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Hemis National Park: 7 Hidden Facts You Should Never Miss

भारत अपनी प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों की अद्भुत विविधता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां ऊंचे हिमालय, घने जंगल, रेगिस्तान, समुद्र और दलदली इलाके—सब कुछ एक ही देश में देखने को मिलता है। इन्हीं प्राकृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए देशभर में कई नेशनल पार्क बनाए गए हैं, जिनका उद्देश्य सिर्फ जंगली जानवरों की रक्षा करना नहीं, बल्कि उनके पूरे प्राकृतिक वातावरण को बचाना भी है

आज भारत में 100 से अधिक नेशनल पार्क हैं, लेकिन जब बात सबसे बड़े नेशनल पार्क की आती है, तो सबसे पहले Hemis National Park का नाम ज़रूर लिया जाता है। यह पार्क अपने विशाल क्षेत्रफल, ऊंचे पहाड़ों, दुर्लभ वन्यजीवों और बर्फीले रेगिस्तान जैसी अनोखी प्राकृतिक खूबसूरती के कारण दुनिया भर में मशहूर है।

अगर आप लद्दाख घूमने की योजना बना रहे हैं या आपको वन्यजीवों और एडवेंचर का शौक है, तो Hemis National Park आपके लिए किसी सपने से कम नहीं होगा। यहां आपको ऐसे नज़ारे देखने को मिलेंगे, जो भारत के किसी दूसरे हिस्से में शायद ही दिखाई दें।

क्या है Hemis National Park?

Hemis National Park भारत का सबसे बड़ा नेशनल पार्क है, जो केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लेह जिले में स्थित है। यह लगभग 4,400 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है, जिस वजह से इसे न केवल भारत बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के सबसे बड़े नेशनल पार्कों में गिना जाता है।

यह पार्क समुद्र तल से लगभग 3,000 मीटर से 6,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए यहां का मौसम साल के ज़्यादातर समय काफी ठंडा और शुष्क रहता है। ऊंचे पहाड़, गहरी घाटियां, बर्फ से ढकी चोटियां और दूर तक फैले सूखे पहाड़ी इलाके Hemis National Park को बाकी नेशनल पार्कों से बिल्कुल अलग पहचान देते हैं।

Hemis National Park का इतिहास

आज जिस Hemis National Park को पूरी दुनिया जानती है, उसकी शुरुआत वर्ष 1981 में राष्ट्रीय उद्यान के रूप में अधिसूचना से हुई थी। इस पार्क को बनाने का सबसे बड़ा उद्देश्य हिमालय के दुर्लभ और संकटग्रस्त वन्यजीवों को सुरक्षित रखना था, जिनकी संख्या बढ़ती मानव गतिविधियों और शिकार के कारण तेज़ी से घट रही थी।

सरकार ने इस पूरे ऊंचाई वाले इलाके को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया, ताकि यहां रहने वाले जानवर बिना खतरे के अपना जीवन जी सकें और उनका आवास सुरक्षित रह सके। समय के साथ इस पार्क का महत्व और बढ़ता गया और आज Hemis National Park दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण हाई एल्टीट्यूड वाइल्डलाइफ क्षेत्रों में गिना जाता है।

Hemis National Park

 अगर कोई पूछे कि Hemis National Park को बाकी नेशनल पार्कों से अलग क्या बनाता है, तो इसका जवाब कई बातों में छिपा है। सबसे पहले, यह दुनिया के सबसे ऊंचाई पर स्थित संरक्षित क्षेत्रों में से एक है और पूरा इलाका ठंडा रेगिस्तान (Cold Desert) माना जाता है। सालभर यहां बहुत कम बारिश होती है, लेकिन सर्दियों में बर्फबारी काफी ज़्यादा होती है, जिससे यहां का मौसम कठोर लेकिन अनोखा बन जाता है।

