनाथ मंदिर के पास कांजी वड़ा और दही भल्ला खाने का मौका मिला। करीब ₹30 में मिलने वाले कांजी वड़े में हींग, राई और काले नमक का स्वाद वाला पानी डाला जाता है। गर्मी में इसका खट्टा-पाचक स्वाद काफी अच्छा लगता है। अगर आप Vrindavan food की तलाश कर रहे हैं तो बड़ी दुकानों के साथ-साथ ऐसी स्थानीय दुकानों को भी अपनी सूची में जगह दे सकते हैं।

लोई बाजार की कचौड़ी और जलेबी

Vrindavan की यात्रा में देसी नाश्ता करना है तो लोई बाजार की तरफ जाना बनता है। बांके बिहारी मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते से आगे लोई बाजार में सीताराम हलवाई की कचौड़ी काफी प्रसिद्ध बताई जाती है। यहां देसी घी में बनी कचौड़ी आलू की सब्जी और मीठी पेठे की सब्जी के साथ मिलती है। एक कचौड़ी करीब ₹25 की और दो करीब ₹50 की थीं।

इसके साथ देसी घी की जलेबी और पेड़े भी मिलते हैं। यहां बैठकर गरम कचौड़ी खाना आपको Vrindavan के उस रूप से मिलाता है जो सिर्फ मंदिरों की वजह से नहीं, बल्कि अपने पुराने बाजार और खाने की दुकानों की वजह से भी पहचाना जाता है।

Banke Bihari Temple और भारी भीड़

बांके बिहारी मंदिर Vrindavan की पहचान से जुड़ा हुआ नाम है। लेकिन यहां जाने से पहले भीड़ का अंदाजा जरूर रखें। हमारी यात्रा जन्माष्टमी के आसपास थी और उस समय भीड़ काफी ज्यादा थी।

इतनी भीड़ के कारण इस बार बांके बिहारी मंदिर के दर्शन नहीं हो पाए और आसपास के बाजार तथा खाने का आनंद लेकर वापस लौटना पड़ा। इससे एक बात साफ है कि त्योहारों के समय Vrindavan में यात्रा की योजना बनाते हुए सिर्फ यह तय करना काफी नहीं है कि कौन-कौन से मंदिर देखने हैं। यह भी देखना जरूरी है कि किस मंदिर में किस समय कितनी भीड़ हो सकती है और वहां पहुंचने में कितना वक्त लगेगा।

दो दिन में Vrindavan कैसे घूमें?

अगर आपके पास सिर्फ दो दिन हैं तो Vrindavan को आराम से देखने के लिए यात्रा की शुरुआत सुबह जल्दी करना बेहतर रहेगा। पहले दिन दिल्ली से निकलकर सुबह Vrindavan पहुंचें। नाश्ते के बाद इस्कॉन मंदिर जा सकते हैं। उसके बाद आसपास के बाजारों में घूमते हुए दोपहर का समय रखा जा सकता है। बजट में ठहरने के लिए आश्रम या धर्मशाला का विकल्प लिया जा सकता है। शाम को मंदिर का कीर्तन या आरती देखने के बाद आराम करें। दूसरे दिन रंगनाथ मंदिर से शुरुआत की जा सकती है।

मंदिर और आसपास के स्थान देखने के बाद स्थानीय खाना चखें। समय के अनुसार बांके बिहारी मंदिर की तरफ जाएं और शाम को केशी घाट पहुंचकर आरती देखें। इस तरह आपकी Vrindavan Travel यात्रा सिर्फ मंदिरों की सूची पूरी करने वाली यात्रा नहीं रहेगी, बल्कि आपको शहर को थोड़ा समझने का समय भी मिलेगा।

Vrindavan जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

Vrindavan में त्योहारों के समय सामान्य दिनों के मुकाबले काफी ज्यादा भीड़ हो सकती है। इसलिए अगर आप जन्माष्टमी जैसे अवसर पर जा रहे हैं तो यात्रा में अतिरिक्त समय जरूर रखें। मंदिरों के आसपास वाहन ले जाने की जगह कई बार पार्किंग करके आगे जाना पड़ सकता है। ई-रिक्शा इस दौरान काफी काम आता है। मंदिरों के आसपास अपना मोबाइल, चश्मा और बाकी सामान संभालकर रखें।

Vrindavan

बंदरों को खाने की चीज दिखाने या उनके बहुत करीब जाने से भी बचें। खाने के मामले में स्थानीय दुकानों पर कीमत पहले पूछ लेना अच्छा रहता है। और अगर आप बजट में Vrindavan trip करना चाहते हैं तो रहने और खाने की जगह पहले से तय कर लें।

हमारी Vrindavan यात्रा से क्या याद रहा?

Vrindavan की खासियत शायद यही है कि यहां हर जगह सिर्फ एक धार्मिक स्थल के तौर पर नहीं मिलती। मंदिर से बाहर निकलते ही बाजार शुरू हो जाता है, बाजार से आगे कोई छोटी सी खाने की दुकान मिल जाती है और कुछ दूर चलने पर कोई ऐसी गली आ जाती है जिसकी दीवार पर बनी तस्वीर आपका ध्यान रोक लेती है।

फिर शाम को वही यात्रा यमुना किनारे पहुंच जाती है, जहां घाट पर आरती हो रही होती है। हमारी दो दिन की Vrindavan Travel यात्रा में भी यही चीज सबसे ज्यादा याद रही। एक तरफ इस्कॉन मंदिर का अलग माहौल था, दूसरी तरफ रंगनाथ मंदिर की दक्षिण भारतीय स्थापत्य शैली और फिर केशी घाट की शाम। इसके बीच कांजी वड़ा, कचौड़ी, जलेबी और बाजार की छोटी-छोटी दुकानें इस यात्रा में अपना अलग स्वाद जोड़ती रहीं।

अगर आप पहली बार Vrindavan जा रहे हैं तो यात्रा को सिर्फ मंदिरों की सूची तक सीमित न रखें। थोड़ा समय यहां की गलियों के लिए निकालें, स्थानीय खाना खाएं, घाट पर बैठें और शहर को अपनी गति से देखने की कोशिश करें। यही छोटी-छोटी चीजें आपकी Vrindavan trip को यादगार बना सकती हैं।

Five Colors of Travel की ओर से खास सुझाव

  • दिल्ली से सड़क मार्ग से जा रहे हैं तो सुबह जल्दी निकलने पर यात्रा ज्यादा आराम से हो सकती है।
  • जन्माष्टमी जैसे मौकों पर मंदिरों के आसपास बहुत ज्यादा भीड़ हो सकती है। समय का अतिरिक्त ध्यान रखें।
  • मोबाइल, चश्मा और खाने का सामान संभालकर रखें, खासकर मंदिरों के आसपास।
  • कांजी वड़ा, कचौड़ी, जलेबी और पेड़े जैसे स्थानीय स्वादों के लिए पुरानी दुकानों को भी आजमाएं।
  • Vrindavan को सिर्फ एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक दौड़ते हुए देखने के बजाय गलियों, बाजार और केशी घाट के लिए भी समय बचाकर रखें।
Shivani Pal

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