दूसरी बड़ी बात यह है कि यहां दुनिया के सबसे दुर्लभ वन्यजीवों में शामिल स्नो लेपर्ड (Snow Leopard) अच्छी संख्या में पाए जाते हैं। इसी वजह से कई लोग Hemis National Park को Snow Leopard Capital of India भी कहते हैं।

दुनिया का सबसे मशहूर स्नो लेपर्ड पार्क

Hemis National Park की सबसे बड़ी पहचान स्नो लेपर्ड यानी बर्फीला तेंदुआ है। स्नो लेपर्ड दुनिया के सबसे दुर्लभ, रहस्यमयी और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले जंगली जानवरों में गिना जाता है। इसका शरीर मोटे, घने फर से ढका होता है, जिससे यह बेहद ठंडे, बर्फीले मौसम में भी आसानी से जीवित रह पाता है।

इसकी पूंछ लंबी और घनी होती है, जो संतुलन बनाने के साथ-साथ ठंड से बचाने में भी मदद करती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसका रंग आसपास की चट्टानों और बर्फ से इतना मिलता-जुलता होता है कि कई बार यह आंखों के सामने होते हुए भी नज़र नहीं आता, इसी कारण इसे Ghost of the Mountains भी कहा जाता है।

दुनिया भर से वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर सिर्फ स्नो लेपर्ड की एक झलक पाने के लिए Hemis National Park पहुंचते हैं। कई लोग कई दिनों तक ट्रेकिंग और इंतज़ार करते हैं, तब कहीं जाकर उन्हें इसकी एक तस्वीर लेने का मौका मिलता है।

यहां और कौन-कौन से जानवर रहते हैं?

हालांकि स्नो लेपर्ड इस पार्क का सबसे बड़ा आकर्षण है, लेकिन Hemis National Park सिर्फ उसी के लिए मशहूर नहीं है। यहां कई ऐसे दुर्लभ और ऊंचे पहाड़ों में रहने वाले जानवर भी पाए जाते हैं, जो भारत के अन्य हिस्सों में बहुत कम दिखाई देते हैं।

तिब्बती भेड़िया (Tibetan Wolf) यहां का एक प्रमुख शिकारी है। इसके अलावा लाल लोमड़ी (Red Fox), यूरेशियन भूरा भालू (Eurasian Brown Bear), एशियाई आईबेक्स (Asiatic Ibex), भरल यानी ब्लू शीप (Bharal/Blue Sheep), आर्गली (Great Tibetan Sheep) और शापू या लद्दाखी यूरियल भी यहां दर्ज की गई प्रजातियों में शामिल हैं।

शापू, जिसे लद्दाखी यूरियल कहा जाता है, एक दुर्लभ जंगली भेड़ है, जो लगभग सिर्फ इसी इलाके में देखने को मिलती है, इसीलिए वन्यजीव वैज्ञानिकों के लिए Hemis National Park विशेष महत्व रखता है।

पक्षी प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं

Hemis National Park

अगर आपको पक्षियों को देखना पसंद है, तो Hemis National Park आपके लिए भी किसी स्वर्ग जैसा अनुभव देगा। यहां लगभग 73 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें कई बड़े शिकारी और ऊंचाई पर रहने वाले पक्षी शामिल हैं।

खुले आसमान में उड़ता गोल्डन ईगल (Golden Eagle) यहां का सबसे आकर्षक पक्षियों में माना जाता है। इसके अलावा हिमालयन ग्रिफॉन (Himalayan Griffon) और लैमर्गियर (Lammergeier) जैसे बड़े शिकारी गिद्ध भी अक्सर दिखाई देते हैं। रुम्बक घाटी पक्षी देखने के लिए सबसे बेहतरीन जगहों में गिनी जाती है, जहां सर्दियों और गर्मियों में अलग-अलग तरह के पक्षी देखे जा सकते हैं, इसीलिए बर्ड वॉचर्स सालभर यहां आते रहते हैं।

यहां की जैव विविधता क्यों है इतनी खास?

पहली नजर में Hemis National Park सिर्फ पत्थरों और बर्फ से ढका सूखा इलाका लगता है, लेकिन असलियत इससे बिल्कुल अलग है। यहां का पूरा इकोसिस्टम बेहद संतुलित और संवेदनशील है, जहां छोटे-छोटे पौधों से लेकर बड़े शिकारी जानवरों तक हर जीव इस प्राकृतिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

इसी वजह से वैज्ञानिक Hemis National Park को हिमालय के सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता वाले क्षेत्रों में शामिल करते हैं। यहां की ऊंचाई, ठंडा रेगिस्तान वाला मौसम और सीमित वनस्पति मिलकर एक अनोखा पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं।

Hemis National Park के पेड़-पौधे भी हैं बेहद खास

बहुत से लोग पहली बार Hemis National Park का नाम सुनकर सोचते हैं कि यहां केवल बर्फ, पत्थर और पहाड़ ही होंगे। लेकिन जैसे-जैसे आप इस पार्क के भीतर जाते हैं, आपको पता चलता है कि यहां का वनस्पति संसार भी उतना ही अनोखा है जितना यहां का वन्यजीवन।

यह इलाका ठंडा रेगिस्तान (Cold Desert) कहलाता है, जहां बारिश बहुत कम होती है, इसलिए घने जंगल नहीं मिलते, लेकिन कम पानी में जीवित रहने वाली कई खास प्रजातियां मिलती हैं। निचले इलाकों में आपको जुनिपर, विलो और पॉपलर जैसे पेड़ दिखाई देंगे, जबकि ऊंचाई वाले हिस्सों में छोटी-छोटी झाड़ियां और घास के मैदान नजर आते हैं, जो यहां रहने वाले जानवरों के लिए मुख्य भोजन का स्रोत हैं।

दुर्लभ औषधीय पौधों का खजाना

Hemis National Park सिर्फ जानवरों के लिए ही नहीं, बल्कि औषधीय पौधों के लिए भी जाना जाता है। यहां कई ऐसी जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जिनका इस्तेमाल सदियों से पारंपरिक तिब्बती और आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणालियों में किया जाता रहा है।

जानकारों के अनुसार, इस पार्क में लगभग दर्जनों ऐसी दुर्लभ औषधीय प्रजातियां मौजूद हैं, जो अब धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं और संरक्षण की ज़रूरत महसूस की जा रही है। इसी वजह से वैज्ञानिक और वन विभाग इन पौधों के संरक्षण पर भी लगातार काम कर रहे हैं।

Hemis National Park के बीच बसे छोटे-छोटे गांव

बहुत लोगों को यह जानकर हैरानी होती है कि Hemis National Park के भीतर और आसपास कई छोटे-छोटे गांव भी बसे हुए हैं। यहां रहने वाले ज़्यादातर लोग पशुपालन और छोटे स्तर की खेती पर निर्भर रहते हैं और पारंपरिक तरीके से अपना जीवन जीते हैं।

इन गांवों के लोग सदियों से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीते आए हैं, इसी कारण स्थानीय समाज इस पूरे क्षेत्र की जैव विविधता को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आज पर्यटन बढ़ने के बाद कई परिवार अपने घरों को होमस्टे के रूप में भी चलाने लगे हैं, जिससे उन्हें रोज़गार मिलता है और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का मौका मिलता है।

प्रसिद्ध Hemis Monastery भी इसी इलाके में

Hemis National Park सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है। इसी क्षेत्र में लगभग 400 साल पुराना हेमिस मठ (Hemis Monastery) स्थित है, जो लद्दाख के सबसे बड़े और सबसे प्रसिद्ध बौद्ध मठों में से एक माना जाता है।

हर साल यहां हजारों श्रद्धालु और पर्यटक दर्शन और उत्सवों में भाग लेने के लिए आते हैं। अगर आप लद्दाख की यात्रा पर जाएं, तो इस मठ को अपनी यात्रा में ज़रूर शामिल करें, क्योंकि यहां आपको आध्यात्मिक शांति के साथ लद्दाख की संस्कृति की झलक भी मिलेगी।

हेमिस सेचू उत्सव की खास बात

हर साल जून या जुलाई के महीने में हेमिस मठ में प्रसिद्ध हेमिस सेचू उत्सव मनाया जाता है। यह दो दिन चलने वाला भव्य बौद्ध धार्मिक उत्सव है, जिसमें रंग-बिरंगे पारंपरिक वस्त्र, मुखौटा नृत्य (Mask Dance), सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक अनुष्ठान देखने को मिलते हैं।

Hemis National Park

दुनिया भर से हजारों पर्यटक इस उत्सव का हिस्सा बनने लद्दाख पहुंचते हैं। अगर आपकी यात्रा इसी समय हो, तो आपको लद्दाख की संस्कृति, संगीत, नृत्य और आध्यात्मिक परंपराओं को बहुत करीब से देखने का मौका मिलेगा।

ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए जन्नत

अगर आपको ट्रैकिंग पसंद है, तो Hemis National Park आपके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां कई प्रसिद्ध ट्रैकिंग रूट मौजूद हैं, जिनमें सबसे लोकप्रिय मारखा वैली ट्रेक (Markha Valley Trek) है।

यह ट्रेक आपको ऊंचे पहाड़ों, छोटे गांवों, बर्फीली चोटियों और खूबसूरत घाटियों के बीच से होकर ले जाता है, जहां रास्ते भर बदलते नज़ारे और स्थानीय जीवन दिखता रहता है। हर साल हजारों ट्रेकर्स सिर्फ इस ट्रेक का अनुभव लेने यहां पहुंचते हैं।

पर्वतारोहियों की पहली पसंद

ट्रैकिंग के अलावा Hemis National Park पर्वतारोहियों के बीच भी काफी लोकप्रिय है। यहां मौजूद कांग यात्से (Kang Yatse) और स्टोक कांगड़ी (Stok Kangri) जैसी ऊंची चोटियां एडवेंचर पसंद लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

हालांकि इन चोटियों पर चढ़ना आसान नहीं होता, इसके लिए अच्छी शारीरिक तैयारी, अनुभव और सही उपकरणों की ज़रूरत होती है। इसी वजह से दुनिया भर के अनुभवी पर्वतारोही हर साल यहां आकर अपनी सीमाओं को आज़माते हैं।

Hemis National Park घूमने का सबसे अच्छा समय

अगर आप Hemis National Park घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो सही मौसम चुनना बहुत ज़रूरी है। अगर आपका उद्देश्य ट्रैकिंग, प्राकृतिक नज़ारे और आराम से घूमना है, तो जून से सितंबर या मई से अक्टूबर के बीच का समय सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहता है और ज्यादातर ट्रैकिंग रूट खुले होते हैं।

वहीं अगर आपका सपना स्नो लेपर्ड देखने का है, तो आमतौर पर फरवरी और मार्च का समय बेहतर माना जाता है, जब सर्दियों में बर्फ की वजह से स्नो लेपर्ड निचले इलाकों में आ जाते हैं और उन्हें देखने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि इस समय तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है, इसलिए पूरी तैयारी और सही कपड़ों के साथ ही यात्रा करनी चाहिए।

Hemis National Park कैसे पहुंचें?

Hemis National Park घूमने के लिए सबसे पहले आपको लद्दाख के लेह शहर पहुंचना होगा, जो इस पार्क का सबसे नज़दीकी बड़ा शहर है और यहीं से अधिकांश यात्राएं शुरू होती हैं। हवाई यात्रा के लिए लेह का कुशोक बकुला रिम्पोछे एयरपोर्ट सबसे नज़दीक है, जहां दिल्ली समेत भारत के कई बड़े शहरों से नियमित उड़ानें मिल जाती हैं।

अगर आप सड़क मार्ग से यात्रा करना चाहते हैं, तो मनाली–लेह हाईवे और श्रीनगर–लेह हाईवे के ज़रिए भी यहां पहुंचा जा सकता है, लेकिन ये रास्ते केवल गर्मियों के महीनों में ही खुले रहते हैं, क्योंकि सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण इन्हें बंद कर दिया जाता है। लेह से Hemis National Park की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है, जहां तक टैक्सी या स्थानीय वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।

क्या पार्क के अंदर गाड़ी ले जा सकते हैं?

Hemis National Park

बहुत से पर्यटक यह सवाल करते हैं कि क्या वे अपनी कार या बाइक लेकर Hemis National Park के अंदर घूम सकते हैं। इसका जवाब है—पूरे पार्क में नहीं, बल्कि कुछ सीमित रास्तों तक ही।

पार्क के कई हिस्सों में मोटर वाहनों को ले जाने की अनुमति नहीं होती, खासकर ट्रैकिंग वाले क्षेत्रों में आपको पैदल ही चलना पड़ता है। यही पैदल सफर इस जगह की असली खूबसूरती है, क्योंकि रास्ते में ऊंचे पहाड़, छोटी नदियां, खुले मैदान और कई दुर्लभ जानवरों को देखने का मौका मिलता है।

Hemis National Park में ठहरने की व्यवस्था

अगर आप यहां एक-दो दिन से ज्यादा रुकने की योजना बना रहे हैं, तो ठहरने के कई विकल्प उपलब्ध हैं। ज्यादातर पर्यटक लेह शहर में होटल या गेस्ट हाउस बुक करते हैं और वहीं से दिनभर पार्क घूमकर वापस लौट जाते हैं।

अगर आप स्थानीय संस्कृति को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो पार्क के आसपास बसे गांवों के होमस्टे सबसे अच्छा विकल्प हैं। यहां रहने से आपको लद्दाख के पारंपरिक खान-पान, स्थानीय लोगों की जीवनशैली और संस्कृति को समझने का मौका मिलता है, साथ ही इससे स्थानीय लोगों की आय भी बढ़ती है।

ऊंचाई पर जाने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

Hemis National Park समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित है, इसलिए यहां पहुंचते ही कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत, सिरदर्द या तेज़ थकान महसूस हो सकती है। इसी वजह से डॉक्टर और स्थानीय लोग सलाह देते हैं कि लेह पहुंचने के बाद कम से कम 24 से 48 घंटे आराम ज़रूर करें, ताकि आपका शरीर नई ऊंचाई के अनुसार खुद को ढाल सके।

इस प्रक्रिया को Acclimatization कहा जाता है, यानी शरीर को कम ऑक्सीजन वाले वातावरण के अनुसार धीरे-धीरे तैयार करना। अगर आप बिना आराम किए सीधे ट्रैकिंग शुरू कर देंगे, तो आपकी तबीयत बिगड़ सकती है और यात्रा का आनंद भी कम हो जाएगा।

Hemis National Park दूसरे नेशनल पार्कों से अलग क्यों है?

भारत में कई बड़े और खूबसूरत नेशनल पार्क हैं, लेकिन Hemis National Park की पहचान सबसे अलग है।

नीचे की सारणी में कुछ प्रमुख नेशनल पार्कों की विशेषताएं देखें:

नेशनल पार्कराज्य / क्षेत्रप्रमुख विशेषताक्षेत्रफल/प्रकृति संकेत
Hemis National Parkलद्दाख, लेहठंडा रेगिस्तान, स्नो लेपर्ड, ऊंची घाटियां, उच्च ऊंचाई वाला क्षेत्रलगभग 4,400 वर्ग किमी, हाई एल्टीट्यूड कोल्ड डेजर्ट
डेजर्ट नेशनल पार्कराजस्थानरेतीला थार रेगिस्तान, ग्रेट इंडियन बस्टर्डशुष्क रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र
गंगोत्री नेशनल पार्कउत्तराखंडहिमालयी ग्लेशियर, भागीरथी नदी का उद्गम क्षेत्रऊंचे हिमालयी जंगल और ग्लेशियर
नामदाफा नेशनल पार्कअरुणाचल प्रदेशघने वर्षावन, अत्यधिक जैव विविधतापूर्वोत्तर भारत के वर्षावन

लेकिन Hemis National Park इन सबसे अलग है, क्योंकि यहां आपको ठंडा रेगिस्तान, बर्फीले पहाड़, दुर्लभ स्नो लेपर्ड, ऊंची घाटियां और लद्दाख की संस्कृति—सब कुछ एक ही जगह देखने को मिलता है। यही अनोखा मेल इसे भारत का सबसे खास और सबसे बड़ा नेशनल पार्क बनाता है।

क्यों जरूरी है Hemis National Park का संरक्षण?

आज पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन तेज़ी से बढ़ रहा है और इसका असर हिमालयी इलाकों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बर्फ तेजी से पिघल रही है, मौसम का चक्र बदल रहा है और कई दुर्लभ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहे हैं।

ऐसे समय में Hemis National Park का महत्व पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ जाता है। यह पार्क सिर्फ स्नो लेपर्ड या दूसरे जानवरों का घर नहीं, बल्कि पूरे हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सरकार ने यहां Project Snow Leopard जैसे कई संरक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनका उद्देश्य वन्यजीवों और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर संतुलन बनाना और अवैध शिकार व आवास क्षति को रोकना है।

अगर आने वाली पीढ़ियों को भी यह अनमोल प्राकृतिक धरोहर देखनी है, तो हम सबकी जिम्मेदारी है कि इसके संरक्षण में अपना योगदान दें, चाहे वह जिम्मेदार पर्यटन हो, जागरूकता हो या स्थानीय समुदायों को सहयोग।

Five Colors of Travel की ओर से कुछ खास सुझाव

आपके जैसे यात्रियों के लिए कुछ सरल लेकिन महत्वपूर्ण सुझाव Hemis National Park यात्रा को सुरक्षित और यादगार बना सकते हैं।

  • लेह पहुंचने के बाद कम से कम 2 दिन आराम ज़रूर करें, ताकि आपका शरीर ऊंचाई के अनुसार खुद को ढाल सके।
  • अगर स्नो लेपर्ड देखने का सपना है, तो फरवरी या मार्च में जाएं; ट्रैकिंग के लिए जून से सितंबर या मई से अक्टूबर का समय सबसे अच्छा रहता है।
  • स्थानीय होमस्टे में ठहरें, इससे आप लद्दाख की संस्कृति को करीब से जान पाएंगे और स्थानीय लोगों की आय भी बढ़ेगी।
  • गर्म कपड़े, ट्रैकिंग शूज़, सनग्लासेस, सनस्क्रीन और जरूरी दवाइयां ज़रूर साथ रखें, क्योंकि पहाड़ों में मौसम कभी भी अचानक बदल सकता है।
  • पार्क में शांति बनाए रखें, कचरा बिल्कुल न फैलाएं और जंगली जानवरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें; जिम्मेदार पर्यटन ही इस खूबसूरत धरोहर को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा तरीका है।Hemis National Park हमें

यह सिखाता है कि प्रकृति का असली सौंदर्य सिर्फ घने जंगलों में ही नहीं, बल्कि बर्फ से ढके सूखे पहाड़ों और कठिन परिस्थितियों में भी छिपा होता है। यही वजह है कि यह पार्क दुनिया भर के प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों और एडवेंचर पसंद लोगों की पसंदीदा जगहों में शामिल है।

अगर आप लद्दाख की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो Hemis National Park को अपनी ट्रैवल लिस्ट में ज़रूर शामिल करें। यहां बिताया गया हर पल आपको प्रकृति के और करीब ले जाएगा और शायद आपकी ज़िंदगी की सबसे यादगार यात्राओं में से एक बन जाएगा।

 

Shivani Pal

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